चक्कर आना एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसका अनुभव बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। कुछ लोगों को अचानक खड़े होने पर सिर हल्का महसूस होता है, तो कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे आसपास की सभी चीजें घूम रही हों। कई बार आँखों के सामने अंधेरा छाने, शरीर में कमजोरी महसूस होने, संतुलन बिगड़ने या बेहोशी जैसा अनुभव होने की शिकायत भी होती है।
चक्कर आने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कभी-कभी यह शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक भोजन न करने, अचानक रक्तचाप कम होने या थकान से संबंधित हो सकता है। दूसरी ओर, अंदरूनी कान की समस्या, खून की कमी, रक्त शर्करा में बदलाव, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव या हृदय और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएँ भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए चक्कर आने पर केवल घरेलू उपाय करना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि चक्कर किस प्रकार के हैं, कब आते हैं, कितनी देर तक रहते हैं और उनके साथ दूसरे कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि चक्कर आने का अर्थ क्या है, इसके संभावित कारण क्या हैं, चक्कर आने पर तुरंत क्या करना चाहिए, भोजन और दिनचर्या में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए तथा आयुर्वेद में इस समस्या को किस दृष्टि से देखा जाता है।
चक्कर आना स्वयं में कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य स्थितियों में दिखाई देने वाला एक लक्षण है। अलग-अलग व्यक्ति चक्कर आने के अनुभव को अलग-अलग तरीके से बताते हैं।
कुछ लोगों को सिर हल्का होने या बेहोशी जैसा अनुभव होता है। कुछ को ऐसा लगता है कि कमरा, जमीन या आसपास की वस्तुएँ घूम रही हैं। वहीं कुछ लोगों को चलते समय असंतुलन महसूस होता है या ऐसा लगता है कि वे सीधे चल नहीं पा रहे हैं।
चक्कर आने की समस्या को सामान्य रूप से तीन प्रकार के अनुभवों में समझा जा सकता है।
इस स्थिति में व्यक्ति को कमजोरी, आँखों के सामने अंधेरा या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। यह कभी-कभी अचानक खड़े होने पर रक्तचाप कम होने, शरीर में तरल पदार्थों की कमी या अन्य कारणों से हो सकता है।
इस अनुभव को वर्टिगो (Vertigo) कहा जाता है। व्यक्ति को ऐसा लग सकता है कि वह स्वयं घूम रहा है या उसके आसपास की वस्तुएँ घूम रही हैं। इसके पीछे अक्सर संतुलन नियंत्रित करने वाले अंदरूनी कान की समस्याएँ हो सकती हैं, हालांकि अन्य कारण भी संभव हैं।
कुछ लोगों को चलते समय डगमगाने, सहारे की आवश्यकता पड़ने या सीधे खड़े रहने में परेशानी होती है। यह संतुलन प्रणाली, दृष्टि, मांसपेशियों या तंत्रिका तंत्र से संबंधित विभिन्न समस्याओं के कारण हो सकता है।
चक्कर के इन प्रकारों को समझना उपयोगी है, क्योंकि इनके कारण और उपचार एक जैसे नहीं होते।
हमारे शरीर को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की आवश्यकता होती है। गर्म मौसम, अधिक पसीना, उल्टी, दस्त, बुखार या पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कुछ व्यक्तियों को सिर हल्का लगना, कमजोरी, प्यास, मुँह सूखना और पेशाब कम आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
क्या करें?
यदि व्यक्ति पूरी तरह होश में है और सामान्य रूप से निगल सकता है, तो पानी पी सकता है। उल्टी या दस्त के कारण तरल पदार्थों की कमी होने पर उचित मात्रा में ओआरएस उपयोगी हो सकता है। यदि व्यक्ति बेहोश है, बहुत सुस्त है या निगलने में परेशानी है, तो मुँह से पानी या कोई अन्य पदार्थ न दें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
कई लोग सुबह नाश्ता नहीं करते या व्यस्तता के कारण लंबे समय तक भोजन नहीं कर पाते। इससे कुछ लोगों को कमजोरी, थकान या सिर हल्का होने का अनुभव हो सकता है।
हालाँकि, खाली पेट रहने से होने वाली हर चक्कर की समस्या को रक्त शर्करा कम होना नहीं माना जा सकता। वास्तविक हाइपोग्लाइसीमिया विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन या कुछ दवाओं के कारण हो सकता है।
यदि चक्कर के साथ पसीना आना, कंपकंपी, तेज भूख, घबराहट या भ्रम जैसे लक्षण हों, तो रक्त शर्करा की जाँच उपयोगी हो सकती है।
मधुमेह के रोगियों को डॉक्टर द्वारा दी गई हाइपोग्लाइसीमिया संबंधी योजना का पालन करना चाहिए। बार-बार ऐसा होने पर दवाओं और भोजन के समय की समीक्षा कराना आवश्यक है।
कुछ लोगों को बिस्तर से उठते समय, लंबे समय तक बैठे रहने के बाद खड़े होने पर या झुककर अचानक सीधा होने पर चक्कर आने लगते हैं।
ऐसा कभी-कभी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के कारण होता है। इसमें खड़े होने पर रक्तचाप में गिरावट आ सकती है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति कुछ समय के लिए प्रभावित होती है।
इसके संभावित कारणों में पानी की कमी, कुछ दवाएँ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ शामिल हैं।
बचाव के लिए पहले बिस्तर पर बैठें, कुछ समय रुकें और फिर सहारा लेकर धीरे-धीरे खड़े हों। यदि यह समस्या नियमित रूप से होती है, तो डॉक्टर से रक्तचाप की जाँच कराएँ।
हमारे अंदरूनी कान में मौजूद संरचनाएँ शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें समस्या होने पर घूमने जैसा चक्कर आ सकता है।
एक सामान्य कारण बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV) है। इसमें सिर की स्थिति बदलने, बिस्तर पर करवट लेने, ऊपर देखने या झुकने पर थोड़े समय के लिए तेज घूमने जैसा अनुभव हो सकता है।
कुछ अन्य स्थितियों में चक्कर के साथ कान में आवाज आना, सुनने में बदलाव, मतली या उल्टी भी हो सकती है।
इस प्रकार के चक्कर के लिए सही निदान आवश्यक है। कुछ मामलों में प्रशिक्षित चिकित्सक विशेष सिर और शरीर की गतिविधियों वाले उपचार का उपयोग करते हैं। स्वयं से कोई भी प्रक्रिया करने के बजाय पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चक्कर का कारण क्या है।
खून में हीमोग्लोबिन की कमी को एनीमिया कहा जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है।
एनीमिया होने पर थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना और सिर हल्का लगना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
इसके कारणों में आयरन की कमी, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, रक्तस्राव तथा कुछ दीर्घकालिक बीमारियाँ शामिल हैं।
यदि बार-बार चक्कर आते हैं और साथ में थकान या कमजोरी रहती है, तो डॉक्टर की सलाह पर हीमोग्लोबिन और अन्य आवश्यक रक्त जाँच कराई जा सकती हैं।
बिना जाँच के आयरन की गोलियाँ लेना उचित नहीं है, क्योंकि हर प्रकार का एनीमिया आयरन की कमी से नहीं होता।
रक्तचाप बहुत कम होने पर कुछ लोगों को सिर हल्का होने, कमजोरी या बेहोशी जैसा अनुभव हो सकता है। दूसरी ओर, उच्च रक्तचाप आमतौर पर बिना लक्षण के भी रह सकता है; इसलिए केवल चक्कर आने से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि रक्तचाप बढ़ा हुआ है।
यदि चक्कर बार-बार आते हैं, तो उचित तरीके से रक्तचाप की जाँच कराना उपयोगी है। दवा लेने वाले व्यक्तियों को अपने चिकित्सक से दवाओं की समीक्षा करानी चाहिए।
कुछ लोगों को माइग्रेन के साथ चक्कर, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, मतली या संतुलन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसे वेस्टिबुलर माइग्रेन कहा जाता है।
हर बार चक्कर के साथ सिरदर्द होना आवश्यक नहीं है। यदि ऐसे लक्षण बार-बार आते हैं, तो डॉक्टर को इनके समय, अवधि और साथ होने वाले अन्य लक्षणों के बारे में बताना चाहिए।
कुछ दवाओं से चक्कर, उनींदापन या रक्तचाप में गिरावट हो सकती है। उदाहरण के लिए, कुछ रक्तचाप की दवाएँ, नींद लाने वाली दवाएँ और अन्य औषधियाँ ऐसा प्रभाव पैदा कर सकती हैं।
यदि किसी नई दवा को शुरू करने या उसकी खुराक बदलने के बाद चक्कर आने लगे हैं, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
अपनी मर्जी से दवा बंद करना, खुराक बदलना या अतिरिक्त दवा लेना सुरक्षित नहीं है।
कभी-कभी चक्कर या बेहोशी जैसा अनुभव हृदय की धड़कन में गड़बड़ी या अन्य हृदय संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
यदि चक्कर के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, तेज या अनियमित धड़कन अथवा बेहोशी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
तनाव, चिंता, तेज साँस लेना और अपर्याप्त नींद कुछ लोगों में सिर हल्का होने या अस्थिरता का अनुभव बढ़ा सकते हैं। लेकिन हर चक्कर को तनाव का परिणाम मानना उचित नहीं है।
यदि लक्षण बार-बार होते हैं, तो शारीरिक कारणों की जाँच के साथ मानसिक स्वास्थ्य और नींद से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
अचानक चक्कर आने पर सबसे पहले गिरने और चोट लगने से बचना जरूरी है।
तुरंत बैठ जाएँ या लेट जाएँ। ऐसी जगह रहें जहाँ गिरने का खतरा न हो।
अचानक खड़े न हों। चक्कर कम होने तक आराम करें और फिर धीरे-धीरे उठें।
जरूरत पड़ने पर सहायता लें। यदि चलने में परेशानी हो, तो किसी व्यक्ति को अपने पास बुलाएँ।
पानी तभी पिएँ जब सुरक्षित हो। यदि आप पूरी तरह होश में हैं और निगलने में कोई समस्या नहीं है, तो पानी पी सकते हैं।
मधुमेह होने पर रक्त शर्करा जाँचें। कम रक्त शर्करा की पुष्टि होने पर अपनी निर्धारित उपचार योजना अपनाएँ।
वाहन चलाने से बचें। चक्कर के दौरान बाइक, कार या मशीन चलाना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
लक्षणों पर ध्यान दें। चक्कर कब शुरू हुआ, कितनी देर रहा और किस गतिविधि के दौरान हुआ, यह जानकारी डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकती है।
यदि अचानक गंभीर चक्कर आएँ या उनके साथ बोलने में परेशानी, शरीर के एक तरफ कमजोरी, दोहरा दिखाई देना, गंभीर सिरदर्द या चलने में अचानक कठिनाई हो, तो इसे आपातकालीन स्थिति मानें।
घरेलू देखभाल का उद्देश्य शरीर को सुरक्षित रखना और संभावित सामान्य कारणों से बचाव करना है। यह हर प्रकार के चक्कर का इलाज नहीं है।
दिनभर नियमित रूप से पानी पिएँ। गर्मी में, शारीरिक मेहनत के दौरान या अधिक पसीना आने पर तरल पदार्थों की आवश्यकता बढ़ सकती है।
हालाँकि, हृदय या गुर्दे की बीमारी वाले कुछ लोगों को तरल पदार्थ सीमित रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे व्यक्तियों को डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार ही पानी पीना चाहिए।
नाश्ता, दोपहर और रात के भोजन का नियमित समय बनाए रखें। संतुलित आहार में साबुत अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल और प्रोटीन के उचित स्रोत शामिल करें।
यदि भोजन करने के बाद भी बार-बार चक्कर आते हैं, तो इसे केवल कमजोरी समझकर अनदेखा न करें।
सुबह उठते समय पहले बिस्तर पर बैठें। कुछ समय बाद सहारा लेकर खड़े हों। यदि खड़े होते ही चक्कर आने लगे, तो तुरंत बैठ जाएँ या लेट जाएँ।
बार-बार ऐसा होने पर रक्तचाप, दवाओं और शरीर में तरल पदार्थों की स्थिति का मूल्यांकन कराना चाहिए।
नियमित और पर्याप्त नींद सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
यदि नींद की कमी के साथ लगातार चक्कर, थकान या दिन में अत्यधिक उनींदापन रहता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
तेज गर्मी में लंबे समय तक बाहर रहने, अत्यधिक मेहनत करने या बंद और गर्म स्थान पर रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
गर्मी के दौरान छाया में आराम करें, आवश्यकता के अनुसार तरल पदार्थ लें और अस्वस्थ महसूस होने पर शारीरिक गतिविधि रोक दें।
यदि चक्कर बार-बार आते हैं, तो एक डायरी में इन बातों को लिखें:
चक्कर किस समय आया?
कितनी देर तक रहा?
क्या सिर घुमाने या खड़े होने से शुरू हुआ?
क्या मतली, सिरदर्द, कान में आवाज या कमजोरी भी हुई?
क्या आपने कोई नई दवा शुरू की है?
क्या भोजन या पानी कम लिया था?
यह जानकारी डॉक्टर को कारण समझने में सहायता कर सकती है।
चक्कर आने पर भोजन का चयन संभावित कारण के अनुसार करना चाहिए। कोई एक खाद्य पदार्थ सभी प्रकार के चक्कर का उपचार नहीं करता।
संतुलित आहार में मौसमी फल और हरी सब्जियाँ शामिल करें। ये शरीर को विटामिन, खनिज और फाइबर प्रदान करते हैं।
दालें, चना, राजमा, कुछ हरी पत्तेदार सब्जियाँ और अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थ भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थों के साथ पौधों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बेहतर हो सकता है।
यदि एनीमिया है, तो केवल भोजन पर्याप्त होगा या नहीं, यह उसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करता है।
दाल, दूध और दूध से बने पदार्थ, सोया, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत संतुलित भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और आहार संबंधी जरूरतों के अनुसार भोजन चुनें।
सामान्य परिस्थितियों में पानी का नियमित सेवन उपयोगी है। उल्टी या दस्त के कारण शरीर से पानी और लवण निकल रहे हों, तो ओआरएस की आवश्यकता हो सकती है।
ध्यान दें: चक्कर आने पर हर व्यक्ति को नमक-चीनी का पानी, नींबू पानी या मीठा पेय देने की जरूरत नहीं होती। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गुर्दे की बीमारी में विशेष सावधानी आवश्यक है।
आयुर्वेद में स्वास्थ्य को शरीर, मन, आहार, दिनचर्या और व्यक्ति की समग्र स्थिति के संदर्भ में देखा जाता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक साहित्य में घूमने, सिर हल्का होने या अस्वस्थता जैसे लक्षणों के संदर्भ में वात, पित्त और अन्य शारीरिक अवधारणाओं की चर्चा मिलती है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में व्यक्ति के आहार-विहार, पाचन, नींद, दिनचर्या और अन्य लक्षणों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिर भी, चक्कर आने के वास्तविक कारण का पता लगाना आवश्यक है। आधुनिक चिकित्सा में रक्तचाप में गिरावट, अंदरूनी कान की समस्याएँ, एनीमिया, रक्त शर्करा में कमी और हृदय या तंत्रिका तंत्र की समस्याओं जैसे कारणों की जाँच की जाती है।
इसलिए केवल यह मान लेना कि चक्कर वात या पित्त बढ़ने के कारण आ रहे हैं, सही निदान का विकल्प नहीं है।
यदि आप आयुर्वेदिक उपचार लेना चाहते हैं, तो योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करें। उन्हें अपनी सभी मौजूदा बीमारियों, दवाओं और लक्षणों के बारे में बताएँ।
कुछ आयुर्वेदिक उत्पाद अन्य दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं या उनमें ऐसे घटक हो सकते हैं जिनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जाँच आवश्यक हो। इसलिए बिना सलाह के औषधियाँ, भस्म या कई प्रकार के उत्पाद एक साथ शुरू न करें।
गंभीर या अचानक शुरू हुए चक्कर में पहले तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन कराना जरूरी है। आयुर्वेदिक या अन्य वैकल्पिक उपचार के लिए आपातकालीन सहायता में देरी न करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है। लेकिन सक्रिय चक्कर के दौरान खड़े होकर योग करना, कठिन आसन करना या अचानक सिर घुमाना गिरने का खतरा बढ़ा सकता है।
इसलिए चक्कर आने के समय व्यायाम करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर बैठें या लेटें।
जब चक्कर पूरी तरह ठीक हो जाएँ और कोई गंभीर कारण न हो, तब व्यक्ति की क्षमता के अनुसार हल्की गतिविधियाँ की जा सकती हैं।
यदि चलते समय संतुलन बिगड़ता है, तो अकेले व्यायाम करने से बचें और चिकित्सकीय सलाह लें।
कुछ संतुलन संबंधी समस्याओं में वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन उपयोगी हो सकता है। इसमें प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित अभ्यास शामिल होते हैं।
BPPV जैसी कुछ स्थितियों में विशेष पोजिशनिंग प्रक्रिया लाभकारी हो सकती है, लेकिन इसे सही निदान के बाद ही अपनाना चाहिए।
शांत वातावरण में आराम से बैठना और सामान्य, सहज साँस लेना तनाव कम करने में मदद कर सकता है। साँस को लंबे समय तक रोकने या तेजी से साँस लेने वाले अभ्यास चक्कर के दौरान न करें।
योग या प्राणायाम को चक्कर आने के मूल कारण के उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
महिलाओं में चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें पानी की कमी, रक्तचाप में बदलाव, एनीमिया, माइग्रेन, दवाओं का प्रभाव और अन्य स्वास्थ्य स्थितियाँ शामिल हैं।
मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने से कुछ महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।
गर्भावस्था के दौरान भी कुछ महिलाओं को चक्कर आने का अनुभव हो सकता है। इसके पीछे रक्तचाप में बदलाव, उल्टी के कारण पानी की कमी या अन्य कारण हो सकते हैं।
गर्भावस्था में चक्कर के साथ बेहोशी, रक्तस्राव, पेट में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी या गंभीर सिरदर्द हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
यदि महिलाओं में बार-बार चक्कर आते हैं, तो इसका कारण केवल कमजोरी या हार्मोनल बदलाव मानने के बजाय उचित जाँच करानी चाहिए।
बुजुर्गों में चक्कर आने पर विशेष सावधानी आवश्यक है, क्योंकि इससे गिरने और हड्डी टूटने जैसी चोटों का खतरा बढ़ सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों को रक्तचाप में बदलाव, दृष्टि संबंधी समस्याएँ, संतुलन में कमी या कई दवाएँ लेने के कारण चक्कर आ सकते हैं।
बुजुर्ग व्यक्ति को उठते समय सहारा देना, घर में फिसलने वाली वस्तुओं को हटाना, पर्याप्त रोशनी रखना और जरूरत पड़ने पर सहायक उपकरणों का उपयोग करना उपयोगी हो सकता है।
यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति को अचानक नया चक्कर, बेहोशी, बोलने में कठिनाई या चलने में अचानक परेशानी होती है, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
बच्चों में चक्कर आने की शिकायत कई कारणों से हो सकती है। कभी-कभी पानी की कमी, बीमारी के दौरान कमजोरी, भोजन कम करना, माइग्रेन या संतुलन से जुड़ी समस्या इसके पीछे हो सकती है।
यदि बच्चा बार-बार चक्कर आने की शिकायत करता है, खेलते समय गिरता है, बेहोश होता है या उसकी गतिविधियों में अचानक बदलाव आता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए।
यदि बच्चे को गंभीर सुस्ती, सांस लेने में परेशानी, दौरा, अचानक कमजोरी या बेहोशी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के चक्कर की दवाएँ या आयुर्वेदिक औषधियाँ नहीं देनी चाहिए।
चक्कर आने के कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले लक्षणों का इतिहास लेते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि चक्कर घूमने जैसा है या सिर हल्का होने जैसा, यह कितनी देर रहता है और किस परिस्थिति में शुरू होता है।
आवश्यकता के अनुसार निम्न जाँचें की जा सकती हैं:
रक्तचाप की जाँच: बैठने और खड़े होने की स्थिति में रक्तचाप की तुलना की जा सकती है।
रक्त शर्करा की जाँच: यदि कम रक्त शर्करा की आशंका हो, तो इसकी जाँच की जा सकती है।
रक्त की जाँच: एनीमिया या अन्य संभावित कारणों की जाँच के लिए रक्त परीक्षण कराया जा सकता है।
कान और संतुलन की जाँच: घूमने जैसा चक्कर आने पर अंदरूनी कान और संतुलन प्रणाली का मूल्यांकन किया जा सकता है।
हृदय संबंधी जाँच: लक्षणों के अनुसार ईसीजी या अन्य हृदय संबंधी परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।
तंत्रिका संबंधी जाँच: यदि गंभीर या असामान्य लक्षण हों, तो डॉक्टर अतिरिक्त जाँच की सलाह दे सकते हैं।
हर व्यक्ति को सभी जाँचों की जरूरत नहीं होती। कौन-सी जाँच करनी है, यह लक्षणों और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर तय किया जाता है।
चक्कर आने के सभी कारणों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियाँ जोखिम कम करने में सहायता कर सकती हैं।
दिनभर नियमित रूप से पानी पिएँ, यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने को न कहा हो।
संतुलित भोजन करें और लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।
बिस्तर से उठते समय धीरे-धीरे उठें।
मधुमेह या रक्तचाप की दवाएँ डॉक्टर के निर्देशानुसार लें।
पर्याप्त नींद लें और अपनी दिनचर्या नियमित रखें।
दवाओं से चक्कर आने की आशंका हो, तो डॉक्टर से समीक्षा कराएँ।
गिरने के जोखिम को कम करने के लिए घर में पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित रास्ते रखें।
बार-बार चक्कर आने पर लक्षणों का रिकॉर्ड रखें और चिकित्सकीय जाँच कराएँ।
सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर बैठ जाएँ या लेट जाएँ। गिरने से बचें और चक्कर कम होने तक अचानक उठने या वाहन चलाने से बचें। गंभीर या नए असामान्य लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
कुछ मामलों में पानी की कमी, एनीमिया या कम रक्त शर्करा के कारण चक्कर आ सकते हैं। लेकिन अंदरूनी कान, रक्तचाप, हृदय और अन्य समस्याएँ भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए बार-बार चक्कर आने पर जाँच आवश्यक है।
कुछ व्यक्तियों को लंबे समय तक भोजन न करने पर अस्वस्थता या सिर हल्का होने का अनुभव हो सकता है। मधुमेह के कुछ रोगियों में दवाओं के कारण रक्त शर्करा कम हो सकती है। हर मामले में कारण एक जैसा नहीं होता।
नींबू पानी सभी प्रकार के चक्कर का इलाज नहीं है। यदि व्यक्ति को पानी की कमी है, तो उचित तरल पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन चक्कर का कारण जानना जरूरी है।
सिर्फ चक्कर आने से उच्च रक्तचाप की पुष्टि नहीं होती। रक्तचाप मापना और लक्षणों का मूल्यांकन कराना आवश्यक है।
उपचार चक्कर के कारण पर निर्भर करता है। योग्य चिकित्सक की सलाह से उपयुक्त उपचार पर विचार किया जा सकता है, लेकिन पहले गंभीर कारणों की जाँच और सही निदान जरूरी है।
हाँ। बार-बार चक्कर आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। यदि इसके साथ बेहोशी, सीने में दर्द, गंभीर सिरदर्द, शरीर के एक तरफ कमजोरी या बोलने में परेशानी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
संतुलित भोजन लें, नियमित समय पर भोजन करें और पर्याप्त तरल पदार्थ लें। किसी विशेष खाद्य पदार्थ को हर प्रकार के चक्कर का उपचार नहीं माना जा सकता।
यदि हल्का चक्कर है, तो सुरक्षित स्थान पर लेटकर आराम करना उपयोगी हो सकता है। लेकिन गंभीर, अचानक या असामान्य लक्षणों में केवल सोकर इंतजार न करें; तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
शुरुआत में सामान्य चिकित्सक से परामर्श लिया जा सकता है। लक्षणों के अनुसार वे ईएनटी विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट या अन्य विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। आपातकालीन लक्षणों में सीधे आपातकालीन सेवा लें।
चक्कर आना एक ऐसा लक्षण है जिसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। शरीर में पानी की कमी, रक्तचाप में बदलाव, एनीमिया, रक्त शर्करा में कमी, अंदरूनी कान की समस्या और कुछ दवाओं के प्रभाव से चक्कर आ सकते हैं।
चक्कर आने पर सबसे पहले गिरने से बचना, सुरक्षित स्थान पर बैठना या लेटना और जरूरत पड़ने पर सहायता लेना महत्वपूर्ण है। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और सावधानीपूर्ण दिनचर्या सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं, लेकिन इनसे हर प्रकार के चक्कर का इलाज नहीं होता।
यदि चक्कर बार-बार आते हैं, लंबे समय तक बने रहते हैं या उनके साथ अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय जाँच कराएँ। अचानक गंभीर चक्कर, बोलने में कठिनाई, एक तरफ कमजोरी, सीने में दर्द या बेहोशी जैसी स्थिति में तत्काल आपातकालीन सहायता लें।
स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी और समय पर उचित उपचार बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी चिकित्सक की जाँच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।
लेखक/प्रकाशक: AyurvediyaUpchar.com
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