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गठिया रोग के लक्षण प्रकार एवं उपचार

Jul 07, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
गठिया रोग के लक्षण प्रकार एवं उपचार

उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर के ऊतक कमजोर पड़ने लगते हैं शरीर के विभिन्न जोड़ घिसने लगते हैं ऐसी स्थिति में जोड़ों में दर्द रहने लगता है भोजन के प्रति अरुचि होती है प्यास अधिक लगती है हाथ, पैर, जंघा, एड़ी तथा कमर आदि के जोड़ों में दर्द होने लगता है घुटनों में  शोथ (सूजन) भी हो जाता है रोग बढ़ जाने पर चलने फिरते  समय भयंकर कष्ट होता है बढ़ती उम्र के साथ जो गठिया होता है उसे आस्टियो आर्थराइटिस कहते हैं जोड़ों में सूजन या प्रदाह के कारण उत्पन्न गठिया को रियूमेटाइड आर्थराइटिस कहते हैं जोड़ों में यूरिक अम्ल के जमा हो जाने के कारण उत्पन्न गठिया को  गाउटीआर्थराइटिस कहते हैं हीमोफीलिया में रक्त स्राव से जोड़ों में खून के थक्के जम जाने के कारण उत्पन्न गठिया को एक्यूट (गंभीर) आर्थराइटिस कहते हैं क्षय रोग और आम बात में भी हड्डी के जोड़ प्रभावित होते हैं 

कंधों में जकड़न --- कंधों को घेरने वाली मांसपेशियों में सूजन आ जाती है कंधे स्वाभाविक रूप से हिलडुल नहीं पाते। हाइड्रोकार्टिसॊनका इंजेक्शन तथा अल्ट्रासॉनिक  किरणों से सॆऺकने पर दर्द मॆं लाभ पहुंचता है  आस्टियो आर्थराइटिस--- लगभग 50-55 वर्ष की बाद यह शुरू होता है घुटने कन्धे और रीड की हड्डी में दर्द होता है जोड़ों का कार्टिलॆज घिसने के बाद हड्डी घिसनी शुरू हो जाती है किनारे धारदार हो जाते हैं जोड़ हिलने डुलने पर चटखने की आवाज होती है धीरे-धीरे दर्द बढ़ता है जोड़ों की गति कम हो जाती है ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी स्थिति में खूब चलें हल्का सा व्यायाम करें और औषधि का सेवन नियम पूर्वक करते रहें ठीक हो जाने के बाद भी पुनः दर्द शुरू हो सकता है उठने, बैठने, चलने फिरने में कष्ट होने लगता है घुटने पूर्णता क्षतिग्रस्त होने पर औषधि की अपेक्षा शल्य क्रिया आवश्यक हो जाती है 

रियूमेटाइड आर्थराइटिस---- यह रोग लगभग 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में विशेष कर पाया जाता है घुटने टखने और हाथ के जोड़ विशेष रूप से प्रभावित होते हैं रोगी को निरंतर कुछ न कुछ करते रहना चाहिए इसके साथ ही आराम की भी आवश्यकता होती है कॉर्टिसोन के इंजेक्शन से लाभ प्रतीत होता है  असाध्यावस्था में शल्य क्रिया अपेक्षित होती है 

रीड की हड्डी की गठिया --रोगी आगे की ओर झुक जाता है रीड की हड्डी के अतिरिक्त कूल्हे और कंधे भी प्रभावित हो जाते हैं यह रोग विशेष रूप से पुरुषों को होता है 

 गाउट -----घुटने के जोड़ के कार्टिलेज में यूरिक अम्ल के जमा हो जाने के कारण यह अपंग कर देने वाला रोग होता है चिकित्सा में यूरिक अम्ल कॆ दाने न जमा होने पाए इसका उपाय करते हैं इसके लिए रक्त में यूरिक अम्ल की मात्रा कम करने का प्रयास करते हैं मानक पदार्थ और मांसाहार इस रोग की उत्पत्ति में प्रमुख रूप से सहायक है इन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए शाकाहार और तनाव रहित दिनचर्या होनी चाहिए 

जोड़ों की टी॰बी॰--- यह रोग कुपोषण से होता है रोग का आक्रमणों जोड़ों पर होता है फेफड़ों का क्षय रोग भी हड्डियों के जोड़ तक पहुंच जाता है इसके भी लक्षण गठिया से मिलते जुलते हैं क्षय की दीर्घकालीन चिकित्सा से इसका उपचार किया जाता है 

चिकित्सा (1)  --- प्रातः एकपुटिया लहसुन एक पाव दूधमें डालकर उबालें। दूधके आधा पाव रह जानेपर उसे छानकर पी लें। दूसरे दिन दो एकपुटिया लहसुन, तीसरे दिन तीन एकपुटिया लहसुन इसी प्रकार ग्यारहवें दिन ग्यारह एकपुटिया लहसुन दूधमें उबालकर उसे छानकर दूध पी जाएँ। दूध की मात्रा प्रत्येक दिन बढातॆ जावे बारहवें दिनसे लहसुनकी संख्या एक-एक करके कम करते जायें।


(2) ---पुनर्नवा की जड़ १० ग्राम को १०० ग्राम पानीमें उबालें और २५ ग्राम शेष रहनेपर छानकर पी लें।

 (3)  ---  महायोगराज गुग्गुल सुबह-शाम दो-दो गोली महारसनादि  क्वाथ के साथ लें ! 


(4) अश्वगन्ध, चोपचीनी, पीपलामूल, सोंठ इसका समान मात्रामें चूर्ण सुबह-शाम दूधके साथ पीयें। 


(5) जोड़ोंपर सेंक करके अरेन्डी के पत्तों पर घी लगाकर बाँधॆ॓।


(6) रातको सोते समय १० ग्राम मेथीका दाना पानी में भिगोकर रख दें सुबह खाली पेट चबा चबाकर खाएं एवं पानी पी ले ।


(7) दर्दके स्थानपर महानारायण तेल एवं महाविषगर्भ तेल की बराबर मात्रा मिलाकर  मालिश करें।


पथ्य---गेहूँ, बाजरेकी रोटी, मेथी, चौलाई, करेला,टिंडा, सेब, पपीता, अंगूर, खजूर, लहसुन इत्यादि वस्तुओंका सेवन हितकर है।


अपथ्य---चावल, आलू, गोभी, मूली, सेम, चना, उड़दकी दाल, केला, सन्तरा, नीबू, अमरूद, टमाटर, दही तथा समस्त वायुकारक पदार्थ, दिवाशयन, अधिक परिश्रम इत्यादि रोगको बढ़ाते हैं।

गठिया रोग के प्रकार (Types of Arthritis)

  1. ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)

    • यह सबसे सामान्य प्रकार है।

    • बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का घिसना इसका मुख्य कारण है।

  2. रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis)

    • यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली ही जोड़ों पर हमला करती है।

  3. गाउट (Gout)

    • इसमें यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से जोड़ों में क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, जो तेज दर्द और सूजन का कारण बनते हैं।

  4. एंकायलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis)

    • रीढ़ की हड्डी और कूल्हों के जोड़ों में सूजन होती है।

  5. सोरियाटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis)

    • यह सोरायसिस (त्वचा की बीमारी) से जुड़ा गठिया है।


गठिया रोग के लक्षण (Symptoms of Arthritis)

  • जोड़ों में दर्द और सूजन

  • चलने-फिरने या हिलाने में कठिनाई

  • सुबह के समय जोड़ों में जकड़न (stiffness)

  • जोड़ों में लालिमा और गर्मी

  • थकान और कमजोरी

  • बुखार (रूमेटॉइड आर्थराइटिस में)

  • हाथ-पैर की उंगलियों का टेढ़ा होना (क्रोनिक स्थिति में)


गठिया का आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार (Treatment & Remedies)

आयुर्वेदिक उपाय:

  1. अश्वगंधा – सूजन और दर्द को कम करने में सहायक।

  2. हरिद्रा (हल्दी) – इसमें मौजूद करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी होता है।

  3. गुग्गुलु – पुराने गठिया के दर्द में लाभकारी।

  4. रसना चूर्ण, त्रिफला, और दशमूल – शरीर से विषाक्त तत्व निकालते हैं।

  5. पंचकर्म थैरेपी (Panchkarma) – वात दोष संतुलन के लिए उत्तम।

घरेलू उपाय:

  • अजवाइन का पानी: रोज सुबह खाली पेट पीने से जोड़ों के दर्द में राहत।

  • हल्दी वाला दूध: सूजन में राहत देता है।

  • सरसों के तेल की सेंक: दर्द वाले हिस्से पर मालिश व गर्म सेंक फायदेमंद।

  • मेथी दाना: रात को भिगोकर सुबह चबाकर खाने से जोड़ों का दर्द कम होता है।

  • लहसुन: रोज 1-2 कलियां खाने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है।


सावधानियाँ (Precautions):

  • ठंडी और नमी वाली जगह से बचें।

  • अधिक वजन न बढ़ाएं।

  • नियमित योग और हल्की एक्सरसाइज़ करें – जैसे भुजंगासन, वज्रासन।

  • संतुलित और वातनाशक आहार लें।

  • अधिक नमक, तली चीज़ें और मांसाहार से परहेज़ करें।

    जोड़ों के दर्द में आप आप निम्न दवाएं भी ले सकते हैं 

    महाबात चिंतामणि रस ,

    महायोगराज गुग्गुल,

     कैशोर गुग्गुल,

     अमृतादी गुग्गुल,

     सभी दवा की बराबर गोलियां लेकर मिक्सी में पीस लें एवं आधा चम्मच चूर्ण महारस्नादी क्वाथ के साथ सुबह शाम खाली पेट लें

    अथवा

    सिंहनादि गुग्गुल एक गोली

     महारस्नादि क्वाथ तीन चम्मच प्लस तीन चम्मच पानी

     अरेन्डी तेल एक चम्मच

    सभी को मिलाकर रात में सोते समय लेने इसके लेने से सुबह पेट साफ भी होगा

    बात रक्त में निम्न दबाए लें 

    वातान्तक  टैबलेट,

     महाबात विध्वंसक रस

    सभी टैबलेट बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें एवं  आधा चम्मच चूर्ण महामजिस्ठादि क्वाथ  के साथ लें।

    आम बात में निम्न योग का उपयोग करें।

    सौंठ ,काली मिर्च ,बाय विहंग, और सेंधा नमक, इनका चूर्ण बनाकर गर्म जल के साथ सुबह-शाम लें।

    जोड़ों के दर्द के लिए लेप

    एलोवेरा ग्वारपाठा का जेल हल्दी अरंडी का तेल

    सभी को मिलाकर पेस्ट बना लें हल्का गर्म करें एवं जोड़ो वाले दर्द में लेप करें एवं आक के पत्ते को तवे पर अरंडी के तेल में सें कर पेस्ट दर्द वाली जगह में पत्ते को बांधकर धागा लपेट लें एवं छोड़ दें रात में उपयोग ज्यादा अच्छा रहता है सभी जोड़ों के दर्द के लिए उपयुक्त है

    पारिजात के पांच छै पत्तों की चटनी बनाकर एक गिलास पानी में उबालें जब आधा रह जावे तो ठंडा होने पर बिना छाने पीना है चार-पांच दिन में पुराने से पुराना गठिया रोग ठीक हो जाता है पत्ते साफ सुथरे एवं इनफेक्टेड नहीं होना चाहिए।

    बबूल की फल्ली तोड़कर पाउडर बनाकर एक चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से सभी जोड़ों के दर्द ठीक होते हैं।

    नोट

    इन दबाओसे यदि फायदा नहीं हो रहा तो रक्त शुद्ध करने की दवा लेना चाहिए

    अपथ्य

    चांवल ,दही, मट्ठा, नींबू, संतरा, मौसंबी, केला, उड़द की दाल, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, ठंडे फलों का शरबत, पंखे कूलर की तेज हवा, एसी, ठंडे पानी का स्नान, ठंडा पानी,

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