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निरोगी रहने के लिए कब्ज से बचें (Causes, Symptoms & Ayurvedic Treatment of Constipation)

Apr 09, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
निरोगी रहने के लिए कब्ज से बचें  (Causes, Symptoms & Ayurvedic Treatment of Constipation)

 परिचय 

-निरोगी रहने के लिए कब्ज से बचें
जब आंतों में मल सूख कर रुक जाता है, तो यह कब्ज कहलाता है। इसमें या तो मल मुश्किल से निकलता है या कम अथवा बंधा हुआ नहीं निकलता। कब्ज के कारण अन्य दूसरे रोगों की भी उत्पत्ति होने लगती है। यह प्रायः गलत आहार-विहार के कारण होता है और फिर स्थायी रूप धारण कर लेता है। आज अधिकतर मनुष्य इसी रोग से ग्रस्त नजर आते हैं।

-मनुष्य जो भोजन ग्रहण करता है, यह लगभग 16 घंटे बाद आंत के आखिरी भाग में पहुंच जाता है। वहां यह 5-6 घंटे रुका रहता है। मलत्याग के समय आमाशय की गति के द्वारा या मानसिक प्रेरणावश आंत के आखिरी भाग में एक प्रेरक गति उत्पन्न होने लगती है, जिससे उसमें उपस्थित मल आगे खिसक कर मलाशय में प्रवेश कर जाता है। मलाशय में आए मल के कारण मल त्याग की इच्छा होती है। यदि मल-विसर्जन 24-48 घंटों में नियमित रूप से एक बार न हो, तो इसे कब्ज कहते हैं।


 कब्ज क्या है? 

कब्ज (Constipation) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को मल त्याग में कठिनाई होती है, या मल कठोर और सूखा हो जाता है। यह समस्या अस्थायी भी हो सकती है और लंबे समय तक रहने पर गंभीर भी बन सकती है।

-आयुर्वेद में इसे विबंध कहा गया है और यह मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है। जब शरीर में सूखापन बढ़ जाता है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, तो मल सूखकर आंतों में रुक जाता है।

 -आधुनिक चिकित्सा के अनुसार कब्ज के मुख्य कारण हैं:

  • फाइबर की कमी
  • पानी की कमी
  • शारीरिक गतिविधि का अभाव
  • तनाव

 कब्ज के कारण 

इसका प्रमुख कारण मलायाग की प्रेरणा की बार-बार अवहेलना करना है।
गरिष्ठ या मसालेदार चीजों का अत्यधिक सेवन व हर समय कुछ न कुछ खाने की आदत।

-बासी तथा रूखा-सूखा भोजन खाने से भी प्रायः कब्ज हो जाता है।

-विना चोकर का आटा, पालिश किए हुए चावल, छिलका रहित बनाई गई सब्जियों व रेशा रहित आहार का अत्यधिक सेवन।

-कम पानी पीने की आदत एवं मादक पदार्थों के सेवन से मल सूख जाता है।

-परिश्रम रहित आलस्यमय जीवन।

-मलत्याग के लिए चाय, बीड़ी-सिगरेट पीने की आदत।

-चिंता, भय, क्रोध, आघात आदि मानसिक विकार।

-बवासीर, भगंदर आदि मलमार्ग के रोगों के कारण मलत्याग के समय होने वाले कष्ट के डर से मलत्याग को रोके रखने की प्रवृत्ति।

-लंबी बीमारी के फलस्वरूप उत्पन्न हुए शारीरिक दोषों का अत्यधिक प्रकोप, जिसके कारण शरीर के सभी अंगों का ठीक प्रकार से कार्य न कर पाना।

-बहुत कम मात्रा में भोजन करना, अधिक उपवास करना, खाने में शाक सब्जियों का अभाव, विटामिंस की कमी एवं भोजन सही ढंग से चबाकर न खाना।

-बड़ी आंत व पेट की पेशियों की दुर्बलता,

-वृद्धावस्था, खून की कमी, आंत को गति को कम करने वाले पदार्थ।

-थाइरॉयड एवं पिट्यूटरी ग्रंथियों के स्त्रावों को कमी।

-पित्त तथा आंत के स्त्रावों की कमी के कारण लिवर के रोग या लिवर का ठीक प्रकार से कार्य न कर पाना।

-अत्यधिक पसीना आना या अधिक मूत्र लाने वाले पदार्थों का सेवन।

-आंतों की विकृति तथा लिवर की दुर्बलता आदि भी कब्ज का कारण बन सकते हैं।


 कब्ज के लक्षण

-शौच कठिनता से आना।

-मल सूख जाने से मल त्याग के समय तकलीफ होना।

-भूख धीरे-धीरे कम होती जाना एवं पेट में हर समय भारीपन महसूस होना।

-जीभ पर मैल की परत जम जाना एवं पेट में हल्का-हल्का दर्द बना रहना।

-मुख से दुर्गध आना।

-दुर्गंध युक्त उदरवायु (गैस) निकलना।

-कब्ज के फल स्वरुप गैस बनने के कारण सिरदर्द, शरीर दर्द, सिर चकराना, मितली आना, किसी काम में मन न लगना, -मानसिक तनाव व शिथिलता का अनुभव होना।

-कब्ज के रोगी को बुखार, सुस्ती, नींद की कमी, पाचन शक्ति में कमी, आलस्य, जंभाई आना, अफरा आदि बने रहते हैं।

-निरंतर कब्ज रहने से अनेक मानसिक, शारीरिक व स्नायु संबंधी रोग होने की संभावना बनी रहती है। इससे बवासीर की उत्पत्ति भी हो सकती है।

-अधिक समय तक कब्ज रहने से घबराहट व बेचैनी होने लगती है। किसी काम में न तो मन लगता है और न ही कुछ खाने की इच्छा होती है।

-कब्ज के कारण जो गैस बनती है, उससे सिर में दर्द व हृदय भी प्रभावित हो सकता है। जिससे रोगी को बहुत घबराहट होती है।

-कब्ज के कारण अम्ल अधिक बनने लगता है, जिससे सीने, गले व पेट के ऊपरी हिस्से में जलन के साथ बार-बार खट्टी डकारें आती हैं।

-बचपन से नियत समय पर मलत्याग की आदत न डलवाने से भी कब्ज की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


 कब्ज की चिकित्सा 

मलत्याग के समय को कभी टालना नहीं चाहिए। इस समय मलत्याग का संकल्प करने मात्र से ही मल-विसर्जन की संवेदना होने लगती है। उस समय सब चिंताओं से मुक्त होना आवश्यक है।

-यदि निश्चित समय पर मल-विसर्जन न हो, तो मलत्याग के लिए जाने से कुछ समय पहले एक गिलास गुनगुना पानी, दूध अथवा एक कप चाय लें।

-अधिक परेशानी होने पर दो चम्मच ग्लिसरीन लेकर उसे थोड़े से गुनगुने पानी में मिलाकर पिचकारी द्वारा गुदा में प्रविष्ट करके दस मिनट बाद मल त्याग के लिए जाएं।


 औषधि चिकित्सा 

पैराफिन लिक्विड या जैतून का तेल आदि भोजन के बाद लेने से बड़ी आंत तथा मलाशय में चिकनापन होकर कब्ज दूर हो जाता है। इस कार्य के लिए बादाम रोगन या एरंड का तेल भी लिया जा सकता है।

-ईसबगोल के बीज या छिलके एक बड़े चम्मच की मात्रा में दिन में दो बार गुनगुने दूध से लेने पर आंत की मल-प्रवर्तक गति उत्तेजित होती है। ये बीज या छिलके पेट में फूल जाने के कारण आंत पर दबाव डालकर उसकी मल-प्रवर्तक गति को बढ़ाते हैं, जिससे मलत्याग आसानी से हो जाता है।

-कब्ज के लिए त्रिफला एक अच्छी औषधि है। रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से लेना चाहिए।

-गुलाब की पत्तियां, सनाय के पत्ते तथा अमलतास में भी कब्ज नाशक गुण हैं।

-सौंफ, सनाय, मुलेठी 10-10 ग्राम लेकर 7 ग्राम शक्कर के साथ मिलाकर कूट-पीस लें।

-इस चूर्ण को 1 से 3 चम्मच सायंकाल गुनगुने पानी से लेने पर सुबह शौच साफ आता है।


 योग, दिनचर्या और जीवनशैली 

  • सुबह जल्दी उठें
  • 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं
  • रोज 20 मिनट टहलें
  • योग करें: पवनमुक्तासन, भुजंगासन
  • समय पर भोजन करें

 कब्ज के लिए सही डाइट 

✔ खाएं:

  • पपीता
  • केला
  • दलिया
  • ओट्स
  • हरी सब्जियां
  • चोकर वाला आटा

 न खाएं:

  • मैदा
  • फास्ट फूड
  • कोल्ड ड्रिंक
  • अधिक चाय-कॉफी

 20 घरेलू उपाय

-गुनगुना पानी

-नींबू पानी
-शहद
-घी दूध
-इसबगोल
-
त्रिफला
-
मुनक्का
-
किशमिश
-
अजवाइन
-
अलसी
-
चिया सीड्स
-
नारियल पानी
-
छाछ
-
पपीता
-
केला
-
फाइबर डाइट
-
योग
-
वॉक
-
तनाव कम करें
-
जीरा पानी


 कब्ज के नुकसान

  • बवासीर
  • फिशर
  • गैस
  • त्वचा रोग
  • मानसिक तनाव

 FAQ 

Q. कब्ज क्यों होता है?
 गलत खान-पान

Q. सबसे अच्छा इलाज?
 त्रिफला + पानी


 निष्कर्ष

कब्ज एक छोटी समस्या नहीं है, बल्कि कई बड़ी बीमारियों की जड़ है।
अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो अपनी जीवनशैली सुधारें।

अच्छा पाचन = अच्छा स्वास्थ्य

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