मस्तिष्क अर्बुद (ब्रेन ट्यूमर) – विस्तृत विवरण

Apr 24, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
मस्तिष्क अर्बुद (ब्रेन ट्यूमर) – विस्तृत विवरण

मस्तिष्क अर्बुद (ब्रेन ट्यूमर)

हमारा शरीर किसी भी तरह की गंभीर बीमारी आने के पहले कुछ लक्षण बतलाता है, जिसे हम या तो समझ नहीं पाते या उसे नजरअंदाज कर देते हैं। अर्बुद या कैंसर के संबंध में पूर्व में जो लक्षण अहसास होते हैं, वे इस प्रकार हैं—

कैंसर के पूर्वरूप लक्षण

1. असामान्य पूय अथवा रक्तस्राव

शरीर के किसी भी अंग में से अचानक और असाधारण रूप से पूय अथवा रक्तस्राव हो, तो शीघ्र ही उसका परीक्षण करवा कर रोग विनिश्चय कर लेना चाहिए।

2. व्रण (घाव) का होना

शरीर के बाहरी भाग में अथवा भीतरी भाग में व्रण (छिद्र-नारु) हो और उसमें दर्द हो रहा हो, तो परीक्षण करा लेना चाहिए।

3. पुरानी खांसी

खांसी पुरानी हो जाने पर, चिकित्सा से न मिटने पर, आवाज भारी हो जाये, कभी हल्की हो जाये और यह स्थिति कई दिनों तक बनी रहे, तो परीक्षण करा लेना ही उत्तम है क्योंकि ये लक्षण कैंसर के हो सकते हैं।

4. श्वास एवं भोजन संबंधी समस्या

रोगी को श्वास लेने में तकलीफ हो, भोजन ठीक से गले के नीचे न उतरता हो, अजीर्ण रहता हो, तो जांच करा लेनी चाहिये।

5. आंतों की प्राकृतिक क्रियाओं में परिवर्तन

आंतों के कैंसर के प्रारम्भ में आंतों की प्राकृतिक क्रियाओं में परिवर्तन हो, तो जांच करा लेनी चाहिए।

6. मस्सा या तिल में परिवर्तन

त्वकिय मस्सा या तिल में परिवर्तन आने लगे, तो जांच करा लेनी चाहिए।

7. शरीर का क्षीण होना

रोगी को शरीर एकाएक क्षीण होने लगे या एकाएक कम होने लगे, तो जांच करा लेनी चाहिए।

8. अत्यधिक दुर्बलता

रोगी को एकाएक अति दुर्बलता अनुभव हो, धातुओं को पोषण न मिलने से रोगी कांतिहीन, फीका होने लगे, तो समझना चाहिए कि कैंसर हो सकता है।

9. कठोर गांठ

शरीर के किसी भी भाग में एकाएक गांठ उत्पन्न हो और वह गांठ अति कठिन हो तथा धीरे-धीरे वह बड़ी होती जा रही हो, तो कैंसर संभव है।

ये पूर्वरूप लक्षण सर्वमान्य हैं। ऐसे लक्षण शरीर में हों, तो घबराने की आवश्यकता नहीं, चूंकि इनकी सद्यः एवं स्थायी चिकित्सा जलौकावचारण (जौंक चिकित्सा) से संभव है।


मस्तिष्क अर्बुद (ब्रेन ट्यूमर)

हम यहां ब्रेन ट्यूमर (मस्तिष्क अर्बुद) के संबंध में चर्चा करेंगे।

मस्तिष्क मानव शरीर का सर्वोत्तम अंग है। वह हमारे शरीर की सारी क्रियाओं का संचालन एवं नियंत्रण करता है। मस्तिष्क में स्थित जब किसी संचालन बिंदु पर क्षति या आघात होता है, तब उससे संबंधित अंग के कार्य में बाधा या वह अंग ही निष्क्रिय हो जाता है।

मस्तिष्क संज्ञावह स्रोतसों से तथा नाड़ीवह स्रोतसों द्वारा सारे शरीर को संचालित करता है। नाड़ीवह संस्थान के दो प्रकार के होते हैं, वे परस्पर सहयोग से ही कार्य करते हैं। ये रूप, रस, गन्ध आदि का ज्ञान, मेधा, और इन अंगों को चेष्टा, स्मृति, आवेग तथा सोच-विचार का मुख्य आश्रय हैं।

मस्तिष्क में ज्ञान व कर्म के केन्द्र अलग-अलग होते हैं। शीर्षण्य नाड़ियों के बारह मुख्य क्षेत्र हैं, ये अलग-अलग प्रकार से कार्यशील होते हैं। स्वस्थ मस्तिष्क उपरोक्त कर्मों का संपादन करता है। जब किसी कारणवश अस्वस्थ होता है, तो उसके कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है।

शारीरिक तथा मानसिक रोग होने से दिमाग को हानि पहुंचती है तथा कई तरह के विकार पैदा होने लगते हैं।

मनुष्य के मस्तिष्क में शरीर के नियंत्रक सूत्र केन्द्रित होते हैं। कैंसर उन्हें दबाकर नष्ट अथवा क्रियाहीन कर देता है। अन्ततः वह अंग निष्क्रिय या मंद क्रिया वाला हो जाता है।


आधुनिक विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क अर्बुद

मस्तिष्क में होने वाले अर्बुद (कैंसर) की सामान्य जानकारी निम्नानुसार है—

Cerebral Tumor

ट्यूमर में कोशिकाएं एक स्थान पर जमा होने लगती हैं, जो अनेक संख्या में विभाजित हो सकती हैं।

यह विभाजन यदि मूल कोशिकाओं की सीमा तक रहे, तो उसे सौम्य अर्बुद कहते हैं।

यदि वह मूल कोशिकाओं की मर्यादा को छोड़कर अन्य कोशिकाओं तक फैलती है तथा रस-रक्त के माध्यम से किसी भी अंग में फैलती है, तब उसे घातक कहते हैं।

कोशिकाओं का केन्द्र में होने के कारण मायटोटिक की बढ़ी हुई संख्या और आस-पास की कोशिकाओं में फैलाव होना—इस स्थिति को देखकर हिस्टोलॉजिकल सौम्य और घातक ऐसा वर्गीकरण किया जाता है।

सेरेब्रल ट्यूमर भी इसी प्रकार सौम्य और घातक दो प्रकार का होता है।

कभी-कभी सौम्य अर्बुद भी सिर की बंद जगह में होने से मगज के नाजुक भागों पर दबाव देकर अथवा आघात कर स्थायी अपंगत्व या मृत्यु का कारण बन सकता है।

मस्तिष्क अर्बुद, स्तन और फेफड़ों में हुए ट्यूमर के मेटास्टाइसिस के रूप में देखने को मिलता है, परंतु मस्तिष्क अर्बुद के कारण अन्य स्थान में मेटास्टाइसिस होने की संभावना बहुत कम होती है।


लक्षण

ट्यूमर के कारण मस्तिष्क के अन्दर दबाव बढ़ जाने से विविध लक्षण उत्पन्न होते हैं—

  • झुकने, खांसने, थूकने आदि से सिर दर्द बढ़ता है

  • क्लम और तन्द्रा

  • सन्न्यास (कोमा) तक किसी भी वर्ग का हो सकता है

  • प्रारम्भ में स्वभाव में परिवर्तन दिखता है

  • चिड़चिड़ा स्वभाव

  • ध्यान न रहना

  • मूर्च्छा के झटके (दौरे) आना

  • चक्कर आना

  • सिर हल्का लगना

  • उल्टी होना

  • हृदय की गति मंद होना

  • दिखने में कमी

  • उच्च रक्तदाब

  • कभी डिसप्लेसमेंट ऑफ सेरेब्रल स्ट्रक्चर होने से अन्त में मृत्यु हो जाती है

जब मस्तिष्क के अन्दर अर्बुद की उत्पत्ति होती है और वह धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, तब उसका आकार बरगद के फल जैसा होता है।

अर्बुद के बढ़ने के साथ-साथ—

  • शरीर कमजोर होता जाता है

  • ज्वर आता है, जो रात को कम हो जाता है

  • यह मकड़ी के जाले के समान हो जाता है

  • शरीर में रक्त की कमी हो जाती है

  • दर्द कम लेकिन अधिक समय तक रहता है

  • एक अर्बुद में से अनेक अर्बुद हो जाते हैं

  • रोगी पीड़ा होने से बार-बार बेहोश हो जाता है

  • अर्बुद के बढ़ने से अन्धापन

  • बहरापन

  • सूंघने की शक्ति का नाश हो जाता है


चिकित्सा

मस्तिष्क में होने वाला अर्बुद अति गम्भीर होता है।

आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में ऑपरेशन के लिये कहा जाता है, लेकिन उसके सफल होने के अवसर कम ही होते हैं।

आयुर्वेद शास्त्र भी इस अर्बुद को असाध्य ही मानता है। यदि प्रथम अवस्था में ही निदान होने से चिकित्सा की जाये, तो रोगी बच सकता है।


पंचकर्म

सभी प्रकार के कैंसर रोगों में आवश्यकता अनुसार पंचकर्म कराना चाहिए। उससे शरीर की शुद्धि होने से प्रकुपित दोष आदि शांत होने से रोग की उग्रता कम हो जाती है।


पथ्यादि क्वाथ

आयुर्वेद में सिर के रोग ग्यारह प्रकार के बताये गये हैं। इन सभी के अलावा गले के ऊपर वाले रोगों में पथ्यादि क्वाथ नाम की औषधि बहुत ही लाभ करती है।

  • रक्त की शुद्धि

  • कच्चे रस (आम) को दूर करता है

  • भूख लगती है

  • पाचन शक्ति ठीक करता है

  • दर्द नाशक

  • सूजन हटाने के कारण अर्बुद नाशक

रोगी को छः माह तक मूंग का आहार तथा पथ्यादि क्वाथ का सेवन कराना चाहिए।

साथ ही इस काढ़े की बूंदें सुबह-शाम नाक में डालने से विशेष लाभ होता है।

रोज सुबह शिरोधारा और शिरोवस्ति का क्रम किया जाना चाहिए।


नस्य

1. कड़वी तुम्बी

कड़वी तुम्बी के चूर्ण को विधिवत नाक में डालें।

2. कड़वी तोरई

कड़वी तोरई के रस की बूंदें नाक में डालें।

3. श्वास कुठार रस

श्वास कुठार रस (चूर्ण) का नस्य दें।

4. षड्बिन्दु तैल

पडविन्दु तैल की छः-छः बूंदें नाक में डालें।


बंधन

पुराने ज्वार के आटे की मोटी रोटी बनाकर एक तरफ से सेंक लें। दूसरी तरफ घी लगाकर मस्तक पर रखकर बांध लें।

ऐसा रोजाना करें।

शिरोधारा या शिरोबस्ति का प्रयोग करें।


औषधि चिकित्सा

(1) कैंसरगजकेसरी वटी

1-1 गोली शहद या घी के साथ।

(2) विजय पर्पटी

1 रत्ती प्रतिदिन 1-1 रत्ती बढ़ाकर 10 दिन तक प्रयोग करें।

(3) पंचामृत लोह गुग्गुल

1-1 गोली तीन बार सौंठ वाले दूध से।

(4) पुनर्नवादि लौह

2-2 गोली पतली छांछ के साथ दिन में तीन बार।

(5) कांचनार गुग्गुल

2-2 गोली त्रिफला क्वाथ से दिन में तीन बार।

(6) ब्राह्मी वटी

1-1 गोली सुबह-शाम तुलसी के स्वरस से।

(7) शिरःशूलादि वज्र रस

2-2 गोली दिन में तीन बार पानी से।

(8) मिश्रित भस्म योग

  • गोदन्ती भस्म 500 मिग्रा.

  • प्रवाल भस्म 250 मि.ग्राम

  • सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम

  • चौंसठ प्रहरी पीपल 250 मिग्रा.

मात्रानुसार पुड़ियां बनाकर 1-1 पुड़िया तीन बार शहद से दें।

(9) अडूसा के फूल और गुड़

दिन में दो बार दें।

(10) ताजे गोमूत्र

ताजे गोमूत्र को छानकर दो चम्मच एक बार दें।

(11) बाह्य लेप

गुञ्जाफल, करंज बीज, भृंगराज और कालीमिर्च पानी में पीसकर सिर पर लेप करें।


संहिजन (सहिजन) का प्रयोग

सभी प्रकार के कैंसर रोगों में सहिजन लाभ पहुंचता है। मस्तिष्क रोगों में भी संहिजन विशेष लाभ पहुंचाता है।

क्वाथ

(1) सहिजन मूल की छाल

सहिजन मूल की छाल का काढ़ा बनाकर दो बार रोजाना दें।

(2) सहिजन के बीज

संहिजन के बीज के बारीक चूर्ण को नाक में डालने से मस्तिष्क के सभी रोगों में लाभ मिलता है।


अपामार्ग का प्रयोग

आचार्य चरक के अनुसार मस्तिष्क की शुद्धि के लिये अपामार्ग का उपयोग करना चाहिये।

अपामार्ग के क्षार, तेल, आदि योगों को काम में लें।


पथ्य

  • पुराना गेहूं

  • चावल

  • जौ

  • लहसुन

  • हल्दी

  • मूंग

  • परवल

इनका सेवन करावें।

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