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पलाश का पेड़: औषधीय गुण, कमरकश गोंद के फायदे और प्रकृति की अद्भुत देन

Mar 09, 2026
बनोषधि
पलाश का पेड़: औषधीय गुण, कमरकश गोंद के फायदे और प्रकृति की अद्भुत देन

भारत की प्राकृतिक वनस्पतियों में पलाश (Butea monosperma) का पेड़ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे टेसू, ढाक, किंशुक और जंगल की ज्वाला (Flame of the Forest)।

फाल्गुन और बसंत ऋतु के दौरान जब पलाश के पेड़ पर लाल, केसरिया और नारंगी फूल खिलते हैं तो पूरा जंगल मानो आग की लपटों से जगमगा उठता है। इसी कारण इसे अंग्रेजी में Flame of the Forest कहा जाता है।

पलाश केवल सुंदरता का प्रतीक ही नहीं है बल्कि आयुर्वेद में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसके फूल, पत्ते, छाल और गोंद सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:

  • पलाश का पेड़ क्या है

  • क्रीम रंग का पलाश कैसा होता है

  • कमरकश क्या है

  • कमरकश के आयुर्वेदिक फायदे

  • पलाश के औषधीय उपयोग

  • और भारतीय संस्कृति में पलाश का महत्व


क्रीम रंग का पलाश: एक दुर्लभ प्रजाति

पलाश की कई प्रजातियां होती हैं जैसे:

  • लाल पलाश

  • पीला पलाश

  • सफेद पलाश

  • क्रीम रंग का पलाश

  • काला पलाश

क्रीम रंग का पलाश देखने में बहुत ही आकर्षक होता है। यह देखने में ऐसा प्रतीत होता है जैसे पीले और नारंगी पलाश का मिश्रण हो।

इसकी विशेषताएँ:

  • बाहरी भाग में हल्के सफेद रेशे होते हैं

  • पंखुड़ियों पर क्रीम रंग की पट्टियां दिखाई देती हैं

  • भीतर से फूल हल्के पीले रंग के होते हैं

  • किनारों पर सफेद रंग दिखाई देता है

  • पंखुड़ियों पर नारंगी रंग की धारियां होती हैं

कई लोग इसे सफेद पलाश समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह उससे अलग प्रजाति होती है।


कमरकश क्या है?

कमरकश पलाश के पेड़ से प्राप्त होने वाली एक विशेष प्रकार की गोंद (Resin) होती है।

आयुर्वेद में इसे बहुत ही उपयोगी औषधि माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मानते हैं कि पलाश की पूरी शक्ति इस गोंद में छिपी होती है।

कमरकश का उपयोग प्राचीन समय से कई आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता रहा है।


प्रसव के बाद कमरकश का उपयोग

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्रसव के बाद महिलाओं को कमरकश से बने लड्डू खिलाए जाते हैं।

इसका मुख्य उद्देश्य होता है:

  • शरीर की कमजोरी दूर करना

  • गर्भाशय को मजबूत बनाना

  • ढीली हो चुकी मांसपेशियों को पुनः मजबूत करना

कमरकश की गोंद को पहले हल्का भून लिया जाता है और फिर इसे पीसकर लड्डुओं में मिलाया जाता है।

ध्यान रखें:

? गर्भवती महिलाओं को कमरकश नहीं दिया जाता।


कमरकश के आयुर्वेदिक फायदे

कमरकश में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे:

  • कैल्शियम

  • फास्फोरस

  • खनिज तत्व

इसके कारण यह कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी होता है।

1. कमर दर्द में लाभ

कमरकश का नियमित सेवन कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और दर्द को कम करता है।


2. जोड़ों के दर्द में लाभ

इसमें मौजूद खनिज तत्व हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं।


3. त्वचा के लिए लाभकारी

ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार कमरकश का सेवन करने से:

  • त्वचा में निखार आता है

  • झाइयां कम होती हैं

  • आंखों के नीचे काले घेरे कम हो जाते हैं


कमरकश का सेवन कैसे करें

कमरकश को सामान्यतः सुबह खाली पेट लिया जाता है।

सेवन विधि:

  • कमरकश पाउडर

  • गुनगुना दूध

  • थोड़ा सा गुड़

इनके साथ इसका सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


पलाश: जंगल की ज्वाला

लाल पलाश को जंगल की ज्वाला कहा जाता है क्योंकि जब इसके फूल खिलते हैं तो ऐसा लगता है जैसे जंगल में आग की लपटें उठ रही हों।

इसके बारे में एक सुंदर पंक्ति कही गई है:

“दहक उठी हैं डालियां, पहने लाल लिबास
फागुन का स्वागत करे, जंगल बीच पलाश।”

बसंत ऋतु में जब पूरा जंगल सूखा दिखाई देता है तब पलाश के लाल फूल वातावरण को जीवंत बना देते हैं।


कबीरदास और पलाश

संत कबीरदास ने भी पलाश के फूलों के माध्यम से जीवन का संदेश दिया है:

“कबीरा गरब न कीजिए, इस जोबन की आस
टेसू फूले दिवस दस, खांखर भया पलास।”

इसका अर्थ है कि मनुष्य को अपनी सुंदरता और जवानी पर घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हमेशा नहीं रहती।


पलाश की पत्तियों का महत्व

पलाश की पत्तियों के बारे में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है:

“ढाक के तीन पात”

इसका अर्थ है कि पलाश की पत्तियां हमेशा तीन के समूह में होती हैं।

इन पत्तियों का उपयोग कई कामों में किया जाता है।


पत्तल बनाने में उपयोग

ग्रामीण क्षेत्रों में पलाश की पत्तियों से पत्तल और दोने बनाए जाते हैं।

शादी-विवाह और भोज में भोजन परोसने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।


कृषि में उपयोग

किसान पलाश की पत्तियों का उपयोग खेतों में पशुओं को छाया देने के लिए भी करते हैं।


पलाश की छाल के उपयोग

पलाश की छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होती है।

इससे:

  • रस्सियां बनाई जाती हैं

  • औषधीय काढ़ा तैयार किया जाता है

यदि किसी व्यक्ति को मूत्र संबंधी समस्या हो तो इसकी छाल का काढ़ा लाभकारी माना जाता है।


पलाश और होली का संबंध

होली का त्योहार पलाश के फूलों से भी जुड़ा हुआ है।

प्राचीन समय में लोग पलाश के फूलों से प्राकृतिक रंग और गुलाल बनाया करते थे।

इन रंगों के कई फायदे होते थे:

  • त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते

  • त्वचा रोगों को कम करते

  • प्राकृतिक सुगंध देते

आज भी कई लोग पलाश के फूलों से हर्बल रंग बनाते हैं।


पलाश का पारंपरिक महत्व

मध्य प्रदेश सहित भारत के कई क्षेत्रों में पलाश का पेड़ पारंपरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषकर छिंदवाड़ा क्षेत्र में यह पेड़ किसानों के जीवन से जुड़ा हुआ है।

इसके उपयोग:

  • पशुओं को छाया देना

  • पत्तल बनाना

  • औषधीय उपयोग


पलाश के औषधीय गुण

आयुर्वेद में पलाश के कई औषधीय उपयोग बताए गए हैं।

यह उपयोगी है:

  • त्वचा रोगों में

  • पाचन संबंधी समस्याओं में

  • मूत्र रोगों में

  • सूजन में


पलाश का संरक्षण क्यों जरूरी है

आज के समय में तेजी से जंगलों की कटाई और विदेशी पौधों के रोपण के कारण पलाश जैसे भारतीय वृक्ष कम होते जा रहे हैं।

यदि हम इन वृक्षों को संरक्षित नहीं करेंगे तो भविष्य में यह दुर्लभ हो सकते हैं।

इसलिए हमें:

  • पलाश के पौधे लगाने चाहिए

  • प्राकृतिक वनस्पतियों को बचाना चाहिए


निष्कर्ष

पलाश का पेड़ केवल एक सुंदर वृक्ष ही नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य देन है। इसके फूल, पत्ते, छाल और गोंद सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।

कमरकश जैसी आयुर्वेदिक औषधि इसी पेड़ से प्राप्त होती है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी है।

यदि हम प्रकृति की इस अद्भुत देन को संरक्षित करेंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी इसके लाभ प्राप्त कर सकेंगी।

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