पंचम कटिप्रदेशीय तथा प्रथम-द्वितीय कटिप्रदेशीय नाड़ी मूलों के मिलने से “ग्रध्रसी नाड़ी (Sciatic Nerve)” का निर्माण होता है।
जब इन नाड़ी मूलों पर विकृति होती है, तो साइटिका / ग्रध्रसी रोग उत्पन्न होता है।
आयुर्वेद में इसका मूल कारण प्रकोपित (दुष्ट) वात माना गया है, जो नितम्ब, जांघ, जंघा व गुल्फ में पीड़ा उत्पन्न करता है।
तीव्र पीड़ा, जो नितम्ब से शुरू होकर → कटि → जांघ → घुटना → पिंडली → पैर तक जाती है।
टांग में जकड़ाहट, सुई जैसे चुभन, फड़कन।
इसे शुद्ध वातिक ग्रध्रसी कहा जाता है।
ऊपर दिए सभी लक्षणों के साथ
तन्द्रा (बहुत नींद आना)
भारीपन
अरुचि (भूख कम लगना)
एड़ी और गुल्फ की कण्डरा में वात-दूषण
भारी वजन उठाना
गलत मुद्रा में बैठना
शरीर में वात का बढ़ना
रीढ़ की हड्डी में दबाव (Disc Compression)
सुई चुभने जैसी पीड़ा
जकड़ाहट व अकड़ाहट
फड़कन
लंगड़ाकर चलना
शरीर का एक ओर झुकना
रात में व ठंडी हवा में दर्द बढ़ना
खाँसी-छींकने पर दर्द बढ़ना
कभी-कभी यह दोनों पैरों में भी हो सकती है
शुरू में कटिशूल (लोअर बैक पेन) महसूस होना
कम-से-कम 1 माह पूर्ण विश्राम।
जमीन पर गद्दा, या तख़्त पर सोना उत्तम।
दर्द, अकड़ाहट व सूजन में अत्यंत लाभ।
आवश्यकतानुसार वमन व विरेचन करें।
इसके बाद दीपन-पाचन योग देकर अग्नि को मजबूत करें।
शुरुआत में स्नेहन (तेल मालिश) न करें।
नमक की पोटली, गर्म बालू, या हॉट वॉटर बैग से सिकाई करें।
एरंड बीज की पोटली से सेक अत्यंत लाभकारी।
पत्तों का स्वरस – 30 ml
या
क्वाथ – 60 ml
इसमें एरंड मूल क्वाथ मिलाने से और भी अच्छा लाभ मिलता है।
विधि:
लहसुन – 20 g
दूध – 80 ml
पानी – 240 ml
→ एक साथ पकाएँ
→ जब पानी पूरा उड़कर सिर्फ दूध बचे, यही लहसुन खीर कहलाती है।
लाभ: साइटिका की पुरानी से पुरानी पीड़ा में अत्यंत प्रभावी।
20 ml एरंड तेल + 58 ml गोमूत्र
→ 1 माह तक सेवन लाभदायक।
या
एरंड बीज की लुगदी दूध में पकाकर,
→ गुड़ या चीनी के साथ सेवन करें।
सामग्री:
त्रिकुट, पिप्पली मूल, विडंग, देवदारु, सैंधव, रास्ना, चित्रक, अजवायन, वचा, हरड़
→ सभी बराबर मात्रा
→ 2 गुना घृत में मर्दन
खुराक: 3 माशा, सुबह-शाम।
त्रिफला – 1 पाव
जल – 8 सेर
→ चौथाई रहने पर
गुग्गुल – ½ पाव
एरंड तेल – 10 तोला
रास्ना, विडंग, त्रिकुट, देवदारु, गंधक – 1-1 तोला
खुराक: 1–2 माशा, सुबह-शाम।
शुद्ध कुपीलु – 60 g
समीर पन्नग रस – 120 g
योगराज – ½ g
रसोन पिंड – 2 g
→ एक-एक मात्रा
→ शैफाली क्वाथ या एरंड मूल क्वाथ के साथ सेवन।
वात गंजाकुश – 240 mg
वैश्वानर चूर्ण – 3 g (भोजन बाद, गुनगुने जल से)
महाविष गर्भ तेल – मालिश + सेक
पथ्यादि गुग्गुल
वातनाशक वटी
स्नायु शूलहर चूर्ण
मल्ल सिन्दूर
रसोन कल्प
दशमूलादि क्वाथ
महारास्नादि क्वाथ
रास्ना गुग्गुल
सभी औषधियाँ योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में लें।
यदि दर्द, कमजोरी या सुन्नपन बढ़े तो तुरंत जांच कराएँ।
At AyurvediyaUpchar, we are dedicated to bringing you the ancient wisdom of Ayurveda to support your journey toward holistic well-being. Our carefully crafted treatments, products, and resources are designed to balance mind, body, and spirit for a healthier, more harmonious life. Explore our range of services and products inspired by centuries-old traditions for natural healing and wellness.
आयुर्वेदीय उपचार में, हम आपको आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को समग्र कल्याण की ओर आपकी यात्रा में सहायता करने के लिए समर्पित हैं। हमारे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए उपचार, उत्पाद और संसाधन स्वस्थ, अधिक सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्राकृतिक उपचार और कल्याण के लिए सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हमारी सेवाओं और उत्पादों की श्रृंखला का अन्वेषण करें।