बढ़ती उम्र के साथ शरीर में अनेक प्रकार के परिवर्तन होना स्वाभाविक है। 60 वर्ष की आयु के बाद शरीर की कार्यक्षमता, नसों की मजबूती, रक्त संचार और तंत्रिका तंत्र पहले की तुलना में धीमे और कमजोर होने लगते हैं। इसी उम्र में बहुत से लोगों को यह शिकायत होने लगती है कि झुकते ही या अचानक उठते ही कुछ सेकंड के लिए सिर घूम जाता है, आँखों के सामने अंधेरा छा जाता है या कभी-कभी दो-दो चीजें दिखाई देने लगती हैं।
अधिकतर लोग इसे सामान्य बुढ़ापे की कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन चिकित्सकीय दृष्टि से यह स्थिति कई बार ब्लड प्रेशर, दिमाग, कान, गर्दन या आँखों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। यदि समय रहते इसका सही कारण जानकर उपचार न किया जाए, तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
हर व्यक्ति में इसके लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः निम्न लक्षण देखे जाते हैं:
झुकते ही या उठते ही सिर घूमना
5–10 सेकंड के लिए संतुलन बिगड़ना
आँखों के सामने धुंध छाना
कभी-कभी दो-दो आकृतियाँ दिखाई देना (Double Vision)
सिर हल्का या भारी लगना
कमजोरी और थकावट
कानों में सीटी या भारीपन
दिल की धड़कन तेज़ होना
चलने में लड़खड़ाहट
ये लक्षण अगर कभी-कभार हों तो भी ध्यान देने योग्य हैं और अगर बार-बार हों तो जाँच ज़रूरी हो जाती है।
यह सबसे आम कारण है। जब व्यक्ति बैठी या झुकी अवस्था से अचानक खड़ा होता है, तो रक्तचाप अचानक गिर जाता है। इससे दिमाग तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुँच पाता और कुछ सेकंड के लिए चक्कर आता है।
जोखिम अधिक किन्हें होता है?
बुज़ुर्ग व्यक्ति
BP की दवा लेने वाले
लंबे समय तक खड़े रहने वाले
डिहाइड्रेशन से ग्रस्त लोग
वर्टिगो में व्यक्ति को ऐसा लगता है जैसे आसपास की चीजें घूम रही हों। यह समस्या कान के अंदर मौजूद संतुलन तंत्र (Inner Ear) के बिगड़ने से होती है।
विशेष लक्षण:
सिर की स्थिति बदलते ही चक्कर
बिस्तर पर करवट बदलने पर समस्या
ऊपर देखने या झुकने पर तेज़ चक्कर
मतली या उल्टी जैसा मन
गर्दन की हड्डियों में उम्र के साथ घिसाव आ जाता है। इससे नसों और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे दिमाग तक रक्त प्रवाह प्रभावित होता है।
लक्षण:
गर्दन में दर्द और अकड़न
सिर घूमना
कंधों और हाथों में झनझनाहट
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने पर परेशानी
उम्र बढ़ने के साथ धमनियों में संकुचन और कठोरता आ जाती है। इससे दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त नहीं मिल पाता, जिसके कारण चक्कर और दृष्टि समस्या हो सकती है।
उम्र के साथ दृष्टि कमजोर होना
चश्मे का नंबर बदलना
माइग्रेन
आँखों की मांसपेशियों की कमजोरी
इसी कारण कुछ लोगों को दो-दो दिखाई देने की शिकायत होती है।
डायबिटीज
खून की कमी (Hemoglobin कम)
शरीर में पानी की कमी
अत्यधिक दवाइयों का सेवन
मानसिक तनाव और चिंता
आयुर्वेद में वृद्धावस्था को वात प्रधान अवस्था माना गया है। इस समय:
वात दोष बढ़ जाता है
नसें शुष्क और कमजोर हो जाती हैं
मज्जा धातु और ओज का क्षय होता है
रक्त संचार धीमा पड़ जाता है
इसी असंतुलन के कारण:
चक्कर
अस्थिरता
दृष्टि दोष
कमजोरी
जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
⚠️ यह उपचार सामान्य मार्गदर्शन है। पहले से चल रही दवाओं के साथ लेने से पहले वैद्य या चिकित्सक से सलाह लें।
नसों और मांसपेशियों को बल देता है
मानसिक तनाव और कमजोरी कम करता है
सेवन:
½ चम्मच चूर्ण रात को गुनगुने दूध के साथ
दिमाग को पोषण देती है
संतुलन और स्मरण शक्ति सुधारती है
सेवन:
ब्राह्मी वटी 1 गोली सुबह-शाम भोजन के बाद
रक्त संचार सुधारती है
कमजोरी और थकावट दूर करती है
सेवन:
½ चम्मच गिलोय सत्व सुबह खाली पेट
वात दोष संतुलन में सहायक
पाचन और शरीर की सफाई करता है
सेवन:
½ चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को गुनगुने पानी के साथ
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ
ताजे फल – सेब, अनार, पपीता
गुनगुना दूध
भीगे बादाम (2–3)
हल्का और सुपाच्य भोजन
अत्यधिक तला-भुना
बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी
अत्यधिक नमक
बहुत ठंडा भोजन
अचानक न झुकें और न उठें
उठते समय पहले बैठें, फिर खड़े हों
दिन भर पर्याप्त पानी पिएँ
गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग करें
लंबे समय तक मोबाइल/टीवी से बचें
सिर नीचे करके लगातार काम न करें
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी प्राणायाम
गर्दन की हल्की एक्सरसाइज़
✔️ नियमित BP और शुगर जाँच
✔️ पर्याप्त नींद
✔️ तनाव कम करें
❌ स्वयं दवा बंद या बदलना
❌ चक्कर को नज़रअंदाज़ करना
❌ अचानक तेज़ मूवमेंट
? चक्कर लंबे समय तक रहे
? बोलने में परेशानी
? हाथ-पैर सुन्न होना
? चलने में संतुलन न बनना
? बार-बार दो-दो दिखना
? बेहोशी या उल्टी
Q1. क्या यह स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है?
यदि अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण हों, तो हाँ।
Q2. क्या केवल उम्र ही इसका कारण है?
नहीं, इसके पीछे स्पष्ट चिकित्सा कारण हो सकते हैं।
Q3. क्या आयुर्वेद से फायदा होता है?
सही निदान और नियमित उपचार से काफी सुधार संभव है।
60 वर्ष की उम्र के बाद झुकने पर सिर घूमना या चक्कर आना कोई साधारण समस्या नहीं है। यह शरीर के अंदर चल रही असंतुलन की प्रक्रिया का संकेत हो सकता है। समय रहते जाँच, सही जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वस्थ और सुरक्षित जीवन के लिए लक्षणों को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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