बंध्यत्व (बांझपन): कारण, लक्षण और चिकित्सा

Apr 12, 2026
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बंध्यत्व (बांझपन): कारण, लक्षण और चिकित्सा

 बंध्यत्व (बांझपन) क्या है?

प्रत्येक विवाहित स्त्री को संतान प्राप्त करने की उत्कंठा रहती है। विवाहित स्त्री को संतान उत्पन्न न होना ही बंध्यत्व या बांझपन कहलाता है। ऐसी स्त्री को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है, जिससे वह हीन भावना से ग्रस्त हो जाती है।

बांझ स्त्री के मन में संतान प्राप्ति की इतनी तीव्र इच्छा रहती है कि वह कुछ भी करने को तैयार हो जाती है। कई बार वह टोने-टोटके, तांत्रिकों तथा पाखंडी साधु-संतों के बहकावे में आकर अनर्थ तक कर बैठती है।

यदि पति में कोई दोष न हो तथा पति-पत्नी संतान प्राप्ति के इच्छुक हों, फिर भी विवाह के 5 वर्ष तक पत्नी गर्भवती न हो, तो उसे बांझ समझना चाहिए।


 बंध्यत्व के कारण

बंध्यत्व के अनेक कारण हो सकते हैं:

  • गर्भाशय का जन्म से न होना या अल्प विकसित होना
  • योनि का संकुचित होना
  • योनि या गर्भाशय का अपने स्थान से खिसक जाना
  • डिंब ग्रंथि (Ovary) में सूजन या उसका अभाव
  • बीजवाहिनी नलिकाओं का अवरुद्ध होना
  • गर्भाशय या डिंब ग्रंथि में सिस्ट (गांठ)
  • बीजवाहिनी नलिकाओं का अभाव या पृथक्करण

इसके अतिरिक्त:

  • उपदंश, पूयमेह
  • श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर
  • खून की कमी (एनीमिया)
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • गर्भाशय तरल की अत्यधिक अम्लता
  • गर्भाशय व्रण
  • मोटापा
  • गर्भाशय कला में सूजन
  • योनि में सूजन

इन कारणों से योनि स्त्राव की प्रक्रिया में परिवर्तन हो जाता है, जिससे शुक्राणु नष्ट हो जाते हैं। शुक्राणु क्षारीय वातावरण में सक्रिय रहते हैं, जबकि अम्लीय वातावरण में शीघ्र नष्ट हो जाते हैं, जिससे गर्भाधान नहीं हो पाता।


 जीवनशैली से जुड़े कारण

  • मैथुन के बाद तुरंत उठकर बैठ जाना
  • तुरंत योनि को धो देना
  • कुपोषण
  • मैथुन में विषम आसनों का प्रयोग
  • आहार में विटामिन E की कमी
  • गर्भनिरोधक साधनों का अधिक उपयोग
  • मैथुन में असफलता

इसके अलावा:

  • शोक, क्रोध, भय, चिंता, द्वेष
  • पति-पत्नी में प्रेम की कमी
  • क्षय किरणों का अधिक संपर्क
  • सीसा, पारद, रेडियम आदि का दुष्प्रभाव
  • नशीले पदार्थों का सेवन

ये सभी कारण भी बंध्यत्व उत्पन्न कर सकते हैं।


 बंध्या स्त्री के लक्षण

  • मासिक धर्म का अनियमित होना
  • समय पर रक्तस्राव न होना
  • कभी जल्दी, कभी देर से पीरियड आना
  • योनि में सुई चुभने जैसा दर्द
  • समागम के बाद भी गर्भधारण न होना
  • योनि मार्ग का सूखा रहना
  • नितम्बों का कम विकसित होना
  • स्तनों का पूर्ण विकास न होना

यदि डिंबाशय में रसौली हो:

  • हाथ, छाती और पेट पर बाल आना
  • आवाज का पुरुषों जैसी हो जाना

 मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव

  • सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों से दूरी
  • हीन भावना और कुंठा
  • दूसरों के बच्चों से चिढ़
  • छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा

प्रारंभ से ही संतान का न होना बंध्यत्व का प्रमुख लक्षण है।


 बंध्यत्व के प्रकार

बंध्यत्व को दो भागों में बांटा गया है:

1. सहज (जन्मजात) कारण

स्त्री के प्रजनन अंगों की संरचना में विकृति या उनका अभाव।


2. जातोत्तर कारण

  • सूजन या गांठ के कारण Ovary का नष्ट होना
  • Adhesion के कारण डिंब का बाहर न निकलना
  • बीजवाहिनी में अवरोध
  • गर्भाशय में सूजन
  • Cervix के संक्रमण से शुक्राणु नष्ट होना

 हार्मोनल कारण

  • अंतःस्रावी ग्रंथियों में असंतुलन
  • Ovary स्राव की कमी → गर्भाशय का विकास नहीं
  • स्राव अधिक → गर्भाशय का बढ़ना

विशेष:

  • थायरॉयड ग्रंथि
  • पिट्यूटरी ग्रंथि

इनकी कमी से भी बंध्यत्व होता है।


 अन्य महत्वपूर्ण कारण

  • प्रजनन अंगों में चोट
  • शस्त्रक्रिया से अंगों का नष्ट होना
  • रजस्वला से पहले की अवस्था
  • रजोनिवृत्ति के बाद

 एकापत्य बंध्यता

एक बच्चा होने के बाद दूसरा बच्चा न होना:

  • प्रसव के बाद संक्रमण
  • बीजवाहिनी नलिकाओं में सूजन
  • गर्भाशय ग्रीवा में चोट
  • Sub Involution

 बंध्यता के भेद (आयुर्वेद अनुसार)

  • आदि बंध्या
  • वात दोष जन्य बंध्या
  • पित्त दोष जन्य बंध्या
  • कफ दोष जन्य बंध्या
  • त्रिदोष जन्य बंध्या
  • रक्त दोष जन्य बंध्या
  • गृह दोष जन्य बंध्या
  • देवबल जन्य
  • अभिचार जन्य

 आधुनिक चिकित्सा अनुसार

  • प्राथमिक बंध्यता
  • द्वितीय बंध्यता

 बंध्यत्व की चिकित्सा

सबसे पहले कारण का पता लगाना आवश्यक है।

  • स्त्री और पुरुष दोनों की जांच जरूरी
  • संक्रमण का उपचार करें
  • स्वच्छता रखें
  • गर्भाशय व नलिकाओं का उपचार करें

 

 औषधि चिकित्सा

 स्त्री के लिए

(1)
जे.पी. सूतशेखर रस 10 ग्राम,
जे.पी. पुष्पधन्वा रस 5 ग्राम,
जे.पी. पुष्यानुग चूर्ण 50 ग्राम,
जे.पी. कामदुधा रस 10 ग्राम,
जे.पी. स्वर्ण माक्षिक भस्म 10 ग्राम

 सबको घोंट-पीसकर 50 मात्रा बनाकर
 सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें


(2)
फेमिटोन टैबलेट + बिमटोन टैबलेट (2-2)

  • जे.पी सुपारी पाक 1 चम्मच
     दूध के साथ सुबह-शाम लें

(3)
फेमीराल सिरप
 2-2 चम्मच भोजन के बाद


(4)
जेपी आराम चूर्ण
 2 चम्मच रात को गुनगुने पानी से


(5)
फिटकरी चूर्ण 3 चम्मच
 1 लीटर गुनगुने पानी में मिलाकर
 7 दिन तक योनि डूश

फिर
 नीम पत्तों का उबला पानी 7 दिन उपयोग करें


 पुरुष के लिए

(1)
जे.पी. पुष्पधन्वा रस
 सुबह खाली पेट दूध/शहद से


(2)
007 टेबलेट + शुक्र शोधन + विमटोन + सूतशेखर रस
 2-2 गोली
 वीर्य शोधन चूर्ण 1 चम्मच
 सुबह-शाम दूध से


(3)
जेरीरान सिरप
 2-2 चम्मच भोजन के बाद


(4)
जेपी आराम चूर्ण
 2 चम्मच रात को


(5)
आरजी मसाज ऑइल

 5-5 बूंद सुबह-शाम लगाएं
 निष्कर्ष

बंध्यत्व एक जटिल समस्या है, लेकिन सही कारण और उचित उपचार से इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

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