नुस्खा:
टंकण भस्म (फुला सुहागा) – 3 ग्राम
घी + शक्कर
प्रातः 5 बजे 1 खुराक
3 दिन लगातार
➡ आधा सिरदर्द पूरी तरह समाप्त।
नुस्खा:
आक/आकड़ा का पका पान
एक ओर घी लगाकर हल्का गरम
उसके रस की 3–4 बूंद कान में
➡ तुरंत राहत।
प्याज पीसकर रस निकाले
हल्का गरम कर 4 बूंद कान में डालें
➡ पुराना दर्द भी ठीक।
लहसुन + सरसों तेल में उबाल
2–2 बूंद सुबह/दोपहर/शाम
➡ फुंसी बह जाती है, दर्द खत्म।
भुनी फिटकरी (3 रत्ती)
बराबर मात्रा में चीनी
दिन में 3 बार
➡ कठिन खाँसी 3–5 दिन में ठीक।
नुस्खा 1:
गर्म गाय दूध 1 पाव
12 काली मिर्च
1 तोला मिश्री
नुस्खा 2:
1 तोला मिश्री + 8 काली मिर्च
पानी से पीसकर गर्म कर चाय की तरह पीएँ
➡ 5 दिन में जुकाम समाप्त।
पलाश/खाखरा की कोमल टहनी से दातौन
➡ 1–2 प्रयोग में लाभ।
काले मरवा के पत्ते चबाएँ
➡ दाढ़-दर्द ठीक।
हल्दी + सेंधा नमक
सरसों तेल में मिलाकर मंजन
➡ दर्द खत्म – दाँत मजबूत।
कपूर महीन पीसकर दाँत में भरें
कुछ देर दबाकर रखें
➡ दर्द, संक्रमण और छेद में राहत।
नुस्खा 1: चमेली के पत्ते चबाएँ
नुस्खा 2: बकरी दूध की सीड़ लगाएँ
➡ जल्दी राहत।
ठंडा फीका दूध + आधा नींबू रस
➡ 1–2 खुराक में दस्त बंद।
अजवाइन + सेंधा नमक + काली मिर्च
बराबर मात्रा
रात को गर्म पानी से
➡ सभी पेट रोग समाप्त।
अदरक के छोटे टुकड़े
नींबू रस + सेंधा नमक
➡ भूख खुलेगी, पाचन सुधरेगा।
बड़ा नींबू रात भर ओस में रखकर
सुबह चीनी शरबत + थोड़ा काला नमक
➡ जिद्दी कब्ज भी खत्म।
नुस्खा 1: गर्म प्याज रस – सुबह/शाम
नुस्खा 2: सेम पत्तों का रस + शहद
➡ कीड़े मरकर बाहर निकलते हैं।
गर्म अनार रस
दिन में 3 बार
➡ उल्टी रुक जाती है।
नागफनी/थूहर का कच्चा गूदा – 10 ग्राम
सुबह 3–5 दिन
➡ 7–8 दिन में लीवर सामान्य।
नीम पत्तियाँ + गो-घृत
हल्का गर्म लगाएँ
➡ पुराने फोड़े भी भर जाते हैं।
नुस्खा 1: कच्चे आलू का रस
नुस्खा 2: इमली छाल-भस्म + गो-घृत
➡ जलन व छाले मिटते हैं।
प्याज पीसकर गर्म
थोड़ा गोमूत्र मिलाकर बाँधें
➡ गिल्टी व दर्द दोनों समाप्त।
नीम बीज + काली मिर्च + लाल सेंधा नमक
बराबर मात्रा में
1 तोला घृत के साथ
➡ विष उतरता है।
पहचान:
नींबू रस लगाने पर स्थान काला पड़े = सर्पदंश
लाल मिर्च + शुद्ध शहद
डंक पर लगाएँ
➡ विष शांत हो जाता है।
पुराने कंबल की ऊन की भस्म – 3–4 रत्ती
शहद के साथ 3 बार
➡ 1 दिन में लाभ।
भुनी हींग + गोमूत्र
दूसरा नुस्खा:
राई चूर्ण + भुनी हींग
गर्म पानी से
➡ प्रसव आसान, मूढगर्भ में लाभ।
कुशा की जड़ 1 छटाक
चावल धोया पानी 1 गिलास
सुबह–दोपहर–शाम
➡ प्रसवोत्तर समस्याओं में लाभ।
ताजा करेले को मसलकर उसका पानी
50g × दिन में 3 बार
➡ जलन दूर।
जामुन गुठली चूर्ण – अठन्नी भर
दिन में 3 बार पानी से
साथ में: करेले का रस 2 तोला
➡ शुगर नियंत्रण।
सोंठ + बकरी दूध
नाक से खींचें
➡ सभी प्रकार का सिरदर्द ठीक।
मेहंदी का बीज + शहद
दिन में 3 बार
➡ याददाश्त बढ़ती है।
कपूर + मलयागिरी चंदन
गुलाब जल में घिसकर
नाक से खींचें
➡ तुरंत राहत।
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