दृष्टि नाशक भयानक रोग ग्लूकोमा (Glaucoma) – समय पर पहचान नहीं हुई तो जा सकती है आंखों की रोशनी

May 23, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
दृष्टि नाशक भयानक रोग ग्लूकोमा (Glaucoma) – समय पर पहचान नहीं हुई तो जा सकती है आंखों की रोशनी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लगातार मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन देखने, अनियमित दिनचर्या, मधुमेह तथा बढ़ती उम्र के कारण आंखों के कई गंभीर रोग सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है — ग्लूकोमा (Glaucoma)
यह आंखों का ऐसा खतरनाक रोग है जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को खत्म कर देता है और समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति पूरी तरह अंधा भी हो सकता है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ग्लूकोमा शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। इसलिए इसे “Silent Thief of Sight” यानी “चुपचाप नजर चुराने वाला रोग” भी कहा जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार मोतियाबिंद के बाद ग्लूकोमा अंधत्व का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है। भारत में भी लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश लोगों को इसका पता बहुत देर से चलता है।


क्या है ग्लूकोमा? (What is Glaucoma)

ग्लूकोमा आंखों का एक गंभीर रोग है जिसमें आंख के अंदर का दबाव (Intra Ocular Pressure) सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। आंख के अंदर एक विशेष प्रकार का जलीय द्रव (Aqueous Humor) लगातार बनता और निकलता रहता है। जब किसी कारण से इस द्रव का संतुलन बिगड़ जाता है, तब आंखों का दबाव बढ़ने लगता है।

यह बढ़ा हुआ दबाव आंख की सबसे महत्वपूर्ण नस — ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) — को नुकसान पहुंचाने लगता है। यही नस आंखों से मस्तिष्क तक देखने के संकेत पहुंचाती है। जब यह नस खराब होने लगती है, तब व्यक्ति की दृष्टि धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो स्थायी अंधापन तक हो सकता है।

सामान्यतः आंखों का दबाव 14 से 22 मि.मी. पारा (mmHg) तक माना जाता है। इससे अधिक दबाव लंबे समय तक बना रहे तो ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है।

कई स्थानों पर इसे “धोबा” या “कालापानी” भी कहा जाता है।


ग्लूकोमा कितने प्रकार का होता है?

ग्लूकोमा कई प्रकार का हो सकता है, लेकिन मुख्य रूप से इसे निम्न प्रकारों में बांटा जाता है —

1. ओपन एंगल ग्लूकोमा (Open Angle Glaucoma)

यह सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें आंखों का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता है और रोगी को लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। धीरे-धीरे देखने की क्षमता कम होने लगती है।

2. एंगल क्लोजर ग्लूकोमा (Angle Closure Glaucoma)

यह अचानक होने वाला गंभीर ग्लूकोमा है। इसमें आंखों में तेज दर्द, सिर दर्द, उल्टी, धुंधला दिखाई देना और आंखों की लालिमा जैसे लक्षण तेजी से दिखाई देते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है।

3. जन्मजात ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma)

कुछ बच्चों में जन्म से ही आंखों की संरचना ठीक विकसित नहीं होती, जिसके कारण ग्लूकोमा हो सकता है। ऐसे बच्चों की आंखों से लगातार पानी बहता रहता है और आंखें असामान्य रूप से बड़ी दिखाई दे सकती हैं।

4. सेकेंडरी ग्लूकोमा (Secondary Glaucoma)

यह किसी अन्य बीमारी, चोट, संक्रमण, मोतियाबिंद या दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण होता है।


ग्लूकोमा होने के प्रमुख कारण

ग्लूकोमा के कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह वंशानुगत भी होता है।

मुख्य कारण

  • आंखों का बढ़ा हुआ प्रेशर
  • परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास
  • बढ़ती उम्र
  • मधुमेह (Diabetes)
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • मोतियाबिंद
  • आंखों की चोट
  • स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक प्रयोग
  • आंखों की सर्जरी
  • कम रोशनी में लगातार पढ़ना
  • अत्यधिक मानसिक तनाव

कुछ लोगों में आंखों का अग्रिम कक्ष (Anterior Chamber) बहुत संकरा होता है। ऐसे लोगों में अचानक ग्लूकोमा होने की संभावना अधिक रहती है।


ग्लूकोमा के लक्षण (Symptoms of Glaucoma)

शुरुआत में ग्लूकोमा के लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे रोग गंभीर होता जाता है।

सामान्य लक्षण

  • आंखों में दर्द या भारीपन
  • सिर दर्द
  • आंखों की लाली
  • धुंधला दिखाई देना
  • रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे रंग दिखना
  • रात में कम दिखाई देना
  • आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर होना
  • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना
  • चलते समय चीजों से टकराना
  • आंखों का सख्त महसूस होना
  • जल्दी आंखों में थकान होना

गंभीर स्थिति के लक्षण

  • अचानक तेज आंख दर्द
  • उल्टी और जी मिचलाना
  • पलकों में सूजन
  • नजर लगभग खत्म होना
  • तेज सिर दर्द

ऐसी स्थिति में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।


किन लोगों को अधिक खतरा होता है?

निम्न लोगों में ग्लूकोमा होने का खतरा अधिक पाया जाता है —

  • 40 वर्ष से अधिक आयु वाले
  • मधुमेह रोगी
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • जिनके परिवार में किसी को ग्लूकोमा हो
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले
  • मोतियाबिंद से पीड़ित व्यक्ति
  • अधिक समय तक स्क्रीन देखने वाले लोग

ग्लूकोमा की जांच कैसे होती है?

ग्लूकोमा का सही पता केवल आंखों की विशेष जांच द्वारा लगाया जा सकता है।

1. टोनोमेट्री (Tonometry)

14P22 mmHg14 \leq P \leq 22\ \text{mmHg}

इस जांच में आंखों का दबाव मापा जाता है। यदि दबाव सामान्य सीमा से अधिक हो तो ग्लूकोमा की संभावना मानी जाती है।

2. फण्डस्कोपी (Fundoscopy)

इस जांच में आंख के अंदर रेटिना और ऑप्टिक नर्व की स्थिति देखी जाती है।

3. विजुअल फील्ड टेस्ट

इससे यह पता लगाया जाता है कि देखने का क्षेत्र कितना प्रभावित हुआ है।

4. कॉर्निया जांच

कॉर्निया की मोटाई और आंखों की संरचना की जांच की जाती है।

5. OCT Scan

आधुनिक मशीन द्वारा ऑप्टिक नर्व की क्षति का पता लगाया जाता है।


ग्लूकोमा का इलाज (Treatment of Glaucoma)

ग्लूकोमा का इलाज जितना जल्दी शुरू हो जाए, आंखों की रोशनी बचाने की संभावना उतनी अधिक रहती है।

1. दवाओं द्वारा इलाज

  • आंखों में डालने वाली ड्रॉप्स
  • प्रेशर कम करने वाली गोलियां
  • इंजेक्शन

इनका उद्देश्य आंखों का दबाव कम करना होता है।

2. लेजर उपचार

लेजर तकनीक द्वारा आंखों में जमे द्रव के निकास को बेहतर बनाया जाता है।

3. शल्य चिकित्सा (Surgery)

जब दवाओं से लाभ न मिले तब ऑपरेशन किया जाता है।

प्रमुख सर्जरी

  • Trabeculectomy
  • Drainage Implant Surgery
  • Laser Trabeculoplasty

आजकल माइक्रो सर्जरी और लेजर तकनीक से इलाज काफी सुरक्षित और प्रभावी हो गया है।


ग्लूकोमा में सावधानियां

  • आंखों की नियमित जांच कराएं
  • बिना डॉक्टर सलाह स्टेरॉयड दवाएं न लें
  • मधुमेह नियंत्रित रखें
  • पर्याप्त नींद लें
  • लगातार स्क्रीन देखने से बचें
  • धूम्रपान और शराब से दूरी रखें
  • पौष्टिक भोजन लें
  • आंखों में दर्द या धुंधलापन हो तो तुरंत जांच कराएं

क्या ग्लूकोमा में खोई हुई रोशनी वापस आ सकती है?

ग्लूकोमा में जो दृष्टि क्षति हो चुकी होती है, उसे वापस लाना संभव नहीं होता। इसलिए समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। उपचार का उद्देश्य आगे होने वाले नुकसान को रोकना होता है।


घरेलू देखभाल और जीवनशैली

हालांकि ग्लूकोमा का इलाज डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए, लेकिन कुछ अच्छी आदतें आंखों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं —

  • हरी सब्जियां और फल खाएं
  • विटामिन A, C और E युक्त भोजन लें
  • योग और प्राणायाम करें
  • आंखों को पर्याप्त आराम दें
  • तनाव कम रखें

निष्कर्ष

ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे खत्म करने वाला गंभीर रोग है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यही है कि शुरुआती अवस्था में यह अक्सर बिना लक्षण के बढ़ता रहता है। इसलिए 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित आंख जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

यदि आंखों में दर्द, धुंधलापन, सिर दर्द, रोशनी के चारों ओर रंगीन घेरे दिखना या नजर कमजोर होने जैसे लक्षण महसूस हों तो लापरवाही न करें और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर इलाज ही आंखों की रोशनी बचाने का सबसे बड़ा उपाय है।


Author — AyurvediyaUpchar.com Team

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