"गुर्दे (किडनी) की सुरक्षा: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय"

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"गुर्दे (किडनी) की सुरक्षा: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय"

        किडनी(Kidney) गुर्दे - सुरक्षा एवं उपाय 

 

हमारे गुर्दे लाखों छलनियो तथा लगभग 140 मील नलिकाओं से बने होते हैं | गुर्दे की इस इकाई को नेफ्रॉन कहते हैं | एक गुर्दे में लगभग 10 लाख ऐसी ऐसी इकाइयां होती हैं | नलिकाएं उस छाने हुए द्रव अच्छी अच्छी चीज़ो( सोडियम,पोटेशियम, कैल्शियम ) इत्यादि को दोबारा सोख लगभग 1.5 लीटर मूत्र के रूप में बाहर निकाल देती हैं | हमारे गुर्दे लगभग 1500 लीटर खून को साफ़ कर के लगभग 9.5 लीटर मूत्र में बदल देते हैं | लगभग 1200 मिलीलीटर रक्त प्रत्येक १ मिनट में दोनों गुर्दों से प्रवाहित होता है तथा यह 1 मिलीलीटर प्रत्येक मिनिट के हिसाब से मूत्र में बदल जाता है | 


- छने हुए मूत्र द्वारा शरीर के गंदे एवं हानिकारक पदार्थ जैसे यूरिया क्रेटिनिन विभिन्न प्रकार के अम्ल इत्यादि बाहर निकल जाते हैं | 


- शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित करना गुर्दों का ही काम है ,यही कारण है की गुर्दे ख़राब होने पर शरीर सूजने लगता है | 


- ये रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं 

 गुर्दे कैसे ख़राब होते हैं -


गुर्दे ख़राब होने बहुत सारे कारण है लेकिन मुख्य कारण निम्न है -


(1) दर्द की अधिक गोलियां खाना तथा अनावश्यक दवाओं का प्रयोग | 

(2) खून व पानी की कमी से उल्टी दस्त हैज़ा इत्यादि होना | 

(3) गुर्दे की छलनियों में सूजन से मूत्र में प्रोटीन जाने लगता है इसे “ग्लोमेउलोनेफ्राइटिस” कहते हैं | 

(4) मूत्र संस्थान में पथरी बनना एवं मूत्र के रास्ते में रुकावट

 

गुर्दे की सुरक्षा के उपाय 

(1) पानी अधिक से अधिक पिएँ | 

(2 ) अगर डाइबिटीज़ या हाई ब्लडप्रेसर की बीमारी है तो उसे नियंत्रण में रखें | 

(३) दर्द की दवाइयां केबल आवश्यकता के समय ही ले ज्यादा मात्रा में सेवन न करें | 

(4) गुर्दे की बीमारी की शंका होते ही गुर्दे के डॉक्टर से उचित परामर्श लें ,क्योकि गुर्दे की बीमारियां जल्दी उपचार मिलने से ठीक हो सकती है | इलाज में देर होने से गुर्दे पूरी तरह खरब होने की सम्भावना रहती है | 


सावधानियां   

(1) नमक कम मात्रा में सेवन करें तथा द्रव की मात्रा मूत्रनुसार( दूध,चाय,पानी) मिलाकर रखें | 

(2) रसीले फल न खाएं तथा गूदे वाले फलों जैसे सेव,अमरुद,पपीता आदि का सेवन करें | 

(3) पत्ते वाली हरी सब्जियां उबाल कर सेवन करें| 

(4) दिनभर में एक बड़ा चम्मच तेल या घी का सेवन करें

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