पथ्य-अपथ्य: आयुर्वेद के अनुसार किस रोग में क्या खाएं और क्या नहीं?

Jun 21, 2026
आरोग्य साधन
पथ्य-अपथ्य: आयुर्वेद के अनुसार किस रोग में क्या खाएं और क्या नहीं?

रोगों से बचाव और उपचार में आहार का महत्व

आयुर्वेद केवल रोग होने पर दवा लेने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण विज्ञान प्रणाली है। आयुर्वेदाचार्यों ने स्पष्ट कहा है कि यदि रोगी उचित पथ्य (हितकारी आहार-विहार) का पालन करता है तो औषधि कम मात्रा में भी लाभ देती है, जबकि अपथ्य (अहितकारी आहार-विहार) करने पर श्रेष्ठ औषधि भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाती।

आयुर्वेद में कहा गया है—

"पथ्ये सति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणैः।
पथ्येऽसति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणैः॥"

अर्थात् यदि रोगी पथ्य का पालन करता है तो औषधि की आवश्यकता कम पड़ती है और यदि पथ्य का पालन नहीं करता तो औषधि भी पूर्ण लाभ नहीं दे पाती।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान, जंक फूड, तनाव और रात्रि जागरण जैसी आदतों के कारण अनेक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि किस रोग में कौन-सा भोजन लाभदायक है और किन पदार्थों से बचना चाहिए।


1. अम्लपित्त (एसिडिटी, खट्टी डकार और सीने में जलन)

अम्लपित्त आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है। जब आमाशय में अम्ल (एसिड) की मात्रा बढ़ जाती है तो खट्टी डकारें, सीने में जलन, पेट में भारीपन, जी मिचलाना और कभी-कभी उल्टी की समस्या भी हो सकती है।

अम्लपित्त के मुख्य कारण

  • अत्यधिक मसालेदार भोजन
  • ज्यादा चाय-कॉफी
  • खाली पेट रहना
  • देर रात भोजन करना
  • तनाव और चिंता
  • अत्यधिक खट्टे पदार्थों का सेवन

पथ्य (क्या खाएं)

अम्लपित्त में शीतल, हल्का और पचने में आसान भोजन लाभकारी माना गया है।

  • शालि चावल
  • गेहूं
  • मूंग दाल
  • दूध
  • मिश्री एवं शक्कर
  • ठंडा एवं स्वच्छ जल
  • केला
  • अनार
  • परवल
  • आंवला
  • बथुआ का साग
  • नारियल पानी

अपथ्य (क्या न खाएं)

  • खट्टे पदार्थ
  • अचार
  • सिरका
  • तली-भुनी वस्तुएं
  • उड़द की दाल
  • कुल्थी
  • दही
  • मद्यपान
  • फास्ट फूड

विशेष सलाह

भोजन समय पर करें और भोजन के तुरंत बाद न सोएं।


2. प्रवाहिका (पेचिश)

प्रवाहिका में बार-बार मल त्याग की इच्छा होती है। मल में श्लेष्मा (म्यूकस), रक्त, पेट दर्द और मरोड़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

पथ्य

  • पुराना चावल
  • मूंग और मसूर का युष
  • बकरी का दूध
  • गाय का दूध
  • मक्खन
  • सोंठ
  • जामुन
  • अनार
  • बेल फल
  • केला

अपथ्य

  • अत्यधिक खट्टे पदार्थ
  • मिर्च-मसाले
  • गन्ने से बने पदार्थ
  • उड़द
  • जौ
  • अधिक पानी
  • बासी भोजन

विशेष सावधानी

उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिएं।


3. अर्श (बवासीर)

अर्श या बवासीर में गुदा क्षेत्र की नसों में सूजन आ जाती है जिससे दर्द, जलन और रक्तस्राव की समस्या हो सकती है।

पथ्य

  • शालि चावल
  • जौ
  • गेहूं
  • कुल्थी
  • मूली
  • बकरी का दूध
  • मक्खन
  • परवल
  • पुनर्नवा
  • बथुआ
  • आंवला
  • सूरणकंद

अपथ्य

  • तले हुए पदार्थ
  • अत्यधिक मिर्च-मसाले
  • तिल
  • भारी भोजन
  • शराब
  • कब्ज बढ़ाने वाले पदार्थ

विशेष सुझाव

कब्ज से बचना बवासीर के रोगियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।


4. मूत्राश्मरी (किडनी या मूत्र पथरी)

मूत्राश्मरी अर्थात मूत्र मार्ग में बनने वाली पथरी। इसमें कमर दर्द, पेशाब में जलन तथा मूत्र अवरोध जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

पथ्य

  • पुराना चावल
  • कुष्माण्ड (पेठा)
  • अदरक
  • वरुण की छाल
  • जौ का पानी
  • नारियल पानी

अपथ्य

  • कब्जकारी भोजन
  • अत्यधिक नमक
  • अत्यधिक खट्टे पदार्थ
  • भारी भोजन

विशेष सलाह

प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।


5. कृमि रोग (पेट के कीड़े)

पेट में कृमि होने पर भूख कम लगना, पेट दर्द, कमजोरी, वजन घटना और बच्चों में चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है।

पथ्य

  • शालि चावल
  • बथुआ
  • हींग
  • तिक्त द्रव्य
  • नीम
  • लहसुन

अपथ्य

  • मिठाइयां
  • दूध
  • दही
  • दिन में सोना
  • अधिक भोजन

6. आमवात (गठिया)

आमवात को आधुनिक चिकित्सा में रूमेटाइड आर्थराइटिस से जोड़ा जाता है। इसमें जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न रहती है।

पथ्य

  • जौ
  • कुल्थी
  • अदरक
  • लहसुन
  • करेला
  • बथुआ
  • पुनर्नवा
  • गुनगुना पानी

अपथ्य

  • दही
  • दूध
  • मछली
  • गुड़
  • भारी भोजन
  • ठंडे पेय

विशेष सुझाव

हल्का व्यायाम और नियमित योग लाभकारी माना जाता है।


7. पाण्डु रोग (एनीमिया)

पाण्डु रोग में शरीर में रक्त की कमी हो जाती है जिसके कारण कमजोरी, चक्कर, थकान और सांस फूलने की समस्या होती है।

पथ्य

  • मूंग
  • मसूर
  • गेहूं
  • जौ
  • गाजर
  • मूली
  • सलाद
  • अनार
  • आंवला
  • पपीता
  • जामुन
  • द्राक्षा
  • मट्ठा

अपथ्य

  • अत्यधिक नमक
  • अत्यधिक खट्टा भोजन
  • मद्यपान
  • उड़द
  • मटर

विशेष सुझाव

आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।


8. दाह (शरीर में जलन)

दाह का अर्थ है शरीर में अत्यधिक गर्मी या जलन का अनुभव होना।

पथ्य

  • दूध
  • मक्खन
  • नारियल
  • पेठा
  • केला
  • द्राक्षा
  • छुआरा
  • जौ
  • शालि चावल

अपथ्य

  • लाल मिर्च
  • गरम मसाले
  • धूप में अधिक घूमना
  • अत्यधिक व्यायाम

9. मेदोवृद्धि (मोटापा)

मोटापा अनेक गंभीर रोगों का कारण बन सकता है।

पथ्य

  • जौ
  • मसूर
  • मट्ठा
  • पुराना चावल
  • सुबह-शाम टहलना

अपथ्य

  • मिठाइयां
  • शक्कर
  • ठंडे पेय
  • फास्ट फूड
  • अधिक दूध एवं दुग्ध उत्पाद

मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय

  • सुबह गुनगुना पानी पिएं।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • भोजन के तुरंत बाद न सोएं।

10. राजयक्ष्मा (टीबी)

राजयक्ष्मा एक गंभीर संक्रामक रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है।

पथ्य

  • अनार
  • आंवला
  • आम
  • गेहूं
  • शालि चावल
  • बकरी का दूध
  • पौष्टिक भोजन

अपथ्य

  • तले हुए पदार्थ
  • अत्यधिक क्रोध
  • दिन में सोना
  • अत्यधिक श्रम

महत्वपूर्ण सूचना

टीबी के रोगी चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं का पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें।


11. आगन्तुज छर्दि (उल्टी)

पथ्य

  • नारियल पानी
  • अनार
  • आंवला
  • नींबू
  • अदरक
  • द्राक्षा
  • बेर

अपथ्य

  • अत्यधिक तैलीय भोजन
  • दुर्गंधयुक्त भोजन
  • अरुचिकर भोजन

12. सूर्यावर्त (सूर्य के साथ बढ़ने वाला सिरदर्द)

पथ्य

  • आंवला
  • नारियल
  • दूध
  • छाछ
  • पुराना घृत
  • द्राक्षा

अपथ्य

  • दिन में सोना
  • वेगों को रोकना
  • धूप में अधिक रहना

13. श्वास रोग (दमा)

दमा में सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट और खांसी की समस्या होती है।

पथ्य

  • गेहूं
  • जौ
  • शालि चावल
  • परवल
  • द्राक्षा
  • कुल्थी
  • बकरी का दूध

अपथ्य

  • दही
  • मछली
  • उड़द
  • तले हुए पदार्थ
  • धूम्रपान
  • ठंडी चीजें

अतिरिक्त सुझाव

धूल, धुआं और प्रदूषण से बचाव करें।


आयुर्वेद के 10 स्वर्णिम पथ्य नियम

  1. भूख लगने पर ही भोजन करें।
  2. भोजन अच्छी तरह चबाकर खाएं।
  3. ताजा और गर्म भोजन करें।
  4. बासी भोजन से बचें।
  5. भोजन के साथ अधिक पानी न पिएं।
  6. रात का भोजन हल्का रखें।
  7. पर्याप्त नींद लें।
  8. क्रोध और तनाव कम करें।
  9. नियमित व्यायाम करें।
  10. प्राकृतिक वेगों को कभी न रोकें।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार सही आहार और जीवनशैली ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है। रोग के अनुसार पथ्य-अपथ्य का पालन करने से रोगों की गंभीरता कम हो सकती है तथा उपचार अधिक प्रभावी बन सकता है। इसलिए केवल औषधि पर निर्भर रहने के बजाय आहार-विहार में भी आवश्यक सुधार करना चाहिए।


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी रोग के निदान, उपचार या औषधि सेवन के लिए योग्य आयुर्वेदाचार्य या चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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