मुंह के छाले (Mouth Ulcers) एक सामान्य लेकिन बहुत परेशान करने वाली समस्या है। जब जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों, गाल के अंदर या तालू पर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं तो उन्हें छाले कहा जाता है। ये छाले सफेद या लाल रंग के हो सकते हैं और कई बार गले तक भी फैल जाते हैं।
छाले होने पर खाने-पीने में बहुत दर्द और जलन होती है। कई बार तो पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा परेशान करती है क्योंकि इससे बुखार, लार गिरना और मुंह में सूजन भी हो सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार मुंह के छाले का मुख्य कारण पेट की खराबी, कब्ज, पाचन समस्या और शरीर की अधिक गर्मी होता है। सही आहार, घरेलू उपचार और आयुर्वेदिक उपायों से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।
इस लेख में हम मुंह के छालों के लक्षण, कारण, आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू नुस्खे विस्तार से जानेंगे।
मुंह के छाले होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।
जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों या गाल के अंदर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं।
छालों पर भोजन या पानी लगते ही तेज दर्द और जलन होने लगती है।
छाले सफेद या लाल रंग के दिखाई देते हैं।
कई बार पूरे मुंह में सूजन हो जाती है।
छोटे बच्चों में छाले होने पर लगातार लार गिरती रहती है।
कभी-कभी छालों के साथ हल्का बुखार भी हो सकता है।
मिर्च-मसालेदार या खट्टा भोजन खाने पर दर्द बहुत बढ़ जाता है।
मुंह के छाले कई कारणों से हो सकते हैं। आयुर्वेद में मुख्य कारण पेट की खराबी और शरीर की गर्मी को माना गया है।
छालों का सबसे बड़ा कारण कब्ज या अजीर्ण होता है। जब पेट साफ नहीं होता तो शरीर की गर्मी बढ़ जाती है जिससे मुंह में छाले बन जाते हैं।
ज्यादा मिर्च-मसालेदार भोजन, तला हुआ खाना और गरिष्ठ भोजन पेट में गर्मी बढ़ा देता है।
विशेष रूप से विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C की कमी से भी छाले हो सकते हैं।
बच्चों में बोतल से दूध पीने पर यदि बोतल साफ नहीं हो तो संक्रमण हो सकता है।
इसके अलावा Candida Albicans नामक फंगस से भी छाले हो सकते हैं जिसे थ्रश कहा जाता है।
दांतों में संक्रमण, मसूड़ों की बीमारी या पायरिया होने पर भी छाले बन सकते हैं।
कुछ दवाइयों जैसे
मर्करी
आर्सेनिक
बिस्मिथ
फेनाबार्बिटोन
फॉस्फोरस
का अधिक सेवन भी छालों का कारण बन सकता है।
निम्न चीजों के कारण भी छाले हो सकते हैं
अधिक मिर्च मसाले
गरिष्ठ भोजन
ज्यादा बाजरा
बिना चोकर वाले आटे का अधिक सेवन
आयुर्वेद में छालों का उपचार तीन प्रकार से किया जाता है
स्थानिक उपचार (Local treatment)
कब्ज दूर करना
शरीर की आंतरिक चिकित्सा
सबसे पहले साफ रूई से छालों को साफ करें।
फिर बोरो ग्लिसरीन या इरिमेदादि तेल लगाएं।
गुनगुने नमक पानी से दिन में 3-4 बार कुल्ला करें।
फिटकरी को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करने से छाले जल्दी ठीक होते हैं।
हल्के घोल से कुल्ला करने पर भी संक्रमण कम होता है।
सुहागा को तवे पर फुलाकर पीस लें।
एक चुटकी सुहागा शहद में मिलाकर दिन में 2-3 बार छालों पर लगाएं।
नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें।
अमरूद के पत्ते उबालकर उससे कुल्ला करने से दर्द और सूजन कम होती है।
मेथी को पानी में उबालकर उसमें 3-4 बूंद लहसुन का रस डालकर कुल्ला करें।
चमेली के पत्ते चबाने से छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं।
बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से छालों में आराम मिलता है।
गर्म पानी में नींबू निचोड़कर कुल्ला करने से मुंह साफ रहता है।
छालों का मुख्य कारण कब्ज होता है इसलिए कब्ज दूर करना जरूरी है।
आधा चम्मच एरण्डी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पीने से कब्ज दूर होती है।
गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना लाभदायक है।
रात में सोने से पहले 2-4 चम्मच ईसबगोल दूध के साथ लें।
रात को त्रिफला चूर्ण लेने से पेट साफ रहता है और छाले जल्दी ठीक होते हैं।
दिन में 3-4 बार 1-2 गोली चूसने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
सुबह-शाम 1-2 चम्मच गुलकंद खाने से शरीर की गर्मी कम होती है।
आंवला विटामिन C का अच्छा स्रोत है जो छालों को जल्दी ठीक करता है।
डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन भी लाभदायक है।
छाले होने पर हल्का और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।
खिचड़ी
दलिया
दही
हरी पत्तेदार सब्जियां
अंकुरित दालें
अंजीर
मुनक्का
पपीता
खीरा
तरबूज
ककड़ी
ये सभी पाचन सुधारते हैं और शरीर को ठंडक देते हैं।
छालों के दौरान कुछ चीजों से बचना चाहिए।
ज्यादा मिर्च मसाले
तला हुआ भोजन
गरिष्ठ भोजन
बहुत गर्म खाना
ज्यादा खट्टे पदार्थ
ये चीजें छालों की जलन और दर्द को बढ़ा सकती हैं।
यदि आप इन आदतों को अपनाते हैं तो छालों से बच सकते हैं।
कब्ज होने न दें।
दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं।
हरी सब्जियां और फल नियमित खाएं।
दिन में दो बार ब्रश करें।
विटामिन B और C युक्त आहार जरूर लें।
मुंह के छाले एक सामान्य समस्या है लेकिन यह बहुत दर्दनाक हो सकती है। अधिकतर मामलों में इसका कारण कब्ज, पेट की गर्मी, विटामिन की कमी और गलत खानपान होता है।
आयुर्वेद में इसके लिए कई प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं जैसे सुहागा-शहद, नीम के पत्ते, बबूल की छाल, त्रिफला और गुलकंद। साथ ही हल्का भोजन और सही जीवनशैली अपनाने से छालों से जल्दी राहत मिलती है।
यदि छाले बार-बार हो रहे हों या लंबे समय तक ठीक न हों तो किसी योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
At AyurvediyaUpchar, we bring you a carefully selected range of quality Masala & Spices and Natural Products for your everyday needs. From Haldi and Red Chilli Powder to Neem, Amla, Moringa and other natural powders, our products are selected with a focus on quality, convenience and everyday use. Explore our products and informative blog resources for simple ideas, traditional knowledge and a more natural lifestyle.
आयुर्वेदीय उपचार में हम आपके दैनिक उपयोग के लिए गुणवत्तापूर्ण मसाले, स्पाइसेज़ और प्राकृतिक उत्पादों की चुनिंदा रेंज उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। हल्दी और लाल मिर्च पाउडर से लेकर नीम, आंवला, मोरिंगा और अन्य प्राकृतिक पाउडर तक, हमारे उत्पादों का चयन गुणवत्ता, उपयोगिता और सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाता है। हमारे उत्पादों के साथ-साथ जानकारीपूर्ण ब्लॉग का भी आनंद लें, जहाँ आपको पारंपरिक ज्ञान, उपयोगी जानकारी और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़े विषय मिलेंगे।