मुख के छाले एक सामान्य किंतु अत्यंत कष्टदायक समस्या है, जिसमें मुंह, जीभ, होठों या गालों के अंदर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं। बोलने, खाने और निगलने में जलन व दर्द होने लगता है।
मुख्यतः दो कारण अधिक देखे जाते हैं—
1️⃣ कब्ज (Constipation) — पाचन विकृति व मल अवरोध के कारण शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे छाले बनते हैं।
2️⃣ विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की कमी — शरीर में पोषण की कमी से म्यूकोसा कमजोर हो जाता है और घाव बनने लगते हैं।
अन्य कारण — तनाव, मसालेदार भोजन, बार-बार गर्मी होना, पानी कम पीना, नींद की कमी, धूम्रपान, एंटीबायोटिक का अधिक उपयोग आदि।
कब्ज दूर होना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए—
✔ त्रिफला चूर्ण
रात में सोते समय गर्म पानी के साथ लें।
या
✔ अरंडी का तेल (Castor Oil)
1 कप गर्म दूध में 1 चम्मच मिलाकर सोते समय पिएँ।
इन उपायों से आमतौर पर कब्ज में राहत मिलती है और छाले जल्दी भरने लगते हैं।
✔ विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की गोली चिकित्सीय सलाह अनुसार लें।
यह शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत कर छाले भरने में सहायता करता है।
नीचे दिए मिश्रण को तैयार करें—
श्वेत चंदन — 50 ग्राम
मेहंदी के सूखे पत्ते — 50 ग्राम
शीतल चीनी — 50 ग्राम
असली कत्था — 50 ग्राम
चौपचीनी — 30 ग्राम
➡ सभी को खरल करके शीशी में भरकर रखें।
➡ खुराक — 4–4 रत्ती (लगभग 121.5 mg प्रति रत्ती)
➡ दिन में 3 बार, 8–8 घंटे के अंतराल पर, मधु (शहद) के साथ चाटें।
त्रिफला 25 ग्राम को 400 ml पानी में उबालें
पानी जब 100 ml रह जाए तो छान लें
उसमें फिटकरी पाउडर 4 रत्ती मिलाएँ
➡ दिन में 4–5 बार कुल्ला करें
➡ पीना नहीं है—मुंह में घूमाकर थूक दें
➡ कुल्ला के बाद 30 मिनट तक पानी न पिएँ
यह सूजन, जलन और जीवाणुओं को कम करता है।
देसी घी 50 ग्राम में कपूर 6 ग्राम डालकर गर्म करें
ठंडा होने पर स्वच्छ रुई से छालों पर दिन में 3–4 बार लगाएँ
आधा घंटा कुछ न खाएँ–पिएँ
आसानी से किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर उपलब्ध—
रुई की काड़ी बनाकर तेल में भिगोएँ
छाले वाले स्थान पर दिन में 2–3 बार लगाएँ
दिनभर पर्याप्त पानी पिएँ
अत्यधिक मसाले, खट्टे, गरम व तले भोजन से बचें
धूम्रपान, शराब, पान-मसाला न लें
तनाव कम करें, नींद पर्याप्त लें
मुंह की सफाई नियमित रखें
छाले 10–14 दिन में न भरें
बार-बार बार–बार हों
अत्यधिक दर्द, बुखार, रक्तस्राव हो
वजन कम हो रहा हो
बच्चे, गर्भवती, बुजुर्ग या गंभीर रोगी हों
- किसी भी दवाई या मात्रा का उपयोग योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही करें।
-मात्रा, समय व उपयुक्तता व्यक्ति-विशेष के अनुसार बदल सकती है।
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