मुख के छाले (Mouth Ulcers) — कारण, लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

Nov 22, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
मुख के छाले (Mouth Ulcers) — कारण, लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

मुख के छाले (Mouth Ulcers) — कारण, लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

मुख के छाले एक सामान्य किंतु अत्यंत कष्टदायक समस्या है, जिसमें मुंह, जीभ, होठों या गालों के अंदर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं। बोलने, खाने और निगलने में जलन व दर्द होने लगता है।


मुख के छाले होने के प्रमुख कारण

मुख्यतः दो कारण अधिक देखे जाते हैं—
1️⃣ कब्ज (Constipation) — पाचन विकृति व मल अवरोध के कारण शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे छाले बनते हैं।
2️⃣ विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की कमी — शरीर में पोषण की कमी से म्यूकोसा कमजोर हो जाता है और घाव बनने लगते हैं।

अन्य कारण — तनाव, मसालेदार भोजन, बार-बार गर्मी होना, पानी कम पीना, नींद की कमी, धूम्रपान, एंटीबायोटिक का अधिक उपयोग आदि।


पहला कदम — कब्ज का उपचार

कब्ज दूर होना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए—

त्रिफला चूर्ण
रात में सोते समय गर्म पानी के साथ लें।

या

अरंडी का तेल (Castor Oil)
1 कप गर्म दूध में 1 चम्मच मिलाकर सोते समय पिएँ।

इन उपायों से आमतौर पर कब्ज में राहत मिलती है और छाले जल्दी भरने लगते हैं।


दूसरा कदम — पोषण की पूर्ति

विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की गोली चिकित्सीय सलाह अनुसार लें।
यह शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत कर छाले भरने में सहायता करता है।


आयुर्वेदिक आंतरिक सेवन (लेप/चूर्ण)

नीचे दिए मिश्रण को तैयार करें—

  • श्वेत चंदन — 50 ग्राम

  • मेहंदी के सूखे पत्ते — 50 ग्राम

  • शीतल चीनी — 50 ग्राम

  • असली कत्था — 50 ग्राम

  • चौपचीनी — 30 ग्राम

➡ सभी को खरल करके शीशी में भरकर रखें।
खुराक — 4–4 रत्ती (लगभग 121.5 mg प्रति रत्ती)
➡ दिन में 3 बार, 8–8 घंटे के अंतराल पर, मधु (शहद) के साथ चाटें।


कुल्ला (Gargle) उपचार

  • त्रिफला 25 ग्राम को 400 ml पानी में उबालें

  • पानी जब 100 ml रह जाए तो छान लें

  • उसमें फिटकरी पाउडर 4 रत्ती मिलाएँ
    ➡ दिन में 4–5 बार कुल्ला करें
    ➡ पीना नहीं है—मुंह में घूमाकर थूक दें
    ➡ कुल्ला के बाद 30 मिनट तक पानी न पिएँ

यह सूजन, जलन और जीवाणुओं को कम करता है।


स्थानीय (टॉपिकल) उपचार

✔ देसी घी-कपूर लेप

  • देसी घी 50 ग्राम में कपूर 6 ग्राम डालकर गर्म करें

  • ठंडा होने पर स्वच्छ रुई से छालों पर दिन में 3–4 बार लगाएँ

  • आधा घंटा कुछ न खाएँ–पिएँ

✔ इरिमेदादी तेल

आसानी से किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर उपलब्ध—

  • रुई की काड़ी बनाकर तेल में भिगोएँ

  • छाले वाले स्थान पर दिन में 2–3 बार लगाएँ


सहायक उपाय

  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएँ

  • अत्यधिक मसाले, खट्टे, गरम व तले भोजन से बचें

  • धूम्रपान, शराब, पान-मसाला न लें

  • तनाव कम करें, नींद पर्याप्त लें

  • मुंह की सफाई नियमित रखें


कब डॉक्टर/वैद्य से संपर्क करें?

  • छाले 10–14 दिन में न भरें

  • बार-बार बार–बार हों

  • अत्यधिक दर्द, बुखार, रक्तस्राव हो

  • वजन कम हो रहा हो

  • बच्चे, गर्भवती, बुजुर्ग या गंभीर रोगी हों


महत्वपूर्ण सलाह (NOTE)

- किसी भी दवाई या मात्रा का उपयोग योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही करें।
 -मात्रा, समय व उपयुक्तता व्यक्ति-विशेष के अनुसार बदल सकती है।

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