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पैरों और चेहरे पर सूजन आना किस बीमारी का संकेत है? जानिए कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

Jun 01, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पैरों और चेहरे पर सूजन आना किस बीमारी का संकेत है? जानिए कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

पैरों और चेहरे पर सूजन आना किस बीमारी का संकेत है?

शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन आना सामान्य बात नहीं है। विशेष रूप से यदि आपके पैरों, टखनों, चेहरे या मुंह पर बार-बार सूजन आ रही है, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। बहुत से लोग इसे सामान्य थकान, अधिक नमक खाने या मौसम के प्रभाव के रूप में नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह किडनी, हृदय, लिवर या थायरॉइड जैसी बीमारियों की चेतावनी भी हो सकती है।

आयुर्वेद में इस स्थिति को मुख्य रूप से शोथ रोग (Edema) कहा गया है। शोथ का अर्थ है शरीर के ऊतकों में द्रव (Fluid) का असामान्य रूप से जमा हो जाना, जिसके कारण प्रभावित भाग में सूजन दिखाई देती है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि पैरों और चेहरे पर सूजन क्यों आती है, इसके प्रमुख कारण क्या हैं, कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं तथा आयुर्वेदिक और घरेलू उपायों द्वारा इससे कैसे राहत पाई जा सकती है।


सूजन क्या होती है?

जब शरीर के ऊतकों में आवश्यकता से अधिक तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तब उस भाग में सूजन दिखाई देती है। चिकित्सा भाषा में इसे एडेमा (Edema) कहा जाता है।

यह सूजन शरीर के किसी एक हिस्से में भी हो सकती है और पूरे शरीर में भी फैल सकती है। सामान्यतः यह समस्या निम्न भागों में अधिक दिखाई देती है—

  • पैर और टखने
  • चेहरे और आंखों के आसपास
  • हाथ और उंगलियां
  • पेट
  • शरीर का निचला भाग

पैरों और चेहरे पर सूजन आने के प्रमुख कारण

1. किडनी (गुर्दे) की बीमारी

गुर्दे शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं। जब किडनी सही प्रकार से काम नहीं करती, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है जिससे चेहरे और पैरों में सूजन आने लगती है।

लक्षण

  • सुबह उठते ही आंखों और चेहरे पर सूजन
  • पैरों और टखनों में सूजन
  • पेशाब कम या अधिक आना
  • कमजोरी और थकान
  • भूख कम लगना

यदि सूजन के साथ पेशाब में झाग दिखाई दे तो यह किडनी रोग का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।


2. हृदय (दिल) की कमजोरी

जब हृदय शरीर में रक्त को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, तो रक्त और तरल पदार्थ पैरों में जमा होने लगते हैं।

लक्षण

  • पैरों और टखनों में सूजन
  • सांस फूलना
  • सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी
  • जल्दी थक जाना
  • सीने में भारीपन

हृदय संबंधी रोगों में सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है।


3. लिवर (यकृत) की बीमारी

लिवर शरीर में प्रोटीन बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब लिवर प्रभावित होता है, तो शरीर में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की कमी हो जाती है और शरीर में पानी जमा होने लगता है।

लक्षण

  • पैरों में सूजन
  • पेट फूलना
  • त्वचा और आंखों का पीला पड़ना
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी

4. थायरॉइड की समस्या

थायरॉइड हार्मोन की कमी होने पर शरीर की चयापचय क्रिया धीमी हो जाती है जिससे चेहरे और शरीर में सूजन दिखाई दे सकती है।

लक्षण

  • चेहरे पर सूजन
  • वजन बढ़ना
  • सुस्ती
  • कब्ज
  • बाल झड़ना

5. एलर्जी

कुछ लोगों को भोजन, दवाइयों, धूल, परागकण या अन्य पदार्थों से एलर्जी हो सकती है।

लक्षण

  • चेहरे या होंठों पर अचानक सूजन
  • खुजली
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • आंखों में जलन

यदि सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।


6. शरीर में प्रोटीन की कमी

लंबे समय तक पर्याप्त प्रोटीन न मिलने पर शरीर में द्रव संतुलन बिगड़ सकता है और सूजन हो सकती है।

कारण

  • कुपोषण
  • अत्यधिक डाइटिंग
  • गंभीर बीमारी

7. अधिक नमक का सेवन

नमक में उपस्थित सोडियम शरीर में पानी रोकने का काम करता है।

लक्षण

  • सुबह चेहरे पर सूजन
  • पैरों में भारीपन
  • शरीर में फुलावट

8. लंबे समय तक बैठे या खड़े रहना

एक ही स्थिति में लंबे समय तक रहने से पैरों में रक्त संचार प्रभावित होता है।

उदाहरण

  • ऑफिस में घंटों बैठना
  • लगातार यात्रा करना
  • लंबे समय तक खड़े रहना

9. गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है।

सामान्य लक्षण

  • पैरों और टखनों में सूजन
  • हल्की हाथों की सूजन

लेकिन अत्यधिक सूजन होने पर चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।


10. कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव

कुछ दवाएं शरीर में पानी रोक सकती हैं।

जैसे

  • ब्लड प्रेशर की दवाएं
  • स्टेरॉयड
  • हार्मोनल दवाएं
  • दर्द निवारक दवाएं

आयुर्वेद के अनुसार सूजन का कारण

आयुर्वेद में इस रोग को शोथ कहा गया है।

आचार्यों के अनुसार—

  • वात दोष के बढ़ने से रक्त संचार प्रभावित होता है।
  • पित्त दोष बढ़ने पर सूजन के साथ जलन होती है।
  • कफ दोष बढ़ने पर भारीपन और पानी का संचय होता है।

जब तीनों दोष असंतुलित हो जाते हैं, तब पूरे शरीर में सूजन उत्पन्न हो सकती है।


सूजन के सामान्य लक्षण

  • पैरों का फूलना
  • चेहरे का फूला हुआ दिखाई देना
  • आंखों के नीचे सूजन
  • त्वचा पर दबाने से गड्ढा पड़ना
  • भारीपन महसूस होना
  • थकान
  • सांस फूलना
  • वजन बढ़ना

आयुर्वेदिक उपाय

1. पुनर्नवा

पुनर्नवा को आयुर्वेद में प्राकृतिक मूत्रवर्धक माना गया है।

लाभ

  • शरीर का अतिरिक्त पानी बाहर निकालने में सहायक
  • किडनी की कार्यक्षमता को समर्थन
  • सूजन कम करने में मदद

2. गोक्षुर

गोक्षुर मूत्र संबंधी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।

लाभ

  • जल संचय कम करने में सहायक
  • मूत्र मार्ग को स्वस्थ रखने में मदद

3. त्रिफला

त्रिफला शरीर की शुद्धि और पाचन सुधारने में सहायक मानी जाती है।

लाभ

  • कब्ज दूर करने में मदद
  • शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकालने में सहायक

4. अदरक

अदरक में सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं।

सेवन विधि

अदरक की चाय का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।


5. हल्दी

हल्दी में प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं।

लाभ

  • सूजन कम करने में मदद
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन

घरेलू उपाय

धनिया पानी

रातभर धनिया भिगोकर सुबह उसका पानी पीना लाभदायक माना जाता है।

गुनगुना पानी

दिनभर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीएं।

पैरों को ऊंचा रखें

सोते समय पैरों के नीचे तकिया रखें।

नमक कम करें

अधिक नमक से बचें।


क्या खाएं?

लाभकारी खाद्य पदार्थ

  • लौकी
  • परवल
  • खीरा
  • नारियल पानी
  • पपीता
  • सेब
  • अनार
  • मूंग दाल
  • हरी सब्जियां

क्या न खाएं?

  • अत्यधिक नमक
  • पैकेज्ड फूड
  • फास्ट फूड
  • तले हुए पदार्थ
  • कोल्ड ड्रिंक
  • अत्यधिक चीनी

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें—

  • सांस लेने में कठिनाई
  • छाती में दर्द
  • पेशाब बहुत कम होना
  • चेहरे, जीभ या गले में अचानक सूजन
  • तेजी से बढ़ती सूजन
  • अत्यधिक कमजोरी

निष्कर्ष

पैरों और चेहरे पर सूजन केवल एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह किडनी, हृदय, लिवर, थायरॉइड या अन्य गंभीर रोगों का संकेत भी हो सकती है। इसलिए बार-बार या लगातार सूजन आने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उचित जांच, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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