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प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन (Prostatitis): कारण, लक्षण, उपचार, आयुर्वेदिक दवाएँ व घरेलू उपाय

Nov 29, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन (Prostatitis): कारण, लक्षण, उपचार, आयुर्वेदिक दवाएँ व घरेलू उपाय

प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन जिसे प्रोस्टेटाइटिस कहा जाता है, पुरुषों में होने वाला एक सामान्य लेकिन अत्यंत कष्टदायक रोग है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है जो मूत्राशय के नीचे स्थित रहती है और वीर्य द्रव के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है तो पेशाब करने में दर्द, बार-बार पेशाब आना, कमजोर धार, जननांगों और गुदा क्षेत्र में दर्द जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। यह रोग मुख्यत: वृद्धावस्था में देखा जाता है लेकिन अनियमित आदतों और गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में 20% से 60% पुरुष इस रोग से प्रभावित पाए जाते हैं।

प्रोस्टेटाइटिस का मुख्य कारण प्रोस्टेट ग्रंथि में प्रदाह, संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन, चोट, कठोर वस्तु पर अधिक देर बैठना, यौन असंतुलन, कैथेटर का गलत उपयोग और बढ़ती उम्र है। 60 वर्ष के बाद लगभग 60% पुरुषों में प्रोस्टेट संबंधित समस्याएँ देखने को मिलती हैं। यह रोग प्रारंभ होने पर साधारण लक्षण दिखाता है लेकिन समय रहते उपचार न लेने पर गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है।


प्रोस्टेटाइटिस के प्रमुख कारण

• टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी के कारण प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने लगती है।
• स्त्रियों में एस्ट्रोजन की कमी से भी इसी प्रकार का प्रभाव देखा जाता है।
• चोट लगना और पेल्विक क्षेत्र पर दबाव पड़ना।
• घुड़सवारी या कठोर सीट पर लंबे समय तक बैठना।
• मूत्र मार्ग या आस-पास के अंगों का संक्रमण।
• कैथेटर या मेडिकल औजारों का अनियमित उपयोग।
• जीवाणु संक्रमण (Bacterial infection)।
• अत्यधिक कामुकता या लंबे समय तक वीर्य संचित रहना।
• 50 वर्ष के बाद प्रोस्टेट स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है।


प्रोस्टेटाइटिस के प्रमुख लक्षण

• बहुमूत्र – बार-बार पेशाब आना
• मूत्रकृच्छ – पेशाब करते समय दर्द और जलन
• मूत्रघात – पेशाब का रुक जाना
• कामशक्ति में कमी
• पेशाब के समय बहुत कठिनाई और दर्द
• धार का कमजोर होकर नीचे गिरना
• बार-बार रात में पेशाब के लिए उठना
• जननांग एवं गुदा के पास दर्द
• मलत्याग में दर्द
• पेशाब के साथ चिपचिपा स्राव
• बुखार व कंपकंपी
• अचानक पेशाब बंद हो जाना – यह आपात स्थिति होती है


प्रोस्टेटाइटिस की पहचान और जाँचें

• मूत्र त्यागने में कठिनाई
• पेशाब की धार कमजोर होना
• रात में कई बार उठना
• पेशाब के बाद मूत्राशय खाली न होने का एहसास
• अल्ट्रासाउंड (USG) से प्रोस्टेट की वृद्धि स्पष्ट दिखती है
• यूरोफ्लोमीट्री, सिस्टोस्कोपी, सिस्टोमीटरोग्राम जैसी जाँचें मूत्र प्रवाह और रुकावट को बताती हैं


रोग का परिणाम (जटिलताएँ)

• निचले पेट में लगातार दर्द
• पेशाब का पूर्ण रूप से रुक जाना – यह मेडिकल इमरजेंसी होती है
• पेशाब से पहले या बाद में रक्त आना
• गुर्दों (किडनी) पर नकारात्मक प्रभाव
• संक्रमण बढ़ने से रीनल फेल्योर का खतरा


चिकित्सा विधि (Modern + Ayurveda)

आधुनिक चिकित्सा में प्रोस्टेटाइटिस के लिए कोई पूर्ण रूप से कारगर दवा नहीं है। प्रारंभिक अवस्था में दर्दनाशक, एंटीबायोटिक और अल्फा-ब्लॉकर्स दिए जाते हैं लेकिन दीर्घकालिक अवस्था में सर्जरी ही अंतिम विकल्प बन जाता है।

आयुर्वेद में इस रोग का सफल इलाज पाया गया है। वात-पित्त शमन, मूत्रमार्ग की रुकावट दूर करना, सूजन कम करना और प्रोस्टेट को प्राकृतिक रूप से छोटा करना आयुर्वेद का मुख्य लक्ष्य है।


पथ्य–अपथ्य

क्या करें:
• ठंड से बचें
• पेशाब रोककर न रखें
• खूब पानी और जूस लें
• मूली, गाजर, टमाटर, हरी सब्जियाँ खाएँ
• कब्ज न होने दें

क्या न करें:
• अत्यधिक मिर्च-मसाले
• शराब
• मांस, मछली, अंडा
• तली-भुनी चीजें
• अचार, चटनी
• अधिक चाय–कॉफी


आयुर्वेदिक पेटेंट औषधियाँ (आपके दिए अनुसार)

• वरुण पाउडर – 125 mg सुबह-शाम
• हथेली के बीच अंगूठे से दबाव – दिन में कई बार
• कुलथी दाल भिगोकर उसका पानी
• फिटकरी – 1 ग्राम को 250 ml पानी में घोलकर दिन में 2–3 बार (7 दिन तक ही)
• लौकी जूस + 5 काली मिर्च + 7 तुलसी पत्ते – सुबह खाली पेट
• अदरक का रस
• पीली हरड़ – रात में भिगोकर सुबह चबाकर एक माह तक

आयुर्वेदिक संयोजन (बहुत प्रभावी):
• वंगशील वटी – 2 गोली
• सिस्टोन – 2 गोली
• पुनर्नवादि मण्डूर – 1 गोली
सुबह–शाम पानी से

शंख भस्म, यवक्षार, मूली क्षार, नौसादर, सज्जीछार – चंदनासव के साथ

कचनार गुग्गुल 60
गोक्षुरादि गुग्गुल 60
चंद्रप्रभा वटी 60
बंग भस्म 20 ग्राम
इनकी 60 पुड़िया बनाकर गिलोय क्वाथ के साथ सुबह–शाम लें
60 दिनों में अद्भुत आराम मिलता है।


निष्कर्ष

प्रोस्टेटाइटिस एक गंभीर लेकिन नियंत्रित होने वाली समस्या है। इसकी समय पर पहचान, सही आयुर्वेदिक उपचार, घरेलू नुस्खे, उचित आहार और जीवनशैली सुधार इस रोग को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं। पेशाब का अचानक बंद हो जाना, रक्त आना या तेज दर्द होने पर तुरंत चिकित्सा आवश्यक है। आयुर्वेद के बताए गए उपचार, औषधियाँ, पथ्य–अपथ्य और घरेलू उपाय प्रोस्टेट की सूजन को प्राकृतिक रूप से कम करने में अत्यंत प्रभावी हैं।

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