गेहूं का पौधा: अद्भुत स्वास्थ्य-रक्षक

Jul 02, 2026
प्राकृतिक चिकित्सा
गेहूं का पौधा: अद्भुत स्वास्थ्य-रक्षक

गेहूं विश्व के सबसे प्रमुख खाद्यान्नों में से एक है। यह ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन तथा खनिजों का अच्छा स्रोत माना जाता है। अंकुरित गेहूं (Sprouted Wheat) और गेहूं के कोमल पौधों (Wheatgrass) का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में किया जाता रहा है।

आयुर्वेद के अनुसार गेहूं शीतल, बलवर्धक, पुष्टिकारक, वात-पित्त शामक तथा शरीर को पोषण देने वाला माना गया है। नया गेहूं अपेक्षाकृत कफवर्धक माना जाता है, जबकि पुराना गेहूं इस दृष्टि से अधिक हितकारी बताया गया है।


गेहूं के अंकुर एवं पौधे के पोषक तत्व

अंकुरण के बाद गेहूं में कई पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। इसमें सामान्यतः निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं—

  • विटामिन B समूह
  • विटामिन C (अंकुरण के बाद बढ़ जाता है)
  • विटामिन E
  • फोलिक एसिड
  • जस्ता (Zinc)
  • आयरन
  • मैग्नीशियम
  • क्लोरोफिल

कुछ शोधों में गेहूं के पौधे (Wheatgrass) को क्लोरोफिल की अधिक मात्रा के कारण "ग्रीन ब्लड" भी कहा गया है।


आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार गेहूं—

  • बल एवं ऊर्जा बढ़ाने वाला
  • पुष्टिकारक
  • वीर्यवर्धक
  • वात एवं पित्त शामक
  • रुचिवर्धक
  • शरीर को पोषण देने वाला माना गया है।

गेहूं के पौधे का रस (Wheatgrass Juice)

पारंपरिक मान्यता के अनुसार गेहूं के कोमल पौधों का रस शरीर की प्राकृतिक शुद्धि प्रक्रिया में सहायक माना जाता है। कई लोग इसे स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में सेवन करते हैं।

ध्यान दें: यह दावा कि गेहूं का रस रक्त का निर्माण करता है, कैंसर ठीक करता है या किसी गंभीर रोग का निश्चित उपचार है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।


गेहूं का पौधा उगाने की विधि

  1. लगभग 10–12 गमलों या ट्रे में गोबर की खाद मिश्रित उपजाऊ मिट्टी भरें।
  2. पहले दिन पहले गमले में गेहूं के बीज बोएं।
  3. दूसरे दिन दूसरे गमले में बीज बो दें।
  4. इसी प्रकार प्रतिदिन एक-एक गमले में बीज बोते रहें।
  5. लगभग 7–10 दिनों में पौधे 6–8 इंच लंबे हो जाएंगे।
  6. इस अवस्था में पौधों को नीचे से काट लें।
  7. उसी गमले में पुनः बीज बो दें ताकि लगातार ताजे पौधे उपलब्ध होते रहें।

रस बनाने की विधि

  • ताजे कटे हुए पौधों को अच्छी तरह धो लें।
  • मिक्सर या सिलबट्टे पर बारीक पीस लें।
  • सूती कपड़े से छानकर रस निकालें।
  • रस निकालने के तुरंत बाद धीरे-धीरे पी लें।
  • बचा हुआ रेशा (पल्प) इच्छानुसार उपयोग किया जा सकता है।

सेवन की मात्रा

सामान्यतः 25–50 मिलीलीटर ताजा गेहूं के पौधे का रस सुबह एवं शाम लिया जाता है।

यदि पहली बार सेवन कर रहे हों तो कम मात्रा (10–15 मिलीलीटर) से शुरुआत करना उचित माना जाता है।


सेवन के समय सावधानियां

  • रस हमेशा ताजा बनाकर ही पिएं।
  • रस निकालने के बाद अधिक देर तक न रखें।
  • सेवन से लगभग 30 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं।
  • यदि किसी प्रकार की एलर्जी, पेट खराब या असुविधा हो तो सेवन बंद करें और चिकित्सक से सलाह लें।
  • गर्भवती महिलाएं, गंभीर रोगी तथा दवा ले रहे व्यक्ति चिकित्सकीय सलाह के बाद ही सेवन करें।

पारंपरिक रूप से बताए गए उपयोग

1. रक्ताल्पता (एनीमिया)

पारंपरिक मान्यता के अनुसार गेहूं के पौधे का रस रक्त निर्माण में सहायक माना जाता है। हालांकि एनीमिया के उपचार के लिए चिकित्सकीय जांच एवं उचित उपचार आवश्यक है।


2. त्वचा संबंधी समस्याएं

अंकुरित गेहूं में पाया जाने वाला जस्ता (Zinc) त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है।


3. आंखों का स्वास्थ्य एवं सिरदर्द

कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नियमित सेवन आंखों के स्वास्थ्य और सामान्य सिरदर्द में सहायक माना जाता है।


4. दांत एवं हड्डियां

अंकुरित गेहूं में विटामिन एवं खनिज पाए जाते हैं जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर हड्डियों एवं दांतों के स्वास्थ्य में योगदान दे सकते हैं।


5. कब्ज

भुने हुए गेहूं तथा साबुत अनाज में पर्याप्त फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या कम करने में सहायक हो सकता है।


6. कुपोषण

छोटे बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार गेहूं का दलिया, सूप अथवा अन्य पौष्टिक आहार देना लाभकारी माना जाता है।


7. समग्र स्वास्थ्य

अंकुरित गेहूं, दलिया तथा संतुलित आहार का नियमित सेवन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने में सहायक हो सकता है।


महत्वपूर्ण सूचना

निम्न रोगों के संबंध में पारंपरिक साहित्य में गेहूं के पौधे का उल्लेख मिलता है—

  • रक्त कैंसर
  • गुर्दे एवं मूत्राशय संबंधी समस्याएं
  • पथरी
  • पेट के कीड़े

लेकिन इन रोगों के उपचार हेतु गेहूं के पौधे के रस की प्रभावशीलता के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इन स्थितियों में योग्य चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार ही प्राथमिक विकल्प होना चाहिए।


निष्कर्ष

गेहूं का पौधा (Wheatgrass) पोषक तत्वों से भरपूर प्राकृतिक खाद्य पदार्थ माना जाता है। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सीमित एवं उचित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि इसे किसी भी गंभीर बीमारी का निश्चित उपचार मानना उचित नहीं है। यदि आप किसी रोग से पीड़ित हैं, तो किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

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