एक घातक रोग: कामला (पीलिया) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

Mar 15, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
एक घातक रोग: कामला (पीलिया) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

आज के समय में कामला (पीलिया) एक ऐसा रोग है जो नवजात शिशु से लेकर वृद्ध व्यक्ति तक किसी को भी हो सकता है। आयुर्वेद में इसे कामला रोग, यूनानी चिकित्सा में यरकान अस्फर, अंग्रेज़ी में Jaundice, और वैज्ञानिक भाषा में Icterus कहा जाता है।

यह रोग मुख्य रूप से यकृत (लिवर) और पित्त प्रणाली से जुड़ा होता है। जब शरीर में पित्त का संतुलन बिगड़ जाता है या पित्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, तब पित्त रक्त में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाता है और शरीर के कई अंग पीले दिखाई देने लगते हैं।


कामला (पीलिया) क्या है?

कामला रोग में शरीर के कई भाग पीले हो जाते हैं जैसे:

  • आंखों की पुतली

  • त्वचा

  • नाखून

  • मूत्र

  • मल

इसका मुख्य कारण लिवर की खराब कार्यप्रणाली या पित्त नलिका में रुकावट होता है।

आयुर्वेद के अनुसार पित्त का असंतुलन होने से यह रोग उत्पन्न होता है।


शरीर में कामला रोग कैसे होता है?

यकृत (लिवर) शरीर में लगातार पित्त (Bile) का निर्माण करता है। यह पित्त भोजन के पाचन में मदद करता है और छोटी आंत (ड्यूडोनम) में पहुंचकर भोजन को पचाने का कार्य करता है।

लेकिन जब:

  • पित्त नलिका में रुकावट आ जाती है

  • लिवर ठीक से कार्य नहीं करता

  • पित्त का प्रवाह रुक जाता है

तो पित्त रक्त में मिल जाता है।

इसके बाद यह रक्त के साथ पूरे शरीर में फैल जाता है जिससे शरीर में पीलेपन के लक्षण दिखाई देने लगते हैं


आयुर्वेद में कामला रोग के प्रकार

आयुर्वेद में कामला के कई प्रकार बताए गए हैं:

1. कोष्ठाश्रित कामला

यह पाचन तंत्र से जुड़ा होता है।

लक्षण:

  • आंखों में पीलापन

  • त्वचा पीली होना

  • मूत्र पीला होना

  • कमजोरी

  • भूख कम लगना

  • अपचन


2. शाखाश्रित कामला

इसमें पित्त नलिकाओं का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।

लक्षण:

  • हल्दी जैसे पीली त्वचा

  • सफेद मल

  • कब्ज

  • पेट में भारीपन

  • भूख कम होना

  • छाती में दर्द


3. कुंभ कामला

यह कामला का गंभीर रूप है।

लक्षण:

  • शरीर में सूजन

  • त्वचा फट जाना

  • उल्टी

  • दस्त

  • अत्यधिक कमजोरी

  • सांस फूलना


4. हलीमक कामला

यह कामला की अंतिम अवस्था मानी जाती है।

लक्षण:

  • शरीर का रंग हरा या नीला होना

  • तेज कमजोरी

  • भूख समाप्त

  • शरीर दर्द

  • चक्कर


कामला रोग के प्रमुख लक्षण

यदि शरीर में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करवानी चाहिए:

  • आंखों और त्वचा में पीलापन

  • मूत्र का गहरा पीला होना

  • भूख कम लगना

  • थकान और कमजोरी

  • उल्टी और मतली

  • पेट में दर्द

  • खुजली


आधुनिक चिकित्सा के अनुसार पीलिया के प्रकार

आधुनिक चिकित्सा में कामला के कई प्रकार बताए गए हैं:

  1. अवरोधात्मक पीलिया

  2. विषाणुजन्य पीलिया

  3. रक्तविनाशक पीलिया

  4. नवजात पीलिया

  5. संक्रामक पीलिया

  6. कुंभ कामला

इनमें हेपेटाइटिस और लिवर कैंसर में भी पीलिया के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।


आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में कामला रोग के उपचार के लिए कई औषधियों का उल्लेख मिलता है।

कुछ प्रमुख औषधियां:

  • मंडूर भस्म

  • पुनर्नवा मंडूर

  • चंद्रकला रस

  • ताप्यादि लौह

  • स्वर्णमाक्षिक भस्म

  • पर्पटारिष्ट

  • कुमार्यासव

इनका सेवन केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।


कामला रोग में क्या खाना चाहिए (पथ्य)

पीलिया के रोगी को हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए।

उपयुक्त आहार:

  • मूंग दाल

  • पुराना चावल

  • जौ

  • पपीता

  • अंगूर

  • नारंगी

  • लौकी

  • करेला

  • परवल

  • गाजर

सुबह नाश्ते में पपीता विशेष लाभदायक माना जाता है।


किन चीजों से परहेज करना चाहिए

पीलिया के रोगी को इन चीजों से बचना चाहिए:

  • तला हुआ भोजन

  • ज्यादा नमक

  • लाल मिर्च

  • गरम मसाले

  • शराब

  • चाय और कॉफी

  • मांस और अंडे

  • अधिक परिश्रम


पाचन और लिवर स्वास्थ्य के लिए जरूरी जानकारी

लिवर से जुड़े रोगों में पाचन शक्ति का कमजोर होना भी आम समस्या है।
ऐसी स्थिति में पाचन तंत्र को मजबूत रखना बेहद जरूरी है।

आप यह लेख भी पढ़ सकते हैं:

मुंह के छाले: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार


शरीर दर्द और कमजोरी में उपयोगी जानकारी

पीलिया के दौरान शरीर में दर्द और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
ऐसी स्थिति में यह लेख आपके लिए उपयोगी हो सकता है:

पीठ दर्द को तुरंत ठीक करने के आसान उपाय (आयुर्वेदिक और घरेलू तरीके)


पीलिया से बचाव कैसे करें

कुछ सावधानियां अपनाकर पीलिया से बचा जा सकता है:

  • स्वच्छ पानी पिएं

  • दूषित भोजन से बचें

  • शराब से दूरी रखें

  • नियमित व्यायाम करें

  • लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली दवाइयों से बचें


निष्कर्ष

कामला (पीलिया) एक गंभीर रोग हो सकता है, लेकिन यदि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए और सही उपचार लिया जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

आयुर्वेद में पथ्य-अपथ्य और प्राकृतिक उपचार के माध्यम से लिवर को मजबूत बनाकर इस रोग से बचाव किया जा सकता है।

स्वस्थ जीवन के लिए नियंत्रित आहार और संतुलित जीवनशैली बेहद आवश्यक है।

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