विषम ज्वर (मलेरिया): कारण, प्रकार और संक्रमण की पूरी जानकारी

Jun 28, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
विषम ज्वर (मलेरिया): कारण, प्रकार और संक्रमण की पूरी जानकारी

विषम ज्वर (मलेरिया) क्या है?

आयुर्वेद में विषम ज्वर ऐसे बुखार को कहा गया है, जो अनियमित समय पर आता है और जिसमें कभी तेज तो कभी हल्का बुखार होता है। कई बार रोगी को पहले तेज ठंड लगती है, फिर शरीर गर्म हो जाता है और अंत में अधिक पसीना आने के बाद बुखार उतर जाता है।

माधव निदान के अनुसार, जब ज्वर पूरी तरह ठीक नहीं होता या ज्वर के बाद शरीर में बचा हुआ दोष गलत खान-पान और दिनचर्या के कारण दोबारा बढ़ जाता है, तब वह रस, रक्त आदि धातुओं को प्रभावित करके विषम ज्वर उत्पन्न करता है।

आयुर्वेद में इसे दोषों के असंतुलन से उत्पन्न रोग माना गया है, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मलेरिया को Plasmodium परजीवी से होने वाला संक्रामक रोग बताया गया है।


विषम ज्वर और मलेरिया क्या एक ही हैं?

कई विद्वान विषम ज्वर को मलेरिया के समान मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार दोनों पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।

आचार्य डल्हण के अनुसार विषम ज्वर केवल दोषों के कारण ही नहीं, बल्कि बाहरी कारणों (आगंतुज), जैसे सूक्ष्म जीवों के संक्रमण से भी हो सकता है।

इसी कारण आज के समय में मलेरिया को विषम ज्वर का एक प्रमुख रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें भी बुखार निश्चित अंतराल पर आता-जाता है।


विषम ज्वर क्यों कहा जाता है?

इस रोग में बुखार का समय और तीव्रता समान नहीं रहती।

  • कभी बुखार निश्चित समय से पहले आता है।
  • कभी देर से आता है।
  • कभी तेज ठंड लगती है।
  • कभी शरीर में अधिक गर्मी महसूस होती है।
  • कभी बुखार कुछ घंटों में उतर जाता है, तो कभी लंबे समय तक बना रहता है।

इसी अनियमित प्रकृति के कारण इसे विषम ज्वर कहा गया है।


विषम ज्वर (मलेरिया) के प्रकार

आयुर्वेद में बुखार आने के समय के आधार पर विषम ज्वर को पाँच प्रकारों में विभाजित किया गया है।

1. संतत ज्वर

इस प्रकार का बुखार लगातार 6, 10 या 12 दिनों तक बना रहता है और आसानी से नहीं उतरता।


2. सतत ज्वर

इसमें रोगी को 24 घंटे में दो बार बुखार आता है।


3. अन्येधुष्क ज्वर

इस प्रकार का ज्वर हर 24 घंटे में एक बार आता है। इसे आधुनिक चिकित्सा में Quotidian Fever के समान माना जाता है।


4. तृतीयक ज्वर

इसमें एक दिन बुखार आता है और अगले दिन नहीं आता। फिर तीसरे दिन दोबारा बुखार होता है।

यह पैटर्न अक्सर Plasmodium vivax संक्रमण में देखा जाता है।


5. चतुर्थक ज्वर

इस प्रकार में दो दिन तक बुखार नहीं आता और चौथे दिन फिर तेज बुखार होता है।

यह स्थिति सामान्यतः Plasmodium malariae संक्रमण से जुड़ी मानी जाती है।


मलेरिया कैसे फैलता है?

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है।

जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त चूसता है, तो मलेरिया के परजीवी उसके शरीर में चले जाते हैं। बाद में यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी उसके रक्त में प्रवेश कर जाते हैं।

संक्रमण के लगभग 10 से 20 दिन बाद रोग के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।


बरसात में मलेरिया क्यों बढ़ जाता है?

बरसात के मौसम में गड्ढों, नालियों, तालाबों और अन्य स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। ऐसे स्थान मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल होते हैं।

इसी कारण वर्षा ऋतु और उसके बाद मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

मच्छरों की संख्या कम करने के लिए जलभराव रोकना, सफाई रखना और आवश्यक होने पर मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव करना प्रभावी उपाय माना जाता है।


मलेरिया किन लोगों को अधिक प्रभावित करता है?

मलेरिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन निम्न लोगों में इसका खतरा अधिक होता है—

  • छोटे बच्चे
  • गर्भवती महिलाएँ
  • बुजुर्ग
  • कमज़ोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोग
  • मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्ति

    मलेरिया (विषम ज्वर) के लक्षण, रोग की प्रक्रिया और पहचान

    पिछले भाग में आपने जाना कि विषम ज्वर (मलेरिया) क्या है, यह कैसे फैलता है और इसके कितने प्रकार होते हैं। अब जानते हैं कि मलेरिया के लक्षण कैसे शुरू होते हैं, बुखार किन चरणों में आता है और शरीर में यह रोग किस प्रकार विकसित होता है।


    मलेरिया के शुरुआती लक्षण

    संक्रमित मच्छर के काटने के बाद मलेरिया के लक्षण आमतौर पर 10 से 20 दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में सामान्य वायरल बुखार जैसे लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे पहचान नहीं पाते।

    मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं—

    • अचानक ठंड लगना और कंपकंपी होना।
    • तेज बुखार आना।
    • सिरदर्द।
    • पूरे शरीर और जोड़ों में दर्द।
    • कमजोरी और थकान।
    • मुंह का स्वाद बदल जाना।
    • भूख कम लगना।
    • मतली या उल्टी होना।
    • अधिक प्यास लगना।

    आयुर्वेद में विषम ज्वर की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई गई है कि बुखार निश्चित अंतराल पर बार-बार आता है।


    मलेरिया के तीन प्रमुख चरण

    मलेरिया का एक सामान्य दौरा (Fever Attack) प्रायः तीन चरणों में पूरा होता है।

    1. शीतावस्था (Cold Stage)

    यह मलेरिया का पहला चरण होता है।

    इस अवस्था में रोगी को अचानक तेज ठंड लगती है। शरीर कांपने लगता है और कई बार कई कंबल ओढ़ने के बाद भी ठंड कम नहीं होती।

    इस दौरान निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

    • तेज कंपकंपी
    • सिरदर्द
    • शरीर में दर्द
    • हाथ-पैर ठंडे पड़ना
    • बेचैनी
    • कमजोरी

    यह अवस्था सामान्यतः 15 मिनट से 2 घंटे तक रह सकती है।


    ठंड क्यों लगती है?

    जब मलेरिया परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के अंदर बढ़ते हैं और उन्हें तोड़कर बाहर निकलते हैं, तब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया करती है। इसी कारण रोगी को तेज ठंड और कंपकंपी महसूस होती है।


    2. ज्वरावस्था (Hot Stage)

    ठंड समाप्त होने के बाद शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है।

    इस अवस्था में रोगी को—

    • तेज बुखार
    • पूरे शरीर में जलन
    • चेहरा लाल होना
    • अत्यधिक प्यास
    • बेचैनी
    • सिरदर्द
    • उल्टी या मतली

    जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

    यह अवस्था लगभग 1 से 5 घंटे तक रह सकती है।


    3. स्वेदावस्था (Sweating Stage)

    कुछ समय बाद रोगी को अत्यधिक पसीना आने लगता है।

    पसीना आने के साथ—

    • शरीर का तापमान कम होने लगता है।
    • बुखार उतर जाता है।
    • शरीर हल्का महसूस होता है।
    • रोगी को राहत मिलने लगती है।

    हालांकि बुखार उतरने के बाद भी कमजोरी कई दिनों तक बनी रह सकती है।


    मलेरिया में बुखार बार-बार क्यों आता है?

    मलेरिया के परजीवी शरीर में एक निश्चित समय के बाद लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ते हैं।

    हर बार जब संक्रमित रक्त कोशिकाएं टूटती हैं, तब बड़ी संख्या में नए परजीवी रक्त में फैलते हैं। इसी समय रोगी को दोबारा ठंड, कंपकंपी और तेज बुखार आता है।

    यही कारण है कि मलेरिया में बुखार नियमित अंतराल पर आता-जाता रहता है।


    मलेरिया पैदा करने वाले प्रमुख परजीवी

    आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मलेरिया मुख्य रूप से Plasmodium नामक परजीवी के कारण होता है।

    इनकी प्रमुख प्रजातियां हैं—

    1. Plasmodium vivax

    भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला प्रकार। इसमें बुखार आमतौर पर हर तीसरे दिन आता है।

    2. Plasmodium falciparum

    यह सबसे गंभीर प्रकार माना जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह मस्तिष्क, किडनी और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है।

    3. Plasmodium malariae

    इसमें बुखार लगभग चौथे दिन आने का पैटर्न देखा जाता है।

    4. Plasmodium ovale

    यह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है, लेकिन इसके लक्षण भी मलेरिया जैसे ही होते हैं।


    मलेरिया का जीवन चक्र (सरल भाषा में)

    मलेरिया का परजीवी अपना जीवन चक्र दो स्थानों पर पूरा करता है—

    1. मनुष्य के शरीर में

    जब संक्रमित मच्छर काटता है, तो परजीवी पहले यकृत (Liver) में पहुंचते हैं।

    कुछ समय बाद वे वहां बढ़कर रक्त में प्रवेश करते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं।

    रक्त कोशिकाएं टूटने पर नए परजीवी बाहर निकलते हैं और यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है।


    2. मच्छर के शरीर में

    जब कोई मादा एनोफिलीज मच्छर मलेरिया से संक्रमित व्यक्ति का रक्त चूसता है, तो परजीवी उसके शरीर में पहुंच जाते हैं।

    मच्छर के शरीर में ये परजीवी विकसित होकर फिर किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

    इसी कारण मच्छर मलेरिया के प्रसार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।


    मलेरिया की पहचान कैसे करें?

    यदि किसी व्यक्ति को निम्न लक्षण दिखाई दें, तो मलेरिया की जांच करानी चाहिए—

    • बार-बार तेज बुखार आना।
    • ठंड और कंपकंपी के बाद पसीना आना।
    • सिरदर्द और शरीर दर्द।
    • उल्टी या मतली।
    • अत्यधिक कमजोरी।
    • प्लीहा (Spleen) का बढ़ जाना।
    • कुछ मरीजों में लिवर बढ़ना।
    • आंखों या त्वचा में पीलापन।
    • गहरे रंग का मूत्र।

    मलेरिया की जांच

    डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार निम्न जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—

    • Peripheral Blood Smear
    • Rapid Malaria Antigen Test
    • Complete Blood Count (CBC)

    रक्त जांच से यह पता लगाया जाता है कि मलेरिया का संक्रमण किस प्रकार का है और उपचार किस प्रकार किया जाए।


    कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

    यदि तेज बुखार के साथ निम्न लक्षण हों, तो तुरंत अस्पताल जाएं—

    • बेहोशी
    • बार-बार उल्टी
    • सांस लेने में कठिनाई
    • दौरे पड़ना
    • अत्यधिक कमजोरी
    • गर्भवती महिला में तेज बुखार
    • छोटे बच्चे में लगातार बुखार

    ऐसी स्थिति गंभीर मलेरिया का संकेत हो सकती है और तत्काल उपचार आवश्यक होता है।

    मलेरिया (विषम ज्वर) का उपचार, आयुर्वेदिक चिकित्सा, पथ्य-अपथ्य और बचाव

    मलेरिया एक गंभीर संक्रामक रोग है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए तेज बुखार, ठंड और कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है।


    मलेरिया का आधुनिक उपचार

    आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मलेरिया का उपचार रक्त जांच में पाए गए Plasmodium परजीवी के प्रकार और रोग की गंभीरता के अनुसार किया जाता है।

    डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार एंटी-मलेरियल दवाएं देते हैं। उपचार के दौरान मरीज को दवा का पूरा कोर्स पूरा करना चाहिए, ताकि संक्रमण पूरी तरह समाप्त हो सके।

    यदि रोगी को लगातार तेज बुखार, बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, दौरे या बार-बार उल्टी हो रही हो, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।


    आयुर्वेद में विषम ज्वर की चिकित्सा

    आयुर्वेद में विषम ज्वर की चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य दोषों का संतुलन करना, ज्वर को शांत करना, पाचन शक्ति में सुधार करना तथा रोगी की शारीरिक शक्ति को बढ़ाना माना गया है।

    आयुर्वेदिक ग्रंथों में निम्न औषधियों का उल्लेख मिलता है—

    • गुडूच्यादि क्वाथ – पिप्पली चूर्ण के साथ चिकित्सकीय सलाह अनुसार।
    • सुदर्शन चूर्ण – विषम ज्वर में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
    • निम्बादि चूर्ण – चिकित्सक की सलाह से।
    • गोदंती भस्म – उचित मात्रा में चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार।
    • रोगी की स्थिति के अनुसार अमृतारिष्ट, कुमारी आसव, द्राक्षासव, संजीवनी वटी, आरोग्यवर्धिनी वटी, हिंग्वाष्टक चूर्ण तथा लवण भास्कर चूर्ण आदि का भी प्रयोग आयुर्वेदाचार्य की सलाह से किया जा सकता है।

    महत्वपूर्ण: उपरोक्त सभी आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन केवल योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से ही करें। स्वयं दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।


    सिद्ध एवं पारंपरिक योग

    आपके मूल संदर्भ में निम्न योगों का उल्लेख किया गया है—

    • फेविकान टेबलेट
    • वेदांतक टेबलेट
    • लिवो सिरप
    • हाजमा पाचक चूर्ण
    • दर्द होने पर पेनकिल ऑयल से मालिश

    इनका उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।


    मलेरिया में क्या खाएं? (पथ्य)

    मलेरिया के दौरान ऐसा भोजन करें जो हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक हो।

    सेवन योग्य आहार

    • गेहूं और जौ की रोटी
    • मूंग या अरहर की दाल
    • मूंग दाल की खिचड़ी
    • लौकी
    • परवल
    • चौलाई
    • मेथी
    • तरोई
    • कद्दू
    • पपीता
    • सेब
    • अनार
    • चीकू
    • पर्याप्त मात्रा में पानी
    • नारियल पानी (यदि डॉक्टर ने मना न किया हो)

    बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त आराम करें।


    क्या नहीं खाना चाहिए? (अपथ्य)

    मलेरिया के दौरान इन चीजों से बचना चाहिए—

    • तला-भुना भोजन
    • अत्यधिक तेल और मसाले
    • बासी भोजन
    • बहुत भारी भोजन
    • अधिक खटाई
    • अचार
    • जंक फूड
    • शराब और धूम्रपान

    यदि किसी विशेष बीमारी (जैसे डायबिटीज या किडनी रोग) के कारण डॉक्टर ने अलग डाइट बताई है, तो उसी का पालन करें।


    मलेरिया से बचाव कैसे करें?

    मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों से सुरक्षा है।

    बचाव के प्रमुख उपाय

    • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
    • कूलर, गमले और टंकियों का पानी नियमित बदलें।
    • मच्छरदानी का उपयोग करें।
    • शाम के समय पूरे बाजू के कपड़े पहनें।
    • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
    • खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं।
    • तेज बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं।

    कब अस्पताल जाना जरूरी है?

    यदि निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत अस्पताल जाएं—

    • लगातार 103°F या उससे अधिक बुखार
    • बेहोशी
    • दौरे पड़ना
    • बार-बार उल्टी
    • सांस लेने में तकलीफ
    • अत्यधिक कमजोरी
    • गर्भवती महिला में मलेरिया
    • छोटे बच्चे या बुजुर्ग में तेज बुखार

    निष्कर्ष

    आयुर्वेद में विषम ज्वर का विस्तृत वर्णन मिलता है, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मलेरिया को Plasmodium परजीवी से होने वाला संक्रामक रोग मानता है। दोनों ही दृष्टिकोण इस बात पर सहमत हैं कि समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद आवश्यक है।

    यदि बुखार के साथ ठंड, कंपकंपी और पसीना आने का क्रम बार-बार दिखाई दे, तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से मलेरिया का सफल उपचार संभव है।


    महत्वपूर्ण सूचना

    यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को तेज बुखार, ठंड, कंपकंपी या मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन भी योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही करें।

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