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पथ्य-अपथ्य: आयुर्वेद के अनुसार किस रोग में क्या खाएं और क्या नहीं?

पथ्य-अपथ्य: आयुर्वेद के अनुसार किस रोग में क्या खाएं और क्या नहीं?

आयुर्वेद केवल रोग होने पर दवा लेने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण विज्ञान प्रणाली है। आयुर्वेदाचार्यों ने स्पष्ट कहा है कि यदि रोगी उचित पथ्य (हितकारी आहार-विहार) का पालन करता है तो औषधि कम मात्रा में भी लाभ देती है, जबकि अपथ्य (अहितकारी आहार-विहार) करने पर श्रेष्ठ औषधि भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाती।

Jun 21, 2026
आरोग्य साधन
मानव शरीर का अति महत्वपूर्ण अंग – मस्तिष्क

मानव शरीर का अति महत्वपूर्ण अंग – मस्तिष्क

मानव मस्तिष्क प्रकृति की सबसे अद्भुत और रहस्यमयी रचनाओं में से एक है। इसकी जटिल संरचना और असाधारण कार्यक्षमता ही मनुष्य को अन्य जीवों से अलग बनाती है। संसार के सभी आश्चर्यों की तुलना में मानव मस्तिष्क कहीं अधिक विलक्षण है। यही शरीर रूपी साम्राज्य का सर्वोच्च नियंत्रक है, जो प्रत्येक क्षण शरीर के सभी अंगों और प्रणालियों का संचालन करता है। मस्तिष्क अस्थियों से निर्मित कपाल (Skull) के भीतर सुरक्षित रहता है। शरीर की सभी ऐच्छिक (Voluntary) तथा अनैच्छिक (Involuntary) क्रियाओं का नियंत्रण इसी के हाथ में होता है। शरीर के प्रत्येक भाग से आने वाली सूचनाएँ तंत्रिकाओं (Nerves) के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचती हैं और फिर मस्तिष्क आवश्यक निर्देश देकर शरीर को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। भगवान श्रीकृष्ण ने शरीर को एक वृक्ष की उपमा दी है, जिसका मूल मस्तिष्क है और शरीर के अंग-प्रत्यंग उसकी शाखाएँ हैं।

Jun 12, 2026
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पंचगव्य से रोग निवारण

पंचगव्य से रोग निवारण

गोमूत्र, गोबर, दूध, दही तथा घी के एक निश्चित अनुपात के मिश्रण को पंचगव्य कहा जाता है। इसके सेवन से तन, मन तथा बुद्धि के विकार दूर होते हैं। आयु, बल और तेज की वृद्धि होती है तथा सात्विक भावों का विकास होता है।

Jun 11, 2026
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अक्षितर्पण : आंखों की अनोखी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति

अक्षितर्पण : आंखों की अनोखी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति

अक्षितर्पण आयुर्वेद की एक अत्यंत प्रभावशाली नेत्र चिकित्सा पद्धति है, जो पंचकर्म उपचारों के अंतर्गत आती है। यह आंखों की सुरक्षा, पोषण और दृष्टि सुधार के लिए उपयोग की जाती है। आयुर्वेद में माना गया है कि उचित विधि से किया गया अक्षितर्पण आंखों को नई ऊर्जा प्रदान करता है और कई नेत्र रोगों में लाभकारी सिद्ध होता है।

May 21, 2026
आरोग्य साधन
महिलाओं में कमर दर्द — एक बढ़ती हुई आम समस्या

महिलाओं में कमर दर्द — एक बढ़ती हुई आम समस्या

आज के समय में महिलाओं में कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले यह समस्या केवल अधिक उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवा लड़कियां, गृहिणियां, ऑफिस में काम करने वाली महिलाएं और यहां तक कि किशोरियां भी इससे प्रभावित हो रही हैं। कई महिलाएं इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि लगातार रहने वाला कमर दर्द शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। महिलाओं का शरीर पुरुषों की तुलना में अधिक हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। मासिक धर्म, गर्भावस्था, प्रसव, रजोनिवृत्ति (Menopause), कैल्शियम की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों का अधिक बोझ कमर दर्द को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।

May 19, 2026
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दर्द बीमारियों का आईना है

दर्द बीमारियों का आईना है

दर्द कोई रोग नहीं है, बल्कि यह रोगों का एक महत्वपूर्ण लक्षण है। दर्द शरीर में उत्पन्न किसी गड़बड़ी या बीमारी का संकेत देता है। डॉक्टर भी अक्सर दर्द के आधार पर ही रोग का अनुमान लगाते हैं। यही कारण है कि दर्द को “बीमारियों का आईना” कहा जाता है। दर्द के अनेक रूप होते हैं और जितने रोग होते हैं, लगभग उतने ही प्रकार के दर्द भी देखने को मिलते हैं।

May 18, 2026
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वृद्धावस्था के रोग : बचाव एवं उपचार

वृद्धावस्था के रोग : बचाव एवं उपचार

वृद्धावस्था जन्म-मृत्यु क्रम की एक अवस्था है। जिसने जन्म लिया उसका अन्त तो निश्चित ही है। चूंकि मनुष्य भी अमर नहीं है, लेकिन उसे आयुपर्यन्त स्वस्थ रहने की कला अवश्य जाननी चाहिये। वृद्धावस्था विषय पर शीघ्र ही चिकित्सा विज्ञान ने एक जेरियंट्रोलॉजी पाठ्यक्रम भी प्रारम्भ कर दिया है। कारण, आज विश्व में लगभग 58 करोड़ वृद्ध आयु के मानव हैं और यह आंकड़ा सन् 2026 तक 90 करोड़ तक हो जाने की संभावना है। आज पूरे विश्व के वैज्ञानिक अपने अनुसंधानों से लम्बी आयु के साथ वृद्धावस्था में स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से मनुष्य को मुक्त रखने का प्रयत्न कर रहे हैं। आधुनिक काल में यह सम्भव दिखाई देने लगा है क्योंकि निदान, खान-पान एवं उपचार की अच्छी व्यवस्था सुलभ हो चुकी है।

May 15, 2026
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आंखें हजार नियामत हैं – इन्हें सुरक्षित रखिए

आंखें हजार नियामत हैं – इन्हें सुरक्षित रखिए

आंखें ईश्वर की सबसे अनमोल देन हैं। जब तक आंखें स्वस्थ रहती हैं, तब तक यह संसार रंगों, प्रकाश और सुंदर दृश्यों से भरा दिखाई देता है। लेकिन यदि आंखों की रोशनी चली जाए, तो जीवन मानो अंधकारमय हो जाता है। आंखों का महत्व समझना हो तो उस व्यक्ति से पूछिए जिसने जीवन में कभी अपनी दृष्टि खो दी हो। आंखें केवल देखने का कार्य ही नहीं करतीं, बल्कि हमारे मन के भावों और संवेदनाओं को भी व्यक्त करती हैं। लोभ, मोह, ईर्ष्या, प्रेम, लज्जा, घृणा और करुणा जैसे भाव आंखों से ही स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसलिए आंखों को “मन का दर्पण” भी कहा गया है।

May 08, 2026
आरोग्य साधन
पैर की एड़ी के दर्द का आयुर्वेदिक उपचार (Heel Pain Treatment in Ayurveda)

पैर की एड़ी के दर्द का आयुर्वेदिक उपचार (Heel Pain Treatment in Ayurveda)

एड़ी का दर्द (Heel Pain) आज के समय में एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन चुका है। पहले यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ देखी जाती थी, लेकिन अब युवा, ऑफिस में बैठकर काम करने वाले लोग, और लंबे समय तक खड़े रहने वाले व्यक्तियों में भी यह तेजी से बढ़ रही है। सुबह उठते ही एड़ी में चुभन जैसा दर्द, चलने में कठिनाई, और दिनभर असहजता—ये इसके मुख्य लक्षण हैं।

May 04, 2026
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सुबह खाली पेट क्या पिएं?

सुबह खाली पेट क्या पिएं?

सुबह उठते ही हम क्या पीते हैं—यही हमारी सेहत की दिशा तय करता है। आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट सही पेय (Morning Drink) लेने से पाचन सुधरता है, शरीर detox होता है, ऊर्जा बढ़ती है और कई बीमारियों से बचाव होता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और तनाव के कारण लोगों को एसिडिटी, कब्ज, मोटापा, कमजोरी, त्वचा समस्याएं जैसी दिक्कतें होने लगी हैं। ऐसे में सही सुबह का पेय आपके लिए “नेचुरल मेडिसिन” की तरह काम कर सकता है।

Apr 30, 2026
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गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने वाले 6 आयुर्वेदिक Cooling Foods

गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने वाले 6 आयुर्वेदिक Cooling Foods

गर्मी का मौसम आते ही शरीर कई तरह के संकेत देने लगता है— बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पसीना आना, पेट में जलन, मुंह के छाले, कब्ज, एसिडिटी, चिड़चिड़ापन, थकान और कमजोरी। कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ ठंडा पानी, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक पी लेने से शरीर ठंडा हो जाएगा। लेकिन यह सिर्फ थोड़ी देर की राहत देता है, असली समाधान नहीं। आयुर्वेद कहता है कि गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा रखना जरूरी है। इसके लिए ऐसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो शरीर की पित्त दोष को शांत करें, पाचन को सुधारें और शरीर में शीतलता बनाए रखें।

Apr 28, 2026
आरोग्य साधन
स्मृतिह्रास (Lack of Memory) – याददाश्त की कमी, कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार

स्मृतिह्रास (Lack of Memory) – याददाश्त की कमी, कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार

यदि आपको पढ़ा हुआ पाठ या सुनी हुई बात याद नहीं रहती है, तो इसे ही याददाश्त की कमी या स्मरण शक्ति का ह्रास (Lack of Memory) समझिये। आज के समय में यह समस्या बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं और वृद्धों—सभी में देखने को मिलती है। पढ़ा हुआ पाठ याद न रहना, सुनी हुई बात भूल जाना, नाम, तिथियाँ और आवश्यक कार्य याद न रहना—ये सभी स्मृतिह्रास के लक्षण हैं। ऐसा क्यों होता है? इसके अनेक कारण हैं—मन की एकाग्रता की कमी, तनाव, अनियमित दिनचर्या, अनुचित भोजन, नशे की आदत, पर्याप्त नींद का अभाव तथा मानसिक अशांति। आयुर्वेद के अनुसार स्मरण शक्ति केवल मस्तिष्क की शक्ति नहीं, बल्कि शरीर, मन, आहार, दिनचर्या, ब्रह्मचर्य और मानसिक संतुलन का संयुक्त परिणाम है।

Apr 27, 2026
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