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"बवासीर (Piles): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"बवासीर (Piles): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

बवासीर एक बहुत कष्टदायक रोग है और यदि जल्दी ही इसे दूर न किया जा सके तो तो यह बढ़ता जाता है और रोगी का उठना बैठना भी मुश्किल हो जाता है | इस रोग में गुदा के अंकुर फूल कर मटर या अंगूर के बराबर हो जाते हैं | दरअसल ये अंकुर असामन्य रूप से फूली हुई रक्त शिराएं होती हैं जो गुदा या मलाशय के जोड़ पर या गुदा और गुदाद्वार की त्वचा के जोड़ पर स्थित होती है | इनकी स्थिति की आधार पर ही इन्हे आंतरिक या बाह्य बवासीर कहते हैं |

Apr 16, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"गुर्दे (किडनी) की सुरक्षा: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय"

"गुर्दे (किडनी) की सुरक्षा: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय"

हमारे गुर्दे लाखों छलनियो तथा लगभग 140 मील नलिकाओं से बने होते हैं | गुर्दे की इस इकाई को नेफ्रॉन कहते हैं | एक गुर्दे में लगभग 10 लाख ऐसी ऐसी इकाइयां होती हैं | नलिकाएं उस छाने हुए द्रव अच्छी अच्छी चीज़ो( सोडियम,पोटेशियम, कैल्शियम ) इत्यादि को दोबारा सोख लगभग 1.5 लीटर मूत्र के रूप में बाहर निकाल देती हैं | हमारे गुर्दे लगभग 1500 लीटर खून को साफ़ कर के लगभग 9.5 लीटर मूत्र में बदल देते हैं | लगभग 1200 मिलीलीटर रक्त प्रत्येक १ मिनट में दोनों गुर्दों से प्रवाहित होता है तथा यह 1 मिलीलीटर प्रत्येक मिनिट के हिसाब से मूत्र में बदल जाता है |

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"मोटापा घटाने के आयुर्वेदिक उपाय – स्थायी वजन कम करें बिना साइड इफेक्ट के"

"मोटापा घटाने के आयुर्वेदिक उपाय – स्थायी वजन कम करें बिना साइड इफेक्ट के"

मोटापा एक प्रकार का रोग है,इसके होने के मुख्य दो कारण हैं - (1) आनुवंशिक अर्थात वंशगत| जिनके माता पिता मोटे होते हैं उनकी संतान प्रायः मोटी ही होती है| (2) भूख से खाना,शारीरिक श्रम न करना,आरामदायक जीवन व्यतीत करना| जो लोग खाना खाकर पड़े रहते हैं,उन्हें मोटापा आ जाता है| साधारणतः मोटापा की पहचान यह है की जितने इंच शरीर की ऊंचाई हो उतने किलो शरीर का बजन ठीक है| इससे अधिक होने पर “मोटा”और इससे कम होने पर पतला कहा जायेगा|

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"अनिद्रा (Insomnia) का आयुर्वेदिक इलाज – गहरी नींद पाने के प्राकृतिक उपाय"

"अनिद्रा (Insomnia) का आयुर्वेदिक इलाज – गहरी नींद पाने के प्राकृतिक उपाय"

अनिद्रा- नींद ना आना इस अवस्था मै रोगी की निद्रा मै कमी हो जाती है। कारण- नींद ना आना कितनी बार दूसरे रोग का लक्षण ही रहता है।इस विकार को उत्पन्न करने वाले अनेकों कारण है – (1)- रजोगुण युक्त,बात के अथवा पित्त्युक्त बात के प्रकोप से अनिद्रा रोग उत्पन्न होता है।

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) का सम्पूर्ण मार्गदर्शक

निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) का सम्पूर्ण मार्गदर्शक

मानव शरीर प्रकृति की सबसे जटिल और अद्भुत मशीन है। इस मशीन को निरंतर चलाने के लिए रक्त का शरीर में संचार अत्यंत आवश्यक है, और यही कार्य करता है हमारा रक्तचाप (Blood Pressure)। अधिकतर लोग उच्च रक्तचाप को ही बड़ा खतरा मानते हैं, लेकिन निम्न रक्तचाप भी कई बार उतना ही परेशान करने वाला और खतरनाक सिद्ध हो सकता है, विशेषकर जब लक्षण बढ़ते हुए दिखाई दें। उच्च रक्तचाप को एक "छिपा हुआ सांप" कहा जाता है क्योंकि यह बिना लक्षणों के कई वर्षों तक शरीर को भीतर से कमजोर करता रहता है और अचानक किसी दिन बड़ा नुकसान पहुँचा देता है। इसके विपरीत, निम्न रक्तचाप अक्सर शुरुआत में हानिरहित लगता है, लेकिन जब यह लगातार बना रहे या बार-बार चक्कर आने, थकान, कमजोरी, बेहोशी की प्रवृत्ति पैदा करने लगे — तब यह शरीर में किसी गहरे असंतुलन या रोग का संकेत हो सकता है।

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"कम्पवात (Parkinson's) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"कम्पवात (Parkinson's) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

शरीर के सभी अंगो के कम्प या केवल सिर के कम्पन को कंपवात कहते हैं| मिथ्या आहार-विहार तथा वात को प्रकुपित करने वाले कारणों से वात विकार उतपन्न होते हैं | आयुर्वेद में 80 प्रकार की वात व्याधियों का वर्णन मिलता है,जिनके कम्पवात भी सम्मिलित है | कम्प का शाब्दिक अर्थ है काँपना,जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में हिलना या हिलते रहना ही कह सकते हैं | नाडीमंडल के द्वारा मनुष्य के सम्पूर्ण शरीर के अंग-प्रत्यंगो की चेष्टाओं का नियंत्रण होता है |

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पक्षाघात (लकवा) – असाध्य बनने से पहले करें इलाज | Ayurvedic उपाय"

"पक्षाघात (लकवा) – असाध्य बनने से पहले करें इलाज | Ayurvedic उपाय"

मनुष्य के शरीर को लम्बाई में सिर से लेकर पैर तक के हिस्से को दो बराबर भागों में बाटने पर एक हिस्सा बायां भाग तथा दूसरा हिस्सा दायां भाग कहलाता है | इन दोनों भागों के किसी भी एक पक्ष की चेष्टाओं के नष्ट होने पर उसे पक्षाघात या अर्धंगबात कहते हैं| साधारण भाषा में इसे लकवा कहते हैं कारण- आयुर्वेद के मत से वात (वायु)को प्रकुपित करने वाले आहार विहार का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से वात दोष प्रकुपित होता है | यह प्रकुपित वायु शरीर के किसी भी एक पक्ष में आ

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"डेंगू बुखार: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Dengue Fever Ayurvedic Treatment"

"डेंगू बुखार: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Dengue Fever Ayurvedic Treatment"

वर्षा ऋतू अपने साथ अनेक खुशियां लेकर आती है ,क्योंकि वर्षा ऋतू आगमन पर भीषण गर्मी से मुक्ति मिलती है , लेकिन जब वर्षा का अंत होता है और गुलाबी शीत ऋतू का प्रारम्भ होता है तो वर्षा के जल कारण मक्खी,मच्छर और दूसरे जीवाणु तेज़ी से उत्पन्न होते हैं| वर्षा के जल से भरे गड्ढों में मच्छर

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"साइटिका (Sciatica): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक निवारण"

"साइटिका (Sciatica): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक निवारण"

पंचम कटिप्रदेशीय तथा प्रथम और द्वितीय कटिप्रदेशीय नाड़ी मूलों के मिलने से ग्रध्रसी नाड़ी ( sciatica nerve ) का निर्माण होता है | इन गाडी मूलों पर विकृति होने के फलस्वरूप साइटिका (sciatica ) की उत्पत्ति होती है | इस विकृति का कारण दुष्ट वात होती है ,जो नितम्ब,उ

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"रेबीज़: एक जानलेवा लेकिन रोके जा सकने वाला रोग | Rabies is 100% Preventable"

"रेबीज़: एक जानलेवा लेकिन रोके जा सकने वाला रोग | Rabies is 100% Preventable"

यह एक बेहद संक्रामक व जानलेवा रोग है | इस रोग को “हयड्रोफोबिया” लाइसा व पागलपन आदि कहते हैं | वैसे तो यह जानवरों को होने वाला रोग है लेकिन रेबीजग्रस्त पशुओं के काटने से यह रोग मनुष्यों को भी हो जाता है | प्रायः यह रोग पागल कुत्ते के काटने से होता है | कारण - यह रोग “रहेब्डो वायरस” से होता है | ये वायरस रक्त में मौजूद नहीं होते , केवल तंत्रिकातंत्र को नुकसान पहुंचाकर शरीर को प्र

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

यकृत हमारे शरीर का एक अति महत्वपूर्ण अंग है | इसका बजन 1.5 किलो तक होता है | यकृत रोग कई प्रकार के होते हैं जैसे- पीलिया,जलोदर,यकृत ट्यूमर ,यकृत कैंसर,यकृतवृद्धि,यकृतसूजन,यकृतक्षय | रक्त की जांच कराने से इन सभी यकृत रोगों का पता चलता है | यकृत की पूरी तरह आधुनिक यंत्रों से पर सब कुछ स्पष्ट हो जाता है | ये जांचे डॉक्टर की सलाह से करवाए|

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"डिप्रेशन: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान | Depression Causes & Ayurvedic Remedies"

"डिप्रेशन: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान | Depression Causes & Ayurvedic Remedies"

निरंतर तनाव से आपके स्वास्थ्य और व्यक्तित्व पर दुष्प्रभाव पड़ता है,जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते | सिरदर्द,पेट की गड़बड़ियां और कमरदर्द उन अनेक बीमारियों में से हैं,जो तनाव की वजह से हो जाती है | इनके कारण आपकी खुशियों और संबंधों में दरार पड जाती है | लेकिन निम्न सु

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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Feb 01, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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