मधुमेह आज के समय की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है। यह रोग शरीर में शर्करा (Sugar) की मात्रा बढ़ जाने के कारण होता है। आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” रोगों में प्रमुख माना गया है। यदि समय रहते इसका उपचार और परहेज न किया जाए तो यह शरीर के अनेक अंगों को प्रभावित कर सकता है।
“मधुमेह” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है —
अर्थात जिस रोग में मूत्र के साथ शर्करा निकलती है, उसे मधुमेह कहा जाता है।
जब हम भोजन करते हैं तो भोजन में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट्स पाचन के बाद ग्लूकोज में बदल जाते हैं। अग्नाशय (Pancreas) द्वारा बनने वाला इन्सुलिन इस ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है। लेकिन जब शरीर में पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बनता या इन्सुलिन सही प्रकार कार्य नहीं करता, तब रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने लगती है। यही स्थिति मधुमेह कहलाती है।
आयुर्वेद के अनुसार यह रोग मुख्यतः अग्निमांद्य, कफ दोष और धातु-दूषण के कारण उत्पन्न होता है।
यदि परिवार में माता-पिता या अन्य सदस्यों को मधुमेह है तो इसकी संभावना बढ़ जाती है।
चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक एवं मीठे पदार्थों का अधिक सेवन।
दूध, दही, घी, मक्खन, नवीन चावल, गुड़, तिल आदि का अत्यधिक सेवन।
हमेशा बैठे रहना, व्यायाम न करना और आलसी जीवनशैली।
दिन में अधिक सोना शरीर की अग्नि को मंद करता है।
अत्यधिक चिंता, शोक और तनाव भी मधुमेह का कारण बन सकते हैं।
रात में देर तक जागने से शरीर की क्रियाएं प्रभावित होती हैं।
आयुर्वेद में मधुमेह को केवल मूत्र रोग नहीं माना गया है। यह शरीर की धातुओं, अग्नि एवं दोषों के असंतुलन से उत्पन्न रोग है। इसलिए इसका उपचार केवल शुगर कम करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि शरीर की अग्नि को सुधारना, धातुओं को मजबूत करना और दोषों को संतुलित करना भी आवश्यक माना जाता है।
इन सभी को मिलाकर दिन में 2 बार गुड़मार क्वाथ के साथ सेवन करें।
दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करें।
दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करें।
दोनों को पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करें।
दोनों को समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
मधुमेह रोगियों के लिए योग बहुत लाभकारी माना जाता है।
प्रतिदिन 20–30 मिनट योग एवं प्राणायाम करने से लाभ मिलता है।
आयुर्वेदिक रस, भस्म एवं वटी का सेवन हमेशा योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से करें। यदि आप पहले से एलोपैथिक दवाएं ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद न करें।
मधुमेह एक गंभीर लेकिन नियंत्रित किया जा सकने वाला रोग है। सही आहार, नियमित व्यायाम, योग और आयुर्वेदिक उपचार की सहायता से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। प्रारंभिक अवस्था में ध्यान देने से इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
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