आज के समय में मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि जीवन-शैली से जुड़ा एक गंभीर विकार बन चुका है।
अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव, गलत खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता ने इस रोग को घर-घर में आम कर दिया है।
आयुर्वेद ने हजारों वर्ष पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि—
“पथ्येन रोगा नश्यन्ति”
अर्थात् उचित आहार-विहार से रोग स्वयं नियंत्रित हो जाता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि
मधुमेह रोग (Diabetes Mellitus) में
✔ क्या खाना चाहिए
✔ क्या नहीं खाना चाहिए
✔ कब और कैसे खाना चाहिए
✔ किन आदतों से बचना चाहिए
✔ और आयुर्वेदिक जीवन-शैली से शर्करा कैसे नियंत्रित की जा सकती है
मधुमेह को आम भाषा में “शुगर की बीमारी” कहा जाता है।
इस रोग में शरीर में रक्त शर्करा (Blood Glucose) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।
सामान्य स्थिति में
खाली पेट: 70–100 mg/dl
भोजन के बाद: 140 mg/dl तक
मधुमेह में
जब रक्त शर्करा 160–180 mg/dl से अधिक हो जाती है
तब शर्करा मूत्र के माध्यम से बाहर निकलने लगती है
मधुमेह एक चयापचय संबंधी विकार (Metabolic Disorder) है,
जिसमें—
इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है
या शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता
आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” रोग समूह का एक गंभीर रूप माना गया है।
आयुर्वेद के अनुसार—
कफ, मेद और मूत्र वह स्रोत हैं
जिनकी विकृति से प्रमेह उत्पन्न होता है
जब प्रमेह—
दीर्घकाल तक रहता है
और उपचार के बिना बढ़ता जाता है
तब वह मधुमेह (Madhumeha) में परिवर्तित हो जाता है।
अधिक मधुर, गुरु, स्निग्ध आहार
अधिक निद्रा
व्यायाम की कमी
मानसिक तनाव
मोटापा (स्थूलता)
आयुर्वेद मानता है कि—
आहार ही औषधि है और औषधि ही आहार
मधुमेह में दवा तभी प्रभावी होती है
जब आहार-विहार सही हो।
सही आहार से
रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है
वजन संतुलित रहता है
जटिलताएँ (आंख, किडनी, नसें, हृदय) कम होती हैं
अधिकांश मधुमेह रोगी—
या तो मोटे होते हैं
या ऊँचाई के अनुपात में वजन अधिक होता है
सामान्यतः
1600 कैलोरी प्रतिदिन का संतुलित आहार पर्याप्त होता है
(व्यक्ति की उम्र, वजन और कार्य के अनुसार भिन्न हो सकता है)
इनसे रक्त शर्करा तेजी से बढ़ती है।
❌ शक्कर
❌ गुड़
❌ शहद
❌ मीठे फल व जूस
❌ आलू
❌ सफेद चावल
❌ मैदा
❌ कोल्ड ड्रिंक्स
❌ मिठाई, केक, आइसक्रीम
ये धीरे-धीरे पचते हैं और शर्करा को नियंत्रित रखते हैं।
✅ हरी व पत्तेदार सब्जियाँ
✅ फलियाँ
✅ भूरे चावल
✅ जौ, बाजरा, रागी
✅ दलिया
✅ चौकर युक्त आटा
✅ अंकुरित अनाज
सफेद चावल की जगह भूरे चावल
मैदा की जगह मोटा आटा
❌ घी
❌ मक्खन
❌ वनस्पति घी
❌ मांस, अंडा
❌ फुल-फैट डेयरी
✅ जैतून का तेल
✅ अलसी का तेल
✅ सरसों का तेल
✅ मूंगफली का तेल (सीमित)
भोजन हल्का भुना या उबला हुआ सर्वोत्तम
❌ मांस
❌ अंडा
❌ अधिक दूध-उत्पाद
(इनमें वसा अधिक होती है)
✅ मूंग, मसूर, अरहर दाल
✅ चना
✅ राजमा (सीमित)
✅ सोयाबीन (सीमित)
✅ अंकुरित अनाज
रेशा—
शर्करा के अवशोषण को धीमा करता है
पेट को लंबे समय तक भरा रखता है
✅ सलाद
✅ ककड़ी
✅ गाजर
✅ पत्ता गोभी
✅ फलियाँ
✅ अंकुरित दाने
भोजन से पहले सलाद अनिवार्य
मधुमेह से—
आँखें
तंत्रिकाएँ
गुर्दे
हृदय
प्रभावित होते हैं
इसके लिए आवश्यक हैं
विटामिन A, C, E
स्रोत:
✅ हरी सब्जियाँ
✅ रंगीन सब्जियाँ
✅ खट्टे फल (बिना मिठास)
✅ अंकुरित अनाज
सुबह का नाश्ता न छोड़ें
निश्चित समय पर भोजन करें
रोज़ समान मात्रा में खाएँ
❌ दिन में 2 बार भारी भोजन
✅ दिन में 5–6 बार हल्का भोजन
इससे—
रक्त शर्करा अचानक नहीं गिरती
ज्यादा खाने की इच्छा नहीं होती
वजन नियंत्रित रहता है
⚠️ उपवास न करें, विशेषकर यदि—
इंसुलिन
या शर्करा नियंत्रक दवा लेते हों
भोजन की थाली को इस प्रकार बाँटें:
½ भाग – सब्जियाँ
¼ भाग – दाल/फलियाँ
¼ भाग – संपूर्ण अनाज
पहले सलाद
फिर सब्जी
अंत में अनाज
इससे—
पेट जल्दी भरता है
कैलोरी कम जाती है
✅ अधिक पैदल चलें
✅ लिफ्ट की जगह सीढ़ियाँ
✅ लंबे समय तक न बैठें
रोज़ 30 मिनट मध्यम व्यायाम
जैसे:
पैदल चलना
साइकिल
योग
तैराकी
हल्का खेल
✔ इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है
✔ वजन घटता है
✔ तनाव कम होता है
✔ रक्तचाप नियंत्रित रहता है
✔ हृदय रोग से बचाव
⚠️ व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह आवश्यक
रोज़ पैरों का निरीक्षण करें
छाले या ज़ख्म दिखें तो तुरंत ध्यान दें
नंगे पाँव न चलें
दिनचर्या नियमित रखें
रात्रि जागरण से बचें
मानसिक तनाव कम करें
योग व प्राणायाम अपनाएँ
⚠️ मधुमेह रोग में
कोई एक निश्चित आहार सभी के लिए समान रूप से लाभकारी नहीं होता।
आहार व दवा
अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह से ही लें।
मधुमेह कोई ऐसी बीमारी नहीं
जिसे केवल दवाओं से नियंत्रित किया जा सके।
आहार + विहार + अनुशासन
यही मधुमेह नियंत्रण की कुंजी है।
आयुर्वेदिक जीवन-शैली अपनाकर
हम न केवल शर्करा नियंत्रित कर सकते हैं
बल्कि एक स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन भी जी सकते हैं।
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