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अम्लपित्त (एसिडिटी) क्या है? जानिए सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट की जलन के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार

अम्लपित्त (एसिडिटी) क्या है? जानिए सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट की जलन के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और जंक फूड के बढ़ते प्रचलन के कारण अम्लपित्त (एसिडिटी) एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। बहुत से लोग सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन और गैस जैसी समस्याओं को साधारण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली एसिडिटी भविष्य में गैस्ट्राइटिस, अल्सर और अन्य पाचन संबंधी विकारों का कारण बन सकती है। आयुर्वेद में अम्लपित्त को पित्त दोष की वृद्धि से उत्पन्न होने वाला रोग माना गया है। जब शरीर में पित्त की मात्रा असंतुलित हो जाती है और आमाशय में अम्ल (Acid) का स्राव अत्यधिक होने लगता है, तब भोजन का पाचन प्रभावित होता है और अम्लपित्त की समस्या उत्पन्न होती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसे एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या हाइपरएसिडिटी के नाम से भी जाना जाता है।

Jun 07, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
एक्जीमा (छाजन/पामा) का आयुर्वेदिक इलाज: कारण, लक्षण और प्रभावी उपचार

एक्जीमा (छाजन/पामा) का आयुर्वेदिक इलाज: कारण, लक्षण और प्रभावी उपचार

त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है, जो हमें बाहरी संक्रमण, धूल, गर्मी, सर्दी और अन्य हानिकारक तत्वों से सुरक्षा प्रदान करती है। आयुर्वेद में त्वचा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह केवल शरीर की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और सौंदर्य का भी दर्पण होती है। जब त्वचा में दोषों का असंतुलन हो जाता है, तब अनेक त्वचा रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख रोग है एक्जीमा (Eczema), जिसे आयुर्वेद में पामा, छाजन, चम्बल, अकौता, अपरस या पानीवात के नाम से भी जाना जाता है। एक्जीमा कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन यह लगातार खुजली, जलन और त्वचा की खराब स्थिति के कारण व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से काफी परेशान कर सकती है।

Jun 06, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
मोटापा महिलाओं के लिए क्यों बन रहा है जानलेवा? जानें मेद रोग के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

मोटापा महिलाओं के लिए क्यों बन रहा है जानलेवा? जानें मेद रोग के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

आज के समय में मोटापा केवल शरीर का बढ़ा हुआ वजन नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन चुका है। विशेष रूप से महिलाओं में बढ़ता मोटापा स्वास्थ्य, सौंदर्य, आत्मविश्वास और प्रजनन क्षमता तक को प्रभावित कर सकता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को "मेद रोग" कहा गया है। विश्वभर में मोटापे से प्रभावित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और महिलाओं में इसकी समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जा रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गठिया और हार्मोनल विकार जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

Jun 02, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पैरों और चेहरे पर सूजन आना किस बीमारी का संकेत है? जानिए कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

पैरों और चेहरे पर सूजन आना किस बीमारी का संकेत है? जानिए कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन आना सामान्य बात नहीं है। विशेष रूप से यदि आपके पैरों, टखनों, चेहरे या मुंह पर बार-बार सूजन आ रही है, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। बहुत से लोग इसे सामान्य थकान, अधिक नमक खाने या मौसम के प्रभाव के रूप में नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह किडनी, हृदय, लिवर या थायरॉइड जैसी बीमारियों की चेतावनी भी हो सकती है।

Jun 01, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
वात विकार से उत्पन्न कष्टदायक रोग : स्लिप डिस्क – कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार और बचाव

वात विकार से उत्पन्न कष्टदायक रोग : स्लिप डिस्क – कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार और बचाव

आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान, शारीरिक श्रम की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना तथा बढ़ते मानसिक तनाव के कारण रीढ़ की हड्डी से संबंधित रोगों में लगातार वृद्धि हो रही है। इनमें स्लिप डिस्क (Slip Disc) एक ऐसा रोग है जो व्यक्ति के दैनिक जीवन को अत्यधिक प्रभावित कर सकता है। यह रोग केवल वृद्ध लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि आजकल 25 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी तेजी से देखा जा रहा है।

May 31, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
शरीर को गठरी जैसा बना देने वाला रोग: गठिया (Arthritis) – कारण, लक्षण, बचाव और प्राकृतिक उपाय

शरीर को गठरी जैसा बना देने वाला रोग: गठिया (Arthritis) – कारण, लक्षण, बचाव और प्राकृतिक उपाय

गठिया (Arthritis) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह केवल जोड़ों का दर्द नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। कई बार रोगी की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि शरीर झुकने लगता है और वह सामान्य दैनिक कार्य भी कठिनाई से कर पाता है। इसी कारण पुराने समय में कहा जाता था कि "गठिया शरीर को गठरी बना देता है।" भारत में लाखों लोग घुटनों, कलाई, उंगलियों, टखनों और रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या से पीड़ित हैं। आयुर्वेद में इसे मुख्य रूप से वात विकार माना गया है, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे कई प्रकार की बीमारियों का समूह मानता है।

May 30, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
बिच्छू डसने जैसी भयंकर पीड़ादायक बीमारी: आमवात (रुमेटिज्म) यानी जोड़ों का दर्द

बिच्छू डसने जैसी भयंकर पीड़ादायक बीमारी: आमवात (रुमेटिज्म) यानी जोड़ों का दर्द

मानव शरीर सिर से लेकर पैरों तक अनेक अंगों और उपांगों से मिलकर बना है। ये सभी अंग निरंतर सक्रिय रहकर शरीर को स्वस्थ, चुस्त और कार्यक्षम बनाए रखते हैं। यदि किसी भी अंग में थोड़ा-सा विकार उत्पन्न हो जाए तो सम्पूर्ण शरीर प्रभावित होने लगता है। इसलिए शरीर का प्रत्येक अंग, चाहे छोटा हो या बड़ा, अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। शरीर को आकार और मजबूती अस्थियों (हड्डियों) के ढांचे से प्राप्त होती है। प्रकृति ने शरीर को गतिशील बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर जोड़ों (संधियों) की रचना की है।

May 29, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पैर के पंजे में सूजन (Foot Swelling) : कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण एवं उपचार

पैर के पंजे में सूजन (Foot Swelling) : कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण एवं उपचार

पैर के पंजे में सूजन (Foot Swelling) एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। कई बार यह लंबे समय तक खड़े रहने, चोट लगने या थकान के कारण होती है, जबकि कुछ मामलों में यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। यदि पैर के पंजे में लगातार कई दिनों तक सूजन बनी रहे, दर्द हो या चलने-फिरने में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई लोगों की शिकायत होती है कि सुबह पैर सामान्य रहते हैं लेकिन दिन ढलते-ढलते पंजे सूज जाते हैं। कुछ लोगों में केवल एक पैर प्रभावित होता है, जबकि कुछ में दोनों पैरों में सूजन दिखाई देती है। आयुर्वेद में इस प्रकार की सूजन को मुख्य रूप से शोथ कहा गया है।

May 29, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
कान से कम सुनाई देना और कान में सीटी की आवाज (टिनिटस) : कारण, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण एवं उपचार

कान से कम सुनाई देना और कान में सीटी की आवाज (टिनिटस) : कारण, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण एवं उपचार

आज के समय में कान से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जहां कम सुनाई देने की समस्या मुख्य रूप से वृद्धावस्था में देखने को मिलती थी, वहीं अब युवा वर्ग भी इस समस्या से प्रभावित हो रहा है। कई लोगों की शिकायत होती है कि उन्हें कान में लगातार सीटी, घंटी, भनभनाहट या झिंगुर जैसी आवाज सुनाई देती है। साथ ही धीरे-धीरे सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है। यह स्थिति व्यक्ति के दैनिक जीवन, कार्यक्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कान में बिना किसी बाहरी ध्वनि स्रोत के आवाज सुनाई देने की स्थिति को टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है। वहीं आयुर्वेद में इसे मुख्य रूप से कर्णनाद कहा गया है। यदि इसके साथ सुनने की शक्ति में कमी आने लगे तो उसे बाधिर्य की श्रेणी में रखा जाता है।

May 29, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पित्ताश्मरी (Gall Bladder Stone) : कारण, लक्षण, निदान एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा

पित्ताश्मरी (Gall Bladder Stone) : कारण, लक्षण, निदान एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा

पित्ताश्मरी यानी गॉलब्लेडर (पित्ताशय) की पथरी आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली समस्याओं में से एक है। पहले यह रोग कम देखने को मिलता था, लेकिन अब खराब खानपान, मोटापा, तनाव और बैठे-बैठे काम करने की आदतों के कारण इसके मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। पित्ताशय में बनने वाली यह पथरी कई बार लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रहती है, लेकिन जब यह पित्त नलिका में फंस जाती है तब असहनीय दर्द, सूजन और पीलिया जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। इस लेख में पित्ताश्मरी के कारण, प्रकार, लक्षण, निदान, उपद्रव और आयुर्वेदिक चिकित्सा को व्यवस्थित रूप से समझेंगे।

May 27, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
मूत्राशय की पथरी : सफल चिकित्सा

मूत्राशय की पथरी : सफल चिकित्सा

अश्मरी रोग को आम बोलचाल की भाषा में पथरी रोग कहा जाता है और आधुनिक चिकित्सा में इसे Calculus कहते हैं। यह मुख्यतः चार प्रकार का होता है। (1) वृक्काश्मरी (Renal Calculus) यह वृक्क अर्थात गुर्दे (Kidney) में उत्पन्न होती है। वृक्क में बनने के कारण ही इसे वृक्काश्मरी कहा जाता है। गुर्दों में बनने वाली यह पथरी धीरे-धीरे आकार बढ़ाती है तथा समय पर उपचार न होने पर मूत्र मार्ग में रुकावट उत्पन्न कर सकती है। (2) वस्त्यश्मरी (Vesical Calculus / Stone in Urinary Bladder) यह वस्ति अर्थात मूत्राशय (Urinary Bladder) में उत्पन्न होती है। इसलिए इसे मूत्राश्मरी

May 25, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
देह को कंपकंपा देने वाला : कम्प वात रोग

देह को कंपकंपा देने वाला : कम्प वात रोग

कभी-कभी क्रोध, भय या शोक की स्थिति में व्यक्ति का शरीर कांपने लगता है। सामान्यतः इसे मानसिक भाव माना जाता है, लेकिन जब यही कंपन लगातार शरीर में बना रहे और धीरे-धीरे रोग का रूप ले ले, तब आयुर्वेद में इसे कम्प वात कहा जाता है। आधुनिक चिकित्सा में इसे कई बार Parkinson's Disease से भी जोड़ा जाता है। यह एक गंभीर वातजन्य विकार है, जो समय रहते उपचार न मिलने पर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है।

May 24, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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