"अर्जुन की छाल के फायदे: हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के लिए आयुर्वेदिक औषधि | Arjuna Benefits in Ayurveda"

Mar 31, 2025
बनोषधि
"अर्जुन की छाल के फायदे: हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के लिए आयुर्वेदिक औषधि | Arjuna Benefits in Ayurveda"

नदी,नालों के किनारे होने के कारण इसे धवल,ककुभ तथा नदीसर्ज भी कहा जाता है | 


आधुनिक प्रयोगों से वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है किअर्जुन ह्रदय रोगों के  लिए श्रेष्ठ औषधि है | अर्जुन जाति के कम से कम 15 प्रकार हमारे देश में पाए जाते हैं | इसलिए पहचान ज़रूरी है कि कोन सी औषधि ह्रदय-रक्त-वाही-संस्थान पर कार्य करती है|


प्राचीन आयुर्वेद-शास्त्रियों में बाग्भट ऐसे वैद्य हैं,जिन्होंने पहली बार इस औषधि के ह्रदय-रोग में उपयोगी होने की विवेचना की | इसके बाद वैद्य चक्रदत्त तथा भावमिश्र ने भी कहा की घी,दूध तथा गुड़ आदि के साथ जो अर्जुन की त्वचा का चूर्ण नियमित रूप से लेता है ,उसे ह्रदयरोग,जीर्ण ज्वर,रक्त-पित्त कभी नहीं सताते और वह चिरजीवी होता है | 


अनेकों निघण्टुओं में अर्जुन-सिद्ध घृत को ह्रदय रोगों की, चाहे वे किसी भी प्रकार के हों,अचूक दवा माना है |

निघण्टुरत्नाकार के अनुसार अर्जुन बलकारक है तथा अपने लवण-खनिजों के कारण ह्रदय की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है | 


हमने इसे अपने औषधालय में बहुत उपयोग किया है तथा शत-प्रतिशत रोगियों को लाभ मिला है |


  1. ह्रदय में शिथिलता आनेपर या शोथ होने पर अर्जुन की छाल तथा गुड़ को दूध में मिलाकर औटाकर पिलाना चाहिए |

  2. ह्रदयाघात,ह्रदय शूल  में  अर्जुन  की छाल से सिद्ध दूध अथवा ३ से 6 ग्राम छाल घी या गुड़ के शरबत के साथ देते हैं | 

  3. अर्जुन-घृत बनाने के लिए आधा किलो अर्जुन की छाल जौकुट कर के 4 किलो जल में पकाया जाता है | चौथाई जल शेष रहने पर अर्जुन कल्क 50 ग्राम तथा गाय का घी एक पाव मिलाकर पाक करते हैं | ध्यान रहे,जल उड़ जाने एवं घृत शेष रह जाने पर यह सिद्ध घृत बन जाता है | यह घी ह्रदय के समस्त रोगों में हितकारी है | इसकी मात्रा 6 से 11 ग्राम तक दी जाती है | 

  4. महिलाओं में होने वाले श्वेत प्रदर तथा पेशाब की जलन को रोकना भी इसमें विशेष गुणों में है | 

  5. छाती में जलन,जीर्ण खासी आदि को रोकने में यह सक्षम है | 

  6. हड्डी टूटने पर इसकी छाल का स्वरस दूध के साथ देते हैं | सूजन तथा दर्द को कम करने की शक्ति भी इसमें निहित हैं |

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