बहुमूत्र (Polyuria) एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति को सामान्य से कहीं अधिक बार पेशाब जाना पड़ता है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि रोगी को प्रति 20–30 मिनट में पेशाब जाने की आवश्यकता महसूस होती है। रात्रि में पेशाब के लिए बार-बार उठने से नींद खराब हो जाती है और शरीर में थकावट, कमजोरी व मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।
आयुर्वेद में इस रोग को मूत्रवह स्रोतस की विकृति कहा गया है और इसका सीधा संबंध वात, पित्त, तथा मूत्राशय (Bladder) की मजबूती से होता है।
बहुमूत्र केवल एक लक्षण है, इसके पीछे कई कारण होते हैं — जैसे पेट में गर्मी, मधुमेह, किडनी की कमजोरी, मूत्राशय में संक्रमण, मानसिक तनाव, असंतुलित भोजन, दवाओं के दुष्प्रभाव आदि। आयुर्वेद इस रोग का मूल कारण पहचानकर जड़ से उपचार प्रदान करता है।
बहुमूत्र रोग के कारण समझना उपचार का पहला चरण है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में इसके प्रमुख कारण निम्न प्रकार से माने जाते हैं:
वात दोष बढ़ने से मूत्राशय सिकुड़ता है और बार-बार पेशाब का संकेत देता है।
अत्यधिक तरल पदार्थ मूत्र निर्माण बढ़ाते हैं।
गर्मी बढ़ने से पेशाब पतला, बार-बार और तेज जलन वाला होता है।
डायबिटीज रोगियों में पेशाब अधिक बनता है।
फिल्ट्रेशन बढ़ने पर पेशाब अधिक आता है।
मस्तिष्क और मूत्राशय के बीच सिग्नल ठीक से न जाएँ तो Urgency बढ़ जाती है।
तनाव सीधे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे Frequent Urination बढ़ता है।
ठंडे पदार्थ मूत्रल (Diuretic) होते हैं — जैसे नारियल पानी, तरबूज, खीरा, एलोवेरा जूस आदि।
Blood pressure की कुछ दवाएँ भी पेशाब बढ़ाती हैं।
बार-बार पेशाब जाना
रात में 3–8 बार पेशाब के लिए उठना
पेशाब का दबाव अचानक बढ़ना
पेशाब करने के बाद भी अधूरा लगना
कमर व कूल्हों में दर्द
शरीर में कमजोरी
पेशाब पतला और अधिक मात्रा में
कुछ मामलों में जलन भी हो सकती है
यदि पेशाब में झाग आए, बहुत मीठी गंध आए या अत्यधिक जलन हो तो यह डायबिटीज या इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
वात दोष बढ़ने से—
मूत्राशय की ताकत कम होती है
नाड़ी संस्थान कमजोर होता है
मांस व स्नायु धातु का शोष होता है
बार-बार पेशाब जाने की प्रवृत्ति बढ़ती है
इसलिए आयुर्वेद में उपचार का मुख्य लक्ष्य:
✔ पाचन सुधारना
✔ वात-पित्त संतुलित करना
✔ मूत्राशय की क्षमता बढ़ाना
✔ नाड़ी-तंत्र को मजबूत करना
आइए अब विस्तार से उन नुस्खों और औषधियों को समझें जिन्हें आपने भेजा था, और जिन्हें आयुर्वेद में अत्यंत प्रभावी माना गया है।
(सबसे तेज असर करने वाला घरेलू नुस्खा)
आंवले का रस – 10 ग्राम
हल्दी – 2 ग्राम
शहद – 5 ग्राम
चंद्रप्रभा वटी – 2 गोली
सभी को मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें।
अब इसे तीन बराबर हिस्सों में बाँटकर फ्रिज में रख दें।
हर 8 घंटे पर एक हिस्सा
दिन में तीन बार
✔ मूत्राशय की पेशियों को मजबूत करता है
✔ मूत्र की बार-बार आने वाली प्रवृत्ति शांत करता है
✔ सूजन और गर्मी को कम करता है
✔ पेशाब को नियंत्रित करता है
कई रोगियों में मात्र 2–3 दिनों में प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है।
(बहुमूत्र रोग की क्लासिक आयुर्वेदिक दवा)
तीनों को समान मात्रा में लेकर एक महीन चूर्ण बना लें।
1 से 3 रत्ती (125–375 mg)
शहद के साथ
सुबह और शाम
मूत्राशय को मजबूती
किडनी में सूक्ष्म स्तर पर सुधार
मधुमेह-जनित बहुमूत्र में विशेष लाभ
जलन, कमजोरी और झनझनाहट कम करता है
यह दवा बहुमूत्र रोग में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, क्योंकि यह मूल कारण को ठीक करती है।
(रात्रि सेवन हेतु अत्यंत उपयोगी उपाय)
सफेद तिल – 100 ग्राम
गुड़ – 50 ग्राम
अजवाइन – 15 ग्राम
तिल को हल्का भूनकर, गुड़ और अजवाइन के साथ मिलाकर लड्डू बना लें।
सोते समय 1 लड्डू रोज खाएँ
✔ मूत्राशय को गर्माहट देकर इसकी कार्यक्षमता बढ़ाता है
✔ बार-बार पेशाब की समस्या घटती है
✔ 7 दिनों में अच्छा सुधार
✔ पेशाब में ठंडापन और अधिकता कम
अजवाइन वात नियंत्रित करती है, तिल शरीर को बल देती है, और गुड़ पाचन सुधारता है — इसीलिए यह संयोजन इतना असरदार है।
आंवला बीज की गिरी – 150 ग्राम
काले तिल (भुने हुए) – 500 ग्राम
गुड़ – 150 ग्राम
लड्डू बना कर 20 दिन का कोर्स तैयार करें।
सुबह 1 लड्डू
शाम 1 लड्डू
✔ मूत्रमार्ग की कमजोरी दूर
✔ मूत्रवह स्रोतस मजबूत
✔ बार-बार पेशाब से होने वाली थकान खत्म
✔ 20 दिनों में उल्लेखनीय लाभ
गरम पानी
फूला चावल
गेहूँ की रोटी
तिल का लड्डू
छाछ (हल्की)
बेल का शरबत
मूंग दाल
हल्का भोजन
बहुत ठंडे पेय
नारियल पानी
खीरा, तरबूज
बहुत मीठा
तला-भुना
अधिक चाय/कॉफी
पवनमुक्तासन
मंडूकासन
भुजंगासन
वज्रासन
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
डीप ब्रीदिंग
ये मूत्राशय की नाड़ियों और स्नायु-मांसपेशियों को बल देते हैं।
पेशाब में बहुत जलन
खून आना
झागदार पेशाब
मधुमेह के लक्षण
बहुत अधिक कमजोरी
बहुमूत्र रोग परेशानी भरा जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह ठीक होने वाली अवस्था है। आयुर्वेद में इसका उपचार मुख्य रूप से—
✔ पाचन सुधारकर
✔ वात-पित्त संतुलित करके
✔ मूत्राशय को मजबूत बनाकर
✔ जड़ी-बूटियों से नसों को शक्तिशाली बनाकर
किया जाता है।
ऊपर दिए गए चारों नुस्खे बहुमूत्र रोग के सबसे प्रभावी और आजमाए हुए आयुर्वेदिक उपाय हैं।
इन्हें नियमित रूप से लेने पर रोगी कुछ ही दिनों में राहत महसूस करता है और 20–30 दिनों में यह समस्या लगभग समाप्त हो सकती है।
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