आँखों की कमजोरी / धुंधला दिखना – आयुर्वेदिक कारण, लक्षण, निदान

Dec 11, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
आँखों की कमजोरी / धुंधला दिखना – आयुर्वेदिक कारण, लक्षण, निदान

प्रस्तावना (Introduction)

आयुर्वेद में नेत्रों को “प्रकाश का द्वार” तथा “पित्त का मुख्य स्थान” माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है—

“चक्षु: पित्तस्थानं प्रमुखम्”
अर्थात् आँखों की दृष्टि और तेज मुख्य रूप से पित्त के संतुलन पर निर्भर करते हैं।

आधुनिक जीवनशैली में—
✔ अत्यधिक स्क्रीन उपयोग
✔ अनुचित आहार
✔ रात्रि जागरण
✔ मानसिक तनाव

नेत्र-रोगों की संख्या तेजी से बढ़ा दी है। आयुर्वेद इसका सम्पूर्ण और मूलभूत समाधान प्रस्तुत करता है।


 आंखों की संरचना एवं आयुर्वेदिक दृष्टि (Ayurvedic Anatomy of Eye)

आयुर्वेद में नेत्र को पंचमहाभूतों का समन्वय माना गया है:

  • तेज महाभूत → दृष्टि, प्रकाश ग्रहण

  • वायु महाभूत → नेत्र की गति, blinking

  • आप महाभूत → नेत्र की स्निग्धता

  • पृथ्वी महाभूत → नेत्र का आकार

  • आकाश महाभूत → नेत्र की गुहा (orbit)

साथ ही नेत्र-रोग मुख्यतः अष्ट-विदगार्भ (8 प्रकार के मूल विकार) से उत्पन्न होते हैं।


 नेत्र-रोगों के आयुर्वेदिक कारण (Classical Causes)

आयुर्वेद ने नेत्र-रोगों के कारणों को संसार-निमित्त और सम्प्राप्ति-निमित्त दो भागों में बताया है।

1️⃣ प्रत्यक्ष कारण (Direct Causes)

  • अत्यधिक तेज प्रकाश में काम करना

  • अधिक धुआँ, प्रदूषण, धूल

  • रात्रि जागरण

  • अति-मद्यपान

  • पित्तवर्धक भोजन (तीखा, खट्टा, गर्म)

  • रोते रहना / भावनात्मक तनाव

2️⃣ दोष-सम्बन्धित कारण

➡ पित्तदोष वृद्धि

  • आँखों में जलन

  • लालिमा

  • धुंधलापन

  • दृष्टि कम होना

➡ वातदोष वृद्धि

  • सूखापन

  • नेत्र-कंपन

  • अविदारण (blurred vision)

➡ कफदोष वृद्धि

  • भारीपन

  • झिल्ली मोटी होना

  • पानी आना

  • द्रव संचय

3️⃣ धातु-सम्बन्धित कारण (Dhatu Involvement)

  • रसधातु की कमी → पोषण अभाव

  • रक्तधातु विकृति → लालिमा, जलन

  • मज्जाधातु क्षीणता → optic nerve कमजोर


 आँखों की कमजोरी के लक्षण (Symptoms)

  • दूर की वस्तुएं धुंधली दिखना

  • पास के अक्षर अस्पष्ट दिखना

  • पलकें भारी लगना

  • तेज रोशनी सहन न होना

  • सिरदर्द

  • आँखों में सूखापन / जलन

  • पानी आना

  • चश्मे का नंबर बढ़ना

  • पढ़ते समय strain होना

  • देर तक देखने पर headache


 रोग-सम्प्राप्ति (Ayurvedic Pathogenesis)

आयुर्वेद के अनुसार रोग की उत्पत्ति निम्न क्रम से होती है—

  1. दोषों का वृद्धि (Pitta & Vata)

  2. धातुओं का क्षय

  3. नेत्र-रक्त व स्नायु का शोष

  4. तृतीय-पटल में अवरोध

  5. दृष्टि धुंधली, मंदाग्नि जैसी दिखाई देना

  6. दीर्घकाल में dristi-nasha की ओर प्रवृत्ति

सम्प्राप्ति सूत्र:
दोष – धातु – मल – स्रोतो-अवरोध – दृष्टि-दोष


 निदान (Diagnosis)

आयुर्वेद में त्रिविध परिक्षण से निदान किया जाता है—

1️⃣ दर्शन (Inspection)

  • नेत्र का रंग

  • पुतली की गति

  • लालिमा

  • नेत्र का आकार

2️⃣ स्पर्शन (Palpation)

  • सूखापन

  • दुखन

  • शिराओं में कम्पन

3️⃣ प्रश्न (History Taking)

  • रात्रि जागरण

  • स्क्रीन टाईम

  • पित्तवर्धक भोजन

  • तनाव


 आयुर्वेदिक उपचार (Complete Ayurvedic Treatment)

अब सबसे महत्वपूर्ण भाग—आयुर्वेदिक उपचार

 1. आहार-चिकित्सा (Diet Therapy)

आयुर्वेद कहता है—

“रसाद् रक्षति नेत्राणि”
अर्थात् पोषक आहार ही नेत्रों का मूल औषध है।

खाने योग्य चीज़ें

  • गाजर (Vitamin A)

  • शकरकंद

  • घी

  • आंवला

  • बादाम

  • अखरोट

  • पालक

  • त्रिफला चूर्ण

  • नारियल पानी

  • देसी गाय का दूध

परहेज

  • बहुत तीखा व खट्टा भोजन

  • तला हुआ खाना

  • अत्यधिक चाय/कॉफी

  • देर रात जागना

  • Junk food


 2. आचार-चिकित्सा (Lifestyle Therapy)

Do's (क्या करें)

  • सूर्योदय के बाद ठंडे जल से नेत्र-प्रक्षालन

  • गुनगुना घी नासिका व आँखों के किनारों पर

  • 20-20-20 Rule (हर 20 मिनट में 20 फीट दूर देखें)

  • पर्याप्त नींद

  • योग: त्राटक, प्राणायाम, पल्मिंग

Don'ts (क्या न करें)

  • तेज रोशनी में लम्बे समय तक काम

  • फोन/लैपटॉप को आँखों के बहुत पास रखना

  • धुआँ-धूल के संपर्क में बिना सुरक्षा

  • मानसिक तनाव

  • रात्रि जागरण


औषध-चिकित्सा (Ayurvedic Medicines)

 1. त्रिफला घृत

नेत्रों के लिए सर्वोत्तम औषध।

लाभ:

  • दृष्टि बढ़ाने में सहायक

  • पित्त शांत

  • नेत्र-srotas खोलता है

 2. सaptamrit Lauh

Classical formulation for eye disorders.

 3. महा त्रिफला घृतम्

 4. द्राक्षासव

पित्तशामक, lightness बढ़ाता है।

 5. ब्राह्मी / शंखपुष्पी

Optic nerve को nourish करती है।

NOTE: किसी भी दवा का उपयोग vaidya की सलाह से करें


 नेत्र तर्पण (Panchakarma Therapy)

आयुर्वेद में नेत्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा—नेत्र तर्पण

कैसे किया जाता है?

गाय के घृत को हल्का गुनगुना करके
नेत्रों को dough-ring बनाकर उसमें भरा जाता है।

लाभ:

  • दृष्टि में तीक्षणता

  • स्क्रीन strain समाप्त

  • dryness दूर

  • चश्मा नंबर स्थिर

  • पित्तदोष शांत


 योग व प्राणायाम (Yoga Therapy)

1️⃣ त्राटक

एक बिंदु पर दृष्टि स्थिर करना।

2️⃣ अनुलोम विलोम

Nerve oxygenation बढ़ाता है।

3️⃣ कपालभाति

रक्त-संचार बढ़ाता है।

4️⃣ Eye rotation अभ्यास


 विस्तार से Do’s and Don’ts 

✔ Do’s

  • प्रतिदिन ठंडे जल से नेत्र-प्रक्षालन

  • गाय का घी नासा / नेत्र कोमल भाग पर लगाना

  • पित्त शांत आहार अपनाना

  • Screens से हर 20 मिनट का ब्रेक

  • त्रिफला का नियमित सेवन

  • योग–प्राणायाम करना

❌ Don’ts

  • रात्रि जागरण न करें

  • तीखा–खट्टा भोजन न लें

  • लैपटॉप/फोन अधिक समय तक न देखें

  • धूप/धूल में आँखों को बिना सुरक्षा के न रखें

  • आँखें मलने से बचें

  • दिन में सोना उचित नहीं


 बच्चों में दृष्टि-दोष (Children’s Eye Weakness)

कारण:

  • Mobile addiction

  • Outdoor activity कम

  • Vitamin A deficiency

आयुर्वेद उपाय:

  • रोज आंवला

  • त्रिफला जल से आँखें धोना

  • रात्रि में घी

  • Milk + almonds


 30 दिन का नेत्र-सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम (30-Day Eye Strength Plan)

सप्ताह 1

  • त्रिफला जल प्रक्षालन

  • घृत सेवन

  • 20-20-20 rule

सप्ताह 2

  • नेत्र-तर्पण (यदि संभव)

  • योग + त्राटक

सप्ताह 3

  • Vitamin A diet

  • Stress removal practices

सप्ताह 4

  • Deep relaxation

  • तर्पण पुनः (यदि आवश्यक)


 FAQs

 क्या दृष्टि वापिस बढ़ सकती है?
➡ हाँ, यदि दोष imbalance के कारण है और स्थायी structural damage नहीं है।

 क्या त्रिफला रोज ले सकते हैं?
➡ हाँ, यह सुरक्षित है।


 निष्कर्ष (Conclusion)

आँखों की रोशनी प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार है।
आयुर्वेद इसका संरक्षण दोष-संतुलन, घृत-सेवन, त्रिफला, योग, और पंचकर्म द्वारा करता है।
नियमित पालन से दृष्टि स्पष्ट, प्रकाश-सहनशीलता बेहतर और dryness दूर होती है।


 Disclaimer

औषधियाँ वैद्य की सलाह से ही लें।
यदि तेज दर्द, चमक, अचानक दृष्टि कम होना जैसे लक्षण हों तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें।

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