आयुर्वेद में नेत्रों को “प्रकाश का द्वार” तथा “पित्त का मुख्य स्थान” माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है—
“चक्षु: पित्तस्थानं प्रमुखम्”
अर्थात् आँखों की दृष्टि और तेज मुख्य रूप से पित्त के संतुलन पर निर्भर करते हैं।
आधुनिक जीवनशैली में—
✔ अत्यधिक स्क्रीन उपयोग
✔ अनुचित आहार
✔ रात्रि जागरण
✔ मानसिक तनाव
नेत्र-रोगों की संख्या तेजी से बढ़ा दी है। आयुर्वेद इसका सम्पूर्ण और मूलभूत समाधान प्रस्तुत करता है।
आयुर्वेद में नेत्र को पंचमहाभूतों का समन्वय माना गया है:
तेज महाभूत → दृष्टि, प्रकाश ग्रहण
वायु महाभूत → नेत्र की गति, blinking
आप महाभूत → नेत्र की स्निग्धता
पृथ्वी महाभूत → नेत्र का आकार
आकाश महाभूत → नेत्र की गुहा (orbit)
साथ ही नेत्र-रोग मुख्यतः अष्ट-विदगार्भ (8 प्रकार के मूल विकार) से उत्पन्न होते हैं।
आयुर्वेद ने नेत्र-रोगों के कारणों को संसार-निमित्त और सम्प्राप्ति-निमित्त दो भागों में बताया है।
अत्यधिक तेज प्रकाश में काम करना
अधिक धुआँ, प्रदूषण, धूल
रात्रि जागरण
अति-मद्यपान
पित्तवर्धक भोजन (तीखा, खट्टा, गर्म)
रोते रहना / भावनात्मक तनाव
आँखों में जलन
लालिमा
धुंधलापन
दृष्टि कम होना
सूखापन
नेत्र-कंपन
अविदारण (blurred vision)
भारीपन
झिल्ली मोटी होना
पानी आना
द्रव संचय
रसधातु की कमी → पोषण अभाव
रक्तधातु विकृति → लालिमा, जलन
मज्जाधातु क्षीणता → optic nerve कमजोर
दूर की वस्तुएं धुंधली दिखना
पास के अक्षर अस्पष्ट दिखना
पलकें भारी लगना
तेज रोशनी सहन न होना
सिरदर्द
आँखों में सूखापन / जलन
पानी आना
चश्मे का नंबर बढ़ना
पढ़ते समय strain होना
देर तक देखने पर headache
आयुर्वेद के अनुसार रोग की उत्पत्ति निम्न क्रम से होती है—
दोषों का वृद्धि (Pitta & Vata)
धातुओं का क्षय
नेत्र-रक्त व स्नायु का शोष
तृतीय-पटल में अवरोध
दृष्टि धुंधली, मंदाग्नि जैसी दिखाई देना
दीर्घकाल में dristi-nasha की ओर प्रवृत्ति
सम्प्राप्ति सूत्र:
दोष – धातु – मल – स्रोतो-अवरोध – दृष्टि-दोष
आयुर्वेद में त्रिविध परिक्षण से निदान किया जाता है—
नेत्र का रंग
पुतली की गति
लालिमा
नेत्र का आकार
सूखापन
दुखन
शिराओं में कम्पन
रात्रि जागरण
स्क्रीन टाईम
पित्तवर्धक भोजन
तनाव
अब सबसे महत्वपूर्ण भाग—आयुर्वेदिक उपचार।
आयुर्वेद कहता है—
“रसाद् रक्षति नेत्राणि”
अर्थात् पोषक आहार ही नेत्रों का मूल औषध है।
गाजर (Vitamin A)
शकरकंद
घी
आंवला
बादाम
अखरोट
पालक
त्रिफला चूर्ण
नारियल पानी
देसी गाय का दूध
बहुत तीखा व खट्टा भोजन
तला हुआ खाना
अत्यधिक चाय/कॉफी
देर रात जागना
Junk food
सूर्योदय के बाद ठंडे जल से नेत्र-प्रक्षालन
गुनगुना घी नासिका व आँखों के किनारों पर
20-20-20 Rule (हर 20 मिनट में 20 फीट दूर देखें)
पर्याप्त नींद
योग: त्राटक, प्राणायाम, पल्मिंग
तेज रोशनी में लम्बे समय तक काम
फोन/लैपटॉप को आँखों के बहुत पास रखना
धुआँ-धूल के संपर्क में बिना सुरक्षा
मानसिक तनाव
रात्रि जागरण
नेत्रों के लिए सर्वोत्तम औषध।
लाभ:
दृष्टि बढ़ाने में सहायक
पित्त शांत
नेत्र-srotas खोलता है
Classical formulation for eye disorders.
पित्तशामक, lightness बढ़ाता है।
Optic nerve को nourish करती है।
NOTE: किसी भी दवा का उपयोग vaidya की सलाह से करें।
आयुर्वेद में नेत्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा—नेत्र तर्पण।
गाय के घृत को हल्का गुनगुना करके
नेत्रों को dough-ring बनाकर उसमें भरा जाता है।
दृष्टि में तीक्षणता
स्क्रीन strain समाप्त
dryness दूर
चश्मा नंबर स्थिर
पित्तदोष शांत
एक बिंदु पर दृष्टि स्थिर करना।
Nerve oxygenation बढ़ाता है।
रक्त-संचार बढ़ाता है।
प्रतिदिन ठंडे जल से नेत्र-प्रक्षालन
गाय का घी नासा / नेत्र कोमल भाग पर लगाना
पित्त शांत आहार अपनाना
Screens से हर 20 मिनट का ब्रेक
त्रिफला का नियमित सेवन
योग–प्राणायाम करना
रात्रि जागरण न करें
तीखा–खट्टा भोजन न लें
लैपटॉप/फोन अधिक समय तक न देखें
धूप/धूल में आँखों को बिना सुरक्षा के न रखें
आँखें मलने से बचें
दिन में सोना उचित नहीं
कारण:
Mobile addiction
Outdoor activity कम
Vitamin A deficiency
आयुर्वेद उपाय:
रोज आंवला
त्रिफला जल से आँखें धोना
रात्रि में घी
Milk + almonds
त्रिफला जल प्रक्षालन
घृत सेवन
20-20-20 rule
नेत्र-तर्पण (यदि संभव)
योग + त्राटक
Vitamin A diet
Stress removal practices
Deep relaxation
तर्पण पुनः (यदि आवश्यक)
क्या दृष्टि वापिस बढ़ सकती है?
➡ हाँ, यदि दोष imbalance के कारण है और स्थायी structural damage नहीं है।
क्या त्रिफला रोज ले सकते हैं?
➡ हाँ, यह सुरक्षित है।
आँखों की रोशनी प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार है।
आयुर्वेद इसका संरक्षण दोष-संतुलन, घृत-सेवन, त्रिफला, योग, और पंचकर्म द्वारा करता है।
नियमित पालन से दृष्टि स्पष्ट, प्रकाश-सहनशीलता बेहतर और dryness दूर होती है।
औषधियाँ वैद्य की सलाह से ही लें।
यदि तेज दर्द, चमक, अचानक दृष्टि कम होना जैसे लक्षण हों तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें।
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