Author — Ayurvediyaupchar Team
Traditional Ayurveda — Modern Presentation
आज के समय में एसीडिटी या अम्ल-पित्त सबसे आम लेकिन उपेक्षित रोगों में से एक है। लोग अक्सर इसे साधारण जलन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि आयुर्वेद मानता है कि अम्ल-पित्त का सही समय पर उपचार न किया जाए तो यह अल्सर, गैस्ट्राइटिस और लंबे समय में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
यह रोग केवल पेट तक सीमित नहीं, यह पाचन, मानसिक स्थिति और शरीर के रक्तविकारों से भी जुड़ा है।
पाचन अग्नि (जठराग्नि) भोजन को पचाने के लिए अम्ल एवं रस उत्पन्न करती है।
लेकिन जब आहार-विहार की गलतियों, तनाव या कब्ज के कारण अम्लता बढ़ जाती है, तब पित्त दोष विकृत हो जाता है और यह अतिरिक्त अम्ल पेट, छाती एवं गले में जलन उत्पन्न करता है — यही अवस्था अम्ल-पित्त है।
आयुर्वेद:
“जब पित्त अम्ल प्रधान हो जाए और अग्नि मंद हो, तब भोजन विष में बदल जाता है — यही अम्ल-पित्त का मूल है।”
अम्ल-पित्त केवल मसाले खाने से नहीं होता — यह आहार + दिनचर्या + मानसिक अवस्था + कब्ज के सम्मिलित प्रभाव से उत्पन्न होता है।
| गलतियाँ | प्रभाव |
|---|---|
| खट्टा, तला, तीखा भोजन | पित्त भड़कना |
| अत्यधिक चाय-कॉफी | अम्लता वृद्धि |
| बासी, फ्रिज वाला खाना | अग्नि मंद |
| शराब, धूम्रपान | जठर की क्षति |
| भूख न लगने पर भोजन | अम्ल-रस असंतुलन |
देर रात तक जागना
भोजन के बाद तुरंत लेटना
व्यायाम का अभाव
लंबे समय तक धूप या गर्मी
अनियमित जीवनशैली
चिंता
क्रोध
तनाव
बेचैनी
आयुर्वेद कहता है — “मन विकृत हो, तो पित्त विकृत होता है।”
पुरानी कब्ज रक्त विषमता बढ़ाती है, प्रकृति उस विष को जठर मार्ग से बाहर निकालने की कोशिश करती है — इसी प्रक्रिया में अम्ल-पित्त तीव्र हो जाता है।
अम्ल-पित्त धीरे-धीरे जीवन का संतुलन बिगाड़ देता है।
| प्रारंभिक लक्षण | माध्यमिक लक्षण | पुरानी अवस्था |
|---|---|---|
| भोजन बाद भारीपन | बार-बार खट्टी डकार | पेट में घाव |
| सीने में हल्की जलन | गले में तीव्र जलन | कमजोरी, चिड़चिड़ापन |
| मुँह में पानी भरना | जी मिचलाना, उल्टी | सिर दर्द, भूख कम |
| सफेद/पीली जीभ | नींद में बाधा | पाचन तंत्र कमजोर |
अम्ल-पित्त → गैस्ट्राइटिस → अल्सर → रक्तस्राव → गंभीर जटिलताएँ
इसीलिए आयुर्वेद चेतावनी देता है —
“रोग आरंभ में मिटाओ, बढ़ने पर पछताओ।”
1️⃣ कारण त्याग
2️⃣ कब्ज शमन
3️⃣ अम्ल शांत + पित्त शमन
4️⃣ अग्नि मजबूत
5️⃣ आहार-विहार नियमित
गुनगुने पानी में अल्प सोडा डालकर एनीमा
पेट हल्का होने से अम्लता और जलन घटती है
कुछ दिनों तक लगातार करना लाभकारी
“कब्ज दूर, अम्ल दूर।”
| उपाय | मात्रा | लाभ |
|---|---|---|
| गर्म पैर स्नान | 10–15 मिनट | छाती-गले की जलन तुरंत कम |
| भाप स्नान / पसीना | रोजाना | अम्ल पसीने के साथ बाहर |
| नींबू पानी गर्म → गुनगुना → सामान्य | धीरे-धीरे | अम्ल संतुलन पुनः स्थापित |
नोट:
रोग के चरम दौर में पहले गर्म पानी, फिर धीरे-धीरे मीठे → खट्टे रस शामिल करें।
आंवला चूर्ण + मिश्री — 3–3 ग्राम, दिन में 3 बार
धनिया + सौंफ + जीरा + मिश्री — चूर्ण, ठंडे जल से
| औषधि | मात्रा | सेवन |
|---|---|---|
| अविपत्तिकर चूर्ण | 3 ग्राम | भोजन बाद |
| कपर्दिका भस्म | 250 mg | ठंडे दूध से |
| चंदनासव + कनकासव | 4-4 चम्मच | बराबर पानी |
| इक्षुरक क्षार | 3 ग्राम | ठंडे जल से |
| औषधि | मात्रा | विधि |
|---|---|---|
| स्वर्ण सूतशेखर रस | 1-1 गोली | आंवला रस के साथ |
| उसीरासव | 2 चम्मच | दिन में 2 बार |
| भूनिम्बादि काढ़ा | — | नियमित सेवन |
नियमितता से कुछ ही सप्ताह में सुधार दिखाई देता है।
1️⃣ प्रातः — आंवले के 2 मुरब्बे
2️⃣ भोजन बाद — चंदनासव 4 चम्मच + पानी
3️⃣ 30 मिनट बाद — अविपत्तिकर चूर्ण + नारियल पानी
4️⃣ रात्रि — सूतशेखर रस + कामदुधा रस + शंख भस्म
➡ शहद के साथ 40 पुड़ियाँ बनाकर सेवन
5️⃣ हरड़ + मुनक्का + धनिया + पीपल + मिश्री चूर्ण
➡ दिन में 3 बार शहद के साथ
यह व्यवस्था पुराने अम्ल-पित्त में विशेष रूप से लाभकारी है।
| रोगी स्थिति | क्या करें? |
|---|---|
| स्वस्थ व सबल | प्राणायाम + आसन — भुजंगासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन |
| दुर्बल | नियमित टहलना + लंबी गहरी सांसें |
नारियल पानी
खीरा, लौकी, परवल, तरोई
केला, आंवला, पपीता
दलिया, चावल
बिना मसाले की सब्जियों का सूप
नारियल तेल, जैतून तेल
मसालेदार, तला-भुना
चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक
बासी भोजन
रसायनयुक्त स्नैक्स
शराब, धूम्रपान
भरपेट खाना, देर रात खाना
1️⃣ समय पर भोजन, समय पर सोना
2️⃣ भोजन के बाद 10 मिनट वज्रासन
3️⃣ पानी धीरे-धीरे बैठकर पिएँ
4️⃣ तनाव कम करें — ध्यान, प्राणायाम
5️⃣ कब्ज से बचें — पानी + रेशा + नींद
अम्ल-पित्त वह रोग है जो गलत आदतों से पैदा होता है और सही आदतों से खत्म होता है।
यदि कारण त्याग, आहार नियंत्रण, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक औषधियाँ नियमित रूप से अपनाई जाएँ —
➡ अम्ल-पित्त का स्थाई समाधान संभव है।
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