(Ayurvedic Beauty Remedies – Detailed Point Wise)
आयुर्वेद केवल रोगों की चिकित्सा का शास्त्र नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवन विज्ञान है। आयुर्वेद में शरीर, मन और आत्मा—तीनों के संतुलन को ही वास्तविक सौंदर्य माना गया है। चेहरे की चमक केवल बाहरी लेपों से नहीं आती, बल्कि रक्त की शुद्धता, पाचन की शक्ति और मन की शांति से आती है।
नीचे दिए गए योग आयुर्वेदिक ग्रंथों, लोकानुभव और वैदिक परंपरा से संकलित हैं। इनका उद्देश्य स्थायी, प्राकृतिक और सुरक्षित सौंदर्य प्रदान करना है।
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व दूब (घास) पर पड़ी ओस की बूंदों को उंगलियों से लेकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगाना चाहिए।
यह ओस जल प्रकृति की शुद्ध ऊर्जा से भरपूर होता है। इससे त्वचा के रोमछिद्र सक्रिय होते हैं, रक्तसंचार बढ़ता है और चेहरे पर स्वाभाविक तेज आता है।
यह योग विशेष रूप से रूखी और थकी हुई त्वचा के लिए लाभकारी है।
मक्खन, गुड़, शहद और बेर के बीज की गिरी को समान मात्रा में लेकर पीसें। इसमें वरुणा की छाल और थोड़ा कच्चा बकरी का दूध मिलाकर लेप बनाएं।
यह लेप त्वचा को पोषण देता है, रंग साफ करता है और शरीर में स्निग्धता बढ़ाता है।
नियमित प्रयोग से चेहरा कोमल, उज्ज्वल और आकर्षक बनता है।
गाय के दूध के फेन में शुद्ध हल्दी चूर्ण मिलाकर चेहरे पर लेप करें।
हल्दी रक्तशोधक है और दूध त्वचा को पोषण देता है। यह योग मुंहासे, दाग और सूजन को कम करता है।
इससे चेहरे का लावण्य और कांति बढ़ती है।
छिलका रहित जौं का आटा, मुलहठी और लोध बराबर मात्रा में दूध के साथ पीसें।
यह लेप तैलीय त्वचा, दाग-धब्बे और झाइयों में विशेष लाभ देता है।
नियमित उपयोग से त्वचा स्वच्छ, उजली और संतुलित रहती है।
मसूर की दाल को घी में हल्का भूनकर दूध में 5 घंटे भिगो दें। फूलने पर पीसकर चेहरे पर लगाएं।
यह योग त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है।
चेहरा कांतिमय और मुलायम हो जाता है।
सफेद चंदन, खस, कूट नीलोत्पल और सरफोंका को वासी दही के पानी में पीसकर लेप बनाएं।
यह लेप त्वचा को ठंडक देता है, झुर्रियों को कम करता है और उम्र के प्रभाव को धीमा करता है।
विशेष रूप से बढ़ती उम्र की त्वचा के लिए उपयोगी।
दारूहल्दी, सफेद सरसों, हल्दी, मंजीठ, गेरू और घी को बकरी के दूध में पीसकर चेहरे पर लगाएं।
यह योग रक्तशुद्धि करता है और त्वचा को भीतर से स्वस्थ बनाता है।
नियमित प्रयोग से मुख सौंदर्य अवर्णनीय हो जाता है।
सेमल के कांटों को बारीक पीसकर दूध के साथ लेप बनाएं।
यह दुर्लभ आयुर्वेदिक प्रयोग त्वचा की अशुद्धियां दूर करता है और चेहरे की रंगत सुधारता है।
पुराने वैद्य इस योग को अत्यंत प्रभावी मानते हैं।
भुने हुए मेथी दानों का चूर्ण एक चम्मच मात्रा में गर्म दूध के साथ दिन में तीन बार लें।
यह पाचन सुधारता है, रक्तशुद्धि करता है और हार्मोन संतुलन में सहायक होता है।
इससे भीतर से सौंदर्य बढ़ता है, जो चेहरे पर स्पष्ट दिखता है।
रात में मेथी दाने भिगो दें। सुबह पीसकर स्त्री के दूध में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं।
यह रूसी नष्ट करता है, बालों को मजबूत बनाता है और गिरना कम करता है।
एक माह में बालों की प्राकृतिक सुंदरता लौट आती है।
चावल धोने के बाद बचे पानी में नींबू निचोड़ लें। शैंपू के बाद इसे बालों में लगाएं।
यह बालों को पोषण देता है, चमक बढ़ाता है और रसायन-मुक्त कंडीशनर का कार्य करता है।
खसखस, कचूर, नागरमोथा, आमाहल्दी, लाल चंदन और सूखे नारंगी छिलकों का चूर्ण बनाएं।
स्नान से पहले पूरे शरीर पर मलें।
यह त्वचा के रोमछिद्र खोलता है, मुंहासे और काले दाग हटाता है तथा शरीर की प्राकृतिक आभा बढ़ाता है।
मसूर दाल पाउडर, खाने का सोडा, टाटरी और यूकेलिप्टस तेल मिलाकर प्रयोग करें।
नियमित लगाने से चेहरे के पुराने दाग-धब्बे हल्के पड़ जाते हैं और त्वचा साफ दिखती है।
बादाम की मींगी, सफेद चंदन, गुलाब जल और कपूर मिलाकर लेप बनाएं।
यह त्वचा को गहराई से पोषण देता है और रंगत सुधारता है।
नियमित प्रयोग से काली त्वचा भी निखर उठती है।
बादाम तेल, चंदन तेल, कपूर और ग्लिसरीन को विधि से मिलाकर क्रीम बनाएं।
यह क्रीम चेहरे के दाग-धब्बे, रूखापन और बारीक झुर्रियों में उपयोगी है।
मेंहदी के पत्ते, साबुत आंवला, हरड़ और बहेड़ा बराबर मात्रा में पीसें।
स्त्री के दूध के साथ लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं।
यह योग काले दाग-धब्बों को धीरे-धीरे समाप्त करता है।
चमेली की पत्तियां, कुल्थी, चिरोंजी को चमेली तेल में पीसकर मुंहासों पर लगाएं।
यह सूजन कम करता है और जड़ से मुंहासे हटाने में सहायक है।
बादाम खली, रीठे का छिलका, चावल का आटा और लोहबान मिलाकर लेप बनाएं।
नियमित प्रयोग से पुराने चेचक के निशान हल्के पड़ते हैं।
अरंडी के तेल में थोड़ा बेसन मिलाकर चेहरे पर मलें।
यह त्वचा को साफ करता है और चेहरे को चांद जैसी चमक देता है।
शुद्ध खर्पर को गुलाब जल में भिगोकर छान लें।
इस जल को कपड़े से मुंहासों पर लगाएं।
नियमित प्रयोग से मुंहासे शांत हो जाते हैं।
विशेष विधि से तैयार मसूर दाल और अखरोट का चूर्ण घी के साथ चेहरे पर लगाएं।
यह मुंहासे, दाग और त्वचा की अशुद्धियां दूर करता है।
किसी भी योग से पहले पैच टेस्ट करें
धैर्य रखें, आयुर्वेद धीरे असर करता है
नियमितता ही सफलता की कुंजी है
✍️ लेखक: AyurvediyaUpchar Team
? उद्देश्य: प्राकृतिक, सुरक्षित और स्थायी सौंदर्य
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