खतरनाक बीमारी: भैंसिया दाद (Herpes Zoster) – जनेऊ या shingles का घरेलू उपचार और परहेज

Oct 27, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
खतरनाक बीमारी: भैंसिया दाद (Herpes Zoster) – जनेऊ या shingles का घरेलू उपचार और परहेज

प्रस्तावना

भैंसिया दाद, जिसे जनेऊ, नागिन, नांगऊ, या मेडिकल भाषा में Herpes Zoster (Shingles) कहा जाता है, एक अत्यंत दर्दनाक, सूजनयुक्त और तंत्रिका-जनित वायरल रोग है। यह रोग सामान्य दाद-खुजली जैसा नहीं होता, बल्कि इसकी जड़ में एक विशिष्ट वायरस—Varicella Zoster Virus (VZV)—सक्रिय होता है। यही वह वायरस है जो बचपन में होने वाले Chicken Pox (चेचक) का कारण बनता है। चेचक ठीक होने के बाद भी यह वायरस शरीर की नसों में सुप्त अवस्था में छिपा रहता है, और प्रतिरक्षा शक्ति कमजोर होते ही पुनः सक्रिय होकर Herpes Zoster का रूप ले लेता है।

भारत में इसे “भैंसिया दाद” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि फफोलों का फैलाव भैंस की रस्सी या जनेऊ की तरह शरीर के एक हिस्से में रेखानुमा दिखाई देता है। यह रोग प्रायः जीवन के 40 वर्ष के बाद अधिक देखा जाता है, लेकिन आज तनावपूर्ण जीवनशैली, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और दवाइयों के बढ़ते उपयोग के कारण यह युवाओं में भी तेज़ी से बढ़ रहा है।

Herpes Zoster न सिर्फ त्वचा की समस्या है, बल्कि यह तंत्रिकाओं (nerves) को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यही कारण है कि इसमें होने वाला दर्द कई बार महीनों तक बना रह सकता है।


Herpes Zoster (भैंसिया दाद) क्या है?

Herpes Zoster एक वायरल संक्रमण है जो:

  • त्वचा की नसों और

  • नसों को घेरे हुए डर्मेटोम (Dermatome) क्षेत्र

को प्रभावित करता है। यह संक्रमण आमतौर पर शरीर के किसी एक ही हिस्से में दिखाई देता है—सीने का बांया या दांया हिस्सा, गर्दन, पीठ, पेट, चेहरा, आँख, या कमर के आसपास।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • छोटे-छोटे पानी भरे फफोले

  • जलन, एसिड जैसा दर्द

  • त्वचा में सूजन और चुभन

  • शरीर के एक ही हिस्से में पट्टी-जैसा दाद

ये फफोले 10–14 दिनों में सूखकर पपड़ी बन जाते हैं, लेकिन दर्द कई सप्ताह से लेकर कई महीनों तक रह सकता है।


Herpes Zoster और Herpes Simplex में अंतर

अक्सर लोग Herpes Zoster (Shingles) और सामान्य Herpes Simplex को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं।

विशेषता                     Herpes Zoster      Herpes Simplex
कारण वायरसVaricella Zoster        HSV-1, HSV-2
प्रभावित क्षेत्रशरीर का एक हिस्सा, नसें       मुंह, होठ, जननांग
दर्दबहुत तीव्र, तंत्रिका-जनित                      हल्का से मध्यम
पुनरावृत्तिकभी-कभीबार-बार हो सकती है
गंभीरताअधिककम

इस लेख में हम Herpes Zoster पर ही फोकस कर रहे हैं।


यह बीमारी किसे और क्यों होती है?

Herpes Zoster अधिकतर उन्हीं लोगों को होता है जिन्हें कभी Chicken Pox (चेचक) हुआ हो।

मुख्य कारण:

  1. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

  2. अत्यधिक तनाव

  3. बढ़ती उम्र (40+ आयु)

  4. स्टेरॉयड या कैंसर की दवाइयाँ

  5. HIV/AIDS या अन्य इम्युनिटी कम करने वाले रोग

  6. डायबिटीज़ या लंबे समय की बीमारी

Virus नसों में छिपकर बैठा रहता है। जैसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नीचे जाती है, वह सक्रिय होकर Herpes Zoster बना देता है।


Herpes Zoster के प्रमुख लक्षण

लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। ज्यादातर मरीजों को शुरुआत में दर्द महसूस होता है, और बाद में दाने दिखाई देते हैं।

1. प्रारंभिक लक्षण (Prodromal Stage)

  • जलन

  • चुभन

  • तेज़ दर्द (Electrifying Pain)

  • कमजोरी

  • हल्का बुखार

यह अवस्था 1–3 दिनों तक रहती है।


2. फफोलों का बनना

  • लाल दाने → पानी भरे फफोले

  • समूह में फफोले

  • स्पर्श करते ही तेज़ दर्द

  • कभी मवाद भी बन सकता है


3. पपड़ी बनना

10–14 दिनों में फफोले सूखकर पपड़ी (scab) बन जाते हैं।


4. Post Herpetic Neuralgia (PHN)

यह सबसे दर्दनाक स्थितियों में से एक है। इसमें दाने ठीक होने के बाद भी:

  • नसें कमजोर पड़ जाती हैं

  • झनझनाहट

  • जलन

  • महीनों या कभी-कभी वर्षों तक दर्द

PHN अधिकतर बुजुर्गों में होता है।


Herpes Zoster के प्रकार

Herpes Zoster कई रूपों में मिलता है:

1. Zoster Ophthalmicus

आँख को प्रभावित करता है। यह बहुत खतरनाक होता है और दृष्टि तक कमजोर कर सकता है।

2. Zoster Oticus

कान के क्षेत्र में, जिससे सुनने की समस्या व चक्कर आ सकते हैं।

3. Zoster Generalized

पूरे शरीर में फैल जाता है—दुर्लभ लेकिन गंभीर।

4. Oral Herpes (मुंह पर)

चेहरे और होंठ के आसपास।

5. Genital Herpes (जननांग क्षेत्र)

अत्यंत दर्दनाक और संवेदनशील।


Herpes Zoster के घरेलू उपचार (Home Remedies)

ये उपाय लक्षणों को कम करने में बेहद प्रभावी होते हैं।


1. सामान्य देखभाल एवं सावधानियाँ

  • घाव या फफोलों को कभी न खुरचें

  • ठंडी पट्टी, गीला कपड़ा या बर्फ राहत देता है

  • गर्मी, धूप, पसीना—लक्षण बढ़ाते हैं

  • ढीले सूती कपड़े पहनें

  • पानी अधिक पिएँ

  • क्षेत्र को साफ और सूखा रखें


2. Essential Oils (टी ट्री व लैवेंडर)

कैसे काम करते हैं:

  • एंटी-वायरल

  • एंटी-इन्फ्लेमेटरी

  • एंटीसेप्टिक

उपयोग:

  • 3–4 बूंद टी ट्री या लैवेंडर ऑइल

  • 1 चम्मच नारियल तेल में मिलाएँ

  • दिन में 2–3 बार लगाएँ


3. ब्लैक टी बैग थेरेपी

काली चाय में मौजूद Tannins एंटीवायरल होते हैं।

उपयोग:

  • टी बैग को फ्रिज में ठंडा करें

  • 10–15 मिनट प्रभावित स्थान पर रखें

  • दिन में 2–3 बार


4. Capsaicin (प्राकृतिक दर्द निवारक)

काली मिर्च से प्राप्त यह तत्व दर्द को कम करता है और तंत्रिकाओं को शांत करता है।

  • कैपसाइसिन क्रीम डॉक्टर की सलाह पर लगाएँ

  • यह Post-Herpetic Neuralgia में भी लाभकारी है


5. बेकिंग सोडा पैक

खुजली कम करने में सर्वोत्तम।

उपयोग:

  • 1 चम्मच बेकिंग सोडा + थोड़ा पानी

  • पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाएँ

  • दिन में 2–3 बार


6. Lemon Balm (लेमन बाम)

Herpes Virus को रोकने वाले गुण।

  • लेमन बाम चाय बनाकर ठंडा करें

  • कॉटन से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएँ

  • दिन में 2 बार


7. Aloe Vera (एलोवेरा)

  • त्वचा ठंडी होती है

  • घाव तेजी से भरते हैं

  • सूजन कम होती है


8. मुलेठी की जड़ (Licorice Root)

मुलेठी में Glycyrrhizin होता है, जो वायरस को कमजोर करता है।

उपयोग:

  • मुलेठी पाउडर + पानी

  • पेस्ट बनाकर दिन में 2 बार लगाएँ


आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से Herpes Zoster

आयुर्वेद में इसे Visarpa या Agnivisarpa से जोड़ा जाता है।

इसके अनुसार रोग के कारण:

  • पित्त दोष की वृद्धि

  • रक्त में दूषण

  • तनाव और अनियमित दिनचर्या

  • ओज क्षय (कमजोर इम्यूनिटी)


आयुर्वेदिक औषधियाँ (केवल चिकित्सक की सलाह से)

1. गिलोय घन वटी

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।

2. नीम पत्ता रस

रक्त शुद्धि में सहायक।

3. खदिरादि वटी

त्वचा के रोगों में प्रभावी।

4. मंजिष्ठादि क्वाथ

रक्त व त्वचा विकारों में उपयोगी।

5. हरिद्रा खंड

सूजन और संक्रमण कम करता है।

6. अश्वगंधा

तनाव कम करके इम्यूनिटी बढ़ाती है।


आहार और परहेज (Diet & Restrictions)

✔ खाने योग्य आहार

1. लाइसिन (Lysine) युक्त भोजन

यह वायरस की वृद्धि रोकता है।

  • दालें

  • मछली

  • चिकन

  • अंडे

  • सब्जियाँ

2. हरी पत्तेदार सब्जियाँ

Indole-3-Carbinol मौजूद होता है।

  • पत्ता गोभी

  • फूलगोभी

  • ब्रसल्स स्प्राउट्स

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले भोजन

  • हल्दी

  • अदरक

  • लहसुन

  • आंवला

  • नींबू

  • नारियल पानी


❌ जिनसे परहेज करें

1. अर्जिनिन युक्त खाद्य पदार्थ

यह वायरस की वृद्धि बढ़ाता है।

  • मूंगफली

  • बादाम

  • चॉकलेट

  • कैफीन

2. रिफाइंड शुगर

3. पैकेज्ड फूड

4. तला-भुना भोजन


योग और प्राणायाम

तनाव Herpes Zoster का सबसे बड़ा ट्रिगर है।

लाभदायक योगासन:

  • भुजंगासन

  • वज्रासन

  • ताड़ासन

  • हल्के स्ट्रेच

प्राणायाम:

  • अनुलोम-विलोम

  • भ्रामरी

  • कपालभाति (हल्की मात्रा)


आधुनिक चिकित्सा में उपचार

1. एंटीवायरल दवाइयाँ

  • Acyclovir

  • Valacyclovir

  • Famciclovir

समय: शुरुआत के 72 घंटे में लेने से सबसे अच्छा परिणाम मिलता है।

2. दर्द निवारक

  • NSAIDs

  • Gabapentin (PHN में उपयोग)

3. क्रीम/लोशन

  • कैपसाइसिन

  • कैलामाइन लोशन


संभावित जटिलताएँ

  • Post-Herpetic Neuralgia

  • आँखों का नुकसान

  • बैक्टीरियल संक्रमण

  • त्वचा पर स्थायी निशान


रोग की अवधि

  • दाने 2–3 हफ्तों में ठीक

  • दर्द 1–6 महीने तक

  • दुर्लभ मामलों में 1 वर्ष तक


बच्चों और बुजुर्गों में Herpes Zoster

बच्चों में:

हो सकता है, लेकिन कम गंभीर।

बुजुर्गों में:

PHN का खतरा ज्यादा, दर्द अधिक।


जीवनशैली में अपनाएँ ये बातें

  • तनाव न लें

  • नींद 7–8 घंटे

  • हल्का व्यायाम

  • पौष्टिक भोजन

  • धूप व गर्मी से बचें


FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. क्या भैंसिया दाद छूत का रोग है?

सामान्य रूप से नहीं, लेकिन फफोलों के द्रव में वायरस होता है।
असावधानी न बरतें।


2. क्या यह बार-बार हो सकता है?

हाँ, लेकिन दुर्लभ। कमजोर प्रतिरक्षा में दोबारा हो सकता है।


3. क्या यह घरेलू उपचार से ठीक हो सकता है?

हाँ, अधिकांश मामलों में दाने 2–3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं।


4. क्या दाने खरोंचने से निशान पड़ते हैं?

हाँ। इसलिए खरोंचने से बचें।


5. क्या यह मानसिक तनाव से बढ़ता है?

हाँ। तनाव इसकी मुख्य वजहों में से एक है।


निष्कर्ष

भैंसिया दाद (Herpes Zoster) एक दर्दनाक वायरस जनित रोग है जो शरीर की नसों को प्रभावित करता है। इसके उपचार में सामान्य देखभाल, आयुर्वेदिक उपाय, उचित आहार, तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकतर लोग बिना किसी बड़ी दवा के 2–3 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दर्द लंबे समय तक रह सकता है।

यदि संक्रमण फैलने लगे, आँख या कान के पास हो, तेज़ बुखार आए, या दर्द बहुत बढ़े — तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है।

Recent Posts

Fatty Liver Ka Safaya: 7 Dino Mein Liver Detox Karne Ka Complete Ayurvedic Guide

Feb 01, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

AYURVEDIYAUPCHAR

At AyurvediyaUpchar, we are dedicated to bringing you the ancient wisdom of Ayurveda to support your journey toward holistic well-being. Our carefully crafted treatments, products, and resources are designed to balance mind, body, and spirit for a healthier, more harmonious life. Explore our range of services and products inspired by centuries-old traditions for natural healing and wellness.
आयुर्वेदीय उपचार में, हम आपको आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को समग्र कल्याण की ओर आपकी यात्रा में सहायता करने के लिए समर्पित हैं। हमारे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए उपचार, उत्पाद और संसाधन स्वस्थ, अधिक सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्राकृतिक उपचार और कल्याण के लिए सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हमारी सेवाओं और उत्पादों की श्रृंखला का अन्वेषण करें।

All categories
Flash Sale
Todays Deal