भैंसिया दाद, जिसे जनेऊ, नागिन, नांगऊ, या मेडिकल भाषा में Herpes Zoster (Shingles) कहा जाता है, एक अत्यंत दर्दनाक, सूजनयुक्त और तंत्रिका-जनित वायरल रोग है। यह रोग सामान्य दाद-खुजली जैसा नहीं होता, बल्कि इसकी जड़ में एक विशिष्ट वायरस—Varicella Zoster Virus (VZV)—सक्रिय होता है। यही वह वायरस है जो बचपन में होने वाले Chicken Pox (चेचक) का कारण बनता है। चेचक ठीक होने के बाद भी यह वायरस शरीर की नसों में सुप्त अवस्था में छिपा रहता है, और प्रतिरक्षा शक्ति कमजोर होते ही पुनः सक्रिय होकर Herpes Zoster का रूप ले लेता है।
भारत में इसे “भैंसिया दाद” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि फफोलों का फैलाव भैंस की रस्सी या जनेऊ की तरह शरीर के एक हिस्से में रेखानुमा दिखाई देता है। यह रोग प्रायः जीवन के 40 वर्ष के बाद अधिक देखा जाता है, लेकिन आज तनावपूर्ण जीवनशैली, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और दवाइयों के बढ़ते उपयोग के कारण यह युवाओं में भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
Herpes Zoster न सिर्फ त्वचा की समस्या है, बल्कि यह तंत्रिकाओं (nerves) को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यही कारण है कि इसमें होने वाला दर्द कई बार महीनों तक बना रह सकता है।
Herpes Zoster एक वायरल संक्रमण है जो:
त्वचा की नसों और
नसों को घेरे हुए डर्मेटोम (Dermatome) क्षेत्र
को प्रभावित करता है। यह संक्रमण आमतौर पर शरीर के किसी एक ही हिस्से में दिखाई देता है—सीने का बांया या दांया हिस्सा, गर्दन, पीठ, पेट, चेहरा, आँख, या कमर के आसपास।
छोटे-छोटे पानी भरे फफोले
जलन, एसिड जैसा दर्द
त्वचा में सूजन और चुभन
शरीर के एक ही हिस्से में पट्टी-जैसा दाद
ये फफोले 10–14 दिनों में सूखकर पपड़ी बन जाते हैं, लेकिन दर्द कई सप्ताह से लेकर कई महीनों तक रह सकता है।
अक्सर लोग Herpes Zoster (Shingles) और सामान्य Herpes Simplex को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं।
| विशेषता | Herpes Zoster | Herpes Simplex |
|---|---|---|
| कारण वायरस | Varicella Zoster | HSV-1, HSV-2 |
| प्रभावित क्षेत्र | शरीर का एक हिस्सा, नसें | मुंह, होठ, जननांग |
| दर्द | बहुत तीव्र, तंत्रिका-जनित | हल्का से मध्यम |
| पुनरावृत्ति | कभी-कभी | बार-बार हो सकती है |
| गंभीरता | अधिक | कम |
इस लेख में हम Herpes Zoster पर ही फोकस कर रहे हैं।
Herpes Zoster अधिकतर उन्हीं लोगों को होता है जिन्हें कभी Chicken Pox (चेचक) हुआ हो।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
अत्यधिक तनाव
बढ़ती उम्र (40+ आयु)
स्टेरॉयड या कैंसर की दवाइयाँ
HIV/AIDS या अन्य इम्युनिटी कम करने वाले रोग
डायबिटीज़ या लंबे समय की बीमारी
Virus नसों में छिपकर बैठा रहता है। जैसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नीचे जाती है, वह सक्रिय होकर Herpes Zoster बना देता है।
लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। ज्यादातर मरीजों को शुरुआत में दर्द महसूस होता है, और बाद में दाने दिखाई देते हैं।
जलन
चुभन
तेज़ दर्द (Electrifying Pain)
कमजोरी
हल्का बुखार
यह अवस्था 1–3 दिनों तक रहती है।
लाल दाने → पानी भरे फफोले
समूह में फफोले
स्पर्श करते ही तेज़ दर्द
कभी मवाद भी बन सकता है
10–14 दिनों में फफोले सूखकर पपड़ी (scab) बन जाते हैं।
यह सबसे दर्दनाक स्थितियों में से एक है। इसमें दाने ठीक होने के बाद भी:
नसें कमजोर पड़ जाती हैं
झनझनाहट
जलन
महीनों या कभी-कभी वर्षों तक दर्द
PHN अधिकतर बुजुर्गों में होता है।
Herpes Zoster कई रूपों में मिलता है:
आँख को प्रभावित करता है। यह बहुत खतरनाक होता है और दृष्टि तक कमजोर कर सकता है।
कान के क्षेत्र में, जिससे सुनने की समस्या व चक्कर आ सकते हैं।
पूरे शरीर में फैल जाता है—दुर्लभ लेकिन गंभीर।
चेहरे और होंठ के आसपास।
अत्यंत दर्दनाक और संवेदनशील।
ये उपाय लक्षणों को कम करने में बेहद प्रभावी होते हैं।
घाव या फफोलों को कभी न खुरचें
ठंडी पट्टी, गीला कपड़ा या बर्फ राहत देता है
गर्मी, धूप, पसीना—लक्षण बढ़ाते हैं
ढीले सूती कपड़े पहनें
पानी अधिक पिएँ
क्षेत्र को साफ और सूखा रखें
कैसे काम करते हैं:
एंटी-वायरल
एंटी-इन्फ्लेमेटरी
एंटीसेप्टिक
उपयोग:
3–4 बूंद टी ट्री या लैवेंडर ऑइल
1 चम्मच नारियल तेल में मिलाएँ
दिन में 2–3 बार लगाएँ
काली चाय में मौजूद Tannins एंटीवायरल होते हैं।
उपयोग:
टी बैग को फ्रिज में ठंडा करें
10–15 मिनट प्रभावित स्थान पर रखें
दिन में 2–3 बार
काली मिर्च से प्राप्त यह तत्व दर्द को कम करता है और तंत्रिकाओं को शांत करता है।
कैपसाइसिन क्रीम डॉक्टर की सलाह पर लगाएँ
यह Post-Herpetic Neuralgia में भी लाभकारी है
खुजली कम करने में सर्वोत्तम।
उपयोग:
1 चम्मच बेकिंग सोडा + थोड़ा पानी
पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाएँ
दिन में 2–3 बार
Herpes Virus को रोकने वाले गुण।
लेमन बाम चाय बनाकर ठंडा करें
कॉटन से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएँ
दिन में 2 बार
त्वचा ठंडी होती है
घाव तेजी से भरते हैं
सूजन कम होती है
मुलेठी में Glycyrrhizin होता है, जो वायरस को कमजोर करता है।
उपयोग:
मुलेठी पाउडर + पानी
पेस्ट बनाकर दिन में 2 बार लगाएँ
आयुर्वेद में इसे Visarpa या Agnivisarpa से जोड़ा जाता है।
इसके अनुसार रोग के कारण:
पित्त दोष की वृद्धि
रक्त में दूषण
तनाव और अनियमित दिनचर्या
ओज क्षय (कमजोर इम्यूनिटी)
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
रक्त शुद्धि में सहायक।
त्वचा के रोगों में प्रभावी।
रक्त व त्वचा विकारों में उपयोगी।
सूजन और संक्रमण कम करता है।
तनाव कम करके इम्यूनिटी बढ़ाती है।
यह वायरस की वृद्धि रोकता है।
दालें
मछली
चिकन
अंडे
सब्जियाँ
Indole-3-Carbinol मौजूद होता है।
पत्ता गोभी
फूलगोभी
ब्रसल्स स्प्राउट्स
हल्दी
अदरक
लहसुन
आंवला
नींबू
नारियल पानी
यह वायरस की वृद्धि बढ़ाता है।
मूंगफली
बादाम
चॉकलेट
कैफीन
तनाव Herpes Zoster का सबसे बड़ा ट्रिगर है।
भुजंगासन
वज्रासन
ताड़ासन
हल्के स्ट्रेच
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
कपालभाति (हल्की मात्रा)
Acyclovir
Valacyclovir
Famciclovir
समय: शुरुआत के 72 घंटे में लेने से सबसे अच्छा परिणाम मिलता है।
NSAIDs
Gabapentin (PHN में उपयोग)
कैपसाइसिन
कैलामाइन लोशन
Post-Herpetic Neuralgia
आँखों का नुकसान
बैक्टीरियल संक्रमण
त्वचा पर स्थायी निशान
दाने 2–3 हफ्तों में ठीक
दर्द 1–6 महीने तक
दुर्लभ मामलों में 1 वर्ष तक
हो सकता है, लेकिन कम गंभीर।
PHN का खतरा ज्यादा, दर्द अधिक।
तनाव न लें
नींद 7–8 घंटे
हल्का व्यायाम
पौष्टिक भोजन
धूप व गर्मी से बचें
सामान्य रूप से नहीं, लेकिन फफोलों के द्रव में वायरस होता है।
असावधानी न बरतें।
हाँ, लेकिन दुर्लभ। कमजोर प्रतिरक्षा में दोबारा हो सकता है।
हाँ, अधिकांश मामलों में दाने 2–3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं।
हाँ। इसलिए खरोंचने से बचें।
हाँ। तनाव इसकी मुख्य वजहों में से एक है।
भैंसिया दाद (Herpes Zoster) एक दर्दनाक वायरस जनित रोग है जो शरीर की नसों को प्रभावित करता है। इसके उपचार में सामान्य देखभाल, आयुर्वेदिक उपाय, उचित आहार, तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकतर लोग बिना किसी बड़ी दवा के 2–3 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दर्द लंबे समय तक रह सकता है।
यदि संक्रमण फैलने लगे, आँख या कान के पास हो, तेज़ बुखार आए, या दर्द बहुत बढ़े — तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है।
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