Author: Ayurvediya Upchar Team
Updated: Dec 2025
प्रकृति का नियम है कि समय के साथ शरीर की प्रत्येक क्रिया में परिवर्तन आता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है—त्वचा पर झुर्रियाँ आती हैं, बाल सफ़ेद होते हैं, दृष्टि कमजोर होती है, पाचन धीमा होता है—उसी तरह मस्तिष्क की स्मरण शक्ति, ग्रहण शक्ति और एकाग्रता भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
यह प्रक्रिया सामान्य है, लेकिन आजकल समस्या यह है कि याद्दाश्त की कमी सिर्फ बुजुर्गों में नहीं, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी देखने को मिल रही है।
आयुर्वेद के अनुसार बुद्धि तीन तरह की होती है:
1️⃣ श्रुति / ग्रहण शक्ति (Retention Power) — जो सुनी या देखी बात को ग्रहण करती है।
2️⃣ धारणा शक्ति (Absorption Power) — जो ग्रहण की गई बात को दिमाग में बैठाती है।
3️⃣ स्मृति शक्ति (Recall Memory) — जो संचित ज्ञान को आवश्यकता पड़ने पर याद दिलाती है।
इन तीनों में कमी का नाम है – याद्दाश्त की कमी।
आधुनिक जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन और असंतुलित भोजन इसके बड़े कारण हैं।
बहुत लोग कहते हैं — “मुंह तक बात आती है पर याद नहीं आती…” यह स्मृति शक्ति कम होने का संकेत है।
कुछ सामान्य लक्षण:
नाम, तारीख या नंबर भूल जाना
चीज़ें रखने के बाद जगह भूल जाना
पढ़ा हुआ कुछ ही मिनट में याद न रहना
बातचीत में शब्द याद न आना
काम में ध्यान न लगना
फोन के बिना किसी नंबर की कल्पना न कर पाना
बार-बार चीजें चेक करना (दरवाज़ा बंद किया या नहीं?)
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बढ़ती उम्र में दिमाग में न्यूरॉन्स के बीच के कनेक्शन धीमे हो जाते हैं।
Acetylcholine की कमी — याददाश्त घटने का मुख्य कारण
Blood Flow कम होना — मस्तिष्क को पोषण कम पहुंचता है
Brain Shrinkage (Hippocampus) — याद रखने वाले हिस्से का सिकुड़ना
Free Radicals Damage — कोशिकाएँ कमजोर होती हैं
यह प्रक्रिया स्वाभाविक है, मगर उचित पोषण, व्यायाम और दिनचर्या इसे धीमा कर सकती है।
आयुर्वेद में मन और शरीर एक-दूसरे से जुड़े हैं।
तीन दोषों में वात का बढ़ना मस्तिष्क पर नकारात्मक असर डालता है।
अत्यधिक चिंता, तनाव, अनियमित दिनचर्या → पाचन कमजोर
पाचन कमजोर → रसधातु कमजोर
रसधातु कमजोर → बुद्धि और ओज कमजोर
आयुर्वेद कहता है:
जहाँ पाचन अच्छा, वहाँ बुद्धि प्रखर।
इसलिए याददाश्त का इलाज सिर्फ दिमाग नहीं, पूरे शरीर को संतुलित करना है।
नींद कम होना
बढ़ती उम्र
रक्त संचार कम
पोषण की कमी
हार्मोनल बदलाव
देर रात सोना
सुबह देर तक सोना
तनाव, चिंता
ज़्यादा स्क्रीन टाइम
शारीरिक गतिविधि का अभाव
तले-भुने भोजन
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक
ज्यादा शक्कर
कृत्रिम स्वाद वाले खाद्य
लगातार मल्टीटास्किंग
सोशल मीडिया एडिक्शन
सूचना का बोझ (Information overload)
आयुर्वेद में कई ऐसे नुस्खे हैं जो बुद्धि, स्मृति और एकाग्रता को बढ़ाते हैं।
ये उपाय निरंतर 40–60 दिन करने पर अच्छे परिणाम देते हैं।
कैसे लें:
रात को 1 गिलास गर्म गाय का दूध, उसमें
1 चम्मच गाय का घी
1 चम्मच मिश्री
फायदा:
यह मिश्रण मस्तिष्क की कोशिकाओं को पोषण देता है और न्यूरॉन्स कनेक्शन मजबूत करता है।
दिमाग शांत होकर स्मृति बेहतर होती है।
सामग्री:
ब्राह्मी हरी — 10 ग्राम
बादाम की गिरी — 10 ग्राम
इलायची — 3 नग
काली मिर्च — 3 नग
तरीका:
इन्हें पीसकर गुनगुने दूध में मिलाएँ और पिएँ।
विशेष:
ब्राह्मी स्मृति-वर्धक (Medhya Rasayana) है — प्राचीन काल से बुद्धि बढ़ाने के लिए दी जाती रही है।
(स्कूल बच्चे भी ले सकते हैं)
कैसे बनाएं:
तीनों चीज़ें बराबर मात्रा में पीसकर रखें।
1 चम्मच सुबह-शाम दूध से।
फायदा:
आँखें + दिमाग — दोनों को मजबूती देता है।
Online पढ़ाई वाले बच्चों के लिए श्रेष्ठ।
1 ग्राम दूध से रोज़
गला साफ़, मन शांत, स्मृति स्पष्ट।
अखरोट का आकार स्वयं दिमाग जैसा होता है — और यह Brain-Friendly Omega-3 का स्रोत है।
10 ग्राम अखरोट खूब चबाएँ → ऊपर से दूध पिएँ।
सुबह नाश्ते में लें।
दिमाग ठंडा, मन शांत, स्मृति सुदृढ़।
खीर, बादाम का हलवा, दूध, लस्सी (दोपहर में)
बादाम → Vitamin E
अखरोट → Omega-3
काजू → Magnesium
किशमिश → Iron
मूंग दाल
मसूर दाल
पालक, मैथी, बथुआ
पपीता, अमरूद, सेब, अनार, संतरा, अंगूर
हर दिन कम से कम 4 रंगों के फल-सब्जी — दिमाग का ईंधन!
उड़द, राजमा (गैस → दिमाग बोझिल)
दही रात को
शराब, सिगरेट, तंबाकू
अत्यधिक मिर्च-मसाले
दिन में सोना
बार-बार जंक फूड
जो पचता नहीं, वह चढ़ता नहीं → दिमाग तक पोषण पहुँचता नहीं।
प्रातः भ्रमण — रक्त संचार बढ़ता है
नारियल तेल की मालिश — नसों को पोषण
ठंडे जल से स्नान — ताजगी
सूर्य नमस्कार — संपूर्ण व्यायाम एवं मस्तिष्क ऑक्सीजनेशन
देर तक सोना
रात 12 बजे के बाद जागना
भूख से ज्यादा खाना
चिड़चिड़ापन, तनाव
| योगासन | लाभ |
|---|---|
| बालासन | दिमाग को आराम |
| भुजंगासन | ऊर्जा बढ़ाए |
| ताड़ासन | शरीर सक्रिय |
| पवनमुक्तासन | पाचन सुधरे |
| सूर्य नमस्कार | पूर्ण व्यायाम |
प्राणायाम:
अनुलोम-विलोम
कपालभाति
भ्रामरी
सिर्फ 10 मिनट प्राणायाम = पूरा दिन दिमाग तारो-ताज़ा।
हर दिन 10 नए शब्द याद करें
चेस, सुडोकू, पजल खेलें
डायरी लिखें
किताबें पढ़ें
गणित का मानसिक अभ्यास
एकाग्रता ध्यान (Tratak)
पढ़ाई के 25 मिनट बाद 5 मिनट का ब्रेक
सोने से पहले दिन की पढ़ाई की पुनरावृत्ति
सुबह बादाम दूध
स्क्रीन टाइम कम
रात 10 बजे तक सोना
सीखने का गोल्डन टाइम – सुबह 4:30 से 7:00
अगर—
बातें बिल्कुल याद न रहें
घर का रास्ता भूल जाएँ
व्यवहार बदल जाए
शब्द भूलने की समस्या बढ़ जाए
यह माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट या डिमेंशिया का संकेत भी हो सकता है।
| समस्या | कारण | समाधान |
|---|---|---|
| याददाश्त कमजोरी | पाचन, नींद, तनाव | दूध-घी, ब्राह्मी |
| ध्यान कम | मोबाइल, स्क्रीन टाइम | योग + सूर्य नमस्कार |
| चीजें भूलना | मानसिक थकान | बादाम + अखरोट |
| दिमाग सुस्त | व्यायाम कम | प्राणायाम |
याददाश्त सिर्फ दिमाग की बीमारी नहीं — यह पूरी जीवनशैली का प्रतिबिंब है।
नींद, आहार, व्यायाम और मन — चारों संतुलित हों तो दिमाग तेज़, याददाश्त मजबूत और जीवन सक्रिय।
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