"बच्चों के सामान्य रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार | Common Child Diseases & Ayurvedic Remedies"

Apr 01, 2025
घरेलू नुस्खे
"बच्चों के सामान्य रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार | Common Child Diseases & Ayurvedic Remedies"


नवजात शिशु या बच्चा जब माँ के गर्भ में रहता है तो उसका समुचित विकास होता रहता है लेकिन प्रसव के पश्चात इसके स्वास्थ और विकास में अवरोध पड़ने लगता है और वह रोगों से ग्रसित हो जाता है | इन रोगो के होने का मुख्य कारण है प्रसव के उपरांत माँ द्वारा अपना दूध न पिलाना| छोटे बच्चों को विशेषकर दस्त,निमोनिया,कुपोषण, डिब्बा रोग(पसली चलना),सूखा रोग,अपच गैस आदि अनेक व्याधियां अपने चंगुल में फसा लेती हैं | यदि समय रहते उनका उपचार न किया जाये तो गंभीर परिणाम सामने आते हैं | 


यदि हम आयुर्वेद में बताये गए नुस्खों( जड़ी-बूटियों) से बच्चों का उपचार करें तो बच्चों के शरीर की बीमारियां नष्ट हो जाएँगी एवं बच्चे निरोगी स्वस्थ विकसित एवं दीर्घायु बने रहने के लिए यहाँ कुछ सरल व उपयोगी नुस्खे प्रस्तुत कर रहे हैं -


  1. बुखार - बच्चों के बुखार में नीम की सूखी पत्तियों को घी में मिलाकर धूप( धुआँ) दें | 


  1. सूखा रोग - बच्चों में विटामिन-डी की कमी से सूखा रोग हो जाता है| इस रोग को दूर करने में गूलर विशेष लाभकारी सिद्ध होता है,यदि गूलर का दूध 5-6 बूँद दूध में डालकर पिलाने से लाभ होता है |  शिशुओं को गाय और बकरी का दूध बराबर मात्रा में पिलाने से भी सूखा रोग मिट जाता है |

 

  1. डिब्बा रोग( पसली चलना)- पसली चलने पर लगभग 60मिग्रा. हींग जल में मिलाकर पिलाने से शीघ्र फायदा होता है | 


  1. चेचक- चेचक के संक्रमण के दौरान यदि बच्चे को स्तनपान कराने वाली माता 30-40ग्राम नारयल की गरी का सेवन करे तो बच्चे को चेचक का फैलाओ नहीं होगा| जिन बच्चों ने दूध पीना छोड़ दिया हो वे यदि रोज़ाना 6 से 10 ग्राम तक गारी का सेवन करते रहें तो उनको चेचक की बीमारी का भय नहीं रहेगा | 

  2. गैस व बदहजमी- 6 ग्राम सौंफ को जल में डालकर जरा सा गर्म करने के बाद उस जल को छानकर पीड़ित बच्चे को सेवन कराएं अवश्य लाभ होगा | 

  3. दांत निकलना- जिन शिशुओं के दांत निकल रहे हों और ज्यादा परेशानी हो रही हो उन्हें सुबह शाम अंगूर का रस पिलाने से सरलता से दांत निकल आते हैं साथ ही आंवले को शहद के साथ बच्चे को सेवन कराएं क्योकि बच्चों के दांत निकलते समय विटामिन-सी की आवश्यकता पड़ती है वह इससे पूरी हो जाती है | 

  4. कब्जियत - छोटे बच्चों की कब्जियत दूर करने के लिए अंगूर का रस पिलाना चाहिए कब्जियत में चौलाई की भाजी का रस 2 चमच्च  पिलाने से कब्जियत का शमन होता है यह आंतो में फसे मल को निकालती है | 

  5. दस्त-   बरगद के दूध की एक  बूँद को बताशे  को बताशे में डालकर छोटे बच्चों को दो-चार दिन तक प्रतिदिन प्रयोग कराने से हरे-पीले दस्तों से राहत मिलती है | 

  6. पेट के कीड़े - प्रायः छोटे बच्चों के पेट में छोटे-छोटे सफ़ेद कीड़े(चुन्ने) पैदा हो जाते हैं | इनको नष्ट करने के लिए बच्चों के गूदे को यदि चूने के पानी की पिचकारी दी जाए तो उक्त शिकायत दूर होकर  आराम मिलता है और यदि टमाटर के रस को हींग से बघार कर छोटे बच्चों को सेवन कराया जाये तप पेट के कीड़े समाप्त होकर राहत मिलती है| 

  7. शरीर का विकास - छोटे बच्चों को तिल के  तेल की मालिश कर के धुप में लिटाएं| सूरज की किरणों से कई तरह की व्याधियां अपने आप दूर हो जाती हैं और हड्डियों के निर्माण के लिए पोषक तत्व भी मिलते हैं|

  8. मिट्टी का खाना- यदि छोटे बच्चे मिट्टी खाने के आदि हो गए हैं तो उससे छुटकारा दिलाने के लिए आम की गुठली का चूर्ण जल के साथ प्रयोग कराएं| 

  9. मस्तिष्क तेज़ - यदि बच्चों को रोज़ाना सबेरे शहद और मलाई को एक साथ मिलाकर खाने को दें तो मस्तिष्क तीव्र होगा | 

  10. पाचन शक्ति मज़बूत- छोटे बच्चों की पाचन शक्ति को मज़बूत रखने के लिए उन्हें कच्चा अमरुद जल में पीसकर पिलाना चाहिए | 

  11. गले की परेशानी- यदि बच्चों के गले में खर्र-खर्र की आवाज़ हो तो एक चमच्च शहद में एक चुटकी पिसी हल्दी मिलाकर उन्हें चटा दें तो राहत मिलेगी| 

  12. बिस्तर में पेशाब - यदि बच्चों को बिस्तर में पेशाब करने की आदत हो तो उन्हें रोज़ाना रात्रि में भुने काले तिल को गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू तैयार कर के सेवन कराएं| 

  13. सर्दी जुकाम - छोटे बच्चों को ठण्ड ऋतू में मटर का हलवा खिलाने से जल्दी सर्दी जुकाम नहीं होता है साथ ही अजवाइन और लहसुन का पका हुआ सरसों का तेल बच्चों के सीने पर मालिश  करने से भी सर्दी जुकाम दूर होता है | 

  14. फोड़े- फुंसियां- बच्चों के शरीर में अक्सर फोड़े फुंसियां हो जाते हैं  इन पर हरी धनिया की पत्ती को पीसकर लेप करने से पीड़ा एवं सूजन में आराम मिलता है एवं घाव भी मिट  जाता है | 

  15. घेंघा रोग- इससे छुटकारा पाने के लिए लहसुन का प्रयोग लाभकारी है साथ ही आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करने से घेंघा रोग से बचाव होता है | 

  16. पेट दर्द - ज्यादातर छोटे बच्चे पेट दर्द के कारण रोने लगते हैं ऐसे में आधा चम्मच गुनगुने जल में ज़रा सी हींग घोटकर नाभि के आसपास लेप करें इससे लाभ होगा | 

  17. कान बहना- यदि छोटे बच्चे का कान बह रहा हो तो चूने के पानी की पिचकारी देने से आराम मिलता है | 

  18. कुपोषण - छोटे बच्चों में कुपोषण की समस्या होना आम बात है इसीलिए 4 से 6 महीने के बच्चों को आहार अवश्य प्रारम्भ कराएं और जन्म से ही माताएं बच्चों को स्तनपान कराना शुरू कर  दें तथा सही समय पर टीकाकरण कराएं | बच्चों को कुपोषण से बचाव में सहायता मिलती है | कुपोषण से ग्रसित बच्चों को अगर रोज़ाना पालक का रस दिया जाए तो आशातीत परिणाम दिखाई पड़ते हैं | 

  19. सामान्य व्याधियां - बच्चों की सामान्य व्याधियां  जैसे दस्त,बुखार,दूध डालना आदि को दूर करने के लिए तुलसी की पत्तियों का रस माता के दूध में मिलाकर चटाएं अथवा पिलायें इसमें उपस्थित कैल्शियम बच्चों की दस्त,बुखार व कमजोरी से रक्षा करता है |   


   

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