आज के समय में कोलेस्ट्रॉल का नाम आते ही हार्ट अटैक, स्ट्रोक, ब्लॉकेज, एंजियोप्लास्टी जैसी बातें दिमाग में घूमने लगती हैं।
लोग मान लेते हैं कि कोलेस्ट्रॉल = खतरा
लेकिन सच्चाई यह है कि —
कोलेस्ट्रॉल शरीर का दुश्मन नहीं, बल्कि हमारी जीवन-प्रक्रिया का आवश्यक भाग है… समस्या तब होती है जब यह अपनी मर्यादा छोड़ देता है।
कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा वसायुक्त पदार्थ है जो मुख्यतः यकृत (लिवर) में बनता है।
यह शरीर की हर कोशिका का आधार है और कई ज़िम्मेदार कार्य करता है:
हार्मोन निर्माण: पुरुषत्व (टेस्टोस्टेरॉन) + स्त्रीत्व (एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरॉन)
कोशिकाओं की संरचना: बच्चों में कोशिका निर्माण में विशेष
विटामिन D का निर्माण
बाइल एसिड निर्माण → भोजन पचाने में सहायक
मस्तिष्क कार्य: दिमाग में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है → तंत्रिका कोशिकाओं का संरक्षण
बिना कोलेस्ट्रॉल के जीवन की कल्पना नहीं।
समस्या इसकी अधिकता और जमाव से है।
30 वर्ष की आयु से धमनियों में जमा होना शुरू हो जाता है, और 40+ पहुँचते-पहुँचते लक्षण दिखने लगते हैं।
जब अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और फैटी सामग्री मिलकर धमनियों में परत जमाती है, इसे एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहते हैं।
| जमाव की जगह | परिणाम |
|---|---|
| हृदय की नलियाँ (कोरोनरी आर्टरी) | एंजाइना पेक्टोरिस → हार्ट अटैक |
| गर्दन की धमनियाँ (कैरोटिड आर्टरी) | दिमाग में रक्त प्रवाह रुकना → स्ट्रोक, लकवा |
| पैरों की नलियाँ | रक्त अभाव → गैंग्रीन, अंग काटने तक की नौबत |
| पेट/आंत्र की धमनियाँ | लेरिक सिंड्रोम — गंभीर पेट दर्द और मृत्यु का खतरा |
| दिमाग में छोटी नलियाँ | याददाश्त में कमी, भ्रम, मानसिक आघात |
सबसे बड़ी चुनौती — शुरुआती अवस्था में कोई खास लक्षण नहीं।
लेकिन लंबे समय में:
छाती में जलन/दर्द
सीढ़ियाँ चढ़ते थकान
सांस फूलना
पैरों में दर्द, सुन्नपन
चक्कर आना, धमनी रुकावट
अचानक बेहोशी
हाथ-पैर ठंडे होना
इसीलिए — 30 की उम्र से रूटीन ब्लड टेस्ट अत्यंत आवश्यक।
| टेस्ट | सामान्य नाम | क्यों ज़रूरी |
|---|---|---|
| Lipid Profile | पूरा कोलेस्ट्रॉल टेस्ट | LDL, HDL, TG सब |
| LDL | खराब कोलेस्ट्रॉल | रुकावट बनाता है |
| HDL | अच्छा कोलेस्ट्रॉल | सफाई करता है |
| Triglycerides | वसा | मधुमेह, मोटापा से बढ़ता |
| CRP / hs-CRP | इंफ्लेमेशन | हार्ट जोखिम बताता |
| LFT | लिवर टेस्ट | कोलेस्ट्रॉल बनता है यहाँ |
हर 6–12 महीने में टेस्ट = लाइफ सेविंग कदम
तला हुआ, फास्ट फूड, बिस्किट, केक, पेस्ट्री
मक्खन, मलाई, चर्बी, ज्यादा घी
प्रोसेस्ड मीट, सॉसेज, बर्गर
चिप्स, नमकीन, पिज़्ज़ा, फ़्राइज़
शराब, तंबाकू, धूम्रपान (ब्लॉकेज का त्वरक)
अर्जुन छाल का पानी
दलिया, ओट्स, जौ (फ़ाइबर)
हरी पत्तेदार सब्जियाँ
सेब, पपीता, अमरुद, अनार
अलसी, अखरोट, बादाम (ओमेगा-3)
लहसुन, अदरक, हल्दी (एंटी-इंफ्लेमेटरी)
8,000–10,000 कदम रोज़
रोज़ टहलना + योगासन + प्राणायाम
तनाव पर नियंत्रण
रात में 7–8 घंटे नींद
स्क्रीन टाइम कम, पानी ज्यादा
सिर्फ दवा नहीं — आदतों में बदलाव ही हृदय को बचाता है।
⚠️ ध्यान दें: रसायन-औषधियाँ विशेषज्ञ की देखरेख में ही लें।
यह योग धमनियों की सूक्ष्म सफाई और हृदय पोषण में प्रभावी माना गया है।
मात्रा
श्रृंग भस्म — 1 मासा
अर्जुन घृत — 3 मासा
बसी घृत — 6 मासा
सेवन: सुबह–दोपहर–शाम
लाभ: धमनियों में जमी चर्बी पिघलाना, रक्तप्रवाह सुधारना, दिल को पोषण देना
सामग्री (कुल 4 मासा मिश्रण तैयार):
रस सिंदूर / मकरध्वज वटी — 1 रत्ती
हृदयार्वण रस — 1 रत्ती
नागार्जुनाभ्र रस — 1 रत्ती
हृदयेश्वर रस — 1 रत्ती
प्रभाकर वटी — 4 रत्ती
पुष्कर मूल चूर्ण — 1 मासा
अर्जुन छाल चूर्ण — 2 मासा
सेवन: अर्जुनारिष्ट / बलारिष्ट / दशमूलारिष्ट के साथ
क्यों असरदार?
यह योग दिल, धमनियाँ, रक्त और प्राणवायु — चारों स्तरों पर काम करता है।
अर्जुन छाल — 1 तोला
पुष्कर मूल — 6 मासा
गौदुग्ध — 1 पाव
पानी — 1 पाव
विधि: मिश्रण का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन
लाभ: रक्त प्रवाह सुधार, सीने का दर्द कम, दिल की धड़कन स्थिर
विश्वेश्वर रस, कल्याण सुंदर रस, वृहद वात चिंतामणि रस, योगेंद्र रस, त्रिमूर्ति रस, पूर्णचंद्रोदय, मकरध्वज, जवाहर मोहरा, ताम्र भस्म, स्वर्ण भस्म, मुक्ता पिष्टी, अकीक पिष्टी आदि
| आधुनिक विज्ञान | आयुर्वेद |
|---|---|
| मात्रा नापता है | असंतुलन पहचानता है |
| रिपोर्ट देता है | कारण बताता है |
| जाम हटाता है (एंजियोप्लास्टी) | जमाव रोकता है (दोष-संतुलन) |
| दवाएँ प्रबंधन करती हैं | जड़ पर काम |
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Ayurvediya Upchar Team (आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा संकलित)
Research, Writing & Ayurvedic Review: AyurvediyaUpchar.com
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