भारत के हर घर में दही को स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है।
बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक दही खाते हैं।
गर्मी में लोग इसे “ठंडा” समझकर खाते हैं।
बीमारी में भी लोग दही को हल्का आहार मान लेते हैं।
लेकिन आयुर्वेद एक चौंकाने वाला सत्य बताता है—
“दही सही विधि से लिया जाए तो अमृत है,
गलत समय, गलत मात्रा और गलत संयोजन में लिया जाए तो यह शरीर के लिए विष बन जाता है।”
आज भारत में
मोटापा
हार्ट ब्लॉकेज
डायबिटीज
थायरॉइड
PCOD
गर्भाशय रोग
त्वचा रोग
माइग्रेन
जोड़ों का दर्द
तेज़ी से बढ़ रहा है।
इनमें से एक बड़ा छिपा कारण है —
दही का गलत प्रयोग।
आयुर्वेद में दही को कहा गया है—
“अम्ल रस प्रधान, उष्ण वीर्य, गुरु, अभिष्यंदी और कफवर्धक”
इसका अर्थ है:
दही शरीर में
अम्लता
कफ
चिकनाई
गाढ़ापन
बढ़ाता है।
इसलिए यह तुरंत शक्ति देता है,
लेकिन धीरे-धीरे रोग भी बनाता है।
मीठा दही वह होता है जो:
नया जमा हुआ हो
कम अम्लीय हो
अधिक वसा युक्त हो
ठोस और चिकना हो
वीर्यवर्धक
बलवर्धक
प्राणशक्ति बढ़ाने वाला
भूख बढ़ाने वाला
शरीर को पुष्ट करने वाला
अधिक मीठा दही
मोटापा
कफ
आलस्य
रक्त संचार में अवरोध
सुस्ती
हृदय रोग
पैदा करता है।
खट्टा दही अम्ल प्रधान होता है।
यह तीन स्तर का होता है:
हल्का खट्टा
खट्टा
अत्यधिक खट्टा
यह सबसे खतरनाक माना गया है।
यह
रक्त को दूषित करता है
त्वचा रोग
एलर्जी
जलन
माइग्रेन
हाई BP
बवासीर
स्त्री रोग
पैदा करता है।
जो दही सही तरह से न जमे:
वह शरीर में
गैस
जलन
बार-बार पेशाब
पतला मल
त्रिदोष विकार
आंतों की कमजोरी
पैदा करता है।
ऐसा दही
धीरे-धीरे पाचन तंत्र को नष्ट कर देता है।
अग्नि दीपक
वात नाशक
बलवर्धक
पंचगव्य का अंग
टीबी
खांसी
दमा
बवासीर
में अत्यंत लाभकारी
भारी
बहुत कफ बढ़ाने वाला
मोटापा पैदा करने वाला
आयुर्वेद कहता है:
दही हर ऋतु में समान रूप से सुरक्षित नहीं होता।
| ऋतु | दही |
|---|---|
| वर्षा | उत्तम |
| शिशिर | उत्तम |
| हेमंत | उत्तम |
| ग्रीष्म | सीमित |
| शरद | कम |
| बसंत | कम |
“रात्रौ दधि विषवत्”
(रात का दही ज़हर समान है)
नियमित रात में दही खाने से:
हार्ट ब्लॉकेज
बाइपास सर्जरी
डायबिटीज
मोटापा
PCOD
बांझपन
गर्भाशय रोग
हो सकता है।
आयुर्वेद में एक स्पष्ट वाक्य आता है —
“रात्रौ दधि विषवत् भवति”
(रात में खाया गया दही विष के समान हो जाता है)
आज लोग इसे मज़ाक समझते हैं,
लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस भी अब वही सिद्ध कर रही है जो आयुर्वेद 5000 साल पहले कह चुका है।
रात में शरीर की अग्नि (Digestive Fire) कमज़ोर होती है।
दही भारी, चिकना, अम्लीय और कफवर्धक होता है।
रात में दही खाने से शरीर में यह होता है:
रक्त गाढ़ा होता है
नसों में चिपचिपापन बढ़ता है
कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है
हार्ट ब्लॉकेज बनता है
शुगर बढ़ती है
फैट सेल्स तेज़ी से बढ़ते हैं
इसी कारण आज भारत में
40–50 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक आम हो गया है।
दही में
लैक्टिक एसिड
अम्ल
चिकनाई
ये तीनों मिलकर रक्त को गाढ़ा बनाते हैं।
रात में यह गाढ़ा रक्त
हृदय की नसों में जमने लगता है।
हर दिन 1 कटोरी दही रात में खाने वाला व्यक्ति
5–10 साल में हार्ट ब्लॉकेज की ओर बढ़ता है।
बायपास सर्जरी करवाने वाले 80% लोगों की
एक आदत समान होती है —
रात का दही।
दही में अम्ल और शर्करा का मिश्रण
इंसुलिन को बिगाड़ देता है।
रात में दही:
लिवर को शुगर जमा करने पर मजबूर करता है
फैट सेल्स बढ़ाता है
इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है
इसलिए
रात में दही खाने वालों में
डायबिटीज 2 गुना तेज़ी से आती है।
रात में दही महिलाओं के लिए और भी अधिक खतरनाक है।
यह:
गर्भाशय में कफ बढ़ाता है
हार्मोन बिगाड़ता है
पीसीओडी
सफेद पानी
योनि संक्रमण
अनियमित पीरियड
बांझपन
का कारण बनता है।
आयुर्वेद कहता है:
जो स्त्री नियमित रात में दही खाती है,
वह स्वयं अपने गर्भाशय को रोगों का घर बना लेती है।
यदि बहुत मजबूरी हो तो:
✔ दही में पानी मिलाएँ
✔ थोड़ा घी या शहद मिलाएँ
✔ आंवला चूर्ण डालें
✔ थोड़ा नमक डालें
फिर खाएँ।
❌ लेकिन
यदि आप कफ, पित्त, शुगर, मोटापा, PCOD, हार्ट रोगी हैं —
तो रात में दही बिल्कुल न लें।
नमक
दही की अम्लता को काटता है।
इसलिए:
नमकीन लस्सी
मठा
रायता
ये दही से ज़्यादा सुरक्षित होते हैं।
दही ठंडा नहीं होता —
लेकिन उसकी चिकनाई शरीर को ठंडक का अनुभव देती है।
यह:
पानी की कमी रोकता है
लू से बचाता है
थकान कम करता है
❌ दही + फल
❌ दही + मांस
❌ दही + मछली
❌ दही + खट्टे पदार्थ
❌ दही + तले हुए पदार्थ
ये सब
विषयोग बन जाते हैं।
केवल दही लगाना
त्वचा को अम्लीय बनाता है।
सही तरीका:
✔ दही
✔ दूध
✔ शहद
✔ घी
साथ में मिलाकर लगाएँ।
आज दही का उपयोग
पिज़्ज़ा, बर्गर, सैंडविच, सॉस, ड्रेसिंग, चाट, मोमोज़, पास्ता, रोल, शावरमा आदि में हो रहा है।
यह आयुर्वेद की दृष्टि से
विषयोग (Incompatible Food Combination) है।
दही +
सिरका
नींबू
टमाटर
मैदा
चीज़
रिफाइंड ऑयल
ये मिलकर शरीर में
स्लो पॉयज़न
लिवर फैटी
एसिड रिफ्लक्स
IBS
स्किन एलर्जी
हार्मोन डिसऑर्डर
बनाते हैं।
आज जो लोग रोज़ पिज़्ज़ा, बर्गर, चाट खाते हैं,
उनके शरीर में सबसे पहले
आंतें खराब होती हैं, फिर हार्मोन, फिर दिल।
दही में उपस्थित
Lactic Acid
अत्यधिक मात्रा में लेने पर:
मांसपेशियों की ताकत घटाता है
जल्दी थकान लाता है
बॉडी स्टिफनेस
क्रैम्प
जोड़ दर्द
यही कारण है कि
अधिक दही खाने वाले लोगों को
“हमेशा थकान” रहती है।
अत्यधिक दही:
दिमाग में कफ बढ़ाता है
नींद अधिक
सुस्ती
ध्यान की कमी
अवसाद
चिड़चिड़ापन
का कारण बनता है।
✔ दिन में खाएँ
✔ दोपहर में सबसे अच्छा
✔ नमक के साथ
✔ मठा या लस्सी बेहतर
✔ भोजन के साथ
❌ रात में नहीं
❌ फल के साथ नहीं
❌ तले हुए भोजन के साथ नहीं
❌ मीठे के साथ नहीं
छना हुआ दही +
शक्कर +
इलायची +
केसर +
जायफल
यह दही को
कम हानिकारक और अधिक पाच्य बनाता है।
परंतु:
भारी
कफवर्धक
मोटापा बढ़ाने वाला
इसलिए सीमित मात्रा में ही लें।
सही रूप:
✔ दही + दूध
✔ दही + शहद
✔ दही + घी
गलत:
❌ केवल दही
केवल दही त्वचा को अम्लीय बनाता है
और लंबे समय में झुर्रियाँ बढ़ाता है।
नमकीन लस्सी + पराठा
→ भारी काम के लिए ऊर्जा
मठा, छाछ
→ पसीना, उमस, गर्मी संतुलन
दही अपने आप में न अच्छा है, न बुरा।
वह जैसा खाया जाए, वैसा परिणाम देता है।
| सही प्रयोग | गलत प्रयोग |
|---|---|
| दोपहर में | रात में |
| नमक के साथ | मीठे के साथ |
| मठा | फल के साथ |
| सीमित | रोज़ रात |
सही दही जीवन देता है
गलत दही जीवन छीन लेता है।
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