दुबलापन एवं मोटापा कारण, आयुर्वेदिक उपाय एवं प्रभावशाली औषधियाँ

Jan 13, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
दुबलापन एवं मोटापा कारण, आयुर्वेदिक उपाय एवं प्रभावशाली औषधियाँ

Author – Ayurvediya Upchar Team
(आयुर्वेदिक स्वास्थ्य लेखन, शोध एवं जन-जागरूकता)


भूमिका — शरीर से असंतोष, आधुनिक युग की अदृश्य बीमारी

यह मनुष्य की एक विचित्र प्रवृत्ति है कि वह अपने शरीर से कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता।
जो व्यक्ति मोटा है वह दुबला होना चाहता है।
जो दुबला है वह भरावदार दिखना चाहता है।
लंबा व्यक्ति अपने कद से परेशान है और छोटा व्यक्ति ऊँचाई पाने की लालसा रखता है।
काला व्यक्ति गोरा बनना चाहता है और गोरा व्यक्ति और अधिक उज्ज्वल।

यह असंतोष केवल सौंदर्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह शरीर के स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
जब मनुष्य अपने शरीर को स्वीकार नहीं करता, तब वह या तो उसे ज़बरदस्ती बदलने की कोशिश करता है या उसे उपेक्षित करता है।
दोनों ही स्थितियाँ शरीर में रोगों को जन्म देती हैं।

आचार्य चरक ने शरीर की बनावट के आधार पर आठ प्रकार के पुरुषों को “निंदित” कहा है —

अतिह्रस्व (अत्यधिक छोटा)
अति दीर्घ (अत्यधिक लंबा)
अति लोमा (अत्यधिक रोएँदार)
अलोमा (रोम रहित)
अति कृष्ण (अत्यधिक काला)
अति गौर (अत्यधिक गोरा)
अति स्थूल (अत्यधिक मोटा)
अति कृश (अत्यधिक दुबला)

इनमें से चिकित्सा की दृष्टि से दो सबसे अधिक निंदित अवस्थाएँ हैं —
अति स्थूल (मोटापा) और अति कृश (दुबलापन)

क्योंकि ये दोनों अवस्थाएँ शरीर की सभी धातुओं, अग्नि और ओज को असंतुलित कर देती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ वही है —

जिसमें रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र — ये सातों धातुएँ सम मात्रा में हों,
अग्नि संतुलित हो,
इंद्रियाँ मजबूत हों
और मन प्रसन्न हो।

अर्थात न बहुत मोटा शरीर स्वस्थ है, न बहुत दुबला।


आयुर्वेदिक दृष्टि से मोटापा (स्थूलता)

जब शरीर में मेद धातु आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है, तब उसे स्थूलता कहा जाता है।
मेद का मुख्य कार्य शरीर को स्निग्धता, ऊर्जा और सुरक्षा देना है, लेकिन जब यही मेद आवश्यकता से अधिक हो जाए, तो वही रोग बन जाता है।

मेद और मांस का मुख्य संचय इन स्थानों पर होता है:

  • पेट

  • नितम्ब (कमर)

  • स्तन

  • जांघ

जब इन अंगों पर अनावश्यक चर्बी जमा हो जाती है, तब ये ढीले, भारी और लटकते हुए दिखाई देते हैं।
चलते समय शरीर हिलता है, सांस जल्दी फूलती है, पसीना अधिक आता है और शरीर में आलस्य बना रहता है।

यह संकेत है कि शरीर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ चुका है


मोटापा कैसे बढ़ता है – शरीर के अंदर क्या होता है?

जब व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोजन करता है और उतना श्रम नहीं करता, तब शरीर उस अतिरिक्त भोजन को ऊर्जा में बदल नहीं पाता।
वह भोजन धीरे-धीरे मेद (चर्बी) में बदलकर धातुओं में जमा होने लगता है।

सामान्य व्यक्ति को लगभग 1700 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
पर आज का व्यक्ति 2500–3000 कैलोरी ले रहा है — बिना शारीरिक परिश्रम के।

यह अतिरिक्त ऊर्जा शरीर में जलने की बजाय जमा हो जाती है।


हार्मोन और मोटापा

थायराइड, पिट्यूटरी, एड्रिनल और वृषण ग्रंथियाँ शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती हैं।
इन ग्रंथियों की कमजोरी से शरीर की मूल चयापचय दर (Basal Metabolic Rate) कम हो जाती है।

परिणाम —
चर्बी जल नहीं पाती
और शरीर में जमा होती चली जाती है।


आधुनिक जीवनशैली और मोटापा

आज का जीवन —

  • देर रात तक जागना

  • मोबाइल, टीवी

  • फास्ट फूड

  • तनाव

  • बैठे-बैठे काम

ये सभी कफ और मेद को बढ़ाते हैं।

खासकर बच्चों में:

  • पोहा, उपमा, हलवा छोड़कर

  • ब्रेड, बिस्किट, मैगी, चिप्स, आइसक्रीम खाने की आदत
    भविष्य का मोटापा तैयार कर रही है।

    मोटापा (स्थूलता) का आयुर्वेदिक उपचार


    मोटे व्यक्ति की शरीर-प्रकृति

    आयुर्वेद के अनुसार मोटे व्यक्ति में:

    • कफ अधिक होता है

    • मेद (चर्बी) अधिक होती है

    • अग्नि मंद हो जाती है

    ऐसे व्यक्ति को:

    • जल्दी भूख लगती है

    • अधिक प्यास लगती है

    • पसीना अधिक आता है

    • आलस्य रहता है

    • नींद अधिक आती है

    • सांस फूलती है

    • थोड़ा चलने में थकान होती है

    ये सब कफ-मेद विकृति के लक्षण हैं।


    मोटापा क्यों खतरनाक है?

    आयुर्वेद कहता है —

    “स्थूलः कृशवत् रोगी”
    अर्थात अत्यधिक मोटा व्यक्ति उतना ही रोगी है जितना अत्यधिक दुबला।

    मोटापे से होते हैं:

    • हृदय रोग

    • ब्लड प्रेशर

    • मधुमेह

    • जोड़ों का दर्द

    • घुटनों की खराबी

    • सांस की बीमारी

    • यौन कमजोरी


    मोटे व्यक्ति के लिए आहार-विहार (दिनचर्या)

    1. मानसिक रूप से सक्रिय रहें

    आलसी व्यक्ति जल्दी मोटा होता है।
    अधिक सोच, पढ़ना, काम करना — यह कफ को घटाता है।

    2. नियमित व्यायाम

    तेज़ चलना, पसीना लाने वाला श्रम, योग, सूर्यनमस्कार —
    ये मेद को जलाते हैं।

    3. दिन में सोना वर्जित

    दिन में सोने से कफ और मेद बढ़ते हैं।

    4. रुखा उबटन लगाकर स्नान

    चना आटा, मुल्तानी मिट्टी, त्रिफला चूर्ण से शरीर रगड़ना
    चर्बी घटाता है।

    5. गरम और रुखा भोजन

    ठंडा, तैलीय, मीठा भोजन — मोटापा बढ़ाता है।
    गरम, रूखा और हल्का भोजन — मोटापा घटाता है।


    क्या नहीं खाना चाहिए

    मोटे व्यक्ति को ये नहीं खाना चाहिए:

    • दूध, दही, मलाई

    • घी, तेल

    • चावल

    • आलू

    • केले

    • मिठाई

    • ड्राय फ्रूट्स

    • तले हुए भोजन

    ये सभी कफ और मेद बढ़ाते हैं।


    मोटापा घटाने वाला आहार

    आयुर्वेद के अनुसार मोटे व्यक्ति का भोजन रूखा, हल्का और गरम होना चाहिए।

    अनाज

    • जौ की रोटी

    • कोदो

    • बाजरा

    • सत्तू

    दालें

    • मूंग

    • मसूर

    सब्जियाँ

    • लौकी

    • करेला

    • परवल

    • चौलाई

    • मुनगा

    • गाजर

    • मूली

    • ककड़ी

    फल

    • पपीता

    • जामुन

    • बेर

    • अनार

    पेय

    • छाछ

    • गुनगुना पानी

    छाछ मोटापे में अमृत समान है।


    मोटापा घटाने वाले आयुर्वेदिक योग

    1. शहद

    शहद शरीर की धातुओं को तृप्त नहीं करता, बल्कि उनका शोषण करता है।
    इसलिए यह मोटापे में सर्वोत्तम है।

    2. नींबू + शहद

    सुबह खाली पेट:
    गुनगुना पानी + नींबू + 2 चम्मच शहद
    यह चर्बी गलाता है।

    3. करेला + शहद

    1 चम्मच करेले का रस + 2 चम्मच शहद
    सुबह लें।

    4. तुलसी रस + शहद

    मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है।

    5. पिप्पली + शहद

    भोजन के बाद लें।

    6. सोंठ + शहद

    आधा चम्मच सोंठ + 1 चम्मच शहद


    मोटापे की औषधियाँ

    1. Obecon Tablet

    2 गोली सुबह-शाम गुनगुने पानी से।

    2. Batantak Oil

    प्रतिदिन पेट, जांघ, कमर पर मालिश।

    3. त्रिफला चूर्ण

    यदि कब्ज हो —
    1 चम्मच रात में गुनगुने पानी से।


    मोटापे का लक्ष्य

    आयुर्वेद तेजी से वजन घटाने के पक्ष में नहीं है।
    आयुर्वेद चाहता है —

    धीरे-धीरे मेद घटे
    धातुएँ सुरक्षित रहें
    शरीर बलवान बने

    दुबलापन (अति कृशता) – कारण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रसायन चिकित्सा


    अति कृश व्यक्ति कौन होता है?

    आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में
    मांस, मेद, बल और ओज की अत्यधिक कमी हो जाती है, तब व्यक्ति को अति कृश (बहुत दुबला) कहा जाता है।

    ऐसे व्यक्ति में —

    • शरीर पतला

    • मांस शिथिल

    • चेहरा पीला

    • आँखों के नीचे गड्ढे

    • आवाज़ कमजोर

    • थकान जल्दी

    • भूख कम

    • ठंड अधिक लगना

    ये सब लक्षण दिखाई देते हैं।


    दुबलापन क्यों खतरनाक है?

    दुबला व्यक्ति देखने में हल्का लगता है,
    पर अंदर से वह रोग प्रतिरोधक शक्ति से कमजोर होता है।

    अति कृश व्यक्ति को:

    • बार-बार संक्रमण

    • टीबी

    • एनीमिया

    • नपुंसकता

    • अवसाद

    • स्मरण शक्ति की कमी

    • कमजोरी

    • थकान

    घेर लेती है।


    दुबलापन बढ़ने के कारण

    1. मानसिक कारण

    • अधिक चिंता

    • तनाव

    • भय

    • दुख

    • नींद की कमी

    ये सभी शरीर की ओज शक्ति को खा जाते हैं।

    2. आहार संबंधी कारण

    • कम भोजन

    • भूख दबाना

    • अनियमित खाना

    • रूखा भोजन

    • कड़वे पदार्थ

    3. जीवनशैली

    • अधिक श्रम

    • अधिक व्यायाम

    • अधिक मैथुन

    • देर रात जागना

    4. कमजोर पाचन

    यदि भोजन पचेगा नहीं, तो शरीर बनेगा नहीं।


    अति कृश व्यक्ति के लिए आयुर्वेदिक जीवनशैली

    आयुर्वेद कहता है —

    दुबले व्यक्ति को पहले मन, फिर अग्नि और फिर धातु बनानी चाहिए।

    1. मानसिक शांति

    • चिंता छोड़ें

    • प्रसन्न रहें

    • प्रिय संगीत सुनें

    • प्रिय दृश्य देखें

    2. प्राकृतिक आवश्यकताओं को न रोकें

    • भूख

    • प्यास

    • मल

    • मूत्र

    • नींद

    इन्हें रोकना शरीर को कमजोर बनाता है।

    3. अधिक क्रोध और तनाव से बचें


    अति कृश व्यक्ति क्या न करें

    • अधिक व्यायाम

    • अधिक उपवास

    • अधिक काम

    • अधिक सेक्स

    • देर रात जागना

    • कड़वे, रूखे पदार्थ


    दुबले व्यक्ति के लिए आहार

    दुबले व्यक्ति को मधुर, स्निग्ध और पौष्टिक भोजन चाहिए।

    क्या खाना चाहिए

    • दूध

    • घी

    • मक्खन

    • गुड़

    • गेहूँ

    • चावल

    • खीर

    • दही

    • मेवे

    • केले

    • आम

    क्या नहीं खाना चाहिए

    • मूंग

    • अरहर

    • चना

    • करेला

    • परवल

    • चौलाई

    • कड़वे पदार्थ

    ये वात बढ़ाकर शरीर को और सुखा देते हैं।


    दुबलापन बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक उपाय

    1. दूध + शहद

    सुबह दूध में शहद मिलाकर पीना शरीर बनाता है।

    2. तेल मालिश

    नित्य तिल या चंदन बलालाक्षादि तेल से मालिश
    शरीर में मांस और बल बढ़ाती है।

    3. स्निग्ध उबटन से स्नान

    इससे त्वचा, मन और शरीर पुष्ट होते हैं।


    रसायन चिकित्सा (Rejuvenation Therapy)

    आयुर्वेद में अति कृश व्यक्ति के लिए
    रसायन चिकित्सा अत्यंत आवश्यक मानी गई है।

    इसमें:

    • अश्वगंधा

    • शतावरी

    • विदारीकंद

    • यष्टिमधु

    • अमला

    शरीर को अंदर से बनाते हैं।


    अति कृशता की औषधियाँ

    1. अश्वगंधा कैप्सूल

    1 सुबह-शाम दूध के साथ

    2. RBC Plus कैप्सूल

    रक्त, बल और मांस बढ़ाता है

    3. Livo Syrup

    भोजन से पहले
    पाचन और भूख बढ़ाता है

    4. त्रिफला चूर्ण

    रात में सप्ताह में 3 बार
    आंतों को साफ कर
    पोषण बढ़ाता है


    मोटापा और दुबलापन — दोनों का मूल कारण

    दोनों रोगों की जड़ है —

    अग्नि (Digestive Fire) का असंतुलन

    मोटापे में अग्नि मंद
    दुबलापन में अग्नि कमजोर

    इसलिए आयुर्वेद का लक्ष्य है —

    अग्नि संतुलित करना


    अंतिम निष्कर्ष

    आयुर्वेद किसी को
    न बहुत मोटा बनाना चाहता है
    न बहुत दुबला

    आयुर्वेद चाहता है —

    संतुलित शरीर
    मजबूत धातुएँ
    साफ पाचन
    प्रसन्न मन

    यही सच्चा स्वास्थ्य है।


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