हम अक्सर अपने बालों और त्वचा की देखभाल करते हैं,
लेकिन आँखों की सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
आँखें शरीर का सबसे संवेदनशील और कीमती अंग हैं,
इसलिए इनकी सही आयुर्वेदिक देखभाल बेहद ज़रूरी है।
यहाँ हम बता रहे हैं प्राचीन आयुर्वेदिक नुस्खे, जो आँखों की लालिमा, दर्द, जलन और सूजन जैसी समस्याओं में उपयोगी माने जाते हैं ?️?
आँवला, त्रिफला या धनिया के पानी से आँखें धोने से लाभ होता है।
गुलाबजल की कुछ बूंदें डालने से ठंडक और ताजगी महसूस होती है।
20–25 जायफल के पत्ते पीसकर टिकिया बनाएं।
इसे कपड़े में बांधकर रात में सोते समय आँखों पर रखें।
इससे आँखों का दर्द, सूजन और जलन कम होती है।
हल्दी की डली को तुअर की दाल में उबालें और सुखा लें।
फिर इसे पानी में घिसकर दिन में दो बार सूर्यास्त से पहले लगाएँ।
इससे लालिमा, झामर और फूली जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
राई के चूर्ण को घी के साथ लगाने से आँखों की फुंसी में राहत मिलती है।
गाय के दूध से निकला मक्खन आँखों में लगाने से जलन शांत होती है।
रीठे के पानी से आँख धोने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
दूब घास पीसकर आँखों पर रखने से ठंडक और दर्द में आराम मिलता है।
मेथी दाने का लेप काले घेरे कम करता है।
अनंतमूल की जड़ को दूध या शहद के साथ लगाने से नेत्र रोगों में लाभ होता है।
पलाश की जड़ का रस मोतियाबिंद, फूली और रतौंधी में उपयोगी है।
देशी गाय का घी काजल की तरह लगाने से आँखें स्वस्थ रहती हैं।
त्रिफला के पानी से आँखें धोने पर नेत्र रोग दूर होते हैं।
शीशम, शिरीष और तेजपात के रस से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
बेर के बीज, पुनर्नवा जड़, और चमेली के फूलों का लेप दर्द व सूजन में लाभ देता है।
नीम के पत्तों का रस आँखों या विपरीत कान में डालने से दर्द में राहत मिलती है।
तिल के फूलों पर पड़ी ओस की बूंदें आँखों में डालने से रोग मिटते हैं।
अनार के पत्तों का रस खुजली और पलकों की खराबी में उपयोगी है।
सुबह उठकर बिना कुल्ला किए बासी लार को काजल की तरह लगाने से चश्मे का नंबर घटता है।
सप्ताह में एक बार शुद्ध काला सुरमा (सौवीरांजन) लगाने से मोतियाबिंद का भय नहीं रहता।
आँवला मलकर स्नान करने से दृष्टि शक्ति बढ़ती है।
भोजन के बाद दोनों हथेलियाँ रगड़कर आँखों पर रखने से तिमिर रोग में लाभ होता है।
काले तिल पीसकर सिर पर लगाने से नेत्र दोष मिटते हैं।
अरण्ड के पत्ते, जड़ और छाल को बकरी के दूध में पकाकर उसका सेक करने से वातजन्य नेत्र दर्द में राहत मिलती है।
त्रिफला के क्वाथ (काढ़े) से आँखें धोने से सभी प्रकार की नेत्र पीड़ा शांत होती है।
स्त्री के दूध की बूंदें डालने से रक्तपित्त और वात की नेत्र पीड़ा में आराम मिलता है।
नीम, सोंठ, और फिटकरी के मिश्रण से आँखों का जलना और खुजली कम होती है।
मुलहठी, पीलागेरू, सेंधा नमक, दारुहल्दी और रसौत का लेप नेत्र पीड़ा मिटाता है।
आँवला, गाय का दूध और घी
शहद, सेंधा नमक
बादाम, पालक, डोडी, पुनर्नवा, हरा धनिया
गाजर, अंगूर, केला, संतरा, मुलेठी, सौंफ, गुलाबजल, त्रिफला चूर्ण
देशी गौमूत्र को आठ तह कपड़े से छानकर, तांबे के बर्तन में एक उबाल देकर सुरक्षित रखें।
प्रतिदिन 1-1 बूंद डालने से नेत्र रोगों में लाभ बताया गया है।
(इसे केवल चिकित्सक की देखरेख में ही प्रयोग करें)
यह सभी नुस्खे शिक्षा और जनजागरूकता (Educational Purpose) के लिए साझा किए गए हैं।
किसी भी प्रकार के घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले
कृपया प्रमाणित वैद्य या नेत्र चिकित्सक (Eye Specialist) की सलाह अवश्य लें।
हम किसी भी उपचार या परिणाम की व्यक्तिगत गारंटी नहीं देते।
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