गैस, एसिडिटी और अपच: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvediya Upchar

Nov 28, 2025
घरेलू नुस्खे
गैस, एसिडिटी और अपच: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvediya Upchar

मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अग्नि यानी Digestive Fire। यह अग्नि हमारे द्वारा खाए गए भोजन को ऊर्जा, रस और पोषक तत्वों में बदलती है। जब यह अग्नि कमजोर हो जाती है, तो शरीर में गैस, एसिडिटी, कब्ज, अपच, पेट फुलना और कई अन्य समस्याएँ शुरू हो जाती हैं।
आज की आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव, देर रात तक जागना, बाहर का भोजन – ये सब मिलकर हमारे पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

 गैस, एसिडिटी और अपच क्या हैं? (What Are These Conditions?)

गैस (Flatulence)

यह तब होती है जब भोजन आंत में ठीक से पचता नहीं और फर्मेंटेशन होने लगता है। इससे
✔ डकार
✔ पेट फुलना
✔ कभी-कभी तेज दर्द — होता है।

आयुर्वेद में इसे वात वृद्धि माना गया है।


एसिडिटी (Acidity / Amla Pitta)

जैसे ही पित्त (गर्मी तत्व) बढ़ जाता है,
✔ सीने में जलन
✔ खट्टी डकार
✔ मुंह में कड़वाहट
✔ गले में जलन
✔ हार्टबर्न
शुरू हो जाते हैं।

आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहा गया है।


अपच (Indigestion)

जब भोजन पूर्ण रूप से पचता नहीं है तो उसे अपच कहते हैं।
यह आगे चलकर विषाक्त पदार्थ (आम) बनाता है – जो बीमारियों की जड़ है।


आयुर्वेदिक दृष्टि – क्यों बिगड़ता है पाचन?

आयुर्वेद शरीर को तीन प्रमुख दोषों से समझता है:

1. वात

वायु तत्व
 गैस, कब्ज, bloating
वात बढ़ने से आंतों की गतिशीलता अनियमित हो जाती है।

2. पित्त

अग्नि तत्व
 एसिडिटी, जलन, मुँह कड़वा
पित्त बढ़ने से पाचन अग्नि असमतल हो जाती है।

3. कफ

जल तत्व
 सुस्ती, भारीपन
कफ बढ़ने से पाचन धीमा पड़ जाता है।

गैस → वात बढ़ा
एसिडिटी → पित्त बढ़ा
अपच → कफ + आम


आधुनिक कारण (Scientific Reasons)

 1. अनियमित खान-पान

Breakfast skip करना → lunch भारी खाना → शाम को junk food → रात को late dinner.

 2. फास्ट फूड, ओवर-कुक्ड, तैलीय भोजन

इनसे digestion overwork होने लगता है।

 3. अधिक चाय-कॉफी

कैफीन → acidity trigger करता है।

 4. देर रात तक सोना

Bio-clock गड़बड़ा जाती है → अग्नि कमजोर।

 5. तनाव (Stress)

Stress hormones आँतों की मांसपेशियों पर असर डालते हैं।

 6. पानी कम पीना

डिहाइड्रेशन → पाचन तंत्र की गति धीमी।


गैस, एसिडिटी और अपच के लक्षण (Symptoms)

गैस के लक्षण

✔ पेट दर्द
✔ भारीपन
✔ लगातार डकार
✔ पेट का फूल जाना
✔ मल असामान्य

एसिडिटी के लक्षण

✔ सीने में जलन
✔ छाती में चुभन
✔ गले में जलन
✔ खट्टी डकार
✔ भोजन ऊपर आना

अपच के लक्षण

✔ भूख न लगना
✔ खाना पचने में समय
✔ पेट भारी होना
✔ मुँह से दुर्गंध
✔ नींद खराब


 गंभीर स्थितियाँ (When to See Doctor)

अगर
 उल्टियाँ
 बहुत तेज एसिडिटी
 भूख बिल्कुल खत्म
 अचानक वजन घट रहा हो
पेट में बहुत दर्द
तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क।


आयुर्वेदिक इलाज कैसे करता है काम?

आयुर्वेद सिर्फ दवा से नहीं — 5 स्तर पर उपचार करता है:

  1. दोष संतुलन
    वात-पित्त-कफ अपनी जगह पर लाना।

  2. अग्नि दीपान
    पाचन अग्नि मजबूत करना।

  3. आम पाचन
    शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ हटाना।

  4. संतुलित आहार
    जो शरीर के लिए उपयुक्त हो।

  5. दिनचर्या सुधारना
    रूटीन ठीक करो → बीमारी खुद ठीक हो।


 गैस और एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार (Main Remedies)

1. त्रिफला चूर्ण

रात को 1 चम्मच
कब्ज दूर
पेट साफ
अग्नि मजबूत

2. अजवाइन + काला नमक

1 टीस्पून भोजन के बाद
गैस कुछ ही मिनट में कम
indigestion ठीक

3. जीरा पानी

1 गिलास उबालकर
bloating कम
 digestion boost

4. सौंठ + शहद

वात का बेहतरीन इलाज
गैस और पेट दर्द में चमत्कार

5. आमला (Amla)

 पित्त को शांत
 एसिडिटी कंट्रोल
 इम्युनिटी strong

6. घृत (Cow Ghee)

1 चम्मच खाना
 पित्त शांत
 आंतों की dryness कम


 घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे (Home Remedies)

 1. इलायची

भोजन बाद 1
 एसिडिटी तुरंत शांत

 2. तुलसी पत्ता चबाना

 Amla Pitta control
 गैस कम

 3. नींबू + गुनगुना पानी

सुबह
 detox
 digestion fire strong

 4. धनिया-सौंफ का काढ़ा

 पाचन शांत
 पित्त शांत
 गैस दूर


 गैस और एसिडिटी में क्या न खाएँ?

❌ तली हुई चीजें
❌ बिस्किट, ब्रेड
❌ सोडा, कोल्ड ड्रिंक
❌ चाय-कॉफी बार-बार
❌ दही रात में
❌ उड़ा हुआ फ्रिज का खाना
❌ बहुत मसाले


 गैस/एसिडिटी वालों के लिए आयुर्वेदिक भोजन – पूर्ण Diet Chart

 सुबह (6–8 AM)

✔ गुनगुना पानी
✔ जीरा पानी
✔ 5 बादाम (भिगोए)

 नाश्ता (8–9 AM)

✔ दलिया
✔ पोहा
✔ उपमा
✔ इडली

❌ चाय न लें
❌ ब्रेड न लें

 दोपहर (12–2 PM)

✔ एक कटोरी दाल
✔ रोटी 2
✔ सब्ज़ी (बिना तेल)
✔ छाछ (जीरा मिलाकर)

❌ दही
❌ heavy तेल वाली सब्ज़ी

 शाम (5–6 PM)

✔ नारियल पानी
✔ फल

 रात (7–8 PM)

✔ खिचड़ी
✔ मूंग दाल soup
✔ हल्की उबली सब्ज़ियाँ


 योग और प्राणायाम (Yoga & Breathing)

पाचन समस्याओं में योग चमत्कारिक परिणाम देता है।

टॉप 5 योगासन

  1. पवनमुक्तासन

  2. वज्रासन

  3. भुजंगासन

  4. अर्ध मत्स्येन्द्रासन

  5. मंडूकासन

प्राणायाम

✔ अनुलोम-विलोम
✔ कपालभाति
✔ भ्रामरी


 जीवनशैली में परिवर्तन (Lifestyle Changes)

✔ रात में हल्का भोजन

आंतें रात में आराम चाहती हैं।

✔ भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ

30 मिनट बाद ही।

✔ रोज 15–20 मिनट टहलें

भोजन अच्छी तरह पचता है।

✔ मोबाइल पर खाना न खाएँ

concentration टूटती है → digestion slow।

✔ गुस्सा/तनाव से बचें

पित्त बढ़ता है → एसिडिटी बढ़ती है।


 आयुर्वेद में पंचकर्म की भूमिका

यदि गैस, एसिडिटी या अपच chronic हो जाए, तो
✔ वमन
✔ विरेचन
✔ बस्ती
✔ अभ्यंग
✔ शिरोधारा
अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।


 घरेलू पेय (Digestive Drinks)

1. जीरा-सौंफ-धनिया पानी

पाचन को शांत रखने वाला सर्वश्रेष्ठ पेय।

2. घृतमिश्रित गरम पानी

पित्त शांत करता है।

3. छाछ + जीरा

दिन में एक बार ज़रूर लें।


 वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence)

बहुत से रिसर्च बताते हैं:

✔ जीरा digestion enzymes बढ़ाता है
✔ सौंफ anti-acidic है
✔ अजवाइन carminative (anti-gas)
✔ त्रिफला colon साफ करता है
✔ नींबू पानी detox करता है


 मिथक बनाम सच

❌ मिथक – दूध एसिडिटी में अच्छा है

✔ सच – दूध कुछ देर राहत देता है, बाद में पित्त बढ़ाता है।

❌ मिथक – ज्यादा पानी पीना अच्छा

✔ सच – भोजन के तुरंत बाद पानी digestion slow करता है।


 बच्चों में गैस/एसिडिटी

✔ अधिक packaged food
✔ देर तक मोबाइल
✔ पानी कम

आयुर्वेदिक उपाय:
 सौंफ पानी
 मूंग दाल खिचड़ी
 नींबू गरम पानी (हल्का)


 बुजुर्गों में गैस क्यों ज्यादा होती है?

✔ अग्नि का कमजोर होना
✔ आंतों की गति कम
✔ पानी कम पीना
✔ दवाइयों के दुष्प्रभाव

उपाय:
 त्रिफला
 घी
 हल्का भोजन
 दिन में दो बार walk


 निष्कर्ष (Conclusion)

गैस, एसिडिटी और अपच सिर्फ पेट की समस्या नहीं —
यह आपकी जीवनशैली, भोजन और मानसिक स्थिति का परिणाम है।

आयुर्वेद कहता है:

“जब अग्नि स्वस्थ होगी, शरीर स्वयं स्वस्थ होगा।”

अगर आप
✔ सही भोजन
✔ आयुर्वेदिक दिनचर्या
✔ घर के नुस्खे
✔ योग
✔ तनाव-नियंत्रण
अपनाते हैं, तो यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

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