हर्निया (Hernia) आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेट–संबंधी समस्याओं में से एक है। यह धीरे-धीरे विकसित होने वाली वह स्थिति है जिसमें शरीर का कोई आंतरिक अंग जैसे आँत (Intestine), पेट का हिस्सा (Stomach) या वसायुक्त ऊतक (Fat Tissue) अपनी प्राकृतिक जगह से बाहर निकलकर कमजोर मांसपेशियों को चीरते हुए उभर आता है।
दिखने में यह समस्या एक छोटा सा उभार लगती है, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है — खासकर तब जब यह "फँस" जाए और खून का संचार बंद कर दे (Strangulated Hernia)।
आयुर्वेद में हर्निया का संबंध मुख्यतः वात वृद्धि, अग्नि मंद्यता, धातु कमजोरी, मांसपेशियों के ढीलापन, और गलत जीवनशैली से जोड़ा गया है।
इस में आप जानेंगे:
हर्निया क्या है?
इसके प्रकार
आधुनिक कारण
आयुर्वेदिक कारण
लक्षण और संकेत
जटिलताएँ
Ayurvedic Treatment
पाचन और वात संतुलन
घरेलू उपाय
तेल-चिकित्सा
आहार और निषेध
हर्निया-पेशेंट के लिए योग
कब सर्जरी अनिवार्य है
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में हर्निया
आइए शुरू करते हैं…
हर्निया एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर की मांसपेशियों या ऊतकों की दीवार (Muscle Wall) में कमजोरी आ जाती है। इस कमजोरी के कारण अंदर का अंग बाहर की ओर उभर आता है।
यह उभार —
✔ खड़े होने पर बढ़ जाता है
✔ लेटने पर कम हो जाता है
✔ खांसने, झुकने और वजन उठाने पर दर्द करता है
हर्निया शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन सबसे अधिक यह पेट, नाभि, कमर और जांघ के पास पाया जाता है।
यह कमर (Groin) क्षेत्र में होता है।
पुरुषों में सबसे सामान्य
आँतें कमर की मांसपेशियों के बीच से बाहर आ जाती हैं
जांघ के ऊपरी हिस्से में होता है।
महिलाओं में अधिक
प्रसव के बाद भी हो सकता है
नाभि के पास उभार।
नवजात बच्चों में सामान्य
प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं में भी
पहले हुए ऑपरेशन की जगह पर मांसपेशियाँ कमजोर होने से होता है।
छाती में डायफ्राम के ऊपर पेट का हिस्सा निकल जाता है।
इससे सीने में जलन, गैस, खट्टी डकारें
नाभि और सीने के बीच उभार।
दर्द, कमजोरी, गैस
खिलाड़ियों में मांसपेशियों की चोट से।
प्रत्येक हर्निया अपनी गंभीरता और उपचार में अलग होता है।
हर्निया का मुख्य कारण है मांसपेशियों की दीवार कमजोर होना, लेकिन इसके पीछे कई गहरे कारण छुपे हैं:
कुछ लोगों की मांसपेशियाँ जन्म से कमजोर होती हैं।
गलत तरीके से वजन उठाना पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
लंबे समय तक ज़ोर लगाने से।
छाती और पेट की मांसपेशियों को ढीला कर देती है।
अधिक वजन पेट के अंदर लगातार दबाव बनाता है।
एक से अधिक गर्भ धारण में मांसपेशियाँ ढीली हो जाती हैं।
गैस, अपच, कब्ज — सभी कारण बनते हैं।
कटे हुए हिस्से की मांसपेशियाँ भरती हैं लेकिन कमजोर रहती हैं।
पेट, कमर या जांघ में उभार
खड़े होने पर उभार बढ़ना
दर्द या खिंचाव
चलने या झुकने पर दर्द
भारीपन
गैस, कब्ज
पेट में खिंचाव की अनुभूति
उभार सख्त हो जाए
दर्द बहुत तेज हो
उल्टी आने लगे
गैस/मल न निकले
→ यह Strangulated Hernia है = आपात स्थिति
आयुर्वेद हर्निया को सामान्यत: अवरोध, आनत्र विकृति, तथा वात वृद्धि से जोड़ता है।
✔ वात दोष का अत्यधिक बढ़ना
✔ मांसधातु की कमजोरी
✔ अग्नि मंद (कमजोर पाचन)
✔ रस–मांस–मेद धातु का क्षय
✔ कब्ज
✔ ऊर्जा का असंतुलन
“वात + धातु कमजोरी + उदर क्षेत्र में अवरोध”
महत्वपूर्ण:
हर्निया का मुख्य और अंतिम उपचार सर्जरी माना जाता है।
लेकिन आयुर्वेद —
लक्षणों को नियंत्रित करता है
दर्द कम करता है
गैस व कब्ज हटाता है
मांसपेशियों को मजबूत करता है
रिकवरी तेज करता है
यानी कि Ayurveda = Pre/Post Surgery Best Supportive Treatment
दशमूल
हिंग्वाष्टक चूर्ण
त्रिफला
सौंफ
धनिया
अजवाइन
इनसे पेट की दीवारें मजबूत होती हैं —
अश्वगंधा
शतावरी
बाला चूर्ण
गोक्षुर
योगराज गुग्गुलु
लाक्षादि गुग्गुलु
अदरक
काली मिर्च
हरी इलायची
जीरा–घी
हरड़ चूर्ण
जब पाचन सुधरता है → पेट पर दबाव कम होता है।
ठंडा दूध
मुलेठी
शतावरी
जीरा पानी
अनार
मंडूर भस्म (केवल विशेषज्ञ की सलाह)
पेट और कमर के आसपास…
नारायण तेल
सहचर तेल
माहानारायण तेल
लाभ:
✔ दर्द कम
✔ खिंचाव कम
✔ मांसपेशियाँ मजबूत
गैस और दर्द में राहत।
पेट का तनाव कम।
पाचन बेहतर।
पेट पर दबाव कम।
मूंग दाल
खिचड़ी
दलिया
लौकी
तोरी
दही (दिन में)
छाछ
नारियल पानी
चावल–दाल हल्का
राजमा, छोले
तले भोजन
मांसाहार
शराब
गैस बढ़ाने वाली चीज़ें
बहुत मसालेदार खाना
अत्यंत महत्वपूर्ण:
गलत योगासन स्थिति बिगाड़ सकता है।
भ्रामरी
अनुलोम विलोम
वज्रासन
ताड़ासन
शवासन
क्रंच
पुश-अप
प्लैंक
पेट को मोड़ने वाले आसन
भारी वजन
मांसपेशियाँ कमजोर → हर्निया संभावना अधिक
प्रेग्नेंसी के बाद पेट ढीला → Umbilical/Inguinal Hernia
Umbilical Hernia आम
अधिकतर बिना ऑपरेशन ठीक हो जाता है
यदि:
✔ उभार सख्त और दर्दनाक हो जाए
✔ पेट में तेज दर्द
✔ गैस/मल पास न हो
✔ उल्टी
✔ उभार अंदर न जाए
तो यह Strangulated Hernia है → तत्काल ऑपरेशन आवश्यक।
हर्निया गंभीर समस्या है, लेकिन शुरुआती स्तर पर आयुर्वेद
✔ दर्द कम
✔ गैस–कब्ज नियंत्रित
✔ मांसपेशियाँ मजबूत
✔ जीवन बेहतर
बना सकता है।
उन्नत स्थिति में सर्जरी ही सर्वोत्तम विकल्प है।
आयुर्वेद सर्जरी से पहले–बाद में बेहतरीन सपोर्ट प्रदान करता है।
हर्निया के कारण आंत्र में सूजन आने पर ।
कुटजघन वटी 25 टैबलेट, प्रवाल पंचामृत रस 5 ग्राम मुक्त शुक्ति भस्म 5 ग्राम, स्वर्ण बसंत मालती 1 ग्राम आमदोषांतक चूर्ण 5 ग्राम। सभी को पीसकर आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम खाली पेट पुनर्नवारिष्ट के साथ दें उपरोक्त दवा किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर के संपर्क में ही लें
इस ब्लॉग में बताए गए किसी भी उपचार, जड़ी-बूटी, योग या औषधि को केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही उपयोग करें। स्वयं उपचार करना जोखिमभरा हो सकता है।
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