खर्राटे (Snoring) वह आवाज है जो नींद के दौरान हवा के मार्ग में अवरोध (Obstruction) होने पर निकलती है। गले के नरम ऊतक हवा के दबाव से कंपन करने लगते हैं और resulting vibration एक तेज आवाज पैदा करती है।
यह आवाज कभी इतनी हल्की होती है कि केवल स्वयं को सुनाई देती है, और कभी इतनी तेज कि कमरे का व्यक्ति तो क्या पूरा घर परेशान हो जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की लगभग
40% पुरुष आबादी
25% महिलाएँ
और लगभग 10% बच्चे
नियमित रूप से खर्राटे लेते हैं।
आयुर्वेद में इसे "निद्रा विकार", "कफजन्य अवरोध", और "प्राणवायु की गड़बड़ी" से उत्पन्न रोग माना गया है।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, गले की मांसपेशियाँ अपनी कठोरता खो देती हैं।
ढीली मांसपेशियाँ airway को बंद कर देती हैं, और वही आवाज का कारण हैं।
मोटापे में गले के आसपास चर्बी जमा हो जाती है, जिससे
Nasal passage संकरा हो जाता है
Airway दब जाता है
और हवा का आवागमन रुक-रुककर होता है
इससे बहुत तेज खर्राटे आते हैं।
– फ्लू
– साइनस
– एलर्जी
– नाक में पॉलीप
– नाक की हड्डी टेढ़ी (DNS)
इनसे हवा का रास्ता बंद होता है और दबाव बढ़ने से आवाज पैदा होती है।
Alcohol गले की muscles को relax कर देता है, जिससे vibration बढ़ जाती है।
Smoking से throat tissues में सूजन बढ़ती है।
पीठ के बल सोने पर जीभ पीछे की ओर सरक जाती है और airflow block हो जाता है।
इसमें व्यक्ति की सांस 10–20 सेकंड तक रुक सकती है,
जिससे
ऑक्सीजन घटती है
दिमाग पर दबाव बढ़ता है
दिल पर बोझ बढ़ता है
इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गले के टिशू में सूजन और स्लो metabolism के कारण airway संकरा होता है।
बच्चों में विशेष रूप से अधिक देखा जाता है।
रात में एसिड ऊपर आने से गले में सूजन होती है, जिससे खर्राटे आते हैं।
तेज आवाज वाले खर्राटे
नींद में बार-बार रुकावट
सुबह उठकर भारीपन
सिरदर्द
दिनभर नींद आना
मूड खराब रहना
गले में सूखापन
याददाश्त कम होना
काम में ध्यान न लगना
वजन बढ़ना
यदि खर्राटों के साथ निम्न संकेत हों तो यह गंभीर समस्या है:
सांस कुछ सेकंड रुकना
बिस्तर पर करवटें बदलते रहना
अत्यधिक थकान
रात में घुटन
खर्राटों से
BP बढ़ जाता है
हार्ट अटैक का खतरा कई गुना हो जाता है
दिमाग में पर्याप्त oxygen न पहुँचने से
स्ट्रोक
याददाश्त की समस्या
झुंझलाहट
डिप्रेशन
हो सकता है।
Hormonal imbalance (Ghrelin बढ़ता है, leptin कम होता है)
→ भुख ज्यादा लगती है
→ मोटापा बढ़ता है
→ और मोटापा खर्राटे और बढ़ाता है (vicious cycle)
लोग अलग कमरे में सोना शुरू कर देते हैं।
पढ़ाई में दिक्कत
मोटापा
चिड़चिड़ापन
श्वसन रोग
आयुर्वेद के अनुसार, खर्राटे निम्न दोषों के कारण होते हैं:
कफ जमा होने से
नाक बंद
गला सूजना
airway संकरा
वायु सही दिशा में नहीं चलती, जिससे साँस रुकने की संभावना होती है।
गलत पाचन से कफ बढ़ता है।
देर तक जागना
ज्यादा सोना
ठंडा भोजन
भारी खाना
सब खर्राटे बढ़ाते हैं।
यह सेक्शन और भी बड़ा करके दिया गया है:
नाक में औषधि की बूंद डालना सांस मार्ग को खोलने का सबसे प्रभावी उपाय है।
नस्य में उपयोग होने वाले तेल:
अणु तेल
षड्बिंदु तेल
कर्पूरादि तेल
घृतसिद्ध तेल
इसका immediate असर दिखता है – खर्राटे कम, सांस साफ।
रात को 1 चम्मच गुनगुने पानी से
→ वजन कम
→ पाचन दुरुस्त
→ कफ कम
→ गला साफ
गले की मांसपेशियाँ मजबूत
इन्फेक्शन कम
श्वसन मार्ग खुलता है
दिमाग मजबूत
गहरी नींद
तनाव कम
खर्राटे कम
मांसपेशियों की कमजोरी दूर करता है।
कफ प्रधान खर्राटों में बेहद प्रभावी।
दो बूंद गर्म घी रात को नाक में
काली मिर्च का हल्का धुआँ
→ नाक तुरंत खुलती है
10 मिनट
→ mucus ढीला होता है
→ नाक खुलती है
→ vibration कम
सूजन कम करता है।
नाक की सूजन कम।
अम्लपित्त दूर, जिससे खर्राटे कम।
✔ सूप
✔ गर्म पानी
✔ काली मिर्च
✔ अदरक
✔ हर्बल चाय
✔ तुलसी
✔ सौंठ
✔ हल्का भोजन
✘ दही
✘ चावल
✘ आइसक्रीम
✘ मैदा
✘ चीनी
✘ ठंडा पानी
✘ शराब
गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
वायुमार्ग खोलता है।
vibration से throat muscles मजबूत होती हैं।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
Sleep apnea में life-saving उपकरण।
Deviated septum correction
Uvulectomy
Adenoid removal
हवा का प्रवाह बढ़ाते हैं।
सबसे effective।
बच्चों में खर्राटे हमेशा गंभीर संकेत देते हैं:
एडेनॉइड बढ़ना
टॉन्सिल बढ़ना
नाक ब्लॉक रहना
एलर्जी
मोटापा
अगर बच्चा रोज खर्राटे लेता है, डॉक्टर को दिखाना अनिवार्य है।
महिलाओं में खर्राटे अक्सर
Hypothyroidism
PCOD
तनाव
मोटापा
से जुड़े होते हैं।
उम्र बढ़ने से muscles ढीली → airway संकरा
इसलिए बुजुर्ग अधिक खर्राटे लेते हैं।
खर्राटे सामान्य दिखने वाली समस्या हैं, लेकिन इनके पीछे कई गंभीर कारण छिपे हो सकते हैं।
आयुर्वेद + योग + घरेलू उपाय + आधुनिक चिकित्सा मिलाकर इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
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