मिर्गी (Epilepsy) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

Mar 31, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
मिर्गी (Epilepsy) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

परिचय – मिर्गी क्या होती है?

मिर्गी (Epilepsy / Apsmar) एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति अचानक चेतना खो देता है, शरीर अकड़ जाता है, हाथ-पैर अनियंत्रित रूप से फड़कने लगते हैं, मुँह से झाग आने लगता है, आँखें स्थिर हो जाती हैं और उसे स्वयं को कोई ज्ञान नहीं रहता।

आयुर्वेद में इसे “अपस्मार” कहा गया है —
अर्थात स्मृति का नाश, चेतना का पतन, मन की अस्थिरता और नाड़ियों में विकार।

मिर्गी एक साधारण बीमारी नहीं बल्कि मन, मस्तिष्क, नाड़ियों और प्राणवायु—चारों का विकार है।
इसका इलाज केवल दवा से नहीं बल्कि—
औषध + पथ्य + दिनचर्या + मानसिक शांति + योग
इन सबके मिलकर होता है।


मिर्गी कैसे और क्यों होती है?

  • मस्तिष्क में विद्युत-सिग्नल की गड़बड़ी

  • दिमाग में चोट

  • ब्रेन ट्यूमर / सिस्ट

  • स्ट्रोक

  • दिमाग में सूजन

  • मस्तिष्कावरण शोथ

  • जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी

  • आनुवंशिकता

आयुर्वेदिक कारण

  • वात की विकृति: नसों की गति बिगड़ना

  • कफ का अवरोध: चेतना धीमी होना

  • तामस और राजस का बढ़ना: मन में विकार

  • अग्नि मंद होने से विष (Aam) का निर्माण

  • नाड़ी तंत्र में अवरोध

यह रोग शरीर व मन दोनों का रोग है।


मिर्गी के लक्षण

दौरे से पहले (AURA)

  • चक्कर

  • भय

  • धुंधलापन

  • कोई अजीब गंध/आवाज

  • दिल की धड़कन तेज

दौरे के समय

  • अचानक गिरना

  • आँखें पलट जाना

  • शरीर में अकड़न

  • हाथ-पैर पटकना

  • झाग निकलना

  • पेशाब/पखाना निकल जाना

  • जीभ दब जाना

दौरे के बाद

  • गहरी नींद

  • सिरदर्द

  • कमजोरी

  • कुछ याद न रहना


मिर्गी क्यों खतरनाक है?

  • चोट लगने का खतरा

  • दम घुट सकता है

  • लंबे समय तक untreated रहने पर दिमाग कमजोर होता है

  • याददाश्त घटती है

  • व्यवहार बदलता है

  • बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो सकते हैं

  • कुछ केसों में जान तक जा सकती है


मिर्गी उपचार-

1. सिद्ध अवलेह – मिर्गी का चमत्कारी अवलेह 


(A) सिद्ध अवलेह के घटक द्रव्य – प्रत्येक 50–50 ग्राम

मुख्य मस्तिष्क-बल्य द्रव्य

  • ब्राह्मी

  • शंखपुष्पी

  • मालकांगनी

  • हरड़

  • त्रिफला

  • तगर

  • वंशलोचन

  • नेत्रबाला

कफ-नाशक एवं नाड़ी शुद्धिकारक द्रव्य

  • सोंठ

  • काली मिर्च

  • मुलहठी

  • नागरमोथा

  • कुटकी

  • निशोथ

  • गिलोय

  • खरैंटी

रक्त व पित्त शामक द्रव्य

  • लाल कमल पंचांग

  • दालचीनी

  • चंदन लाल/सफेद

  • नागकेशर

वात-शामक एवं मन-शुद्धि द्रव्य

  • इन्द्रायण जड़

  • अतीस

  • रास्ना पत्ते

  • बेल पत्ते

  • भारंगी पंचांग

  • कुट मीठा

शरीर-बल्य द्रव्य (Nutrition Boosters)

  • पिंडखजूर गुठली निकला

  • मुनक्का

  • सिंघाड़ा

  • अनारदाना मीठा

अन्य विशिष्ट द्रव्य

  • अम्लवेत

  • इमली के बीज

  • पत्रज

  • दारुहल्दी

  • मुसली-सिम्ब्ल

  • कांस बीज

  • बथुआ पत्ते

  • मेहँदी पत्ते

  • पीली हरड़ छिलका

  • आदि…

सभी द्रव्यों को — बारीक कपड़छान चूर्ण बनाएं।


(B) अवलेह निर्माण विधि (Step-by-Step)

1️⃣ सभी द्रव्य बारीक चूर्ण बना लें।
2️⃣ इसमें गौघृत या बादाम रोगन मिलाएँ।
3️⃣ अब ऊपर से चूर्ण जितनी मिश्री डालें।
4️⃣ अब उतनी ही असली मधु (शहद) डालें।
5️⃣ कम से कम 1 घंटे तक लगातार घोटें।
6️⃣ जब मिश्रण एक-जान हो जाए → अवलेह तैयार।


सेवन विधि (सबसे आवश्यक)

पहले 2 दिन पेट शुद्धि:

  • गुलकंद 4 चम्मच

  • त्रिफला 1 चम्मच

  • इसबगोल ½ चम्मच

  • 1 गिलास दूध में शंखपुष्पी सिरप 5 चम्मच

तीसरे दिन से अवलेह शुरू:

  • सुबह खाली पेट – 1 चम्मच + मीठा ठंडा दूध

  • शाम 5 बजे – 1 चम्मच + दूध

  अवधि:

  • 10 साल पुरानी मिर्गी → 2 माह

  • 25 साल पुरानी → 100 दिन


2. सिद्ध घृत – चमत्कारिक मिर्गीनाशक घृत

(A) द्रव्य

  • अवलेह के सभी द्रव्य

  • गन्ने की जड़

  • सफेद दूब

  • कांसी

  • कुशकी जड़
    (प्रत्येक 50 ग्राम)

(B) निर्माण विधि

1️⃣ सबको 16 गुने पानी में उबालें।
2️⃣ चौथाई शेष रहने पर छान लें।
3️⃣ अब इसमें बराबर मात्रा बकरी का दूध मिलाएँ।
4️⃣ और 4 सेर गौघृत डालें।
5️⃣ धीमी आँच पर पकाएँ जब तक सारा पानी उड़ न जाए और केवल घृत रह जाए।
6️⃣ मिट्टी की बरनी में संग्रह करें।

(C) सेवन

  • 1–1 चम्मच सुबह–शाम + कुनकुना दूध

  • 60 दिनों में परिणाम

यह घृत हिस्टीरिया, पागलपन और मानसिक रोगों में भी अत्यंत लाभकारी है।


3. आयुर्वेद की अन्य श्रेष्ठ औषधियाँ

  • अपतंत्रकारी वटी

  • वृहद वात चिंतामणि रस

  • ब्राह्मी वटी (स्वर्ण युक्त)

  • जटामांसी क्वाथ

  • शंखपुष्पी स्वरस

  • रौप्य भस्म + ब्राह्मी + बच चूर्ण (घी से)

  • सर्पगंधा योग


4. मिर्गी के घरेलू नुस्खे (सबसे प्रभावी घरेलू उपचार)

ये नुस्खे आपके उपचार को दोगुना प्रभावशाली बनाते हैं।

1. ब्राह्मी-शंखपुष्पी दूध

  • 1 चम्मच ब्राह्मी चूर्ण

  • 1 चम्मच शंखपुष्पी

  • 1 गिलास दूध
     मस्तिष्क की नाड़ियों को मजबूती।

2. देशी घी नस्य (नाक में घी)

सुबह–शाम 2-2 बूंद
 प्राणवायु स्थिर, दौरे रुकते हैं।

3. खसखस + मिश्री

  • 1 चम्मच खसखस

  • 1 चम्मच मिश्री
    रात को लें → नींद अच्छी, मस्तिष्क शांत।

4. तुलसी + शहद

5–7 तुलसी पत्ते + 1 चम्मच शहद
 दौरे के बाद कमजोरी दूर।

5. नारियल पानी + शक्कर

 दिमाग में जलन व उत्तेजना कम करता है।

6. भृंगराज रस

 मस्तिष्क को ठंडक, दौरे कम।

7. अंजीर + दूध

 ब्रेन की नाड़ियों को पोषण।


5. पथ्य (क्या खाना चाहिए?) – 

✔ लौकी
✔ परवल
✔ टिंडा
✔ पालक
✔ मैथी
✔ गिलोय पानी
✔ मूंग दाल
✔ गेहूं रोटी
✔ दलिया
✔ सेब
✔ पपीता
✔ मीठे फल
✔ दूध
✔ घी
✔ शक्कर


6. अपथ्य (किससे दूरी रखें?)

❌ तले पदार्थ
❌ दही
❌ चावल
❌ आलू
❌ बैंगन
❌ चना/उड़द/मसूर
❌ मांस
❌ शराब
❌ मछली
❌ खट्टा
❌ जंक फूड
❌ कोल्ड ड्रिंक
❌ बिस्किट-ब्रेड


7. योग और प्राणायाम

 सर्वश्रेष्ठ योग:

  • श्वास ध्यान

  • नाड़ी शोधन

  • अनुलोम–विलोम

  • भ्रामरी

  • शवासन

  • सूक्ष्म व्यायाम

 यह मस्तिष्क को तुरंत शांति देते हैं।


8. मिर्गी रोगी की दिनचर्या (Lifestyle)

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठें

  • हल्का व्यायाम

  • विलंबित भोजन न करें

  • दोपहर की नींद न लें

  • रात को देर तक जागरण न करें

  • तनाव से दूर

  • किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, उत्तेजना न पालें


महत्वपूर्ण चिकित्सीय सलाह (Important Medical Note)

उपरोक्त सभी आयुर्वेदिक औषधियाँ, सिद्ध अवलेह, सिद्ध घृत, रस-औषधियाँ तथा घरेलू उपचार किसी योग्य एवं अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही लें।

हर व्यक्ति की प्रकृति (Prakriti), दोष, उम्र, रोग का प्रकार, रोग की अवधि एवं शरीर की सहनशीलता अलग होती है।
इसलिए:

  • बिना चिकित्सक की देखरेख के कोई भी औषधि स्वयं न लें।

  • विशेषकर स्वर्ण-युक्त, खनिज-युक्त या तीव्र प्रभाव वाली दवाएँ हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाएँ।

  • गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग एवं अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

यह लेख केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के लिए है।
उपचार हमेशा किसी पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करें।

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