रोगों का कारण और निवारण –रोग क्या है?

Dec 03, 2025
आरोग्य साधन
रोगों का कारण और निवारण –रोग क्या है?

प्रस्तावना – रोग क्या है?

मनुष्य सहसा कह देता है—
“मैं बीमार हूँ।”

लेकिन क्या वह यह जानता है कि वह किस रोग से पीड़ित है, क्यों पीड़ित है, उसका मूल कारण क्या है, उसका निवारण क्या है?

दुनिया में लाखों लोग अपने रोग के लक्षण को "रोग" समझते हैं।
उन्हें यह पता ही नहीं चलता कि—
लक्षण रोग नहीं, रोग का संकेत है।

उदाहरण:

  • बुखार = रोग नहीं → शरीर का सफाई अभियान

  • सिरदर्द = रोग नहीं → अंदर गंदगी का जमा होना

  • खाँसी = रोग नहीं → शरीर कफ को बाहर निकाल रहा है

  • दस्त = रोग नहीं → शरीर विषाक्त पदार्थ बाहर फेंक रहा है

  • उल्टी = रोग नहीं → पेट की सफाई

रोग असल में शरीर की सफाई की प्रक्रिया है।


रोग क्या है? 8 वैज्ञानिक परिभाषाएँ

1️⃣ शरीर की प्राकृतिक क्रियाओं का रुक जाना
2️⃣ कोशिकाओं का असंतुलन
3️⃣ रक्त में विष का जमाव
4️⃣ टॉक्सिन का किसी अंग में जमा होकर अवरोध पैदा करना
5️⃣ पाचन-तंत्र का बिगड़ना
6️⃣ नाड़ी-तंत्र की गड़बड़ी
7️⃣ हार्मोन का असंतुलन
8️⃣ रोग प्रतिरोधक शक्ति का कमजोर होना


रोग क्या है? 8 आयुर्वेदिक परिभाषाएँ

1️⃣ दोषों (वात-पित्त-कफ) का असंतुलन
2️⃣ अग्नि (Digestive Fire) का मंद होना
3️⃣ आम (टॉक्सिन) का बनना
4️⃣ नाड़ियों में अवरोध
5️⃣ प्राण-वायु का उल्टा चलना
6️⃣ मन में तामस-राजस का बढ़ना
7️⃣ धातुओं की कमजोरी
8️⃣ ओज की कमी


रोग क्या है? 8 प्राकृतिक चिकित्सा दृष्टियाँ

1️⃣ गलत खान-पान का परिणाम
2️⃣ प्रकृति के नियमों का उल्लंघन
3️⃣ शरीर में गंदगी जमा होना
4️⃣ निकास-द्वारों का बंद होना
5️⃣ शरीर का “क्लीनिंग सिस्टम”
6️⃣ शरीर द्वारा दी गई चेतावनी
7️⃣ जीवनशैली का दुष्परिणाम
8️⃣ मन की अशांति का शरीर पर असर


स्वास्थ्य क्या है? बहुत विस्तृत परिभाषा

✔ शरीर

  • अंगों का बिना रुकावट काम करना

  • भोजन का अच्छे से पचना

  • कोई दर्द, बेचैनी या असहजता न होना

✔ मन

  • तनाव न हो

  • चिंता, भय, क्रोध पर नियंत्रण

  • मन में उत्साह, शांति और स्फूर्ति

✔ नाड़ियाँ

  • रक्त का सुचारु प्रवाह

  • नसों में जाम या रुकावट न होना

✔ इंद्रियाँ

  • आँखें साफ

  • श्रवण शक्ति ठीक

  • स्वाद सामान्य

  • त्वचा चमकदार

✔ प्राण

  • श्वास सहज

  • फेफड़े शुद्ध

  • ऑक्सीजन का संपूर्ण उपयोग

✔ अग्नि

  • खाना भूख से खाना

  • सही समय पर पचना

  • सही मल, सही मूत्र

जब ये सब संतुलित हों—
? वही पूर्ण स्वास्थ्य है।


रोग कैसे बनता है? (गहराई से समझें)

यह शरीर एक सूक्ष्म मशीन है।
जब इसमें कचरा जमा होता है—
अवरोध पैदा होता है—
ताप बढ़ता है—
तो शरीर संकेत देता है: “अब मैं परेशानी में हूँ।”


रोग निर्माण की प्रक्रिया — 5 चरण

1️⃣ पाचन बिगड़ना (Digestive Weakness)

गलत आहार → अग्नि मंद → खाना पूरा नहीं पचता।

2️⃣ आम (टॉक्सिन) बनना

न पचा भोजन सड़कर विष बनाता है।

3️⃣ रक्त में मिलना

यह आम रक्त में घूमता है → रक्त अशुद्ध हो जाता है।

4️⃣ किसी कमजोर अंग में जमना

कभी यह

  • त्वचा में जमा होता है → त्वचा रोग

  • फेफड़े में → खाँसी, अस्थमा

  • जोड़ों में → गठिया

  • पेट में → कब्ज, गैस

  • दिमाग में → सिरदर्द, माइग्रेन

5️⃣ शरीर चेतावनी देता है → “रोग” उत्पन्न होता है

यही रोग है।


बीमार कौन होता है?

✔ जो प्रकृति के नियमों का अनादर करता है

  • देर से सोना

  • देर से उठना

  • धूप न लेना

  • बंद कमरों में रहना

  • मांस, अंडा, शराब

  • फास्ट फूड

  • अत्यधिक चाय-कॉफी

  • व्यायाम न करना

✔ जो मन में नकारात्मकता रखता है

  • तनाव

  • क्रोध

  • भय

  • चिंता

✔ जो निकास द्वारों को बंद कर देता है

  • कब्ज

  • पसीना न आना

  • ज्यादा देर बैठना

✔ गलत सांस लेने की आदतें

  • उथली सांस

  • प्रदूषित हवा

? ऐसे लोग सबसे जल्दी बीमार होते हैं।


प्रकृति हमें रोग क्यों देती है?

प्रकृति दंड नहीं देती,
वह केवल चेतावनी देती है—
“तुम गलत जीवन-शैली अपनाए हुए हो।”

बुखार = खून साफ करना
खाँसी = कफ निकालना
उल्टी = पेट की सफाई
दस्त = विष बाहर
पसीना = शरीर की धुलाई

रोग एक मित्र है, दुश्मन नहीं।


रोग कितने प्रकार के हैं?

1. आकस्मिक (Accidental)

  • चोट

  • फ्रैक्चर

  • जलना

  • डूबना

  • गिरना

2. आंतरिक (Internal)

  • अपच

  • कब्ज

  • गैस

  • विष का जमाव

  • गलत खान-पान

  • जीवनशैली की गड़बड़ी

दूसरे प्रकार वाले रोग ही सबसे ज्यादा होते हैं।


शरीर में गंदगी कहाँ-कहाँ जमा होती है?

1️⃣ पेट → गैस / कब्ज
2️⃣ आँतें → टॉक्सिन
3️⃣ त्वचा → फोड़े-फुंसी
4️⃣ रक्त → एलर्जी
5️⃣ जोड़ों में → गठिया
6️⃣ दिमाग में → माइग्रेन
7️⃣ फेफड़ों में → कफ
8️⃣ लिवर में → फैटी लिवर


रोग का निवारण — 25 प्रभावी उपाय

अब बात करते हैं निवारण (Prevention) की।
यह सबसे महत्वपूर्ण है:


1. सही भोजन

  • ताजे फल

  • सलाद

  • अंकुरित

  • दलिया

  • खिचड़ी

  • दही नहीं

  • तेलयुक्त चीजें कम


2. पानी

  • सुबह 2 गिलास

  • दिनभर हल्का गर्म पानी

  • भोजन के बाद एक घंटे बाद पानी


3. सूर्योदय के समय टहलना

फेफड़े + दिल + दिमाग तीनों स्वस्थ होते हैं।


4. योग और प्राणायाम

  • अनुलोम–विलोम

  • भ्रामरी

  • कपालभाति (हल्की)

  • मंडूकासन

  • गोमुखासन


5. सूर्य स्नान

Sunlight = दवा + उर्जा + इम्युनिटी


6. नींबू-शहद पानी

शरीर की सफाई।


7. त्रिफला

रात को 1 चम्मच
? पेट और रक्त दोनों साफ।


8. उपवास

सप्ताह में 1 दिन
→ शरीर खुद को साफ करता है।


9. हर्बल चाय

तुलसी + अदरक + दालचीनी


10. तेल मालिश

सरसों का तेल
? त्वचा और नाड़ियों की शुद्धि


11. भोजन समय पर

सुबह–दोपहर–शाम — तीनों निश्चित समय पर।


12. परहेज़

  • शराब

  • मांस

  • अंडा

  • तला हुआ

  • फास्ट फूड

  • चाय–कॉफी अधिक

  • बासी भोजन


13. मन शांत रखें

मन स्वस्थ → शरीर स्वस्थ


14. नींद भरपूर

7–8 घंटे
? सभी अंगों की मरम्मत


15. कच्चा प्याज़

शरीर की गर्मी नियंत्रित


16. गिलोय

इम्युनिटी बूस्टर


17. अदरक

पाचन अग्नि मजबूत


18. शहद

रक्त शुद्धि


19. हरी सब्जियाँ

रक्त को क्षारीय बनाती हैं


20. दूध (गरम)

रात में
दिमाग शांत करता है


21. फल ज्यादा खाएँ

  • सेब

  • पपीता

  • केला

  • मौसंबी


22. सांस धीमी और गहरी लें

90% रोग गलत श्वास के कारण।


23. गुनगुने पानी से स्नान

नाड़ियाँ खुलती हैं


24. ध्यान (Meditation)

रोग के आधे कारण मन में होते हैं


25. पंचकर्म (If Needed)

  • विरेचन

  • नस्य

  • बस्ती

  • शिरोधारा
    ? गहरी शुद्धि


अंतिम निष्कर्ष (Conclusion)

✔ रोग शत्रु नहीं, मित्र है

✔ रोग शरीर का सफाई तंत्र है

✔ रोग का मूल कारण — रक्त की अशुद्धता

✔ समाधान — प्रकृति के अनुसार जीवन

✔ दवा कम, आहार और जीवन-शैली ज्यादा महत्वपूर्ण

✔ शरीर स्वयं अपना चिकित्सक है

और सुंदर स्वास्थ्य के सामने रोग उसी तरह गायब हो जाता है जैसे सूर्य निकलते ही अंधेरा।

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