थायराइड आज भारत में सबसे अधिक पाई जाने वाली हार्मोनल बीमारियों में से एक है।
WHO के अनुसार 42 करोड़ से अधिक लोग थायराइड जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं, जिनमें अकेले भारत में ही लगभग 11 करोड़ मरीज हैं।
थायराइड बीमारी तेजी से क्यों बढ़ रही है? कारण हैं—
गलत जीवनशैली
पाचन तंत्र की कमजोरी
तनाव (Stress)
नींद की कमी
प्रदूषण और आयोडीन असंतुलन
हार्मोनल सिस्टम का बिगड़ना
आयुर्वेद में थायराइड को गलगण्ड, अग्निमांद्य, कफ-वात विकार, और ग्रंथि-अवरोध बताया गया है।
आयुर्वेद का उद्देश्य केवल बीमारी को दबाना नहीं, बल्कि दोष (Vata-Pitta-Kapha), अग्नि, मन और ग्रंथियों को संतुलित करके बीमारी को मूल से ठीक करना है।
थायराइड Gland गले के निचले हिस्से में, तितली के आकार की एक अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह शरीर के लगभग हर सिस्टम को प्रभावित करती है, जैसे—
पाचन / Digestion
वजन / Weight
ऊर्जा / Energy
नींद / Sleep
त्वचा / Skin
बाल / Hair
दिल / Heart Rate
मूड / Brain Function
थायराइड 3 प्रमुख हार्मोन बनाती है:
इन हार्मोनों को चलाता है —
TSH (Thyroid Stimulating Hormone) — जिसे पिट्यूटरी ग्रंथि बनाती है।
यदि T3–T4 कम बनें → Hypothyroidism
यदि T3–T4 अधिक बनें → Hyperthyroidism
आयुर्वेद में थायराइड को एक ग्रंथि विकार नहीं, बल्कि दोषों और अग्नि असंतुलन का परिणाम माना जाता है।
आयुर्वेद में मुख्य कारण:
आयुर्वेद कहता है:
अग्नि मंद → आमा उत्पन्न → ग्रंथियों में अवरोध → हार्मोन असंतुलन
Hypothyroid का सबसे बड़ा कारण यही है।
भारी, ठंडी, तैलीय चीजें
देर रात सोना
सुबह देर तक उठना
व्यायाम की कमी
कफ बढ़कर गले की ग्रंथि में जमा होकर goitre की समस्या उत्पन्न करता है।
तनाव
अत्यधिक विचार
असंगत दिनचर्या
वात असंतुलन Hyperthyroidism जैसी स्थितियों में दिखता है।
यह थायराइड पर सीधा प्रभाव डालता है।
Stress → Cortisol बढ़ता है → Thyroid hormones का संतुलन बिगड़ता है।
आयोडीन की कमी/अधिकता
प्लास्टिक और रसायनों में मौजूद “थायराइड डिसरप्टर केमिकल्स”
भोजन में मिलावटी पदार्थ
नींद की कमी
स्क्रीन टाइम अधिक
लगातार थकान
वजन बढ़ना
कब्ज
ठंड लगना
त्वचा शुष्क होना
बाल झड़ना / रुखापन
मासिक धर्म गड़बड़ी
भूख कम
तनाव, अवसाद, चिड़चिड़ापन
चेहरे या पैरों में सूजन (Myxedema)
Hypothyroid को आयुर्वेद में:
कफ-वात विकार + अग्निमांद्य + आमा-वृद्धि कहा गया है।
वजन तेजी से कम होना
भूख बढ़ना
दिल की धड़कन तेज
चक्कर और घबराहट
पसीना अधिक
हाथ कांपना
नींद की कमी
आँखें बाहर निकलना (Graves Disease)
आयुर्वेद अनुसार:
पित्त-वात वृद्धि + गर्मी + हृदय ओवरएक्टिविटी
सोंठ, काली मिर्च और पीपल को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें।
मात्रा: आधा चम्मच
कैसे लें: सामान्य पानी के साथ
समय: सुबह और शाम
लाभ: मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है और थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करता है।
1 कप गर्म दूध में 2 चम्मच नारियल तेल मिलाएं।
समय: सुबह खाली पेट
लाभ: थायराइड हार्मोन (T3, T4) के संतुलन में मदद करता है और मेटाबॉलिज़्म सुधारता है।
10–15 ग्राम आंवला चूर्ण में 1 चम्मच शहद मिलाएं।
कैसे लें: सुबह और शाम खाली पेट
लाभ: आंवला में मौजूद विटामिन-C थायराइड सेल्स को पोषण देता है, सूजन कम करता है और हॉर्मोनल बैलेंस सुधारता है।
आयुर्वेद में जाँच 3 माध्यम से होती है—
भूख
प्यास
मल-मूत्र
नींद
गर्दन में सूजन
सूखी त्वचा
तेज धड़कन
बाल झड़ना
Hypothyroid → कफ-वात नाड़ी
Hyperthyroid → पित्त-वात नाड़ी
TSH
Free T3 / T4
Anti-TPO (Autoimmune Test)
Ultrasound
आयुर्वेद में थायराइड का उपचार “Holistic Plan” पर आधारित है—
✔ आहार (Diet)
✔ औषधि (Herbs + Medicines)
✔ दिनचर्या (Lifestyle)
✔ योग (Yoga)
✔ मन-चिकित्सा (Mental Balance)
✔ पंचकर्म (Detoxification)
यह आयुर्वेद में सबसे प्रभावी दवाएँ हैं।
→ थायराइड का सबसे मुख्य आयुर्वेदिक उपचार
→ गोइटर, सूजन, कफ-वृद्धि, ग्रंथियों के अवरोध को दूर करता है
वैज्ञानिक रूप से सिद्ध
→ T4 उत्पादन को बढ़ाता है
→ तनाव कम करता है
→ ऊर्जा बढ़ाता है
→ कब्ज ठीक → अग्नि बढ़ती है → हार्मोन संतुलन
→ सूजन कम
→ लिवर शुद्ध
→ मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करता है
→ ग्रंथियों के blockage खोलता है
→ चिंता, तनाव कम
→ हार्मोनिक संतुलन
→ गर्मी कम करता है
→ पित्त संतुलन
→ पसीना, palpitation कम
→ Hyperactivity नियंत्रित
→ T3–T4 अत्यधिक बनने से रोकता है
→ Anxiety + Acidity + Palpitation में लाभ
→ तंत्रिका तंत्र मजबूत
→ Pitta + Vata संतुलन
→ Hypothyroid में नंबर 1 Remedy
ओमेगा-3 → Hormone Balance
कैसे लें:
1 चम्मच पाउडर सुबह गुनगुने पानी के साथ
→ मेटाबॉलिज्म दोगुना करता है
→ सूजन कम करता है
→ ग्रंथियों में रक्त प्रवाह बढ़ाता है
खाली पेट 2–3 कलियाँ
→ Autoimmune thyroid में जबरदस्त लाभ
गुनगुना पानी
त्रिफला जल
5 बादाम
1 चम्मच अलसी
मूंग चीला
मिलेट खिचड़ी
दही + जीरा
लो-कैलोरी सब्जियाँ
घी वाली दाल
मूंग दाल खिचड़ी
हल्दी दूध
खीरा
तरबूज
सेब
सोया
पत्ता गोभी
फूलगोभी
जंक फूड
आइसक्रीम
रात 11 बजे के बाद सोना
तनाव
खाली पेट चाय
सर्वांगासन
मत्स्यासन
सिंहासन
कंधरासन
शवासन
चाइल्ड पोज़
धीमा प्राणायाम
भ्रामरी
? हाँ, Hypothyroid कई मरीजों में पूरी तरह नॉर्मल हुआ है।
क्योंकि T3–T4 कम → मेटाबॉलिज्म धीमा।
हाँ, पर Ayurvedic Doctor की सलाह आवश्यक।
हाँ, अलसी हार्मोन संतुलन करती है।
हाँ, पित्त-वात संतुलन से बहुत अच्छे परिणाम आते हैं।
थायराइड सिर्फ हार्मोन की बीमारी नहीं है—
यह अग्नि, दोष, मन, जीवनशैली, आहार का संयुक्त असंतुलन है।
आयुर्वेद Symptom Control नहीं, बल्कि बीमारी का Root Cause ठीक करता है।
सही आहार
सही औषधियाँ
सही योग
सही मानसिक संतुलन
इनसे थायराइड पूरी तरह सामान्य हो सकता है।
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