ऋतु परिवर्तन, नमी, प्रदूषण या ठंडी हवा का झोंका—श्वास रोगियों में बेचैनी, खांसी व सांस फूलने के दौरे को बढ़ावा दे सकता है।
दमा फेफड़ों तथा श्वासनलिका को प्रभावित करने वाला रोग है, जिसमें सांस की नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने-छोड़ने में कठिनाई होती है।
दौरे के बाद रोगी सामान्य दिख सकता है, लेकिन थकान बनी रहती है।
वायु प्रदूषण, धुआं, धूल
वायरल/बैक्टीरियल संक्रमण
तनाव व मानसिक दबाव
ठंडी-नमी वाली जलवायु
एलर्जी– धूल, फर वाले जानवर, धुआं, पेंट, परफ्यूम, फफूंद
अनियमित दिनचर्या व नींद की कमी
तला-भुना, फास्ट फूड, पैक्ड फूड
दही-चावल, ठंडे पेय पदार्थ, आइसक्रीम
अत्यधिक कफ बढ़ाने वाला भोजन
भूख न लगने पर खाना, देर से भोजन
अधिक तेल, अचार, जैम, मीठा
मिथ्या आहार-विहार
कफ-वात का प्रकोप
कमजोर अग्नि
दूषित वातावरण
➡️ जो श्वास-प्रश्वास तंत्र को प्रभावित कर दमा उत्पन्न करते हैं।
सांस फूलना, हाँफना
बोलने में रुकावट
छाती में जकड़न, भारीपन
सीटी जैसी आवाज़ (wheezing)
रात व सुबह अधिक समस्या
लेटने में तकलीफ, बैठने से आराम
सूखी या बलगमी खांसी
आँखों के आगे अंधेरा, बेचैनी
व्यायाम, ठंड, धूल, धुएं से अचानक वृद्धि
महाश्वास
ऊर्ध्वश्वास
छिन्नश्वास
क्षुद्रश्वास
तमकश्वास (Bronchial Asthma)
➡️ पहले तीन कष्टसाध्य, जबकि क्षुद्रश्वास एवं तमकश्वास साध्य माने गए हैं।
रोग बढ़ाने वाले कारणों व स्थानों से बचें
पेट साफ रखें — कब्ज न होने दें
रात में हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें
सर्दी-नमी-धूल से बचाव करें
प्रातःकाल स्वच्छ हवा में सैर करें
सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, ब्रह्मरी प्राणायाम
(⚠️ दौरे में प्राणायाम न करें)
रात्रि जागरण, तनाव व अत्यधिक परिश्रम न करें
धूम्रपान, शराब, तंबाकू से दूरी
पालतू जानवरों के फर व धूलभरे कपड़ों से सावधानी
पर्याप्त नींद व जल सेवन
(यदि रोगी को एलर्जी न हो)
सौंठ पाउडर – ¼ चम्मच
हल्दी – ¼ चम्मच
काला नमक – ¼ चम्मच
काली मिर्च – 5
छोटी पीपल – ¼ चम्मच
तुलसी पत्र – 5
➡️ एक पाव पानी में पकाकर 50 ml बचे तब छानकर गर्म पिएँ।
छाती पर गुनगुने तिल के तेल में नमक मिलाकर मालिश
गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर पैर डुबोकर रखें
भाप (steam inhalation) — बिना नीलगिरी तेल
अदरक रस — 1 चम्मच
तुलसी रस — 1 चम्मच
शहद — 1 चम्मच
एक चुटकी नमक
➡️ आधा कप गरम पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा दें
छाती व पीठ पर गर्म घी + नमक से मालिश
नाभि के आसपास हींग का हल्का लेप
सितोपलादि चूर्ण
शुद्ध टंकण
यष्टिमधु चूर्ण
श्वास कुठार रस
➡️ सभी को उचित मात्रा में मिलाकर शहद के साथ लें।
सौंठ
काली मिर्च
पिप्पली चूर्ण
➡️ घी और शहद की विषम मात्रा (असमान मात्रा) में मिलाकर सेवन करें।
⚠️ शहद और घी समान मात्रा में न मिलाएँ — आयुर्वेद में यह निषिद्ध है।
श्वास कुठार रस
श्रृंग भस्म
श्रृंगाराभ्रक भस्म
पुष्करमूल चूर्ण
➡️ सभी को उचित मात्रा में मिलाकर शहद के साथ लें।
-उपरोक्त सभी औषधियाँ केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह, जांच व निगरानी में ही लें।
-मात्रा, अवधि, रोगी की प्रकृति, आयु, इतिहास एवं एलर्जी के अनुसार भिन्न हो सकती है।
-स्व-चिकित्सा व इंटरनेट आधारित डोज़ लेना जोखिमपूर्ण है।
गुनगुना व ताज़ा भोजन
अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हींग
तुलसी, पुदीना, मुलेठी
चने का सूप, जौ, बाजरा, गेहूं, मूंग
गाजर, लौकी, तोरई, पपीता, चीकू
बादाम, किशमिश, मीठा सेव
शहद, सेंधा नमक, जीरा
ठंडा पानी, आइसक्रीम, फ्रिज की चीजें
ब्रेड, पनीर, मटर, लोबिया, उड़द दाल
केला, संतरा, तरबूज (कुछ में एलर्जी बढ़ा सकता है)
तला-भुना, फास्ट फूड, पैक्ड फूड
अचार, सॉस, कोल्ड ड्रिंक
देर से पचने वाला भोजन
श्वास चिंतामणि रस
श्वास कुठार रस
मल्ल सिन्दूर
रस सिन्दूर
चित्रकहरितकी
वासावलेह
कनकासव
कंटकार्यवलेह
च्यवनप्राश
-बिना विशेषज्ञ सलाह के स्व-चिकित्सा न करें — जोखिमपूर्ण हो सकता है।
1 चम्मच सरसों का तेल + थोड़ा गुड़ चाटें
रोज 4–5 तुलसी पत्ते चबाएँ
एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी
गर्म पानी से गरारे करें (सेंधा नमक सहित)
लगातार सांस फूलना
सीने में तेज दर्द
बोलने, चलने या लेटने में कठिनाई
होंठ/चेहरा नीला पड़ना
बच्चे में तेज हांफना या सुस्ती
इनहेलर के बाद भी राहत न मिलना
दमा एक नियंत्रित किया जा सकने वाला रोग है। सही जीवनशैली, शुद्ध आहार, योग-प्राणायाम एवं आयुर्वेदिक उपचार के संयोजन से रोगी सामान्य, सक्रिय, स्वस्थ जीवन जी सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण—लक्षण दिखते ही उचित चिकित्सीय सलाह अवश्य लें।
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