"उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार"

Apr 16, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार"

उच्च रक्त चाप (High Blood Pressure)

उच्च रक्तचाप का आयुर्वेदिक नाम शिरागत वात है। रक्त वाहिनियों तथा धमनियों पर रक्त का अधिक दबाव पड़ना और उनका कठोर हो जाना शिरागत वात है।

सामान्यतः रक्तचाप 120/80 मि.मी. पारा होता है। इसमें 10 मि.मी. पारे की घटत-बढ़त भी सामान्य ही समझना चाहिए।

यह 2 प्रकार का होता है—
(1) उच्च रक्त चाप (High B.P.)
(2) न्यून रक्त चाप (Low B.P.)

यहाँ पर उच्च रक्त चाप पर विचार किया जा रहा है।


सम्प्राप्ति

मनुष्य का हृदय लगभग सात तोला रक्त एक बार के संकोचन के समय धमनी में फेंकता है। इससे पहले भी धमनी में रक्त पूर्ण रूप से भरा रहता है।
धमनी में अतिरिक्त रक्त के फेंके जाने से धमनियों में दबाव पड़ता है और उनकी दीवारें फैल जाती हैं। यह धमनियों की संकुचनशीलता के कारण ही संभव हो सकता है।

दूसरा परिणाम—रक्त के कारण धमनियों में एक लहर पैदा होती है जो प्रारम्भ में बहुत प्रबल होती है और धीरे-धीरे कोशिकाओं में पहुँचने से पहले अदृश्य हो जाती है।
धमनी जितनी कठोर होगी, लहर उतनी ही तीव्र गति से चलेगी। जितनी संकुचनशीलता होगी, उतनी ही धीमी गति से चलेगी।


उच्च रक्त चाप के लक्षण

(1) रोगी के सिर में—विशेषकर सिर के पीछे और कनपटियों (कान के पीछे के भाग) में दर्द होता है। यह सिरदर्द कभी कम, कभी अधिक होता है। सिरदर्द की दवाई लेकर भी दर्द कम न हो—यह प्रमुख लक्षण है।

(2) रोगी को सुबह और शाम चक्कर आने लगता है।

(3) हृदय की गति अधिक हो जाती है और दर्द भी महसूस होता है।

(4) रोगी का कार्य में मन नहीं लगता। वह स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है और थोड़ा सा कार्य करने पर थकान हो जाती है।

(5) रोगी की स्मरण शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है।

(6) रोगी को निद्रा कम आती है और आती भी है तो टूट-टूट कर आती है।

(7) मंदाग्नि हो जाती है—अर्थात भूख कम लगती है और खाने में अरुचि होने लगती है।

(8) पेशाब की मात्रा कम होने लगती है। जांच करवाने पर पता चलता है कि पेशाब में शक्कर अथवा यूरिक एसिड बढ़ जाता है।

(9) उच्च रक्त चाप होने पर नाक और शरीर के अन्य अंगों से रक्तस्राव होने लगता है।

(10) मल आदि का अनियमित त्याग और उसमें बदबू आने लगती है।


कारण

(1) किडनी में काफी दिनों से निरंतर तीव्र संक्रमण
(2) किडनी का पथरी ग्रस्त होना
(3) जन्म से महाधमनी का संकुचित होना
(4) दिमाग में ट्यूमर होना
(5) थायराइड की बीमारी होने से भी रक्तचाप बढ़ सकता है
(6) High BP वंशागुणित बीमारी भी है
(7) मानसिक तनाव एवं चिंता
(8) घी, मक्खन, मलाई, डालडा, मांस, मछली तथा चीनी और मैदा जैसे खाद्य पदार्थ खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो जमकर रक्त संचार में बाधा उत्पन्न करता है, जिससे उच्च रक्तचाप हो सकता है
(9) अधिक धूम्रपान एवं शराब पीने से
(10) व्यायाम न करने से
(11) मधुमेह रोग पुराना होने पर HBP को आमंत्रण दे सकता है


आयुर्वेदिक चिकित्सा

अधिकांशतः डॉक्टर यह कहते हैं कि उच्च रक्त चाप का इलाज जिंदगी भर चलता है।
परंतु यदि उच्च रक्तचाप रोग को जन्म देने वाले कारण या बीमारी को खत्म कर दिया जाए जिसकी वजह से उच्च रक्तचाप हुआ है, तो उच्च रक्त चाप की बीमारी हमेशा के लिए खत्म की जा सकती है।
यदि इस होने वाली बीमारी का कारण समझ नहीं आता है, तो High BP से मुक्ति दिलाना संभव नहीं है।


घरेलू नुस्खे

  • लौकी का रस आधा कप में आधा कप पानी मिलाकर दिन में तीन बार खाली पेट पीने से HBP समाप्त होता है।

  • केले के तने का रस आधा कप नियमित कुछ दिनों तक पीने से HBP में लाभ मिलता है।

  • एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर नियमित सुबह पीने से उच्च रक्तचाप समाप्त होता है।

  • छाछ (मठा) भोजन के साथ दोनों वक्त लेने से उच्च और निम्न रक्त चाप—दोनों में फायदा होता है।

  • दो चम्मच शहद में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उच्च रक्तचाप कम होता है।

  • संतरे का रस पीने से उच्च रक्तचाप कम होता है। यदि रोगी 2–3 दिन उपवास करे और इस बीच केवल संतरे का रस लें, तो उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है।

  • अर्जुन (कोहा) की छाल का चूर्ण मिश्री के साथ खाने से उच्च रक्त चाप ठीक होता है। अर्जुन की छाल की चाय पीने से Low BP ठीक होता है।

  • दालचीनी धूप में सुखाकर पीस लें—½ चम्मच पाउडर + ½ चम्मच शहद मिलाकर चाटें और ऊपर से गर्म जल पिएं।

  • केंथ का मज्जा (गूदा) और जामुन की गुठली का चूर्ण बना लें। इसे सुबह-शाम खाली पेट ½–½ चम्मच सादे जल से लेने पर BP नियंत्रण होता है।

  • देसी गाय का ½ कप मूत्र—स्वच्छ कपड़े की 3 परतों में छानकर खाली पेट लें। इससे HBP व LBP दोनों ठीक होते हैं।


चूर्ण (पाउडर)

  • सर्पगंधा चूर्ण

  • शंखपुष्पी चूर्ण

  • जटामासी चूर्ण

  • अमल की रसायन

  • असगंध

इन सबका चूर्ण बनाकर ½ चम्मच सुबह-शाम खाली पेट सादे जल से लें।


रस-औषधियाँ

(12) वृहद वात चिंतामणि रस — 1–1 गोली शहद के साथ दिन में 3 बार लें।
(13) योगेंद्र रस — 1–1 गोली मधु और अदरक के रस के साथ सुबह-शाम लें।


विशेष अवस्था में

  • अधिक सिरदर्द होने पर — वृहद चिंतामणि रस + सर्पगंधा चूर्ण दूध के साथ लें।

  • यदि सिरदर्द बहुत अधिक हो तो — कपर्दिक भस्म + अकीक भस्म 1–1 तोला आँवले के मुरब्बे के साथ लें।

  • रात्रि में — वृहद वात चिंतामणि रस + सर्पगंधा चूर्ण दूध के साथ दें।

  • अनिद्रा हो तो — सर्पगंधा चूर्ण + वृहद वात चिंतामणि रस दूध के साथ दें।

  • पित्त प्रकृति वालों को — सर्पगंधा को प्रवाल पिष्टी मिलाकर दें।

रक्तचाप अत्यधिक बढ़ी हुई अवस्था में पक्षाघात (लकवा) की संभावना रहती है। अत: उच्च रक्तचाप की वृद्धि को लकवे का संकेतक मान लेना चाहिए।


अन्य नुस्खे

  • प्याज का रस 5 ग्राम + बराबर मात्रा में शुद्ध शहद — इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है।

  • तरबूज के बीज का चूर्ण 3 ग्राम + बराबर मात्रा में खसखस — प्रातः और सांझे खाली पेट लें।

  • मैथी दाना चूर्ण 3 ग्राम — सुबह-शाम खाली पेट 15 दिन लें।

  • खाना खाने के बाद — कच्चे लहसुन की दो फांक मुनक्का में लपेटकर खाएं।

  • गेहूं + चना बराबर मात्रा में पिसवाएँ और बिना चोकर निकाले आटा प्रयोग करें।

  • तांबे के बर्तन में जल में 7 रुद्राक्ष डालकर रात में रखें—सुबह यह जल पिएँ।

  • 4–5 तुलसी पत्ती और 2 नीम पत्ती—खाली पेट लें।

  • खाली पेट पपीता एक माह तक लें।

  • तत्काल लाभ हेतु—100 ग्राम पानी में आधा नींबू निचोड़कर दिन में 3 बार हर 2 घंटे में पिएँ।


रामबाण प्रयोग

250 ग्राम ताज़ी हरी घीया (छिलके सहित) + 500 ग्राम पानी
→ प्रेशर कुकर में डालकर धीमी आंच में पकाएँ
→ सीटी बजने पर उतारें, मसलकर छान लें
→ बिना कुछ मिलाए सूप को प्रातः खाली पेट गर्म-गर्म लगातार 4–5 दिन पिएँ।

यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रण करने वाला परीक्षित एवं रामबाण नुस्खा है।


बचाव

  • चाय, चीनी, काफी, मसाले, शराब, घी तथा अधिक नमक का सेवन न करें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • समय-समय पर उच्च रक्तचाप की जांच करवाते रहें।

 नोट:सभी आयुर्वेदिक दवाएँ केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही लें।

Recent Posts

किडनी रोग: लक्षण, कारण, बचाव और आयुर्वेदिक उपाय

Mar 21, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

Thyroid का आयुर्वेदिक इलाज – कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

Mar 17, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

AYURVEDIYAUPCHAR

At AyurvediyaUpchar, we are dedicated to bringing you the ancient wisdom of Ayurveda to support your journey toward holistic well-being. Our carefully crafted treatments, products, and resources are designed to balance mind, body, and spirit for a healthier, more harmonious life. Explore our range of services and products inspired by centuries-old traditions for natural healing and wellness.
आयुर्वेदीय उपचार में, हम आपको आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को समग्र कल्याण की ओर आपकी यात्रा में सहायता करने के लिए समर्पित हैं। हमारे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए उपचार, उत्पाद और संसाधन स्वस्थ, अधिक सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्राकृतिक उपचार और कल्याण के लिए सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हमारी सेवाओं और उत्पादों की श्रृंखला का अन्वेषण करें।

All categories
Flash Sale
Todays Deal