"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

 यकृत (लिवर) का महत्व

- यकृत हमारे शरीर का एक अति महत्वपूर्ण अंग है।
- इसका बजन लगभग 1.5 किलो तक होता है।
- यह छाती के दाहिने भाग में डायाफ्राम के नीचे स्थित है।
- लिवर शरीर का पाचन, विषहरण, ऊर्जा, रक्त शोधन, प्रतिरक्षा व हार्मोन संतुलन का प्रमुख केंद्र है।

- यकृत रोग अनेक प्रकार के होते हैं जैसे— पीलिया, जलोदर, यकृत ट्यूमर, यकृत कैंसर, यकृतवृद्धि, यकृतसूजन, यकृतक्षय।
- रक्त की जांच कराने से इन सभी यकृत रोगों का पता चलता है।
- यकृत की आधुनिक यंत्रों से जांच कर सब कुछ स्पष्ट हो जाता है।
- ये जांचें डॉक्टर की सलाह से करवाएँ।


 पीलिया रोग पर विस्तृत वर्णन

- यकृत में पित्त बनता है जो पित्ताशय में एकत्रित होता है।
- यह पित्त पित्तवाहनी द्वारा आंतों में जाकर भोजन में मिलता है।
- पित्त गहरे पीले रंग का द्रव्य है जो घी, तेल, चर्बी जैसे वसायुक्त पदार्थों को पचाता है।
- पित्त शरीर में उपस्थित विषैले तत्वों का प्रभाव समाप्त करता है।

- लीवर खाद्य पदार्थों में उपस्थित प्रोटीन, चर्बी, कार्बोहाइड्रेट को बदलकर संचित करता है।
- अतिरिक्त प्रोटीन → एल्ब्यूमिन
- शक्कर → ग्लाइकोजन
- चर्बी → कोलेस्ट्रॉल
- ट्राइग्लिसरीन → लिपो प्रोटीन्स


 पीलिया क्यों होता है?

- पीलिया वायरस से उत्पन्न होने वाला यकृत रोग है।
- यह हेपेटाइटिस वायरस A और B से होता है।
- हेपेटाइटिस A — लगभग 40 दिनों में ठीक हो जाता है।
- हेपेटाइटिस B — ठीक होने में अधिक समय लेता है।

- यकृत कोशिकाएँ रक्त धमनियों व पित्त नलिकाओं से जुड़ी होती हैं।
- वायरस यकृत तंतुओं को नष्ट कर देता है।
- पित्त नलिकाओं में पित्त नहीं पहुँच पाता।
- पित्त यकृत शिरा द्वारा रक्त में मिलने लगता है।
- परिणाम— शरीर, आंखें, नाखून, मूत्र, त्वचा पीली हो जाती है।


 पीलिया के प्रकार

- वायरल पीलिया — वायरस से फैलता है।
- अवरोधजन्य पीलिया — पित्तवाहिनी में अवरोध से।


 पीलिया वायरस कैरियर

- दुनिया में 1 करोड़ से अधिक लोग वायरस कैरियर हैं।
- इन्हें स्वयं कोई हानि नहीं होती।
- परंतु यही दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।


 लीवर को नुकसान पहुँचाने वाली दवाइयाँ

- एंटीबायोटिक्स
- एंटी मलेरियल दवाइयाँ
- TB की दवाइयाँ
- ब्लड प्रेशर कम करने वाली औषधियाँ
- एंड्रोजेन व एस्ट्रोजन हार्मोन

- शराब से बनने वाला एसीटैल्डिहाइड यकृत को नष्ट करता है।
- कमजोर लिवर में पीलिया जल्दी उत्पन्न होता है।


 पीलिया में रंग परिवर्तन

- आंखें
- त्वचा
- नाखून
- मुख
- मल
- मूत्र

➡️ सब हल्दी जैसे पीले दिखाई देते हैं।


 पीलिया के लक्षण

प्रारंभिक लक्षण (3–5 दिन)
- ज्वर
- सिरदर्द
- कंपकंपी
- थकावट

आगे चलकर —
- भोजन में अरुचि
- प्यास
- शरीर दर्द
- पेट जलन
- बेचैनी
- यकृत क्षेत्र में दर्द
- त्वचा पीली
- RBC कम होना
- गहरा पीला मूत्र

गंभीर अवस्था —
- खून की उल्टी
- रक्तस्राव
- मानसिक बेहोशी


 जांच में पुष्टि

- मूत्र में मवाद के कण व एल्ब्यूमिन
- मूत्र व रक्त में पित्त की मात्रा अधिक


 घरेलू उपचार व सावधानियाँ

- स्वच्छ, उबला या RO पानी पिएं।
- आसपास सफाई रखें।
- पूर्ण विश्राम करें।
- शारीरिक मेहनत बंद करें।
- शराब व नशा तुरंत बंद करें।

- यदि 40 दिन से पुराना पीलिया हो— डॉक्टर से मिलें।
- ददोरे, ज्वर, जोड़ों में दर्द — गंभीर संकेत।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी।

- ग्लूकोज मिलाकर पानी पिएँ।
- गन्ना रस तभी लें जब सफाई पक्की हो— अन्यथा गन्ना चूसें।

न खाएँ —
- तली चीजें, मिर्च–मसाला, गरिष्ठ भोजन, उड़द, राजमा, टमाटर, इमली, चाट, समोसा
- नमक कम करें

खाएँ —
- मूंग दाल, लौकी, परवल, तोरई, टिंडा, चौलाई, बथुआ, आलू, अदरक, पुदीना, धनिया, आवला
- मूली की सब्जी व मूली का स्वरस अत्यंत लाभकारी


 आयुर्वेदिक उपचार — देवदाली नस्य

- देवदाली फल के ऊपरी छिलके हटाएँ।
- भीतर के जालीदार भाग को 10 ml पानी में सायंकाल कांच के पात्र में भिगोएँ।
- पूरी रात ओस में रखें।
- सुबह सूर्योदय से पहले नाक में टपकाएँ।
- छींकें आएँगी, पीला रस निकलेगा— पीलापन घटेगा।
- 6–7 दिन बाद दोहराएँ।
- रोगी शारीरिक रूप से सक्षम होना चाहिए।


 पीलिया में उपयोगी औषधियाँ

- सूतशेखर रस 1 रत्ती
- प्रवाल भस्म 1 रत्ती
- पुनर्नवा मण्डूर 4 रत्ती
- गुडूची सत्व 4 रत्ती
➡️ ब्राह्मी स्वरस और मधु के साथ लें
➡️ ऊपर से कामला हर क्वाथ

- पुनर्नवादि मंडूर — त्रिफला क्वाथ के साथ

- नवायस लोह 243 mg — शहद व घी की विषम मात्रा के साथ

- धात्री लोह 2 रत्ती — मधु व घी की विषम मात्रा के साथ

- लोह भस्म + आरोग्यवर्धिनी + पुनर्नवादि मण्डूर + नवायस लोह + प्रवाल पिष्टी
➡️ अमृतारिष्ट और द्राक्षासव के साथ लें

- अरंडी पत्ता रस 1–2 चम्मच — गाय के दूध के साथ

- ताप्यादि लोह 10 g + स्वर्ण भाक्षिक भस्म 10 g + स्वर्ण वसंत मालती रस 2 g
➡️ 20 पुड़िया बनाएँ
➡️ 1–1 पुड़िया सुबह–शाम शहद के साथ
➡️ ऊपर से लिव्हान सिरप पिलाएँ

- बंगला पान + चूना + कत्था + 3–4 बूंद आक का दूध — प्रातः सेवन करें

**- गन्ना चूसें

  • 100 g गन्ना रस सुबह–शाम

  • 10 g जमुना रस + सेंधा नमक — दिन में 3 बार**


✔️ (क्या खाएँ)

- चिकनाई रहित दूध
- फलों का रस
- केला, पपीता, मूली, खीरा
- गन्ना रस, नींबू रस
- अनार
- ग्लूकोज़
- खिचड़ी, लौकी, शलजम, परवल, तरोई


❌  (क्या न खाएँ)

- तली हुई चीजें
- मसालेदार सब्जी
- तेल, मिर्च
- पूरी–कचौड़ी
- चाय, कॉफी अधिक मात्रा में
- नमक, चावल, दूध (अधिक मात्रा में)

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