- यकृत हमारे शरीर का एक अति महत्वपूर्ण अंग है।
- इसका बजन लगभग 1.5 किलो तक होता है।
- यह छाती के दाहिने भाग में डायाफ्राम के नीचे स्थित है।
- लिवर शरीर का पाचन, विषहरण, ऊर्जा, रक्त शोधन, प्रतिरक्षा व हार्मोन संतुलन का प्रमुख केंद्र है।
- यकृत रोग अनेक प्रकार के होते हैं जैसे— पीलिया, जलोदर, यकृत ट्यूमर, यकृत कैंसर, यकृतवृद्धि, यकृतसूजन, यकृतक्षय।
- रक्त की जांच कराने से इन सभी यकृत रोगों का पता चलता है।
- यकृत की आधुनिक यंत्रों से जांच कर सब कुछ स्पष्ट हो जाता है।
- ये जांचें डॉक्टर की सलाह से करवाएँ।
- यकृत में पित्त बनता है जो पित्ताशय में एकत्रित होता है।
- यह पित्त पित्तवाहनी द्वारा आंतों में जाकर भोजन में मिलता है।
- पित्त गहरे पीले रंग का द्रव्य है जो घी, तेल, चर्बी जैसे वसायुक्त पदार्थों को पचाता है।
- पित्त शरीर में उपस्थित विषैले तत्वों का प्रभाव समाप्त करता है।
- लीवर खाद्य पदार्थों में उपस्थित प्रोटीन, चर्बी, कार्बोहाइड्रेट को बदलकर संचित करता है।
- अतिरिक्त प्रोटीन → एल्ब्यूमिन
- शक्कर → ग्लाइकोजन
- चर्बी → कोलेस्ट्रॉल
- ट्राइग्लिसरीन → लिपो प्रोटीन्स
- पीलिया वायरस से उत्पन्न होने वाला यकृत रोग है।
- यह हेपेटाइटिस वायरस A और B से होता है।
- हेपेटाइटिस A — लगभग 40 दिनों में ठीक हो जाता है।
- हेपेटाइटिस B — ठीक होने में अधिक समय लेता है।
- यकृत कोशिकाएँ रक्त धमनियों व पित्त नलिकाओं से जुड़ी होती हैं।
- वायरस यकृत तंतुओं को नष्ट कर देता है।
- पित्त नलिकाओं में पित्त नहीं पहुँच पाता।
- पित्त यकृत शिरा द्वारा रक्त में मिलने लगता है।
- परिणाम— शरीर, आंखें, नाखून, मूत्र, त्वचा पीली हो जाती है।
- वायरल पीलिया — वायरस से फैलता है।
- अवरोधजन्य पीलिया — पित्तवाहिनी में अवरोध से।
- दुनिया में 1 करोड़ से अधिक लोग वायरस कैरियर हैं।
- इन्हें स्वयं कोई हानि नहीं होती।
- परंतु यही दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।
- एंटीबायोटिक्स
- एंटी मलेरियल दवाइयाँ
- TB की दवाइयाँ
- ब्लड प्रेशर कम करने वाली औषधियाँ
- एंड्रोजेन व एस्ट्रोजन हार्मोन
- शराब से बनने वाला एसीटैल्डिहाइड यकृत को नष्ट करता है।
- कमजोर लिवर में पीलिया जल्दी उत्पन्न होता है।
- आंखें
- त्वचा
- नाखून
- मुख
- मल
- मूत्र
➡️ सब हल्दी जैसे पीले दिखाई देते हैं।
प्रारंभिक लक्षण (3–5 दिन)
- ज्वर
- सिरदर्द
- कंपकंपी
- थकावट
आगे चलकर —
- भोजन में अरुचि
- प्यास
- शरीर दर्द
- पेट जलन
- बेचैनी
- यकृत क्षेत्र में दर्द
- त्वचा पीली
- RBC कम होना
- गहरा पीला मूत्र
गंभीर अवस्था —
- खून की उल्टी
- रक्तस्राव
- मानसिक बेहोशी
- मूत्र में मवाद के कण व एल्ब्यूमिन
- मूत्र व रक्त में पित्त की मात्रा अधिक
- स्वच्छ, उबला या RO पानी पिएं।
- आसपास सफाई रखें।
- पूर्ण विश्राम करें।
- शारीरिक मेहनत बंद करें।
- शराब व नशा तुरंत बंद करें।
- यदि 40 दिन से पुराना पीलिया हो— डॉक्टर से मिलें।
- ददोरे, ज्वर, जोड़ों में दर्द — गंभीर संकेत।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी।
- ग्लूकोज मिलाकर पानी पिएँ।
- गन्ना रस तभी लें जब सफाई पक्की हो— अन्यथा गन्ना चूसें।
न खाएँ —
- तली चीजें, मिर्च–मसाला, गरिष्ठ भोजन, उड़द, राजमा, टमाटर, इमली, चाट, समोसा
- नमक कम करें
खाएँ —
- मूंग दाल, लौकी, परवल, तोरई, टिंडा, चौलाई, बथुआ, आलू, अदरक, पुदीना, धनिया, आवला
- मूली की सब्जी व मूली का स्वरस अत्यंत लाभकारी
- देवदाली फल के ऊपरी छिलके हटाएँ।
- भीतर के जालीदार भाग को 10 ml पानी में सायंकाल कांच के पात्र में भिगोएँ।
- पूरी रात ओस में रखें।
- सुबह सूर्योदय से पहले नाक में टपकाएँ।
- छींकें आएँगी, पीला रस निकलेगा— पीलापन घटेगा।
- 6–7 दिन बाद दोहराएँ।
- रोगी शारीरिक रूप से सक्षम होना चाहिए।
- सूतशेखर रस 1 रत्ती
- प्रवाल भस्म 1 रत्ती
- पुनर्नवा मण्डूर 4 रत्ती
- गुडूची सत्व 4 रत्ती
➡️ ब्राह्मी स्वरस और मधु के साथ लें
➡️ ऊपर से कामला हर क्वाथ
- पुनर्नवादि मंडूर — त्रिफला क्वाथ के साथ
- नवायस लोह 243 mg — शहद व घी की विषम मात्रा के साथ
- धात्री लोह 2 रत्ती — मधु व घी की विषम मात्रा के साथ
- लोह भस्म + आरोग्यवर्धिनी + पुनर्नवादि मण्डूर + नवायस लोह + प्रवाल पिष्टी
➡️ अमृतारिष्ट और द्राक्षासव के साथ लें
- अरंडी पत्ता रस 1–2 चम्मच — गाय के दूध के साथ
- ताप्यादि लोह 10 g + स्वर्ण भाक्षिक भस्म 10 g + स्वर्ण वसंत मालती रस 2 g
➡️ 20 पुड़िया बनाएँ
➡️ 1–1 पुड़िया सुबह–शाम शहद के साथ
➡️ ऊपर से लिव्हान सिरप पिलाएँ
- बंगला पान + चूना + कत्था + 3–4 बूंद आक का दूध — प्रातः सेवन करें
**- गन्ना चूसें
100 g गन्ना रस सुबह–शाम
10 g जमुना रस + सेंधा नमक — दिन में 3 बार**
- चिकनाई रहित दूध
- फलों का रस
- केला, पपीता, मूली, खीरा
- गन्ना रस, नींबू रस
- अनार
- ग्लूकोज़
- खिचड़ी, लौकी, शलजम, परवल, तरोई
- तली हुई चीजें
- मसालेदार सब्जी
- तेल, मिर्च
- पूरी–कचौड़ी
- चाय, कॉफी अधिक मात्रा में
- नमक, चावल, दूध (अधिक मात्रा में)
At AyurvediyaUpchar, we are dedicated to bringing you the ancient wisdom of Ayurveda to support your journey toward holistic well-being. Our carefully crafted treatments, products, and resources are designed to balance mind, body, and spirit for a healthier, more harmonious life. Explore our range of services and products inspired by centuries-old traditions for natural healing and wellness.
आयुर्वेदीय उपचार में, हम आपको आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को समग्र कल्याण की ओर आपकी यात्रा में सहायता करने के लिए समर्पित हैं। हमारे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए उपचार, उत्पाद और संसाधन स्वस्थ, अधिक सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्राकृतिक उपचार और कल्याण के लिए सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हमारी सेवाओं और उत्पादों की श्रृंखला का अन्वेषण करें।