गेंहू के जवारे- एक जीवंत आहार
प्रकृति ने मानव जीवन को स्वस्थ, दीर्घायु एवं रोगमुक्त रखने के लिए असंख्य औषधियों का भंडार प्रदान किया है। इन्हीं अनुपम वरदानों में से एक है गेहूं के जवारे का रस, जिसे प्रकृति प्रदत्त अमृत कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। गेहूं के जवारे का रस मानव जगत के लिए एक ऐसा जीवंत उपहार है, जिसमें रोगों के उन्मूलन की अद्भुत शक्ति विद्यमान है।
जीव-वैज्ञानिकों ने इसके असाधारण गुणों को देखते हुए इसे “ग्रीन ब्लड” (हरा रक्त) की संज्ञा दी है। यह केवल एक रस नहीं, बल्कि शरीर के लिए एक शक्तिशाली प्राकृतिक औषधि है। इसमें ऐसे अनेक जीवनदायी तत्व विद्यमान हैं, जो इसे अन्य सभी पेयों से श्रेष्ठ बनाते हैं।
गेहूं के जवारे के रस में प्रचुर मात्रा में—
कार्बोहाइड्रेट
सभी आवश्यक विटामिन
क्षारीय तत्व (Alkaline Minerals)
श्रेष्ठ गुणवत्ता वाला प्रोटीन
पाए जाते हैं।
इन तत्वों की उपस्थिति के कारण जवारे का रस शरीर के भीतर जाकर रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा और ओज का पोषण करता है। अनेक शोधों से यह सिद्ध हो चुका है कि इसके विधिवत प्रयोग से अल्प समय में ही आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं।
गेहूं के जवारों का रस केवल रोगों को ठीक नहीं करता, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कई गुना बढ़ाता है। नियमित सेवन से शरीर बाहरी संक्रमणों का सामना स्वयं करने में सक्षम हो जाता है।
इसके सेवन से निम्न रोग दूर रहते हैं—
उदर व्याधियां
मूत्राशय की पथरी
हृदय रोग
डायबिटीज
दांतों के रोग
लकवा
दमा
गठिया
बालों का झड़ना
त्वचा रोग
यह रस आंखों, दांतों और बालों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है। कब्ज को दूर करता है, शक्ति एवं बल में वृद्धि करता है तथा शरीर को थकान-रहित बनाए रखता है।
गेहूं के जवारे का रस हर आयु वर्ग के लिए समान रूप से उपयोगी है—
बच्चों में यह कृमि रोगों को नष्ट करता है
उनका वजन बढ़ाने में सहायक होता है
वृद्धावस्था में दुर्बलता और जरा-जीर्णता को दूर करता है
यह हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाकर एनीमिया से मुक्ति दिलाने में रामबाण औषधि है।
हृदय रोगियों में यह रक्त में जमी वसा और कोलेस्ट्रॉल को कम कर उच्च रक्तचाप नियंत्रित करता है।
3 इंच गहरे, 1 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले 7 कुंडे
साधारण मिट्टी + गोबर की खाद
अच्छी किस्म का बड़ा दाने वाला गेहूं
❌ प्लास्टिक के बर्तन एवं रसायन मिश्रित मिट्टी का प्रयोग न करें।
❌ रासायनिक खाद का उपयोग न करें।
प्रतिदिन एक कुंडे में गेहूं बोएं
सभी कुंडों में प्रतिदिन पानी दें
सातवें-आठवें दिन जवारों की ऊंचाई 4–5 इंच हो जाती है
7–8 दिन में यह 5–7 इंच तक बढ़ जाते हैं
विशेष ध्यान रखें कि—
मध्यान्ह की तीव्र धूप न लगे
प्रातः अथवा सायंकाल का मंद सूर्य प्रकाश अवश्य मिले
पहले कुंडे के जवारों को काटकर उपयोग करें।
खाली कुंडे में उसी दिन पुनः गेहूं बो दें।
इस प्रकार प्रतिदिन एक नया चक्र चलता रहेगा और आपको नियमित रूप से ताजे जवारे मिलते रहेंगे।
प्रत्येक बार लगभग 100 ग्राम गेहूं लें
इससे लगभग 100 ग्राम जवारे प्राप्त होते हैं
जिनसे 4–6 औंस रस निकलता है
यह मात्रा एक रोगी के लिए एक दिन के लिए पर्याप्त होती है।
प्रारंभ में रस की मात्रा कम रखें—
100 मि.ली. से आरंभ करें
धीरे-धीरे 250–300 मि.ली. तक बढ़ाएं
रोग समाप्ति के पश्चात भी 50 मि.ली. रस का नियमित सेवन स्वास्थ्य संरक्षण हेतु जारी रखें।
यदि आवश्यक हो तो गेहूं के जवारे का रस एनीमा द्वारा भी लिया जा सकता है।
पहले नींबू रस युक्त पानी से एनीमा लेकर बड़ी आंत साफ करें
10–15 मिनट बाद
200 मि.ली. (8 औंस) जवारे का रस एनीमा द्वारा दें
30 मिनट तक रोक कर रखें
इस अवधि में उपयोगी तत्व सीधे आंतों द्वारा शोषित होकर रक्त में मिल जाते हैं।
जवारों को काटते ही धो लें
छोटे टुकड़ों में काटें
मिक्सी में उचित मात्रा में पानी डालकर पीसें
कपड़े से छानकर तुरंत सेवन करें
⚠️ रस को एक क्षण भी न रखें
⚠️ 3 घंटे में उसके सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं
मधु
अदरक
नागरबेल का पान
❌ नमक या नींबू का रस कदापि न डालें
प्रातःकाल खाली पेट सर्वश्रेष्ठ
रस लेने के 30 मिनट पहले और बाद तक कुछ न खाएं
प्रारंभ में उबकाई, उल्टी या सिरदर्द हो सकता है—
? यह शरीर से संचित विषैले पदार्थों के बाहर निकलने का संकेत है।
जवारे चबाकर भी खाए जा सकते हैं—
दांत एवं मसूढ़े मजबूत होते हैं
मुख दुर्गंध दूर होती है
हरी साग-सब्जियों एवं अंकुरित अन्नों के क्लोरोफिल युक्त रस को ग्रीन ब्लड कहा गया है।
यह—
रक्त को शुद्ध करता है
लाल रक्त कणों की वृद्धि करता है
रक्त परिसंचरण को संतुलित करता है
हृदय तंत्र को सशक्त बनाता है
डॉ. ब्रिशर के अनुसार क्लोरोफिल अणु, हीमोग्लोबिन अणुओं से अत्यंत समान होते हैं।
नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. फिशर ने—
रक्त अल्पता
आंत्र शोथ
त्वचा रोग
पेट के अल्सर
पायरिया
जैसे रोगों में 1200 से अधिक रोगियों का सफल उपचार गेहूं के जवारे से किया।
उनके अनुसार—
? एक ग्राम अंकुर में जितने पोषक तत्व होते हैं,
? उनकी पूर्ति 25 गुना अधिक साग-सब्जियां भी नहीं कर सकतीं।
आहार वैज्ञानिकों के अनुसार—
5 दिन के अंकुरित गेहूं में सामान्य दानों की तुलना में
500 गुना अधिक जीवन तत्व होते हैं
स्टार्च धीरे-धीरे शर्करा में परिवर्तित हो जाता है
प्रोटीन की मात्रा और विविधता बढ़ जाती है
अंकुरित अन्नों को सदैव कच्चा ही खाना चाहिए। उबालने से उनके उपयोगी तत्व नष्ट हो जाते हैं।
मनुष्य मूलतः शाकाहारी है।
सभ्यता के विकास के साथ उसने पकाया हुआ भोजन अपनाया, जिससे आंतें पके आहार की अभ्यस्त हो गईं, परंतु इससे पर्याप्त पोषण नहीं मिलता।
प्रसिद्ध आहारविद गहेन्स एंडरसन के अनुसार—
यदि मानव पुनः प्राकृतिक आहार की ओर लौट आए, तो स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन संभव है।
यदि गेहूं को—
24 घंटे पानी में भिगोकर खाया जाए
तो उसमें सूखे गेहूं की तुलना में
? 30 गुना अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
कहा गया है—
“संसार में कोई रोग ऐसा नहीं जिसे गेहूं के जवारों से अच्छा न किया जा सके।”
गेहूं के जवारे का रस—
सस्ता
सुलभ
प्राकृतिक
पूर्ण आहार
सर्वरोग नाशक
यदि हम रोगों से बचना चाहते हैं, पूर्णतः स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो प्रकृति के इस अनुपम अमृत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही होगा।
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