जो व्यक्ति तन और मन—दोनों रूप से स्वस्थ रहता है, वही पूर्ण स्वस्थ कहलाता है।
शरीर तभी स्वस्थ माना जाता है जब उसमें वात, पित्त और कफ सामंजस्य की अवस्था में हों।
परंतु तन का स्वास्थ्य मन के बिना पूर्ण नहीं हो सकता।
मन से वही व्यक्ति स्वस्थ है जो सदाचारी हो।
सदाचारी वही है जो काम, क्रोध, लोभ आदि पर नियंत्रण रखता है।
शास्त्रों में वर्णन है—
कामुक व्यक्ति का वात कुपित हो जाता है।
क्रोधी व्यक्ति का पित्त कुपित हो जाता है।
लोभी व्यक्ति का कफ कुपित हो जाता है।
✅ अतः सदाचारी व्यक्ति ही पूर्ण स्वस्थ रहने की कल्पना कर सकता है।
संसार के सभी बलों में ‘संकल्प बल’ श्रेष्ठ है।
जो व्यक्ति संकल्प शक्ति से आदर्श दिनचर्या अपनाता है, वही स्वस्थ रहता है।
सुबह उठने से लेकर रात सोने तक सभी कार्य समयबद्ध और व्यवस्थित होने चाहिए।
ब्रहम मुहूर्त में—सूर्योदय से 1.5 से 3 घंटे पूर्व उठें।
इस समय उठने से स्वास्थ्य, धन, विद्या, बल और तेज़ बढ़ता है।
सूर्योदय के बाद उठने से उम्र, शक्ति घटती है और बीमारियाँ बढ़ती हैं।
जो व्यक्ति सूर्योदय के बाद मल त्याग करता है वह आजीवन कब्ज़ का शिकार रह सकता है।
सुबह शौच से पहले 4 गिलास गुनगुना या ठंडा पानी पीना—उषःपान कहलाता है।
उषःपान के बाद नियमित मल विसर्जन से कब्ज़ नहीं होती और रोग दूर रहते हैं।
शौच के बाद दातुन या मंजन से दाँत साफ करें।
योगासन एवं प्राणायाम प्रतिदिन करें।
यदि संभव न हो तो प्रतिदिन 3–5 किलोमीटर पैदल चलना आवश्यक है।
यह पाचन, जठराग्नि, शक्ति और शरीर संरचना सुधारता है।
प्रतिदिन स्वच्छ जल से स्नान करें।
जहाँ तक हो सके ठंडे पानी का प्रयोग करें, आवश्यकता अनुसार गुनगुना जल भी ले सकते हैं।
नहाते समय मुँह में पानी भरकर आँखों पर छींटे मारें।
स्नान के बाद और संध्या में ईश्वर की प्रार्थना अवश्य करें।
पूजा करते समय मन एकाग्र रखें।
(1) भोजन हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके करें।
दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके कभी न खाएँ।
(2) भोजन से पहले सलाद खाएँ —
मूली, ककड़ी, चुकंदर, प्याज, गाजर
नींबू, काला नमक व काली मिर्च मिलाएँ
(3) संतुलित भोजन करें —
¼ भाग भोजन
½ भाग जल
¼ भाग खाली स्थान
(4) तीन सफेद चीज़ें न लें —
नमक → काला नमक अपनाएँ
शक्कर → गुड़ अपनाएँ
मैदा → परहेज़ करें
(5) रात्रि भोजन 8 बजे के बाद न करें।
हल्का भोजन — जैसे मूंग दाल खिचड़ी
(6) प्रतिदिन एक आँवला अवश्य खाएँ।
आयुर्वेद में आँवला अमृत समान बताया गया है।
(7) भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ।
कम से कम 1 घंटे बाद ही पिएँ।
(8) खड़े होकर पानी कभी न पिएँ।
इससे घुटनों में दर्द होने की संभावना बढ़ती है।
(9) भोजन के बाद तुरंत न लेटें।
कम से कम 100 कदम चलें या वज्रासन में बैठें।
(10) भोजन शुद्ध भाव से करें।
क्रोध, ईर्ष्या, तनाव, भय में भोजन न करें।
इससे शरीर में विषैले रसायन बनते हैं।
भोजन के तुरंत बाद न सोएँ।
सोने से पहले सद्ग्रंथ पढ़ें।
पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोएँ।
बाईं करवट सोना स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।
यदि हम इन सभी नियमों को दिनचर्या में शामिल कर लें, तो अनेक प्रकार की बीमारियों से सहज ही बच सकते हैं और दीर्घायु, सुखी व स्वस्थ जीवन प्राप्त कर सकते हैं।
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