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"निरोग रहने के लिए 10 असरदार घरेलु नुस्खे – रोज़ अपनाएं स्वस्थ रहें"

"निरोग रहने के लिए 10 असरदार घरेलु नुस्खे – रोज़ अपनाएं स्वस्थ रहें"

(१) कान दर्द - प्याज पीसकर उसका रस कपडे से छान लें| फिर उसे गर्म कर के चार बूँद कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है | (२) दांत दर्द - हल्दी एवं सेंधा नमक महीन पीसकर,उसे शुद्ध सरसों के तेल में मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दातों का दर्द ठीक होता है | (३) दातों के सुराख़ - कपूर को महीन पीसकर दातों पर ऊँगली से लगावें और उसे मलें | सुराखों को भली प्रकार से साफ़ कर लें| फिर सुराखों के नीचे कपूर को कुछ समय तक दबाकर रखने से दातों का दर्द निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है |

Apr 15, 2025
घरेलू नुस्खे
"कम्पवात (Parkinson's) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"कम्पवात (Parkinson's) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

शरीर के सभी अंगो के कम्प या केवल सिर के कम्पन को कंपवात कहते हैं| मिथ्या आहार-विहार तथा वात को प्रकुपित करने वाले कारणों से वात विकार उतपन्न होते हैं | आयुर्वेद में 80 प्रकार की वात व्याधियों का वर्णन मिलता है,जिनके कम्पवात भी सम्मिलित है | कम्प का शाब्दिक अर्थ है काँपना,जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में हिलना या हिलते रहना ही कह सकते हैं | नाडीमंडल के द्वारा मनुष्य के सम्पूर्ण शरीर के अंग-प्रत्यंगो की चेष्टाओं का नियंत्रण होता है |

Apr 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पक्षाघात (लकवा) – असाध्य बनने से पहले करें इलाज | Ayurvedic उपाय"

"पक्षाघात (लकवा) – असाध्य बनने से पहले करें इलाज | Ayurvedic उपाय"

मनुष्य के शरीर को लम्बाई में सिर से लेकर पैर तक के हिस्से को दो बराबर भागों में बाटने पर एक हिस्सा बायां भाग तथा दूसरा हिस्सा दायां भाग कहलाता है | इन दोनों भागों के किसी भी एक पक्ष की चेष्टाओं के नष्ट होने पर उसे पक्षाघात या अर्धंगबात कहते हैं| साधारण भाषा में इसे लकवा कहते हैं कारण- आयुर्वेद के मत से वात (वायु)को प्रकुपित करने वाले आहार विहार का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से वात दोष प्रकुपित होता है | यह प्रकुपित वायु शरीर के किसी भी एक पक्ष में आ

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"डेंगू बुखार: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Dengue Fever Ayurvedic Treatment"

"डेंगू बुखार: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Dengue Fever Ayurvedic Treatment"

वर्षा ऋतू अपने साथ अनेक खुशियां लेकर आती है ,क्योंकि वर्षा ऋतू आगमन पर भीषण गर्मी से मुक्ति मिलती है , लेकिन जब वर्षा का अंत होता है और गुलाबी शीत ऋतू का प्रारम्भ होता है तो वर्षा के जल कारण मक्खी,मच्छर और दूसरे जीवाणु तेज़ी से उत्पन्न होते हैं| वर्षा के जल से भरे गड्ढों में मच्छर

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"क्या बुढ़ापा रोका जा सकता है? जानिए आयुर्वेद और विज्ञान का नजरिया"

"क्या बुढ़ापा रोका जा सकता है? जानिए आयुर्वेद और विज्ञान का नजरिया"

बुढ़ापा या बृद्धावस्था शरीर में होने वाला एक जीव वैज्ञानिक परिवर्तन है ,जिसमे युवावस्था के मुक़ाबले आदमी की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है,जब शरीर की मानसिक अवस्था कमजोर होने लगे,भार घटने लगे,त्वचा में झुर्रियां पड़ने लगे ,नज़र कमजोर होने लगे, बाल सफ़ेद होते जाएँ तो यह समझना चाहिए की शरीर बुढ़ा

Apr 02, 2025
आरोग्य साधन
"साइटिका (Sciatica): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक निवारण"

"साइटिका (Sciatica): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक निवारण"

पंचम कटिप्रदेशीय तथा प्रथम और द्वितीय कटिप्रदेशीय नाड़ी मूलों के मिलने से ग्रध्रसी नाड़ी ( sciatica nerve ) का निर्माण होता है | इन गाडी मूलों पर विकृति होने के फलस्वरूप साइटिका (sciatica ) की उत्पत्ति होती है | इस विकृति का कारण दुष्ट वात होती है ,जो नितम्ब,उ

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"रेबीज़: एक जानलेवा लेकिन रोके जा सकने वाला रोग | Rabies is 100% Preventable"

"रेबीज़: एक जानलेवा लेकिन रोके जा सकने वाला रोग | Rabies is 100% Preventable"

यह एक बेहद संक्रामक व जानलेवा रोग है | इस रोग को “हयड्रोफोबिया” लाइसा व पागलपन आदि कहते हैं | वैसे तो यह जानवरों को होने वाला रोग है लेकिन रेबीजग्रस्त पशुओं के काटने से यह रोग मनुष्यों को भी हो जाता है | प्रायः यह रोग पागल कुत्ते के काटने से होता है | कारण - यह रोग “रहेब्डो वायरस” से होता है | ये वायरस रक्त में मौजूद नहीं होते , केवल तंत्रिकातंत्र को नुकसान पहुंचाकर शरीर को प्र

Apr 02, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"पीलिया (Jaundice): संक्रमित लीवर से होने वाला खतरनाक रोग – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

यकृत हमारे शरीर का एक अति महत्वपूर्ण अंग है | इसका बजन 1.5 किलो तक होता है | यकृत रोग कई प्रकार के होते हैं जैसे- पीलिया,जलोदर,यकृत ट्यूमर ,यकृत कैंसर,यकृतवृद्धि,यकृतसूजन,यकृतक्षय | रक्त की जांच कराने से इन सभी यकृत रोगों का पता चलता है | यकृत की पूरी तरह आधुनिक यंत्रों से पर सब कुछ स्पष्ट हो जाता है | ये जांचे डॉक्टर की सलाह से करवाए|

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"डिप्रेशन: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान | Depression Causes & Ayurvedic Remedies"

"डिप्रेशन: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान | Depression Causes & Ayurvedic Remedies"

निरंतर तनाव से आपके स्वास्थ्य और व्यक्तित्व पर दुष्प्रभाव पड़ता है,जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते | सिरदर्द,पेट की गड़बड़ियां और कमरदर्द उन अनेक बीमारियों में से हैं,जो तनाव की वजह से हो जाती है | इनके कारण आपकी खुशियों और संबंधों में दरार पड जाती है | लेकिन निम्न सु

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"सफेद दाग (Leucoderma): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

"सफेद दाग (Leucoderma): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज"

सफ़ेद दाग एक त्वचा रोग है | इसी को ल्यूकोडर्मा(leucoderma),श्वेत कुष्ठ,सफ़ेद कुष्ठ,श्वित्र कुष्ठ इत्यादि नामों से सम्बोधित किया जाता है | यह त्वचा में मेलनिन(melanin) नामक रंजक पदार्थ की कमी के कारण होता है | इस रंजक पदार्थ को malanocytes मेलैनोसाइट्स नामक त्वचा की कोशकाएँ बनाती हैं | जब किसी कारणवश मेलैनोसाइट्स अपने कार्य करना बंद कर देती हैं तो श्वेत कुष्ठ की उत्पत्ति होती है | यह पहले लाल रंग के दाग के रूप में दिखाई देता है,फिर धीरे-धी

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
"पुदीना: दैनिक जीवन में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि | Benefits of Mint in Daily Life"

"पुदीना: दैनिक जीवन में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि | Benefits of Mint in Daily Life"

पुदिना एक सुगन्धित एवं उपयोगी औषधि है | आयुर्वेद के मतानुसार यह स्वादिष्ट,रुचिकर,पचने में हल्का,तीक्ष्ण,तीखा,कड़वा,पाचनकर्ता और उल्टी मिटाने वाला,ह्रदय को उत्तेजित करने वाला,विकृत कफ को बाहर लाने वाला तथा गर्भाशय-संकोचक एवं चित्त को प्रसन्न करने वाला,जख्मों को भरने वाला और कृमि,ज्वर,विष,अरुचि,मंदाग्नि,अफरा,दस्त,खांसी, श्वाश, निम्नरक्त चाप,मूत्राल्पता,त्वचा के दोष,हैजा

Apr 01, 2025
फलों से चिकित्सा
"पथरी (Kidney Stone): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvedic Treatment of Stone"

"पथरी (Kidney Stone): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvedic Treatment of Stone"

पथरी जिसे संस्कृत में अश्मरी के नाम जाना जाता है अप्राकृतिक आहार-विहार,अपथ्यकारी वस्तुओ के अधिक सेवन,मल-मूत्र के वेगों को रोकना,चिकनाई वाले पदार्थ का उपयोग ,एक ही औषधि का अधिक सेवन करने जैसे अनेकों कारणों से होने वाला रोग है |

Apr 01, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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May 03, 2026
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Apr 30, 2026
आरोग्य साधन

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Apr 29, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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Apr 28, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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