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थायराइड (Thyroid) का आयुर्वेदिक उपचार: कारण, लक्षण, प्रकार

थायराइड (Thyroid) का आयुर्वेदिक उपचार: कारण, लक्षण, प्रकार

थायराइड आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में शामिल है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह 5 से 8 गुना अधिक पाया जाता है। थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) हमारे शरीर की मेटाबॉलिज़्म, हार्मोन बैलेंस, ऊर्जा, वजन, पाचन, मानसिक अवस्था, बाल-त्वचा और मासिक धर्म को नियंत्रित करती है। जब इसके द्वारा बने हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तब थायराइड रोग उत्पन्न होता है।

Nov 20, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
हर्निया (Hernia) का आयुर्वेदिक उपचार: कारण, लक्षण, प्रकार, घरेलू उपाय

हर्निया (Hernia) का आयुर्वेदिक उपचार: कारण, लक्षण, प्रकार, घरेलू उपाय

हर्निया (Hernia) आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेट–संबंधी समस्याओं में से एक है। यह धीरे-धीरे विकसित होने वाली वह स्थिति है जिसमें शरीर का कोई आंतरिक अंग जैसे आँत (Intestine), पेट का हिस्सा (Stomach) या वसायुक्त ऊतक (Fat Tissue) अपनी प्राकृतिक जगह से बाहर निकलकर कमजोर मांसपेशियों को चीरते हुए उभर आता है। दिखने में यह समस्या एक छोटा सा उभार लगती है, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है — खासकर तब जब यह "फँस" जाए और खून का संचार बंद कर दे (Strangulated Hernia)।

Nov 15, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
“मोतियाबिंद (मोतीआँख) क्या है? आयुर्वेदिक कारण, इलाज, नेत्र-चिकित्सा और आहार की पूरी जानकारी”

“मोतियाबिंद (मोतीआँख) क्या है? आयुर्वेदिक कारण, इलाज, नेत्र-चिकित्सा और आहार की पूरी जानकारी”

मोतियाबिंद एक ऐसी नेत्र-समस्या है जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। यह धुंधलापन बढ़ते-बढ़ते रोशनी को रेटिना तक पहुँचने से रोक देता है, जिससे दृष्टि कमजोर हो जाती है। आम तौर पर यह बढ़ती उम्र से संबंधित होता है, लेकिन आजकल— ✔ अत्यधिक मोबाइल/स्क्रीन उपयोग ✔ मधुमेह (डायबिटीज़) ✔ तनाव ✔ प्रदूषण ✔ अत्यधिक धूप ✔ पोषण की कमी की वजह से कम उम्र में भी देखा जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा इसे रोक नहीं सकती, केवल सर्जरी अंतिम विकल्प है। लेकिन आयुर्वेद इसका मूल कारण समझकर लेंस की चमक को बनाए रखने, समस्या की गति धीमी करने और आँखों के ऊतकों को मजबूत करने में मदद करता है।

Nov 14, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
Hormonal Imbalance का Ayurvedic इलाज: PCOS, Thyroid और Stress

Hormonal Imbalance का Ayurvedic इलाज: PCOS, Thyroid और Stress

आज की तेज़ रफ़्तार लाइफस्टाइल, तनाव, खराब खान-पान और अनियमित दिनचर्या ने Hormonal Imbalance को बहुत आम समस्या बना दिया है। खासकर महिलाओं में PCOS, Thyroid, Stress Hormones का बढ़ना एक बड़ी चिंता है। आयुर्वेद इस समस्या को बीमारी नहीं बल्कि दोष असंतुलन (Vata–Pitta–Kapha), अग्नि मंद्यता, आमा (toxins) और मनसिक तनाव का मिश्रण मानता है। इसलिए इसका इलाज जड़ पर आधारित होता है—यानी पूरे शरीर का संतुलन।

Nov 13, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
खतरनाक बीमारी: भैंसिया दाद (Herpes Zoster) – जनेऊ या shingles का घरेलू उपचार और परहेज

खतरनाक बीमारी: भैंसिया दाद (Herpes Zoster) – जनेऊ या shingles का घरेलू उपचार और परहेज

भैंसिया दाद, जिसे जनेऊ या अंग्रेज़ी में Herpes Zoster (Shingles) कहा जाता है, एक खतरनाक वायरल रोग है। यह Herpes Zoster Virus की वजह से होता है, जो त्वचा पर दर्दयुक्त, जलन भरे फफोले पैदा करता है। आमतौर पर यह बीमारी 40 वर्ष की आयु के बाद होने की संभावना अधिक रखती है।

Oct 27, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
किडनी की स्वच्छता (Kidney Cleansing): आयुर्वेदिक डिटॉक्स और घरेलू उपाय

किडनी की स्वच्छता (Kidney Cleansing): आयुर्वेदिक डिटॉक्स और घरेलू उपाय

हमारी किडनी (Kidney) शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो खून को फिल्टर, टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और शरीर में द्रव (Fluid) का संतुलन बनाए रखने का कार्य करती है। आज के समय में प्रदूषण, केमिकल युक्त भोजन, अनियमित दिनचर्या और खराब आदतों के कारण किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किडनी की स्वच्छता (Kidney Detox) करना आवश्यक है। आयुर्वेद में कई ऐसे प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं जिनसे आप घर पर ही किडनी को शुद्ध और स्वस्थ रख सकते हैं।

Oct 27, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
बवासीर (अर्श): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

बवासीर (अर्श): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

अर्श या बवासीर यह एक अत्यंत कष्टप्रद रोग है। जिंदगी को दूभर कर देने वाले इस रोग से ग्रसित व्यक्ति के कष्ट का वर्णन करना कठिन कार्य है। मलद्वार के अंदर तीन वलि (आवर्त) होते हैं इनकी शिराएं जो श्लेष्मकला के भीतर रहती हैं विछिप्त हो जाने से यह रोग होता है ।पतली शिराओं का एक जाल मलाशय को भीतर चारों ओर से घेरे रहता है इन्हीं शिराओ में रक्त का संचय होकर फूलने से यह मस्से का रूप ले लेता है।

Jul 26, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पक्षाघात (लकवा): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

पक्षाघात (लकवा): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

पक्षाघात शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। आंख का पक्षाघात, उंगलियों का पक्षाघात, जीभ का पक्षाघात, सीधे हाथ एवं पैर का पक्षाघात, वाम भाग का पक्षाघात, निम्नांग ( अर्धांग्न) का पक्षाघात, (इसमें कमर से नीचे के अंग रह जाते हैं) पक्षाघात में शरीर के अंग मुड़ जाते हैं ।अनेक बार मुड़ते नहीं हैं परंतु उनकी क्रियाशीलता नष्ट हो जाती है। अंगों में रक्त का संचार तो रहता है

Jul 26, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
कोष्ठबद्धता (कब्ज)-constipation के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

कोष्ठबद्धता (कब्ज)-constipation के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

कव्ज के सम्बन्ध में जनमानस की यह धारणा है कि यदि नित्य नियमित रूप से दो या तीन बार मल का त्याग न होगा तो उन्हें अनेक कष्ट होंगे, भोजन में अरुचि होगी, शरीर सुस्त रहेगा, पेट भारी रहेगा आदि-आदि। कभी -कभी तो मनुष्य में यह विचार भी उठने लगते हैं कि नियमित शौच न होने के कारण ही उन्हें अमुक रोग सता रहा है और शौच हो जाने से उनका रोग ठीक हो जायगा, यद्यपि यह बात कुछ अंश में

Jul 26, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
सफेद दाग के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

सफेद दाग के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

शरीर में अचानक ही विभिन्न स्थानों पर धीरे-धीरे सफेद चिन्ह निकलते निकलते पूरी तरह से फैलने लगते हैं यदि प्रारंभ में ही उपयुक्त उपचार नहीं किया जाता है तो यह रोग शरीर के समस्त चर्म को श्वेत चिन्हों के रूप में परिवर्तित कर देता है यह बहुत बड़ा रोग है और जड़ पकड़ने पर इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है इसका उपचार सरल नहीं है बल्कि दीर्घगामी है।

Jul 07, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
पायरिया: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

पायरिया: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

पायरिया रोग से ग्रस्त होने पर दांत ढीले होकर हिलने लग जाते हैं मसूड़े से मवाद और रक्त निकलने लगता है दांतों पर कड़ी पापड़ियां जम जाती है मुँह से दुर्गन्ध आने लगती है। उचित चिकित्सा न करने पर दाँत कमजोर होकर गिरने लगते हैं।

Jul 07, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
उदर रोगके कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदीय चिकित्सा

उदर रोगके कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदीय चिकित्सा

संपूर्ण उदर रोग यतः त्रिदोषज होते हैं अतः सर्वत्र वात आदि तीनों दोषों को शांत करने वाली क्रियाएं करनी चाहिए। उदर के दोष पूर्ण होने पर अग्निमांद्य हो जाता है अतः इस रोग में अग्नि प्रदीपक और लघु भोजन करना चाहिए। जौं, मूंग ,दूध ,आसव, अरिष्ट ,मधु आदि का इस रोग में उपयोग करना उत्तम है दोषोंके अति संचय से तथा स्रोतों के बंद हो जाने से उदर रोग पैदा होते हैं। अतः उदर रोगी को नित्य विरेचन देना चाहिये। विरेचन में गोमूत्र का अथवा दूध के साथ अरण्ड तेल का पान करना चाहिये।

Jul 07, 2025
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार

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