आयुर्वेद में नेत्रों को “प्रकाश का द्वार” तथा “पित्त का मुख्य स्थान” माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है— “चक्षु: पित्तस्थानं प्रमुखम्” अर्थात् आँखों की दृष्टि और तेज मुख्य रूप से पित्त के संतुलन पर निर्भर करते हैं। आधुनिक जीवनशैली में— ✔ अत्यधिक स्क्रीन उपयोग ✔ अनुचित आहार ✔ रात्रि जागरण ✔ मानसिक तनाव नेत्र-रोगों की संख्या तेजी से बढ़ा दी है। आयुर्वेद इसका सम्पूर्ण और मूलभूत समाधान प्रस्तुत करता है।
खर्राटे (Snoring) वह आवाज है जो नींद के दौरान हवा के मार्ग में अवरोध (Obstruction) होने पर निकलती है। गले के नरम ऊतक हवा के दबाव से कंपन करने लगते हैं और resulting vibration एक तेज आवाज पैदा करती है। यह आवाज कभी इतनी हल्की होती है कि केवल स्वयं को सुनाई देती है, और कभी इतनी तेज कि कमरे का व्यक्ति तो क्या पूरा घर परेशान हो जाता है।
अल्ज़ाइमर्स रोग एक धीमी, लेकिन लगातार बढ़ती मस्तिष्क संबंधी बीमारी है, जिसमें स्मृति, सोचने-समझने, निर्णय लेने, पहचानने, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों को करने की क्षमता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। यह बीमारी सामान्य भूलने की आदत नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के नाश (Degeneration) के कारण होने वाला गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है।
हाइड्रोसील (Hydrocele) को आम भाषा में “पोटों में पानी भरना” कहा जाता है। यह वह अवस्था है जिसमें वृषण-कोष में तरल पदार्थ जमा होकर अण्डकोष को फूलने और नीचे लटकने पर मजबूर कर देता है। यह रोग शुरुआत में साधारण प्रतीत होता है, परंतु समय के साथ: तगड़ा भारीपन, चलने-फिरने में असुविधा, बैठने में दिक्कत, दर्द एवं खिंचाव, मानसिक तनाव और शर्म जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर देता है।
प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन जिसे प्रोस्टेटाइटिस कहा जाता है, पुरुषों में होने वाला एक सामान्य लेकिन अत्यंत कष्टदायक रोग है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है जो मूत्राशय के नीचे स्थित रहती है और वीर्य द्रव के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है तो पेशाब करने में दर्द, बार-बार पेशाब आना, कमजोर धार, जननांगों और गुदा क्षेत्र में दर्द जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। यह रोग मुख्यत: वृद्धावस्था में देखा जाता है लेकिन अनियमित आदतों और गलत जीवनशैली के कारण युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में 20% से 60% पुरुष इस रोग से प्रभावित पाए जाते हैं।
सिर दर्द केवल एक साधारण समस्या नहीं है—यह शरीर का संकेत है कि भीतर कोई असंतुलन उत्पन्न हुआ है। आयुर्वेद में सिर दर्द को शिर:शूल कहा गया है, और इसका सीधा संबंध वात-पित्त-कफ, पाचन अग्नि, मानसिक तनाव, नाड़ी संस्थान व जीवनशैली से माना जाता है।
एलर्जी अस्थमा, जिसे आयुर्वेद में श्वास रोग और विशेष रूप से तमक श्वास कहा गया है, आधुनिक समय की तेजी से बढ़ती हुई समस्या है। ठंड के मौसम में इसका प्रकोप कई गुना बढ़ जाता है। तापमान कम होते ही शरीर की श्वसन नलिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, कफ बढ़ता है, और साँस लेने में बाधा उत्पन्न होती है।
मुख के छाले एक सामान्य किंतु अत्यंत कष्टदायक समस्या है, जिसमें मुंह, जीभ, होठों या गालों के अंदर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं। बोलने, खाने और निगलने में जलन व दर्द होने लगता है। ✅ मुख के छाले होने के प्रमुख कारण मुख्यतः दो कारण अधिक देखे जाते हैं— 1️⃣ कब्ज (Constipation) — पाचन विकृति व मल अवरोध के कारण शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे छाले बनते हैं। 2️⃣ विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की कमी — शरीर में पोषण की कमी से म्यूकोसा कमजोर हो जाता है और घाव बनने लगते हैं। अन्य कारण — तनाव, मसालेदार भोजन, बार-बार गर्मी होना, पानी कम पीना, नींद की कमी, धूम्रपान, एंटीबायोटिक का अधिक उपयोग आदि।
थायराइड आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में शामिल है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह 5 से 8 गुना अधिक पाया जाता है। थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) हमारे शरीर की मेटाबॉलिज़्म, हार्मोन बैलेंस, ऊर्जा, वजन, पाचन, मानसिक अवस्था, बाल-त्वचा और मासिक धर्म को नियंत्रित करती है। जब इसके द्वारा बने हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तब थायराइड रोग उत्पन्न होता है।
हर्निया (Hernia) आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेट–संबंधी समस्याओं में से एक है। यह धीरे-धीरे विकसित होने वाली वह स्थिति है जिसमें शरीर का कोई आंतरिक अंग जैसे आँत (Intestine), पेट का हिस्सा (Stomach) या वसायुक्त ऊतक (Fat Tissue) अपनी प्राकृतिक जगह से बाहर निकलकर कमजोर मांसपेशियों को चीरते हुए उभर आता है। दिखने में यह समस्या एक छोटा सा उभार लगती है, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है — खासकर तब जब यह "फँस" जाए और खून का संचार बंद कर दे (Strangulated Hernia)।
मोतियाबिंद एक ऐसी नेत्र-समस्या है जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। यह धुंधलापन बढ़ते-बढ़ते रोशनी को रेटिना तक पहुँचने से रोक देता है, जिससे दृष्टि कमजोर हो जाती है। आम तौर पर यह बढ़ती उम्र से संबंधित होता है, लेकिन आजकल— ✔ अत्यधिक मोबाइल/स्क्रीन उपयोग ✔ मधुमेह (डायबिटीज़) ✔ तनाव ✔ प्रदूषण ✔ अत्यधिक धूप ✔ पोषण की कमी की वजह से कम उम्र में भी देखा जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा इसे रोक नहीं सकती, केवल सर्जरी अंतिम विकल्प है। लेकिन आयुर्वेद इसका मूल कारण समझकर लेंस की चमक को बनाए रखने, समस्या की गति धीमी करने और आँखों के ऊतकों को मजबूत करने में मदद करता है।
आज की तेज़ रफ़्तार लाइफस्टाइल, तनाव, खराब खान-पान और अनियमित दिनचर्या ने Hormonal Imbalance को बहुत आम समस्या बना दिया है। खासकर महिलाओं में PCOS, Thyroid, Stress Hormones का बढ़ना एक बड़ी चिंता है। आयुर्वेद इस समस्या को बीमारी नहीं बल्कि दोष असंतुलन (Vata–Pitta–Kapha), अग्नि मंद्यता, आमा (toxins) और मनसिक तनाव का मिश्रण मानता है। इसलिए इसका इलाज जड़ पर आधारित होता है—यानी पूरे शरीर का संतुलन।
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